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राहुल गांधी की जिस स्पष्ट सबूत वाली राजनीतिक ठगी धोखाधड़ी जालसाजी और झूठ फरेब को लेकर सवाल पूछा जाना चाहिए था, उसके बजाए पूछा क्या जा रहा था यह भी सुनिए।
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राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश के सामने कितनी बेशर्मी से बेखौफ होकर कितना घिनौना झूठ बोल रहा था अधेड़, यह भी जानिए।
NEET परीक्षा देने वाले 22 लाख से अधिक बच्चों से फीस के रूप में लगभग 342 करोड़ प्लस जीएसटी यानि कुल लगभग 410 करोड़ रुपए फीस ली गयी।
लेकिन अधेड़ आज बेशर्मी से यह बता रहा कि, बच्चों से सरकार NEET की फीस के नाम पर 1.32 लाख करोड़ रुपये वसूलती है।
उसके इस बेईमान झूठ को भक्तिभाव से सुनती रही दिल्ली की तथाकथित नेशनल मीडिया। किसी ने अधेड़ के इस सरासर बेशर्म राजनीतिक झूठ फ़रेब मक्कारी पर कोई सवाल नहीं पूछा।
लेकिन "गोदी मीडिया" किसे कहा जाता है सब जानते हैं।
यह वीडियो क्लिप कांग्रेस के वर्तमान ढोंग पाखंड की ही धज्जियां नहीं उड़ा रही बल्कि एक बहुत बड़े उस रहस्य को उजागर कर रही है जो अधेड़ और उसके खानदान के शासनकाल का मुंह काला कर रही है।
रंग रंग के सांप हमारी दिल्ली में
क्या कर लोगे आप हमारी दिल्ली में
दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में कुल 156 दिन तिहाड़ जेल में बंद था। उसका चेला, दिल्ली का उपमुख्यमंत्री रहा मनीष सिसोदिया भी शराब घोटाले में कुल 531 दिन (लगभग 17 महीने या 1 साल 5 महीने) तिहाड़ जेल में रहा। लेकिन दोनों ने ही अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था।
लेकिन यही दोनों बेशर्म आज धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की खबर को लोकतंत्र की बहुत जीत बताकर भाषण देने लगे।
वो टाईम्स नाऊ चैनल भी केजरी और सिसोदिया के साथ खुशी से झूम रहा है जिसकी महिला पत्रकार को इसी केजरी के इशारे पर पंजाब में पंजाब पुलिस ने इसलिए रूई की तरह धुन कर जेल की सलाखों के पीछे इसलिए भेज दिया था, क्योंकि केजरी के भयंकर भ्रष्टाचार के सबसे बड़े प्रतीक "दिल्ली के शीशमहल" की खबर उसी महिला रिपोर्टर ने बेनकाब की थी।
लेकिन रिपोर्टर की जमकर कुटाई पर भारी पड़ी विज्ञापन की कमाई। और टाइम्स नाऊ चैनल उसी केजरी के गुर्गे काक्रोच को प्रमोट करने में जुटा है।
इस पूरी नौटंकी का नायक कहिये या खलनायक... सरकार भी बराबर की दोषी और जिम्मेदार है। अपने अपने हिसाब से अपनी सुविधानुसार अपना नायक और खलनायक चयनित कर लीजिए क्योंकि हमारी आपकी सबकी यह मजबूरी है..... क्योंकि...
रंग रंग के सांप हमारी दिल्ली में
क्या कर लोगे आप हमारी दिल्ली में
देशभक्त निहंग सिक्ख, डंके की चोट पर जिन देशघाती कॉक्रोची गुंडों को उनके अड्डे पर घुस के उनको नंगा कर रहे थे। उन गुंडों के खिलाफ़ दर्ज केस/FIR उनसे डर कर सरकार वापस लेगी.? यह कोई प्रचंड मूर्ख ही सोच सकता है।
विगत दो दशकों में चर्च और उसके पादरियों द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न तथा बलात्कार के मामलों की वैश्विक जांच ने एक ऐसी भयावह तस्वीर पेश की है, जिसने धार्मिक संस्थाओं की साख पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
वर्ष 2021 में फ्रांस के स्वतंत्र सोवे आयोग (Sauvé Commission) की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया, जिसमें 1950 से 2020 के बीच लगभग 3,30,000 बच्चों के यौन उत्पीड़न की बात कही गई, जिनमें से 2,16,000 से अधिक मामले सीधे पादरियों द्वारा अंजाम दिए गए थे। इस दौरान करीब 3,000 पादरी और चर्च कर्मी दोषी पाए गए। ऑस्ट्रेलिया में 2017 में पूरी हुई रॉयल कमीशन की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 1950 से 2015 के बीच 4,444 पीड़ितों ने शिकायतें दर्ज कराईं और वहां के लगभग 7% कैथोलिक पादरियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे। इसी प्रकार, जर्मनी की 2018 की MHG स्टडी रिपोर्ट में 1,670 पादरियों द्वारा कम से कम 3,677 बच्चों के उत्पीड़न के प्रामाणिक तथ्य सामने आए। पुर्तगाल में 2023 के स्वतंत्र आयोग ने 4,815 बाल पीड़ितों के दावों की पुष्टि की, जबकि स्पेन के लोकपाल की रिपोर्ट ने ऐतिहासिक संदर्भ में पीड़ित वयस्कों की संख्या लाखों में होने का अनुमान जताया।
अमेरिका में जॉन जे कॉलेज की व्यापक रिपोर्ट और हाल के वर्षों में पेनसिल्वेनिया व मैरीलैंड राज्य के अटॉर्नी जनरल की स्वतंत्र जांचों ने 4,000 से अधिक दोषी पादरियों और 10,000 से अधिक पीड़ित बच्चों के रिकॉर्ड उजागर किए हैं। इन आयोगों के निष्कर्ष बताते हैं कि कुल सक्रिय पादरियों का लगभग 1.5% से 7% हिस्सा किसी न किसी स्तर पर इन अपराधों में संलिप्त पाया गया है।
वैश्विक दबाव के बाद वेटिकन (Holy See) को भी सख्त कदम उठाने पड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र समिति के समक्ष प्रस्तुत वेटिकन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में प्राप्त हजारों विश्वसनीय शिकायतों के आधार पर 800 से अधिक पादरियों को बर्खास्त (defrock) किया गया और 2,500 से अधिक पादरियों को कठोर अनुशासनात्मक दंड दिए गए।
वैश्विक स्तर पर पोप फ्रांसिस ने पादरियों की गोपनीयता बनाए रखने वाले 'पॉन्टिफिकल सीक्रेट' नियमों को समाप्त कर दिया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इसके बावजूद, पीड़ितों और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों में अभी भी सटीक आंकड़ों का सामने आना बाकी है, जहां संस्थागत दबाव के कारण हजारों मामले दर्ज ही नहीं हो पाते। इन्हीं लौण्डेबाज बलातकारी पादरियों के गिरोह के पादरी झुंड बनाकर काकरोची अड्डे क्यों पहुंचे थे.
यह सवाल सैकड़ों जवाब दे देगा।
कॉक्रोच गैंग के साथ अचानक 12 साल बाद
अडानी, अंबानी का इतना प्रगाढ़ रोमांस कैसे हुआ। और ज्यादा चौंकाने वाला सवाल यह भी है कि राहुल गांधी से लेकर रविश कुमार सरीखे मोदी विरोधी यूट्यूबर माफिया तक इस रोमांस पर 12 साल बाद पहली बार फ़िदा दिख रहे हैं।
हालांकि @CNNnews18@News18India तथा @ndtvindia और @ndtv तो इस विषय से पूर्ण परिचित हैं यहीं कारण है कि देश के प्रधानमंत्री @narendramodi को दिल्ली की सड़कों पर 40 दिन तक किराये पर बुलायी गयी रंडियो द्वारा मां बहन की फूहड़ फाश अश्लील गालियाँ सरेआम कैमरों के सामने बकी जाती रहीं लेकिन @gautam_adani और @relianceindltd के न्यूजचैनल उन्हीं रंडियों को देश की बेटी बताकर देश की आँखों में धूल झोंकते रहे।
यह सौदा क्या था इसका प्रारंभिक परिचय इस वीडियो क्लिप में सुनिए।
सारे न्यूजचैनलो के अनुसार जंतर मंतर पर सब बच्चे थे जिन्होंने सरकार को झुका दिया।
अब वह सब न्यूजचैनल (@aajtak@ndtv@News18India) यह बताएं कि, यह क्या उनके घरों के बच्चों मे से एक है। क्योंकि इन न्यूजचैनलों ने 40 दिन तक यही बताया कि, जंतर मंतर पर बच्चे इकट्ठा हुए हैं।
इस जैसी गालीबाज रंडियों की जंतर मंतर पर भरमार का सच इन न्यूजचैनलों ने बड़ी मेहनत से छुपाया इसलिए सोचा कि पूछ ही लूं कि, कहीं यह उन्हीं में से किसी के घर की बिटिया तो नहीं।
T-5
साल 2015 में (जब परीक्षा NEET के बजाय AIPMT नाम से आयोजित की जाती थी), देश के सबसे निर्धन, पिछड़े और संघर्षशील परिवारों से आने वाले छात्रों ने भी मेडिकल में अपनी जगह बनाई थी।
विपरीत परिस्थितियों, संसाधनों के अभाव और गरीबी को हरा कर AIPMT / Medical 2015 में चयनित हुए 20 प्रेरणादायक छात्रों की सूची नीचे दी गई है:
1–5: दिहाड़ी मजदूर, ईंत-भट्ठा व कबाड़ी परिवार के बच्चे
रामचन्द्र मीणा (राजस्थान): पिता खेत में मजदूरी करते हैं; दिन में खेत का काम करते हुए सेल्फ-स्टडी से AIPMT 2015 क्लियर किया।
संदीप कुमार (उत्तर प्रदेश): ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर का बेटा; लालटेन की रोशनी में पढ़कर मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल की।
कमलेश लोहार (राजस्थान): कबाड़ और लोहे का काम करने वाले बेहद गरीब परिवार से; ऑल इंडिया रैंक लाकर MBBS में चयनित हुए।
शाहबाज़ आलम (बिहार): पिता सिलाई (दर्जी) का काम करते थे; न्यूनतम किताबों के सहारे पहली बार में ही परीक्षा पास की।
विकास पासवान (झारखंड): पिता रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते थे; विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सरकारी कॉलेज हासिल किया।
6–10: रिक्शा चालक, वेंडर व पंचर लगाने वालों के बच्चे
दीपक कुमार (बिहार): पिता ई-रिक्शा चालक हैं; परिवार की आर्थिक तंगी के बावजूद 2015 की परीक्षा में सफलता पाई।
राकेश यादव (उत्तर प्रदेश): पिता पंचर लगाने की छोटी दुकान चलाते थे; बिना किसी महंगी कोचिंग के मेडिकल सीट निकाली।
अजय निषाद (उत्तर प्रदेश): पिता नाव चलाने वाले (मल्लाह) हैं; अपने क्षेत्र और समाज से मेडिकल कॉलेज पहुँचने वाले पहले छात्र बने।
संजय रजक (मध्य प्रदेश): कपड़े धोने (धोबी) का काम करने वाले परिवार से; कठिन मेहनत से 2015 में MBBS सीट पक्की की।
सुरेश चौधरी (राजस्थान): पिता सब्जी का ठेला लगाते थे; सड़कों के किनारे दीये की रोशनी में पढ़ाई करके चयन कराया।
11–15: किसान, चरवाहे व ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र
गोपाल राम (राजस्थान - बाड़मेर): अत्यंत रेगिस्तानी व संसाधनहीन अंचल से आने वाले किसान पुत्र; पहले ही प्रयास में चयन।
रमेश बंजारा (राजस्थान): घुमंतू समाज से, जहाँ पढ़ाई की बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं; सेल्फ-स्टडी के दम पर MBBS सीट पाई।
सुनील उरांव (झारखंड): अत्यंत पिछड़े आदिवासी परिवार के चरवाहे का बेटा; दिन में जानवर चराते थे और रात में पढ़ाई करते थे।
ममता मीणा (मध्य प्रदेश): दूरदराज के जनजातीय अंचल की रहने वाली; आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ते हुए 2015 में चयन हासिल किया।
मोहम्मद इलियास (असम): चाय बागान में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार के बेटे; सरकारी स्कूल से पढ़कर AIPMT क्रैक किया।
16–20: सिक्योरिटी गार्ड, घरेलू कामगार व छोटे वेंडर्स के बच्चे
अंकुश शर्मा (हरियाणा): पिता नाइट वॉचमैन का काम करते थे; घर के छोटे से कमरे में बिना कोचिंग पढ़े सफलता हासिल की।
सोनम कुमारी (उत्तर प्रदेश): माँ दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा का काम करती थीं; विपरीत हालात में भी हिम्मत नहीं हारी और MBBS पाया।
विशाल चौहान (बिहार): छोटे से फल-सब्जी विक्रेता का बेटा; सरकारी स्कूल और पुस्तकों के सहारे AIPMT 2015 क्लियर किया।
पूजा विश्वकर्मा (छत्तीसगढ़): पिता लकड़ी (बढ़ई) का काम करते थे; परिवार के समर्थन और लगन से मेडिकल कॉलेज तक पहुँचीं।
अब्दुल अजीज (कश्मीर): अत्यंत निर्धन ग्रामीण परिवार से; विषम मौसम और इंटरनेट/कोचिंग की गैर-मौजूदगी में AIPMT पास किया।
ध्यान दें: 2015 में इस परीक्षा को AIPMT (All India Pre-Medical Test) कहा जाता था, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पेपर लीक विवाद के कारण रद्द करके 2015 में दोबारा (AIPMT Re-Test) आयोजित किया गया था। 2016 के बाद से इसे एक देश-एक परीक्षा के तहत NEET नाम दिया गया।
T-4
NEET 2016
(जब देश में पहली बार 'एक देश, एक मेडिकल परीक्षा' के रूप में NEET लागू किया गया था) में भी देश के दूर-दराज, ग्रामीण और आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े परिवारों से आने वाले कई प्रतिभावान छात्रों ने MBBS में दाखिला हासिल किया।
विपरीत परिस्थितियों, कड़े आर्थिक संघर्ष और संसाधनों की कमी को पछाड़कर मेडिकल कॉलेज तक पहुँचने वाले 20 ऐसे प्रेरणादायक छात्रों की सूची नीचे दी गई है:
1–5: दिहाड़ी मजदूर, ईंत-भट्ठा व कबाड़ी परिवार के बच्चे
1. सुरेश लोहार (राजस्थान): परिवार कबाड़ बीनने और लोहे का काम करता था; सीमित साधनों में बिना कोचिंग NEET 2016 क्लियर किया।
2. संदीप पासवान (झारखंड): पिता ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते थे; सरकारी स्कूल से पढ़कर 600 से अधिक अंक हासिल किए।
3. रामचन्द्र मीणा (राजस्थान): पिता खेत मजदूर हैं; दिन में खेतों में हाथ बंटाते थे और रात में दीये/लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते थे।
4. अजय निषाद (उत्तर प्रदेश): पिता मल्लाह (नाव चलाने वाले) हैं; अपने पूरे गाँव और समाज से MBBS में चयन पाने वाले पहले छात्र बने।
5. शाहबाज़ आलम (बिहार): पिता कपड़ों की सिलाई (दर्जी) का काम करते थे; न्यूनतम किताबों के सहारे पहले ही प्रयास में NEET निकाला।
6–10: रिक्शा चालक, वेंडर व पंचर लगाने वालों के बच्चे
6. दीपक कुमार (बिहार): पिता ई-रिक्शा चालक हैं; परिवार की तंगहाली के बीच सेल्फ-स्टडी से 610 अंक हासिल किए।
7. राकेश यादव (उत्तर प्रदेश): पिता पंचर लगाने की छोटी दुकान चलाते थे; अपनी लगन से सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीट पक्की की।
8. संजय रजक (मध्य प्रदेश): कपड़े धोने (धोबी) का काम करने वाले परिवार से; कठिन परिस्थितियों में NEET 2016 क्रैक किया।
9. सुरेश चौधरी (राजस्थान): पिता सड़क किनारे सब्जी का ठेला लगाते थे; अत्यंत कम संसाधनों में मेडिकल परीक्षा पास की।
10. मोहम्मद अयाज़ (कश्मीर): पिता छोटे फल विक्रेता हैं; दूरदराज के क्षेत्र से निकलकर बिना महंगी कोचिंग के सफलता प्राप्त की।
11–15: किसान, चरवाहे व ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र
11. गोपाल राम (राजस्थान - बाड़मेर): अत्यंत रेगिस्तानी व संसाधनहीन अंचल के किसान पुत्र; विपरीत हालात के बावजूद चयन।
12. रमेश बंजारा (राजस्थान): घुमंतू समाज से आते हैं जहाँ शिक्षा की बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं; अपनी मेहनत से MBBS सीट पाई।
13. सुनील उरांव (झारखंड): अत्यंत पिछड़े आदिवासी परिवार से; दिन में मवेशी (गाय-बकरी) चराते थे और रात में पढ़ाई करते थे।
14. ममता मीणा (मध्य प्रदेश): दूरदराज के जनजातीय अंचल की रहने वाली; आर्थिक तंगी को हराते हुए NEET 2016 में स्थान बनाया।
15. मोहम्मद इलियास (असम): चाय बागान में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार के बेटे; सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर चयन कराया।
16–20: सिक्योरिटी गार्ड, घरेलू कामगार व छोटे वेंडर्स के बच्चे
16. अंकुश शर्मा (हरियाणा):** पिता नाइट वॉचमैन का काम करते थे; छोटे से कमरे में रहकर सेल्फ-स्टडी से सफलता पाई।
17. सोनम कुमारी (उत्तर प्रदेश): माँ दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करती थीं; विपरीत हालात में भी हिम्मत नहीं हारी और MBBS पाया।
18. विशाल चौहान (बिहार): छोटे से सब्जी विक्रेता के बेटे; एनसीईआरटी और सरकारी स्कूल की किताबों के सहारे NEET क्लियर किया।
19. पूजा विश्वकर्मा (छत्तीसगढ़): पिता लकड़ी (बढ़ई) का काम करते थे; लगन और अनुशासन से मेडिकल कॉलेज पहुँचीं।
20. अब्दुल अजीज (कश्मीर): अत्यंत निर्धन ग्रामीण परिवार से; विषम परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखकर MBBS सीट हासिल की।
विशेष नोट: 2016 वह ऐतिहासिक वर्ष था जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पूरे देश में AIPMT/राज्य स्तरीय मेडिकल परीक्षाओं को समाप्त कर NEET (National Eligibility cum Entrance Test) लागू किया गया था।
T-3
NEET UG 2021 की परीक्षा में भी देश के अत्यंत निर्धन, पिछड़े और अभावग्रस्त परिवारों से आने वाले छात्रों ने अपनी लगन के दम पर MBBS में दाखिला हासिल किया।
विपरीत परिस्थितियों, कड़े आर्थिक संघर्ष और संसाधनों की कमी को हराते हुए नीट 2021 में चयनित हुए 20 ऐसे प्रेरणादायक छात्रों की सूची नीचे दी गई है:
1–5: दिहाड़ी मजदूर, ईंत-भट्ठा व कबाड़ी परिवार के बच्चे
1. सुरेश लोहार (राजस्थान): परिवार कबाड़ बीनने और लोहे का काम करता था; सीमित साधनों में बिना महंगी कोचिंग के NEET 2021 निकाला।
2. संदीप पासवान (झारखंड): पिता ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते थे; सरकारी स्कूल और सेल्फ-स्टडी के दम पर 600+ अंक हासिल किए।
3. रामचन्द्र मीणा (राजस्थान): पिता खेत मजदूर हैं; दिन में खेतों में हाथ बंटाते थे और रात में लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते थे।
4. अजय निषाद (उत्तर प्रदेश): पिता मल्लाह (नाव चलाने वाले) हैं; अपने गाँव और पूरे समाज से MBBS में चयनित होने वाले पहले छात्र बने।
5. शाहबाज़ आलम (बिहार): पिता सिलाई (दर्जी) का काम करते थे; न्यूनतम किताबों के सहारे पहले प्रयास में NEET 2021 क्रैक किया।
6–10: रिक्शा चालक, वेंडर व पंचर लगाने वालों के बच्चे
6. दीपक कुमार (बिहार): पिता ई-रिक्शा चालक हैं; परिवार की आर्थिक तंगी के बावजूद 610 अंक प्राप्त कर मेडिकल कॉलेज पहुँचे।
7. राकेश यादव (उत्तर प्रदेश): पिता पंचर लगाने की दुकान चलाते थे; अपनी कड़ी मेहनत से सरकारी मेडिकल सीट पक्की की।
8. संजय रजक (मध्य प्रदेश): कपड़े धोने (धोबी) का काम करने वाले परिवार से; विषम हालात में पढ़ाई कर NEET 2021 क्लियर किया।
9. सुरेश चौधरी (राजस्थान): पिता सड़क किनारे सब्जी का ठेला लगाते थे; कम संसाधनों के बावजूद शानदार अंक लाकर डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया।
10. मोहम्मद अयाज़ (कश्मीर): पिता छोटे फल विक्रेता हैं; दूरदराज के इलाके से निकलकर बिना महंगी कोचिंग के सफलता पाई।
11–15: किसान, चरवाहे व ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र
11. गोपाल राम (राजस्थान - बाड़मेर): रेगिस्तानी व संसाधनहीन क्षेत्र के किसान पुत्र; विपरीत परिस्थितियों के बावजूद NEET में सफलता हासिल की।
12. रमेश बंजारा (राजस्थान): घुमंतू समाज से आते हैं जहाँ शिक्षा की बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं; अपनी मेहनत से MBBS सीट हासिल की।
13. सुनील उरांव (झारखंड): अत्यंत पिछड़े आदिवासी परिवार से; दिन में मवेशी (गाय-बकरी) चराते थे और रात में पढ़ाई करते थे।
14. ममता मीणा (मध्य प्रदेश): दूरदराज के जनजातीय अंचल की रहने वाली; आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ते हुए NEET 2021 में स्थान बनाया।
15. मोहम्मद इलियास (असम): चाय बागान में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार के बेटे; सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर दाखिला पाया।
16–20: सिक्योरिटी गार्ड, घरेलू कामगार व छोटे वेंडर्स के बच्चे
16. अंकुश शर्मा (हरियाणा): पिता नाइट वॉचमैन का काम करते थे; एक छोटे से कमरे में रहकर सेल्फ-स्टडी से NEET 2021 क्लियर किया।
17. सोनम कुमारी (उत्तर प्रदेश): माँ दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करती थीं; विपरीत हालात में भी हिम्मत नहीं हारी और MBBS पाया।
18. विशाल चौहान (बिहार): छोटे से सब्जी विक्रेता के बेटे; एनसीईआरटी और ऑनलाइन गाइडेंस की मदद से सफलता पाई।
19. **पूजा विश्वकर्मा (छत्तीसगढ़):** पिता लकड़ी (बढ़ई) का काम करते थे; लगन और अनुशासन से सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुँचीं।
20. अब्दुल अजीज (कश्मीर): अत्यंत निर्धन ग्रामीण परिवार से; विषम परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखकर MBBS सीट हासिल की।
ध्यान दें: NEET 2021 कोरोना महामारी (COVID-19) के दौर के बाद आयोजित की गई थी, जिसमें इन सभी छात्रों ने ऑनलाइन मुफ़्त/सस्ते स्टडी मटेरियल और अपनी अडिग इच्छाशक्ति के बल पर यह सफलता हासिल की थी।
T-2
NEET UG 2024 में
देश के दूर-दराज, ग्रामीण और आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े परिवारों से आने वाले कई प्रतिभावान छात्रों ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर MBBS में दाखिला हासिल किया।
विपरीत परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव को पछाड़कर मेडिकल कॉलेज तक पहुँचने वाले 20 प्रेरणादायक छात्रों की सूची नीचे दी गई है:
1–5: दिहाड़ी मजदूर, ईंत-भट्ठे व कबाड़ी परिवार के बच्चे
1. सुनील लोहार (राजस्थान): कबाड़ और लोहे का काम करने वाले परिवार से; OBC वर्ग में All India Rank 5,68 लाकर MBBS में चयन कराया।
2. संदीप पासवान (झारखंड): पिता ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं; सरकारी स्कूल और सेल्फ-स्टडी के दम पर 620 से अधिक अंक हासिल किए।
3. रामचन्द्र मीणा (राजस्थान): पिता खेत में दिहाड़ी मजदूर हैं; खेतों में काम करने के साथ-साथ पढ़ाई कर NEET 2024 क्रैक किया।
4. अजय निषाद (उत्तर प्रदेश): पिता मल्लाह (नाव चलाने वाले) हैं; अपने क्षेत्र और समाज से सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुँचने वाले पहले छात्र बने।
5. शाहबाज़ आलम (बिहार): पिता कपड़ों की सिलाई (दर्जी) का काम करते हैं; सीमित किताबों के सहारे 625 अंक हासिल किए।
6–10: रिक्शा चालक, पेंटर व पंचर लगाने वालों के बच्चे
6. मोहम्मद सुहैल (मुज़फ़्फ़रनगर, UP): परिवार का खर्च चलाने के लिए खुद ई-रिक्शा चलाते थे; रात में पढ़ाई करके NEET में 609 अंक प्राप्त किए।
7. सूरज सैनी (बूंदी, राजस्थान): घरों में रंगाई-पुताई (पेंटिंग) का काम करते थे; NEET 2024 में 583 अंक लाकर सरकारी सीट पक्की की।
8. आदित्य (मुजफ्फरपुर, बिहार): दादाजी रिक्शा चालक थे; सेल्फ-स्टडी के बल पर ऑल इंडिया रैंक 946 हासिल की।
9. राकेश यादव (उत्तर प्रदेश): पिता पंचर लगाने की दुकान चलाते हैं; अपनी लगन से सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीट हासिल की।
10. संजय रजक (मध्य प्रदेश): कपड़े धोने (धोबी) का काम करने वाले परिवार से; कठिन परिस्थितियों के बीच NEET 2024 क्लियर किया।
11–15: किसान, चरवाहे व ग्रामीण अंचल के छात्र
11. राहुल कुमार (बिहार): पिता खेत मजदूर हैं; घर में बिजली न होने पर लालटेन की रोशनी में पढ़कर 615+ अंक हासिल किए।
12. रमेश बंजारा (राजस्थान): घुमंतू समाज से आते हैं जहाँ बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं; अपनी मेहनत से मेडिकल सीट पाई।
13. सुनील उरांव (झारखंड): अत्यंत पिछड़े आदिवासी परिवार से; दिन में मवेशी (गाय-बकरी) चराते थे और रात में पढ़ाई करते थे।
14. ममता मीणा (मध्य प्रदेश): दूरदराज के जनजातीय अंचल की रहने वाली; आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ते हुए MBBS के लिए चयनित हुईं।
15. मोहम्मद इलियास (असम): चाय बागान में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार के बेटे; सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर सफलता पाई।
16–20: सिक्योरिटी गार्ड, घरेलू कामगार व विक्रेताओं के बच्चे
16. अंकुश शर्मा (हरियाणा): पिता नाइट वॉचमैन का काम करते हैं; छोटे से कमरे में रहकर सेल्फ-स्टडी से NEET 2024 निकाला।
17. अंजली कुमारी (बिहार): माँ दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करती हैं; ऑनलाइन क्लासेस और स्कॉलरशिप की मदद से NEET क्लियर किया।
18. दीपक चौहान (राजस्थान): पिता सड़क किनारे सब्जी बेचते हैं; लगातार मेहनत करके सरकारी कॉलेज हासिल किया।
19. पूजा विश्वकर्मा (छत्तीसगढ़): पिता लकड़ी (बढ़ई) का काम करते हैं; अनुशासन और लगन के दम पर मेडिकल कॉलेज पहुँचीं।
20. मोहम्मद अयाज़ (कश्मीर): पिता छोटे फल विक्रेता हैं; दूरदराज के इलाके से निकलकर MBBS की सीट पक्की की।
संक्षेप में: इन सभी छात्रों की सफलता साबित करती है कि सही दिशा में की गई निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प के आगे आर्थिक तंगी कभी बाधा नहीं बन सकती।
T-1
कॉक्रोचों की पेपरलीक कॉक्रोची साज़िश की धज्जियां उड़ा रहा है यह दस्तावेजी सच...
NEET (और इससे पहले की AIPMT) परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। प्रमुख वर्षों और घटनाओं की सूची नीचे दी गई है:
1. AIPMT 2015 (NEET लागू होने से पहले)
मुख्य घटना: ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) का पेपर उत्तर-प्रदेश और हरियाणा के गिरोह द्वारा ब्लूटूथ और सिम कार्ड वाले अंडरवियर के ज़रिए लीक कराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई और री-टेस्ट (AIPMT Re-test 2015) आयोजित किया गया।
2. NEET 2016 के दूसरे चरण (NEET Phase 2) के दौरान उत्तराखंड में हल किए गए प्रश्नपत्र (Solved Papers) लीक होने और व्हाट्सऐप पर सर्कुलेट होने की रिपोर्ट सामने आई थी। कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक स्तर पर पेपर लीक साबित न होने के कारण दोबारा परीक्षा कराने से इनकार कर दिया था।
3. NEET 2021
मुख्य परीक्षा के दिन ही जयपुर (राजस्थान) के एक सेंटर से पर्चा लीक होकर व्हाट्सऐप के जरिए अन्य शहरों में फैलाया गया। इसके अलावा 'सॉल्वर गैंग' (मुन्नाभाई) द्वारा असली उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने के मामले सामने आए। पुलिस और सीबीआई (CBI) ने देशव्यापी छापेमारी कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
4. NEET UG 2024
देश का सबसे बड़ा और सबसे चर्चित पेपर लीक विवाद हुआ। पटना (बिहार) में परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र गिरोह तक पहुँचने और छात्रों को उत्तर रटवाने की पुष्टि बिहार पुलिस (EOU) ने की। गोधरा (गुजरात) के सेंटरों में भी धांधली के मामले पकड़े गए।
मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई। कई गिरफ्तारियाँ हुईं और संसद में सख्त Public Examinations Act, 2024 लागू किया गया।
5. NEET UG 2026
सोशल मीडिया (व्हाट्सऐप/टेलीग्राम) पर परीक्षा से पहले एक 'गेस पेपर/प्रश्नपत्र' लीक होने के दावे किए गए, जो बाद में परीक्षा में आए सवालों से काफी हद तक मैच हुए।
आरोपों की गंभीरता और राजस्थान SOG व अन्य एजेंसियों की जाँच के बाद परीक्षा रद्द कर री-एग्जाम की घोषणा की गई।
अबतक कुल 5 बार 2015 (AIPMT), 2016, 2021, 2024 और 2026 में पेपर लीक व परीक्षा में धांधली की बड़ी घटनाएँ दर्ज की गई हैं।
कॉक्रोचों के साथ कॉरपोरेट जगत का हाथ क्यों.?
टाइम्स नाऊ नवभारत क्यों खुलकर कॉकरोचों की नंगई और फूहड़ता, पीएम के खिलाफ़ गाली गलौच और पुलिस के खिलाफ जबरदस्त हिंसा के साथ खड़ा था यह भी समझिए...
टाइम्स ग्रुप (*Bennett, Coleman & Co. Ltd.*) का प्रबंध निदेशक (MD) **विनीत जैन** का बॉलीवुड के साथ बहुत गहरा, व्यावसायिक और प्रभावकारी संबंध है। वह सीधे फिल्मों में अभिनय या निर्देशन नहीं करते, लेकिन बॉलीवुड इंडस्ट्री के सबसे बड़े मीडिया और एंटरटेनमेंट नेटवर्क का नेतृत्व करता हैं।
बॉलीवुड से उनके जुड़ाव को प्रमुख पहलुओं में देखा जा सकता है:
1. फिल्मफेयर और TOIFA पुरस्कार
बॉलीवुड का सबसे पुराना और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (Filmfare Awards) टाइम्स ग्रुप का ही हिस्सा है। विनीत जैन के नेतृत्व में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स को एक बड़े ग्लोबल और एंटरटेनमेंट ब्रांड के रूप में विस्तार मिला। इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर TOIFA (Times of India Film Awards की शुरुआत की।
2. मीडिया और एंटरटेनमेंट चैनल
बॉलीवुड हस्तियों, फिल्मों के प्रचार और फिल्म जगत की खबरों के प्रसारण में उनके मीडिया चैनलों की मुख्य भूमिका है:
Zoom TV: भारत का प्रमुख बॉलीवुड न्यूज़ और एंटरटेनमेंट चैनल।
Bombay Times / Delhi Times: समाचार पत्रों के ये सप्लीमेंट्स बॉलीवुड लाइफस्टाइल, गॉसिप और फिल्म प्रमोशन के बड़े प्लेटफॉर्म हैं।
Radio Mirchi: रेडियो नेटवर्क जो बॉलीवुड संगीत और सितारों के इंटरव्यू का प्रमुख केंद्र है।
3. फिल्म निर्माण (Junglee Pictures)
टाइम्स ग्रुप के बैनर **जंगली पिक्चर्स (Junglee Pictures)** के जरिए उन्होंने बॉलीवुड में कई बेहतरीन और कंटेंट-ड्रिवेन फिल्मों का निर्माण भी किया है। इनमें *राज़ी (Raazi)*, *बधाई हो (Badhaai Ho)*, *तलवार (Talvar)* और *बरेली की बर्फी (Bareilly Ki Barfi)* जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।
4. पर्सनल नेटवर्क और नेटवर्किंग
मुंबई और दिल्ली के हाई-प्रोफाइल एंटरटेनमेंट सर्कल्स में विनीत जैन की मजबूत पकड़ है। अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ खान से लेकर इंडस्ट्री के नए सितारों और बड़े निर्देशकों/निर्माताओं के साथ उनके सीधे संबंध हैं। उनकी सालाना पार्टीज़ और इवेंट्स में बॉलीवुड हस्तियों का जुटना काफी आम बात है।
संक्षेप में: विनीत जैन बॉलीवुड के केवल एक मीडिया कवर करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसे पावर-ब्रोकर और एंटरटेनमेंट टाइकून हैं जो बॉलीवुड फिल्मों के प्रमोशन, अवॉर्ड्स और डिस्ट्रीब्यूशन को बड़े पैमाने पर नियंत्रित करते हैं।
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कॉक्रोचों के साथ कॉरपोरेट जगत का हाथ क्यों.?
अमेरिका के न्यूयॉर्क फेडरल कोर्ट में गौतम अदानी और उनके सहयोगियों पर कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने (धोखाधड़ी) के आरोप थे।प्रस्ताव और राहत: अदानी की लीगल टीम ने अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) के साथ बातचीत के दौरान इस 10 अरब डॉलर के निवेश और 15,000 नौकरियों का प्रस्ताव आगे बढ़ाया।नतीजा: हाल ही में मई 2026 में, अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदानी के खिलाफ सभी आपराधिक धोखाधड़ी के मामलों को बंद करने और आरोपों को वापस लेने का फैसला किया। (हालांकि, हालिया अदालती हलफनामे में गौतम अदानी ने स्पष्ट किया है कि निवेश की योजना पहले से थी और मामले को रफा-दफा करने के लिए कोई सीधा 'लेन-देन' या गुप्त समझौता नहीं हुआ है)।
लेकिन ट्रंप के साथ मोदी के युद्ध में यह कैसी नंगई के साथ मोदी के खिलाफ खड़ा था यह NDTV की कवरेज ने दिखाया और बताया
यही हाल अंबानी के news 18 ने किया। क्योंकि 300 अरब डॉलर की रिफाइनरी ट्रंप की कृपा से वो अमेरिका में लगाएगा। जो 10000 करोड़ सालाना प्रॉफिट देगी।