The future generations will never forgive Shudhanshu Trivedi and Sambit Patra.
For power, they are finishing the future of General Caste Hindus.
They know, Modi is trying to finish us, but still they don’t say a word.
Shame.
500 में से 11 अंक वाला शिक्षक, आपके बच्चों को पढ़ा रहा है;
800 में से 1 अंक लाने वाला डॉक्टर, अपनी प्रैक्टिस शुरू कर चुका है;
लेकिन आरक्षण पर बात नहीं होनी चाहिए!
टैक्स कौन सा वर्ग सबसे अधिक दे रहा है? देखें इस वीडियो में...
The General Caste (Sawarn) asked BJP politely to remove Dharmendra Pradhan after UGC but they chose not to listen to them.
Today The so called upper caste came out on street in Jaipur and they protested agianst UGC, whta BJP did to its core vote bank? They Lathicharged them.
Jab Naash Manuj par aata hai, Pehle Vivek marr Jaata hai.
You will see its impact on 5 elections that are coming.
Punjab Elections in Feb 27
Goa Election Feb 27
Uttarakhand Elections Feb 27
UP election Feb March 27
Manipur Election Feb/March 27
और सनातन की शुरुआत नेपाल से होगी....
मुस्लिमों ने 2 कावड़ यात्रियों की हत्या की जिसके बाद ये सब शुरू हुआ.. जबतक इस तरह से जवाब नही दिया जाएगा तब तक बिना बात के हिंदू मरता रहेगा, 2002 के बाद से भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ इसीलिए ये कही भी किसी को भी मार देते है।
कोई आड़ में कुछ नहीं कर रहा है। मैं कर रहा हूँ, मेरे जैसे लाखों लोग कर रहे हैं। आपको जितने वोट मिलते हैं उससे कई गुणा अधिक लोग। आरक्षण जिस रूप में है, उसको जाना ही होगा। वरना @narendramodi के ‘विकसित भारत’ की योजना केवल ‘दिवास्वप्न’ रह जाएगा।
We all know the ‘Reservations Hatao Andolan’ is about to begin. One person alone can’t lead a movement like this.
That’s why I proposed building a strong team. Do you all agree with my idea?
12 years of government, naa apna system banaya, jo log genuinely support karte theyy online, unko gaali dilwayi apne paid chutiyon se.
bsdk, aur do GCs ko gaali ab, i have zero sympathy for you
आरक्षण पर हमारे नेताओं के क्या विचार हैं? सुनिए और तय कीजिए कि क्या इस विषय पर कोई भी पार्टी, किसी भी कालखंड का नेता, कुछ सकारात्मक करता दिखना चाहता है?
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।