Sonam Wangchuk से बात करेगी Modi सरकार?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण अनशन केवल विरोध का माध्यम नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता की भी परीक्षा होती है. यदि कोई नागरिक अपने विश्वास और अधिकारों के लिए जीवन दांव पर लगाकर अनशन कर रहा हो, तो राज्य का प्रथम दायित्व संवाद, सहानुभूति और समाधान का होना चाहिए.
राज्य की भूमिका केवल शासक की नहीं, बल्कि एक अभिभावक की भी होती है. जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चों की पीड़ा को समझने का प्रयास करते हैं, उसी प्रकार सरकार से भी अपेक्षा की जाती है कि वह अपने नागरिकों के साथ सम्मानजनक संवाद करे, चाहे मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों. किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति विरोध को दबाने में नहीं, बल्कि उसे सुनने और संवेदनशीलता से उसका उत्तर देने में निहित है.
सोनम वांगचुक के अनशन ने एक बार फिर ये प्रश्न उठाया है कि लोकतांत्रिक असहमति के प्रति राज्य का उत्तर टकराव नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और मानवीय संवेदना होना चाहिए
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CJP नेताओं को हर हाल में समाज के बड़े-बुजुर्गों से बात करके सोनम वांगचुक जी का अनशन तुड़वाना चाहिए। जितना प्रतिरोध जताना था आप उसमें जीत चुके हैं। हिटलर प्रवृति के नेताओं के आगे अनशन करके मर जाना बहुत समझदारी नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान महत्वपूर्ण नहीं है आपकी लड़ाई लंबी है।
At least 1 character from Aamir Khan’s film 3 idiots has come out in support of Sonam Wangchuk (the inspiration behind the Aamir Khan character) who is on fast at Jantar Mantar for 17 days, seeking the resignation of Education Minister Pradhan.
Waiting to see what Amir Khan does?
'ज्यादा वर्दी का गुरूर हो तो बता देना, पांच मिनट में उतरवा दूंगा '
यूपी में पुलिस इंस्पेक्टर को ऐसी धमकी
कोई कांवड़िया ही दे सकता है . सरेआम ऐसी धमकी सुनने के बाद भी पुलिस वाले कुछ कर भी नहीं पाए. बाद में सुना कि FIR हुई है .
ये तो ट्रेलर है , सावन अभी बाकी है.
जिस यूपी में किसी के घर में दस लोगों के एक साथ नमाज़ पढ़ने पर गिरफ्तारी हो जाती है , उस यूपी में कांवड़ियों के सामने एक थानेदार की यही हैसियत है . मामला मुजफ्फरनगर का है .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
प्रतापगढ़ के रहने वाले सियाराम उमरवैश्य ने 2018 में राम मंदिर के निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये का चंदा दिया था. पहली बार वो 2018 में तभी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये दान करने की घोषणा की थी. लेकिन अब चढ़ावा चोरी के आरोपों के बीच एक बार फिर से उनका एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में वो कह रहे हैं कि उन्होंने राम का मंदिर बन रहा है, ये सोच कर अपनी जमीन बेचकर दान दिया था. लेकिन अब अफसोस हो रहा है.
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Ram Mandir | Donation | Ayodhya
इस्तीफे की आड़ में चंपत राय और अनिल मिश्रा को बचाया जा रहा है। केवल इस्तीफे से काम नहीं चलेगा। चंदा चोरों को फाँसी दो।
और चंपत राय के आकाओं पर कार्रवाई कब होगी? जिनके इशारे पर वो काम करते थे।
कल जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया, उनकी पुलिस रिमांड भी नहीं ली गई। उनसे कोई पुलिस पूछताछ नहीं हुई। उन्होंने चोरी का माल किसे पहुंचाया, किसके कहने पर चोरी कर रहे थे, बाक़ी चोरी का माल कहाँ है। कुछ नहीं पूछा गया।
इस से साफ़ ज़ाहिर है की केवल खाना पूर्ति हो रही है। हफ़्ते दस दिन में उनकी सबकी बेल करवा दी जाएगी।
इस से साफ़ ज़ाहिर है कि चंदा चोर पार्टी के टॉप के नेताओं के इशारे पर इतने सालों से चोरी चल रही है और अब सारा मामला रफ़ा दफ़ा किया जा रहा है।
जब उम्मीदें बिखरती हैं, तो सिर्फ़ सपने नहीं टूटते, भविष्य भी दरक जाता है।
जो पीड़ा शब्दों में नहीं उतरती, वही आँखों से बहती है।
यह एक व्यक्ति की नहीं, लाखों युवाओं की ख़ामोश चीख है।