"न किसी से लगाव रहे, न किसी से जुड़ाव रहे, खुद में डूब जाओ इतना कि, न किसी का प्रभाव रहे! कोई चाहकर भी तुम्हें आहत न कर सके, ऐसा अपना स्वभाव रहे, बना लो खुद को ऐसा कि, अभाव का भी न भाव रहे।"
नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अन्तर्मन, तब सुख के मिले समन्दर का रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।
सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन यदि दुःख में साथ न दें अपना, फिर सुख में उन सम्बन्धों का रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।
मुंह जुवानी ना जताता की मोहब्बत क्या है मैं तुझे कर के दिखाता हूं कि मोहब्बत क्या है
कैसे सीने से लगाऊ कि किसी और के हो मेरे होते तो बताता की मोहब्बत क्या है
और खूब समझता तुझे तेरी मिसाले देकर काश तू पूछने आता की मोहब्बत क्या है...✨♥️
Someone asked me: "Who do i Choose?"
So i replied:
उसे चुनो जो चुने तुम्हें, कहो उसे जो सुनें तुम्हें,
उधेड़ने वाले हजार हैं, चुनो उसे जो बुनें तुम्हें !