@drmjhansi@CPRONCR@RailwaySeva@RailMinIndia
PNR: 2358067420 | ट्रेन: 22195 (VGLJ-BDTS)
स्टेशन: वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ)
सर, मैं झांसी स्टेशन पर हूँ। ट्रेन काफी लेट है और 7:50 पर जाने की बात कही जा रही है। कृपया ट्रेन की सही और सटीक स्थिति बताएं। सहायता करे
@DrmJhansi@CPRONCR@RailwaySeva@RailMinIndia
PNR: 2358067420 | ट्रेन: 22195 (VGLJ-BDTS)
स्टेशन: वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी (VGLJ)
सर, मैं झांसी स्टेशन पर हूँ। ट्रेन काफी लेट है और 7:50 पर जाने की बात कही जा रही है। कृपया ट्रेन की सही और सटीक स्थिति बताएं। सहायता करें।
संत कबीर नगर के कोचरी बिजली उपकेंद्र से ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली लाइट सप्लाई कल पूरी रात से पूरी तरह ठप है पूरा ग्रामीण इलाका ��ंधेरे में है कृपया समस्या का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल कराएं। @UPPCLLKO @PuVVNLHQ @PuvvnlGkp2 #SantKabirNagar #PowerCut #UPPCL
ट्रेन नंबर 11081 (LTT-GKP) को भटनी जंक्शन पर ही समाप्त Short terminate किया जा रहा है। मुझे गोरखपुर जाना था। PNR: 8246902880।
कृपया बताएं कि भटनी से गोरखपुर जाने के लिए रेलवे प्रशासन ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है यात्री परेशान हैं।
@RailMinIndia @NERailwayWM @RPFCR @GKP_Railway
@RailwaySeva@drmbsbner आपकी तरफ से सिर्फ ट्रेन की मॉनिटरिंग और समय पालन का रटा रटाया आश्वासन देकर शिकायत को बंद करने की कोशिश की जा रहीहै ट्रेन बीच रास्त�� में रुकने से यात्रियोंको होने वाली असुविधा और आगे की यात्रा GKP तक के लिए रेलवे की क्या वैकल्पिक व्यवस्था है इस पर कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं दिया गया
@RailwaySeva@drmbsbner असंतोषजनक निवारण और गलत क्लोजिंग रिमार्क्स Reference No: 2026060412929
महोदय,
रेलवे द्वारा दिया गया क्लोजिंग रिमार्क अत्यंत निराशाजनक और मुख्य समस्या से भटकाने वाला है। मैंने शिकायत "ट्रेन लेट होने" की नहीं, बल्कि ट्रेन नंबर 11081 को भटनी जंक्शन पर ही शॉर्ट टर्मिनेट की किया था
ट्रेन नंबर 11081 (LTT-GKP) को भटनी जंक्शन पर ही समाप्त Short terminate किया जा रहा है। मुझे गोरखपुर जाना था। PNR: 8246902880।
कृपया बताएं कि भटनी से गोरखपुर जाने के लिए रेलवे प्रशासन ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है यात्री परेशान हैं।
@RailMinIndia @NERailwayWM @RPFCR @GKP_Railway
@AuthorAtul बाहर दुनिया तेल की कीमतों और बॉर्डर्स के लिए लड़ रही है और यहाँ टिलुआ गाँव की पुलिया पर बैठकर चाय पीते हुए सोच रहा होगा। तेल गया तेल लेने, अपना सिलेंडर फुल है और मम्मी भी कूल है
ये अच्छा है कि अब सीनियर खिलाड़ी भी खुलकर बोल रहे हैं कि मैच खेलने का फैसला सरकार है खिलाड़ियों का नहीं तो अब हमारे कहने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा...सुनील गावस्कर को सुनिए
#BoycottINDvPAK
@setwickkk आवेदन में स्पष्ट लिखें कि
आप विकलांग हैं,
घर नहीं है
आय कम है,
जमीन मात्र 2 बीघा है,बच्चा नहीं है,
और दौड़-भाग करने में असमर्थ हैं।
अपने ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, MLA/MP को लिखित रूप से बताएं और उनसे अनुशंसा पत्र लें।
अक्सर उनके दबाव में प्रशासन जल्दी कार्यवाही करता है
- बेल्ट खोल दे रामचंदर
- नही साहेब, मैं नही खोल सकता
- खोल दे, बहुत दर्द हो रहा है ..
रामचंदर कैसे खोलता। थोड़ी देर पहले जब हाथ लगाकर देखा थ��.. तो समझ गया था कि अंतड़ियां खुल गयी हैं।
बेल्ट ने दबा रखा है।
उसने बेल्ट खोल दी तो...
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साहेब बेहोशी के दौरे में चले जाते, फिर सचेत होते। फिर एक बार बुदबुदाये ..
- अच्छा, एक बात मानेगा मेरी
- हां साहेब
- तू बटालियन चला जा। कहना कि पूरी पलटन शहीद हो गयी। लेकिन कोई पीछे नही हटा
- आपको छोड़कर नही जाऊंगा साहब
पर साहब फिर बेहोश हो चुके थे।
अब जेसीओ रामचन्दर यादव ने उन्हें उठाया, और पहाड़ी के नीचे लाने लगा। रास्ते मे उसे अहसास ���ुआ। मेजर शैतान सिंह दम तोड़ चुके थे।
बर्फ अब भी गिर रही थी।
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राम चन्दर वहां पहुँचा जहां बटालियन का कैम्प था। पर वहाँ बहुत थोड़े लोग थे। जीप में बिठाकर उसे हेडक्वार्टर लाया गया। उसने कहानी बताई..
बारामूला से उन्हें 2 दिन पहले ही चुशुल सेक्टर में भेजा गया था। वहां LAC के पास रेजांग ला पर एक मोर्चा लगाया गया था। कम्पनी वहीं डटी हुई थी।
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18 नवम्बर की भयंकर सर्दी थी। लेकिन भारतीय सैनिक चौकस थे। रात साढ़े तीन बजे कुछ चीनियों को आते देखा गया। मेजर साहब ने रेंज में आते ही उन पर फायर करने का आदेश दिया।
पहला रेला आते ही एक टुकड़ी ने धुआंधार फायरिंग हुई। चीनी गिरने लगे। वे चींटियों की तरह चढ़े आ रहे थे, मरते जा रहे थे। तीन घण्टे तक लड़ाई चली। फिर थम गई।
सुबह साढ़े छह बजे, रोशनी होते ही बंकरों पर गोले बरसने लगे। मानो बरसात हो रही हो। हर पोस्ट, हर बंकर फटने लगी। आधे घण्टे की शेलिंग के बाद नजारा बदल चुका था।
धुआं छंटते ही चीनी फिर आने लगे। हमारी कई पोस्ट खामोश हो चुकी थी। जो बचे थे, गोलियां दाग रहे थे। मेजर शैतान सिंह को भी शेल का टुकड़ा लगा था।
मगर वे पोस्ट से पोस्ट भागते रहे, जवानों का हौसला बढ़ाते। इसी दौरान गोलियों का एक बर्स्ट लगा। गिर गए, राम चन्दर उन्हें उठाकर ओट में ले आया।
खून तेजी से बह रहा था। साहब बेहोश हो गए। फिर होश में आये। तो जानकारी ली। फिर कहा
- बेल्ट खोल दे रामचंदर
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बर्फबारी कुछ दिन बाद रुकी। सीजफायर हो चुका था, मगर बर्फ की मोटी तह हो चुकी थी। सारे निशान मिट चुके थे।
पूरे तीन माह के बाद बाद जब बर्फ पिघली, इनकी तलाश शुरू हुई।। एक चरवाहे को पहाड़��� पर लाशों के ढेर दिखा।
हैवी शेलिंग से उड़े हुए हाथ पैर, हाथों में अब भी बंदूक, कोई यूँ पड़ा है जैसे अभी उठ कर गोली चलाने लगेगा। गुड्डे गुड़ियों की तरह जहां तहां बिखरे शरीर..
कुमाऊं रेजिमेंट ने अपने 113 सैनिकों की लाशें इकट्ठा की। 18 नवंबर 1962 की उस काल रात्रि में चीनी सेना ने भी अपने 1200 से ज्यादा सैनिक खोए। बाद में आई रिपोर्ट्स बताती है कि चीन को सब��े ज्यादा नुकसान रेजांग ला में हुआ था।
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उस रात, चीनियों नें आसपास की कई पहाड़ियों को बिना लड़े कब्जा किया था। भारतीय सेना के कम फौजी होने के कारण उन्हें पीछे हटकर रिग्रूप होने को कहा गया था।
यह आदेश, रेजांगला में मेजर शैतान सिंह भट्टी को भी मिले थे। मगर उनकी कम्पनी में अपने रिस्क पर, पोस्ट न छोड़ना तय किया था।
नतीजा शहादत होगा, वे जानते थे।
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मेजर शैतान सिंह को परमवीर चक्र मिला। रेजांगल�� में उस पहाड़ी पर एक स्मारक बनाया गया। जहां कुमाऊं रेजिमेंट के 113 वीर अपनी जान दे गए।
स्मारक 60 सालों तक चीन की ओर देखकर फुसफुसाता था- यहां न किसी को घुसने दिया गया, न आने दिया गया है।
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60 साल बाद वह इलाका, आखिरकार बिना लड़े हम हार गए। इलाका "बफर जोन" हो गया है। सेना पीछे हट गई।
स्मारक तोड़ दिया गया। मेजर शैतान सिंह की हार 60 साल बाद हुई। पर वो यह खबर टीवी पर नही आई।
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फिर एक शख्स ने सवाल पूछा- वो जमीन क्यो छोड़ी गई। जवाब कोर्ट ने दिया।
��हा- तुम सच्चे भारतीय नही हो।
🙏
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उस जज को माफ कर देना शैतान सिंह। वो नही जानता वो क्या कह रहा है।