बढ़िया रहेगा।
3 % ब्राह्मण बच्चों के लिए 3% ब्राह्मण टीचर ही होने चाहिए। ब्राह्मण शिक्षकों का ओवररिप्रजेंटेशन हटाओ।
देश की 90 % से ज़्यादा बहुजनों के लिए बहुजन टीचर हायर शुरू करो।
आगे बढ़ो हम साथ है।
It’s been over 24 hours & ECI has NOT said a single word about where CEC Gyanesh Kumar was registered as a voter during the 2002-03 SIR.
The rules must be the same for everyone.
Why is the ECI silent?
We deserve to know whether Gyanesh Kumar is a citizen of India or not.
सांसद चन्द्रशेखर आजाद के विषय में मैंने पिछले एक वर्ष का पैटर्न नोटिस किया है👇🏻
मैंने देखा है कि जैसे-जैसे समाज का जातिवादी वर्ग चन्द्रशेखर आजाद के खिलाफ खड़ा होता है, चन्द्रशेखर का बहुजन समाज उतना ही तेजी से उनकी ओर बढ़ता है
पिछले एक वर्ष में मुझे लगता है कि चन्द्रशेखर आजाद की लोकप्रियता दोगुनी हो चुकी है। इसका एक बड़ा कारण है उनके खिलाफ विरोधियों द्वारा चलाए जा रहे प्रोपगंडे, जातिवादियों द्वारा दी जा रही मारने की धमकी व अन्य षड्यंत्र
इस स्तर की लोकप्रियता हासिल करने में शायद अभी चन्द्रशेखर आजाद को कुछ समय और लगता, परंतु उनके विरोधियों ने उनका काम और आसान कर दिया। चन्द्रशेखर आजाद विरोधियों के षड्यंत्रों का सीढ़ी के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं...!!
दिल्ली: 33.13 लाख लोगों को अस्पष्ट SIR नोटिस। बंगाल: 37.18 लाख अपीलें लंबित; अब तक निपटी अपीलों में 93% मतदाता सही! आधार मानने और हटे नामों के कारण बताने को भी SC को बार-बार कहना पड़ा। सवाल—मतदाता गलत है या EC का सिस्टम? वोट अभी छीनकर न्याय वर्षों बाद—क्या यही लोकतंत्र है?
अब ठीक है..
हां, अब जरा भरोसेमंद खबर लगी..!
🤷
हमारे यहां जब तक कोई धार्मिक-सामाजिक कांड 100 बार से अधिक रिपीट न हो जाए, खबर विश्वसनीय नहीं लगती. लगता है विपक्ष की चाल है, पाकिस्तान कनेक्शन है या नक्सली घटना बता कर खारिज कर दिया जाता है.
100+ का आंकड़ा भरोसा दिलाता है.
🤦🤣🤣
गली में मुर्गा बेचने वाले गरीब को पिटवाएंगे
लेकिन KFC देश भर में खुलवाएंगे।
KFC ब्रांड पूरे देश को मुर्गा खिलाएगा, गरीब की दुकान से सबका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा।
गाय के नाम पर लिंचिंग भी कराएंगे, देश को सबसे बड़ा बीफ निर्यातक भी बनाएंगे, गाय काटने वाली कंपनियों से करोड़ों का चंदा भी खाएंगे, और चुनावी नारों में धर्म भी बचाएंगे।
यही पाखण्ड RSS का हिंदुत्व है।
🚨 JUST IN : 🇷🇺🇨🇳 Russia has just banned the dollar in energy trade with Europe. All oil and gas deals will now be conducted only in Russian Rubles or Chinese Yuan.
एक विधायक का चुनाव लड़ने पर खर्चा - 2 करोड़
इलेक्शन कमीशन द्वारा तय हुआ खर्चा - 40 लाख
विधायक को सैलरी मिलती है - 2.50 लाख महीना
विधायक को फण्ड मिलता है - 4 करोड़ सालाना
5 साल में उसको कुल पैसा मिला - 21 करोड़ Rs
लेकिन असली ट्विस्ट अब यहीं पर आता है
विधायक फण्ड से मिला 20 करोड़ जनता पर खर्चा करने के लिए मिला होता है
तो उसके पास 5 साल बाद बचा - 2 करोड़ लगभग
लेकिन 5 साल बाद उसके पास बचा - 19 करोड़
ADR रिपोर्ट के अनुसार.
मतलब उसने विधायक फण्ड जनता पर नहीं इस्तेमाल किया, अच्छे स्कूल सड़के नहीं बनवाई.
और वो गलती से अगर मंत्री बन गया होगा तो सोचो कितनी होगी रकम?
भारत में नेताओं की कुल सम्पति को कभी करप्शन नहीं बोला जाता, बल्कि बोला जाता है
चाचा विधायक हैँ हमारे. 😊.
हैँ ना असली घोटाला??
🚨 Breaking: This is the office where Israeli Prime Minister Netanyahu once sat. Today, Iran pelted the office with hypersonic missiles. Clearly, the Israeli Prime Minister's room is no longer safe. Where is the Iron Dome system? Everything has collapsed. Nothing is left! 🚀🔥🇮🇱
दिल्ली में SIR के नाम पर जो तमाशा हो रहा है उसके पीछे चुनाव आयोग की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है।
शुरुआत में इलेक्शन कमीशन ने डंके की चोट पर कहा था कि "एक भी वैध वोटर छूटेगा नहीं और एक भी अवैध वोटर जुड़ेगा नहीं।"
लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि दिल्ली में हर तीसरा वोटर गायब कर दिया गया।
1 करोड़ 45 लाख में से 80 लाख लोगों (यानी 55% आबादी) को सीधा शक के दायरे में खड़ा कर दिया गया है।
चांदनी चौक जैसे पूरे-पूरे बूथ उड़ा दिए गए हैं और गरीबों से झुग्गी में रहकर जमीन की रजिस्ट्री और पानी-बिजली के बिल मांगे जा रहे हैं।
जाने माने अर्थशास्त्री विवेक देवरॉय जो 2 साल पहले दुनिया छोड़ चुके हैं उनको जिंदा वोटर मानकर नोटिस भेज दिया गया।
जब देश के इतने बड़े और जाने-माने विद्वान का डेटा सिस्टम ट्रैक नहीं कर पाया, तो एक आम झुग्गीवासी या मजदूर की क्या औकात रह जाती है?
नियम कहता है कि किसी बूथ पर 2% से ज्यादा वोट कटने पर जांच होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली में 99% बूथों पर 2% से ज्यादा वोटर काटे गए हैं, और कई जगह तो 70% से 87% तक वोटर साफ़ कर दिए गए हैं।
चुनाव आयोग इस पूरे मामले में खुद कटघरे में है और रोज अपने बयान बदल रहा है। आयोग खुद भ्रम में है कि ये नोटिस BLO की रिपोर्ट पर हैं या सिस्टम-जेनरेटेड हैं।
पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी, CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद और अरविंद केजरीवाल जैसे दिग्गजों को भी नोटिस थमाए गए।
फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि VIP लोग अपने रसूख और वकीलों के दम पर चंद घंटों में अपने कागज़ ठीक करवा लेंगे, लेकिन उस गरीब, मजदूर और बेघर इंसान का क्या, जिसके पास न तो छत है और न ही पुराने कागज़ दिखाने की ताकत?
बंगाल वाला भयानक मॉडल अब दिल्ली में भी दोहराया जा रहा है।
📍भारत के किसी प्रधानमंत्री तो छोड़िए दुनिया के किसी देश के मुखिया ने सार्वजनिक मंच से ऐसे अश्लील इशारे नहीं किए जैसे 'माननीय' कर चुके हैं।
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नैतिकता के पैरोकार , शालीनता के झंडाबरदार पिछले बारह सालों से कहां किस गुफा में सो रहे थे?
लंबी चर्चा की एक छोटी सी कतरन।
🙏
@SpecialCoverage
बिल्कुल सही बांगड़बिल्ला तुमने इससे बड़ा नीच और कमीना इंसान मिलना मुश्किल है और सुनें है कि तुम्हारे अब्बा हुजूर का नाम एप्स्टीन फाईल में भी आ गया है 🤣🤣🤣
हिंदुस्तान में Universal Adult Franchise है
• मतलब अगर आप 18 वर्ष के भारत के नागरिक हैं और दिमागी रूप से ठीक हैं, तो आप किस धर्म, जाति, लिंग, प्रदेश के हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता - वोट देना आपका अधिकार है
• लेकिन चुनाव आयोग SIR के नाम पर लगातार लोगों से उनके वोट का अधिकार छीन रहा है. SIR के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अभी तक
13.8 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हुए - जो देश के 94.78 करोड़ वोटरों का करीब 15% है
• पर कमाल तो दिल्ली में हो रहा है जहाँ चुनाव आयोग ने लगभग 1/3 वोटरों के नाम ही काट दिए हैं
• लेकिन यहाँ भी वोटरों में भेदभाव किया जा रहा है - दिल्ली में कुछ VIPs भी SIR की चपेट में आ गए - BJP के लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री जयशंकर, दिल्ली के उपराज्यपाल (LG), बांसुरी स्वराज, अरविंद पनगरिया जैस वीके लोगों को भी SIR का नोटिस दिया गया है
• कमाल की बात यह है कि आम आदमी का तो वोट आँख बंद करके काटा जा रहा है लेकिन चुनाव आयोग ख़ास लोगों के लिए press release जारी कर के “VIP/marked electors” की बात कर रहा है
👉👉इस देश के संविधान में One Person, One Vote का सिद्धांत है - तो VIP वोट कीमती और आम वोट बेकार कैसे हो सकता है?