ये अजमेर दरगाह के कोई सरवर चिश्ती हैं. इनका कहना है कि तालिबान दहशतगर्द थे, हैं और रहेंगे, वे ज़ालिम-जाबिर हैं, इनसे दोस्ती का कोई मतलब नही और मोदी सरकार इनके आगे नतमस्तक है।
ये इनका निजी सोच है लेकिन इन्होंने एक बात कही कि ‘वो दरगाहों, खानकाहों और अल्लाह वालों को नहीं मानते’ तो क्या यही कारण है कि मुख़ालिफत कि जा रही…🤔
अमीर खान मुत्ताकी साहब से मुलाक़ात के बाद मौलाना अरशद मदनी का बड़ा बयान ,
" अफ़ग़ानिस्तान से हमारा रिश्ता इल्मी और सियासी दोनों है , दारुल उलूम देवबंद से इल्म हासिल करके कई उलेमा ने अफ़ग़ानिस्तान मे इसका दर्स दिया "...
#WATCH | Saharanpur, Uttar Pradesh: On Afghanistan Foreign Minister Amir Khan Muttaqi's visit to Darul Uloom Deoband in Saharanpur today, President of the Jamiat Ulama-i-Hind, Maulana Arshad Madani, says, "...We have a scholarly and educational connection with Afghanistan... He has come to see his Madar-e-Ilmi... and after that, he will talk with us."