मृत्यु... एक अटल सत्य है
इसे टालने की बजाय
जीवन को जी लेना चाहिए उतना भरपूर
की मृत्यु
अपनी अहमियत खो दे...
पर मृत्यु
अवश्यभावी है
प्राकृतिक है
बुद्ध तक भी इससे अछूते नहीं रह सकते..
भले टालने के लिए यमराज की उपासना करो या महाकाल की
कोई चालाकी काम नहीं आती
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(ना जाने कल कौन रहेगा
ना रहेगा....
आज ही मौका है
कुछ जरा सवसे
अंतिम विदाई क़ी तरह से
मिल जुल लें...
कल पता नहीं
किस हाल में
किस जगह
मुलाक़ात हो ना हो )
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(इन्हें पता है
पर
सुनने वाले सोचते
हमारे बारे में कहाँ कह रहे??..
ये सबको पहचान रहे..
उम्र नहीं खराब किया,
अनुभव है कुछ..
जैसी महफ़िल, वैसी शायरी
चीन में
कम से कम 200 मंत्री और
अरबपति हैं
जिनकी कोई संतान नहीं
या सिर्फ बेटी है....
उनमें से कम से कम 40%
क्यों चाहते कि
कोई बढ़िया लड़का मिले,
जिसे बेटा कह सकूँ
या बढ़िया घर जमाई..
(पर एक बात और भी है भाई, सावधान रहना जरा
सुना है कि चीनी लड़की
बहुत मारती है..)
आश्चर्यजनक आंकड़े आ रहे हैं
"कुल आबादी में से
25000
25000!
ऐसे माँ बाप हैं
जो एक आशा में जी रहे
कि उनके बच्चे को कोई
अपना लेगा!?.
25000!..
जबकि उन्हें यह नहीं पता
कि लोग
ज्यादा करके
अधिकारी व जज क़े बच्चे
ज्यादा पसंद करते हैँ
जिनकी भी संख्या
कुछ तो होगी ही!
प्रश्न - क़्या अपनी संतान, दूसरे की
में भेद है?
उत्तर - नहीं है??
Hahah.. क़्या बात करता है?
अपनी तुम अपने लौड़े से
और बीबी क़े पेट से
निकालते हो
दूसरे जे लौड़े
या दूसरे क़ी बीबी क़े पेट से
निकला हुआ
तुम्हारी संतान कैसे?
किस कायदे से?...
जाता अमुक बाबू... आपने बहुत कमाया होगा या होगा आपके पास. पर अक्ल नाम क़ी चीज नहीं। चले हैं सबकुछ पैसवे से तौलने?..
बल्कि ये ना कहकर
कई तो
धन्यवाद देने वाले आत्माभिमान से रहित
धूल धूसरित माँ बाप भी हैं
दुआएं करते हैं
ले जाता कोई!
तो जन्म किसलिए दिया था ज़ब औकात ना थी रखने की?
तो आपका बच्चा कैसे है??
आपका जो है, जितना है
उतना ही बोलें, दिखाएँ
हर किसी क़े बच्चे और बीबी को अपना ना कहें.....
मन हो तो और ज्यादा जन्मा लें,
कोई रोक टोक तो है नहीं..
भावनाओं क़े साथ खिलवाड़ क्यों?
कई ऐसे भी मूर्ख हैं जो जवाब ये तक नहीं दे पाते कि सबकुछ पैसा नहीं हो
कड़े शब्दों में विरोध करें
मानवीय भावनाओं क़े साथ खिलवाड़ करने वाले चालाक ज्यादा बने हुए लोगों को
जबतक कड़ा जवाब देना नहीं सीखेंगे, खुद को आप बुद्धू बनते ही देखने को बाध्य होंगे और वो आपको मात देकर हुशियार!
सीधा कहें, क़्या ये वो, या अमुक
आपके लिंग से पैदा हुआ है?
यदि नहीं
अपने पैसे का बड़ा उसे नाज था। लग रहा था कि दौड़ा दौड़ा सब दे देंगे!.. घर जमाई.....
पर, अंततः पिता को कहना पड़ा
अब आप हमारे द्वार पर आये हैं
खाना पीना खाकर जाएँ
हमें और कड़ा होकर कहने क़े लिए
मजबूर ना करें।
यानि वो इतना जबरदस्त जिद ले बैठा, कि उसे नाज है!.. दे ही देगा!.दौड़कर
कह दीजिए, अभी का अभी निकले। अब हम इसके लिए खाना भी नहीं बनाएंगे।
पिता ने कहा, धीरे बोलो..
हम समझाकर कह देंगे
माँ ने जैसे ही हमें देखा
छाती से चिपटा लिया
जैसे कि मर रहा हूँ
या सदा क़े लिए जा रहा हूँ!....
पिता ने कह दिया,
माँ एकदम नाराज हो गयी है.
वो फिर भी बेशर्म, अपने
औपचारिकता वश. काफ़ी सारे प्लान थे उसके पास। कैसे मैं उसके खेत का भी देख लूंगा सारा माल, कैसे अमुक अमुक चीज का.. शरीफ जानकर पीछे पड़ गया... हम 4 भाई, समान्य परिवार..
पिता ने तो माँ से एक बार पूछ भी लिया, शायद मन टटोलने क़े लिए ही..
माँ चाय पिलाने क़े बाद खाना बना रही थी..
कही,
किसी झांसे में मत पड़ना
यदि ऐसा रहता
तो वे क़्या
गलत काम करके जी रहे होते??
वे खुद को मजबूर पा रहे
गलत काम करने को
तभी करते
तप कितने मजबूर हैं वे?
बस देखो
जेल जाने का भी एक अलग खतरा ढ़ोते
जन मानस से पिटने का भी
जलसाजी क़ी सजा!
For Friends
Who are not in
Hollow run
Not in the que of
Exhastion & empty handedness
I am with whom who are honests,have some meanings
In life & will be available for life, not much concerned with others,either they will become available or not,
But doing well for himself
जाने मत दो। नेगेटिव ऊर्जा..
बच्चे बीमार पड़ेंगे
या
कुछ ना कुछ छाप
उनका पड़ सकता है..
वे बेचारे जबरदस्ती जीवन ढो रहे
ना कोई उमंग है
ना कोई तरंग है
जिंदगी है क़्या
कटी पतंग है
ऐसे लोगों का जीवन ऐसे ही होगा ना..
ईमानदारी कहाँ?
कहेंगे भी झूठ में उड़ता पतंग जीवन. Hhh
उन्हें मत देखो
जिनके साथ
बुरा होने जा रहा या
हो रहा
पर वे जबरदस्ती कहते
भला और अच्छा हो रहा
और होगा..
उन्हें छोड़ दो..
अंततः वे ....
मल हैं, मल ही होकर रहेंगे
चाहे इसमें उनका साथ कोई भी दे
अपने मतलब से
पर कुत्ता कुत्ता ही रहेगा..
उन सबक़े आसपास बच्चों को