बिहार के चर्चित डायरेक्टर प्रकाश झा ने बोला बहुत बड़ी गलती हो गई नेहरू जी से।😱
उन्होंने बोला उनको IAS,IPS से पहले बच्चों को ITS बनाना चाहिए था।
सच में कमाल की सोच है ITS 🔥
Mountains can't be recreated. They are formed millions of years ago, they moderate weather and climate, absorbs tons of carbon and other pollutants, a habitat for other species.
Destroying mountains for economy reason is destruction of safe future😢
Some Gujarati kids from Surat have made this beautiful video... and it’s so true..
(P.S. – Not all people from Maharashtra, Tamil Nadu, etc., are bad language fanatics. This is for those who are suffering from an identity crisis and show their stupidity by engaging in violence)
A thousand years ago, when Mahmud of Ghazni invaded India, he destroyed the Somnath temple on his 18th attack. Some priests then took the broken pieces of the Shiva Linga with them.
One such family sculpted those pieces into a Shiva Linga and worshipped them across several generations. In 1924, the then Shankaracharya instructed the family to keep it hidden for 100 years, and continue to worship it. Now the Shankaracharya guided the family to bring it here to Bengaluru!
#somnath #shiva #history #incredibleindia
🚨 Indian Hotels Company (IHCL) is developing two Taj branded resorts on the islands of Suheli and Kadmat in Lakshadweep. Slated to open in 2026 !
Suheli project = 110 rooms (50 water villas, 60 beach villas)
Kadmat project = 110 rooms (35 water villas, 75 beach villas)
It's not know in which period this Murti was made, But whenever the Aarti passes near the Face of Krishna Ji, Bhagwan Krishna is seen Smiling.....😍
Hare Krishna ....!!
बाज लगभग 70 वर्ष जीता है, परन्तु अपने जीवन के 40 वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है।
उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं...
1. पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है व शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं।
2. चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है और भोजन निकालने में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है।
3. पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूरे खुल नहीं पाते हैं, उड़ानें सीमित कर देते हैं।
भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना और भोजन खाना... तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं।
तब उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं, या तो देह त्याग दे, या अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे... या फिर स्वयं को पुनर्स्थापित करे, आकाश के निर्द्वन्द्व एकाधिपति के रूप में।
जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं, वहीं तीसरा अत्यन्त पीड़ादायी और लम्बा।
बाज पीड़ा चुनता है और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है।
वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है, और तब प्रारम्भ करता है पूरी प्रक्रिया।
सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है..! अपनी चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं पक्षीराज के लिये। तब वह प्रतीक्षा करता है चोंच के पुनः उग आने की।
उसके बाद वह अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है और प्रतीक्षा करता है पंजों के पुनः उग आने की। नये चोंच और पंजे आने के बाद वह अपने भारी पंखों को एक एक कर नोंच कर निकालता है और प्रतीक्षा करता पंखों के पुनः उग आने की।
150 दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा... और तब उसे मिलती है वही भव्य और ऊँची उड़ान, पहले जैसी नयी!
इस पुनर्स्थापना के बाद वह 30 साल और जीता है, ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ।
प्रकृति हमें सिखाने बैठी है; पंजे पकड़ के प्रतीक हैं, चोंच सक्रियता की और पंख कल्पना को स्थापित करते हैं।
इच्छा परिस्थितियों पर नियन्त्रण बनाये रखने की, सक्रियता स्वयं के अस्तित्व की गरिमा बनाये रखने की, कल्पना जीवन में कुछ नयापन बनाये रखने की।
इच्छा, सक्रियता और कल्पना... तीनों के तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं... हममें भी चालीस तक आते आते।
हमारा व्यक्तित्व ही ढीला पड़ने लगता है, अर्धजीवन में ही जीवन समाप्तप्राय सा लगने लगता है, उत्साह, आकांक्षा, ऊर्जा... अधोगामी हो जाते हैं।
हमारे पास भी कई विकल्प होते हैं; कुछ सरल और त्वरित, कुछ पीड़ादायी...!
हमें भी अपने जीवन के विवशता भरे अतिलचीलेपन को त्याग कर नियन्त्रण दिखाना होगा, बाज के पंजों की तरह।
हमें भी आलस्य उत्पन्न करने वाली वक्र मानसिकता को त्याग कर ऊर्जस्वित सक्रियता दिखानी होगी, "बाज की चोंच की तरह।"
हमें भी भूतकाल में जकड़े अस्तित्व के भारीपन को त्याग कर कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी, "बाज के पंखों की तरह।"
महीनों साल न सही, तो एक माह ही बिताया जाये, स्वयं को पुनर्स्थापित करने में। जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने और नोंचने में पीड़ा तो होगी ही, बाज तब उड़ानें भरने को तैयार होंगे,
इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी, अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी...! जीत तक जंग जारी रहेगी!!
#साभार
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