जंतर मंतर पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा महिलाओं से दुर्व्यवहार का वाइरल सीसीटीवी फ़ुटेज असल में AI द्वारा बनाया गया था
बनाने वाला हरियाणा का यूट्यूबर नदीम अहमद गिरफ्तार, नदीम दसवीं पास है और खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताता है
देवी-देवताओं के अपमान पर पुलिस को शिकायत की प्रतीक्षा नहीं करना है बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज करना है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है
Supreme Court of India
Order Date: 28.04.2023
Case No: WP(C) 943/2021
Ashwini Upadhyay vs. UOI
@HMOIndia@AmitShah@PMOIndia@narendramodi
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अब सूना लगता गगन नहीं
सब जगह हरि ही दिखता है
ऐसा लगता है साँस साँस
में आकर मुझसे मिलता है
रोमांचित होता रोम-रोम
चेतन लगता संपूर्ण व्योम
चैतन्यं शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
28.04.2023 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि
देवी-देवताओं के अपमान के मामले में पुलिस किसी के शिकायत की प्रतीक्षा नहीं करेगी बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर FIR करेगी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है
WP(C) 943/2021
200
हर पल अमृत रस झरता है
सब व्याधि विदा हुई तन से
ऐसी निर्मलता उतरी है
सब काम क्रोध भागा मन से
लोरी गा हरि सुलाता है
फिर आकर हमें जगाता है
अथ अमृत शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
समाचार आ रहा है कि, स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी हो गई है। जिस तरह का बड़बोलापन उसने दिखाया था, यह स्वाभाविक था, लेकिन संजय आज़ाद और उसकी बेटी जो बड़बोलापन कर रहे हैं, उससे समाज को कोई खतरा है या नहीं? या एकपक्षीय ही चलेगा?
मैं इंदिरा गांधी जी से 1977 में मिला था। वे एक महान नेता थीं और भारतीय संतों और संस्कृति का सम्मान करती थीं। मगर ये पप्पू? मनुस्मृति जलाने का क्या मतलब? मूर्खता, पागलपन, विषादरोग, उन्माद या सनातन द्रोह? यह खुद तो डूबेगा ही, काँग्रेस को भी ले डूबेगा ।
‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ॥ ३.५६ ॥’
अर्थ:
जहाँ नारियों का सम्मान किया जाता है, वहाँ देवता प्रसन्न होते हैं। और जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ किए गए सभी धार्मिक/पवित्र कर्म निष्फल हो जाते हैं।
—मनुस्मृति, तृतीय अध्याय, श्लोक 56 (मनुस्मृति 3.56)
राहुल गांधी ने हाल में मनुस्मृति को स्त्री-विरोधी बताते हुए उसे जलाने का अभियान चलाया है।
सबसे अधिक उद्धृत श्लोक ये हैं:
1. मनुस्मृति 9.3
पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने।
रक्षन्ति स्थविरे पुत्रा न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति॥
अर्थात—बचपन में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में पुत्र स्त्री की रक्षा/देखभाल करते हैं; स्त्री स्वतंत्रता की अधिकारी नहीं है।
आज के लोकतांत्रिक और लैंगिक समानता के दृष्टिकोण से यह पंक्ति निश्चित रूप से स्त्री की स्वायत्तता को नकारने वाली प्रतीत होती है।
2. मनुस्मृति 9.2
इसमें कहा गया है कि स्त्रियों को परिवार के पुरुषों के अधीन/नियंत्रण में रखा जाना चाहिए।
3. मनुस्मृति 5.148
इसमें भी लगभग यही विचार है कि बाल्यावस्था में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्रों के अधीन स्त्री रहे और स्वतंत्र न हो।
लेकिन एक महत्वपूर्ण दूसरा पक्ष भी है। मनुस्मृति में स्त्रियों के सम्मान की प्रशंसा करने वाले श्लोक भी हैं—
‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ॥ ३.५६ ॥’
अर्थ:
जहाँ नारियों का सम्मान किया जाता है, वहाँ देवता प्रसन्न होते हैं। और जहाँ उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ किए गए सभी धार्मिक/पवित्र कर्म निष्फल हो जाते हैं।
—मनुस्मृति, तृतीय अध्याय, श्लोक 56 (मनुस्मृति 3.56)
इसलिए पूरी मनुस्मृति को ‘स्त्री-विरोधी” कह देना सरासर ग़लत है। कुछ विद्वान 9.3 में ‘रक्षति’ का अर्थ ‘सुरक्षा/देखभाल’ मानते हैं और इसका संदर्भ उस समय की सामाजिक व्यवस्था बताते हैं।
इसलिए निष्पक्ष निष्कर्ष यह होगा:
मनुस्मृति में स्त्री के सम्मान के साथ-साथ ऐसे स्पष्ट प्रावधान भी हैं जो आधुनिक अर्थ में स्त्री की स्वतंत्रता और स्वायत्तता को सीमित करते हैं। राहुल गांधी मुख्यतः इन्हीं प्रावधानों को आधार बनाकर मनुस्मृति का विरोध करते हैं।
सभी धर्मग्रंथों में ऐसी कुछ बातें हैं, जो आज उतने संगत नहीं हैं, जैसे क़ुरान, हदीस आदि।
यदि हिम्मत है, तो इनको भी जलाकर देखिए । उन्हीं धर्म ग्रंथों के आदेशानुसार आपका सर तन से जुदा कर दिया जाएगा ।
राहुल जी, सनातन धर्म की सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठाकर अपनी राजनीति की रोटी पत सेंकिये । इसी में आपकी, आपकी पार्टी की और देश की भलाई है ।
#जयभारत
@AshwiniUpadhyay@PMOIndia@narendramodi आखिर कब ऐसे ज़ुल्मो से राहत मिलेगी बेकसूर लोगों को । सच बात तो ये है कि अविलंब ऐसे झूठी शिकायत दिखाने वालों को जेल भेजने का कानून बनाना चाहिए
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गीतामत गुरुमत सूफीमत
या कहो संतमत भक्ति योग
जब सिद्धयोग जुड़ जाता है
तब कहलाता है सहजयोग
है सहजयोग ही पूर्ण योग
जो ले जाता बैकुंठ लोक
बैकुंठं शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
Count your blessings. इतना कुछ जीवन में मिला है। अगर लिस्ट बनाओगे तो लिस्ट रोज लंबी होती चली जाएगी। जीवन में कितना कुछ परमात्मा ने हमको दिया है, तो सबके लिए धन्यवाद। इसकी लिस्ट बनाओ और रोज उस लिस्ट में add करते जाओ।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🌹
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आती साँसों में उत्सव हो
गोविंद मिलन का भक्ति योग
जाती साँसें आनंद भजें
छोड़ो माया रस विषय भोग
समस्वरता जब सध जाती है
कुंडलिनी खुद जग जाती है
आनंदं शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
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जिसने भी जाना ज्ञान योग
कामना मुक्त वह हो जाता
और जिसने जाना सिद्ध योग
वह रोग मुक्त है हो जाता
जुड़ जाता भक्ति कर्मयोग
सब जुड़कर बनता सहज योग
अथ सहजं शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
कोई सर झुकाकर बंदगी करता है, कोई ऊपर आकाश को देख कर बंदगी करता है। कोई हाथ मिलाकर एहतराम करता है, कोई दंडवत कर इबादत करता है। असल बात तो इबादत है, बंदगी है, एहतराम है। फिर #वंदेमातरम् पर हंगामा क्यों?
सूफी बाबा शाह कलंदर कहते थे-‘तौहीद (अद्वैत) सबसे बड़ा दीन (धर्म) है और वतन परस्ती (देश भक्ति) सबसे बड़ा ईमान (श्रद्धा) है।
रिपोर्टर: आप लातूर में क्या कर रहे हैं?
अभिजीत: मैं लातूर में बीजेपी सरकार के अधीन सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने आया हूँ!
रिपोर्टर: क्या आपको पता है कि पिछले 30 साल से लातूर के विधायक कौन हैं?
अभिजीत: नहीं, जरूर बीजेपी से कोई होगा!
रिपोर्टर: नहीं साहब! लातूर पर कांग्रेस के देशमुख परिवार का शासन रहा है!
अभिजीत: लेकिन सांसद भी तो काम कर सकता है!
रिपोर्टर: लातूर के सांसद भी कांग्रेस से ही हैं!
अभिजीत: तो क्या हुआ! ये तो गांव के स्कूल हैं! यहां के मेयर और प्रधान को स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं पर काम करना चाहिए था!
रिपोर्टर: मेयर और प्रधान—दोनों कांग्रेस से हैं, साहब!
अभिजीत: देखिए! मैं यहां बीजेपी या कांग्रेस करने नहीं आया हूँ। मैं सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने आया हूँ! कृपया मेरा समय बर्बाद मत कीजिए!
रिपोर्टर: लेकिन आप तो बीजेपी को बेनकाब करने आए थे! क्या आप देशमुख परिवार के खिलाफ भी बोलेंगे?
अभिजीत: मेरा समय बर्बाद मत कीजिए! आप गोदी मीडिया हैं!