जोधपुर एम्स में प्रथम वर्ष के PG रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राज नरेश यादव जी की आत्महत्या ने देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्यस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उनके साथियों के अनुसार, डेंगू से पीड़ित होने के बाद उन्होंने छुट्टी मांगी थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद भी उनसे लगातार 36 घंटे तक ड्यूटी कराई गई। लंबे कार्य घंटे, अत्यधिक कार्यभार और पर्याप्त मानव संसाधन का अभाव डॉक्टरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। इन्हीं समस्याओं को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं और कार्यस्थितियों में सुधार की मांग कर रहे हैं।
जो डॉक्टर दिन-रात मरीजों की जान बचाने में जुटे हैं, उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और मानवीय कार्य वातावरण सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यह पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
@MoHFW_INDIA और संस्थान प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रेजिडेंट डॉक्टरों से तय मानकों के अनुरूप ड्यूटी ली जाए, पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता हो, कार्यभार का संतुलित वितरण हो और उन्हें पर्याप्त आराम तथा आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिले।
डॉ. राज नरेश यादव जी की आत्महत्या की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा यह भी तय किया जाए कि संस्थान में ऐसी कार्यस्थितियां क्यों बनीं और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
डॉ. राज नरेश यादव जी के परिजनों के साथ हमारी गहरी संवेदनाएँ हैं। प्रकृति शोक संतप्त परिवार, परिजनों एवं उनके सहकर्मियों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@mygovindia@JPNadda@aiims_jodhpur
🚨 Heart attack in eyes story.
PhD. 20 years university professor.
Still selling Class 6 kitchen fear and temple scare like it happened yesterday.
Ambedkar photo behind her. Quote on screen: kill the caste monster.
Then she begs the same monster for lifetime quota.
“By Varna I should be Acharya.” Worth is useful when it upgrades her. Birth is sacred when it keeps the seat.
Street is full of jobless PhDs. Her real qualification is the caste paper.
Without it she is another unemployed scholar. With it she is “representation” and “self-respect.”
Representation already happened. Now she wants it as family property.
Intelligence didn’t give her the chair. Jaati did.
That’s why the victim story never expires.
इस देश में होता वही है जो भाजपा चाहती हैं
आज मन थोड़ा मायूस हैं
धनबल बाहुबल और सत्ता के प्रभाव के सामने एक गरीब किसान का बेटा एक मजदूर का बेटा चुनाव हार गया. 💔😥
विजय शंकर मीणा दिल्ली विश्वविद्यालय
#DUSU#NSUI
China has approved and issued the country's third medical-device standard for brain-computer interfaces (BCIs), which is also the world's first such standard for BCI medical devices using artificial intelligence (AI) to process electroencephalogram (EEG) data. https://t.co/d3umC6o9CF
हम समय पर टैक्स देते हैं ताकि मेरे नेताओं अधिकारियो का घर मकान दुकान धंधा खूब चले उनका बैंक बैलेंस बढ़े बच्चे विदेशों में पढ़े बिना योग्यता के नौकरी करे मंत्री सचिव बने हम तो मुर्ख है चुनावों में थोड़े से रुपये के लालच में क़ीमती वोट चोर लुटेरे को दे देते उसके नतीजे आज देख रहे हैं
This is a primary school in Noida, a city supposed to be one of the most prosperous in entire UP.
Sincere appeal to our UP politicians—stop the Hindu-Muslim politics. FIX OUR GOVT SCHOOLS!
@Cockroachisback
जो लोग भगवा एंगल और मुख्यमंत्री की गरिमा का पाठ पढ़ा रहे हैं,
वो सुन लें विरोध करने के लिए जिगरा चाहिए,
नेहा यूपी के किसी कोने में छिपकर नहीं,
सीधे गोरखपुर की सीमा में घुसकर दहाड़ी है।
खौफ के साम्राज्य को आईना दिखाना हर किसी के बस की बात नहीं,
नेहा असली शेरनी है!
"मैं ब्राम्हण हूँ, मेरा दोस्त SC समुदाय से है। हम जयपुर में जब भी रूम लेने जाते है तब मुझे खुद की जाति बतानी पड़ती है और दोस्त को भाई बोलकर परिचय देना पड़ता है क्योंकि अगर दोस्त की जाति बताऊंगा तो कोई रूम नही देगा। तो आरक्षण हटाने की बात मैं कैसे करू?"
-समझदार ब्राम्हण युवक
बात तो ऐसे कर रहा जैसे प्रधानमंत्री ने व्हाट्स एप किया हो। अब मोदी जी पर निर्भर करता है कि वे स्वतंत्र का कितना साथ देते हैं। इसी से पता चल जाएगा कि तीन बार के प्रधानमंत्री के पास कैसे लोग हैं। प्रधानमंत्री की ये हालत हो गई है कि वो ऐसे लोगों के साथ खड़े रहें तो उससे अच्छा है ये कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। जिस कुर्सी पर बैठ कर आप वैज्ञानिक से लेकर समाजसेवी, उद्योगपति से लेकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ता की सोहबत पा सकते हैं अगर स्वतंत्र की सोहबत उनके लिए, गृहमंत्री के लिए, चिराग़ पासवान के लिए ज़रूरी बन जाए तो सबको अपना पद छोड़ देना चाहिए। संसद मार्ग थाने का नाम स्वतंत्र भारद्वाज थाना होना चाहिए। दिल्ली पुलिस का नाम स्वतंत्र भारद्वाज पुलिस होना चाहिए।
जंतर मंतर प्रदर्शन में गंभीर जुर्मों के 25 आरोपी जेल से वहाँ कैसे पहुंच गए?
क्या चेहरा पहचानने वाला दिल्ली पुलिस का software गड़बड़ है, जबकि उसका इस्तेमाल हर जगह हो रहा है?
या जघन्य अपराधियों और गुंडों को जानबूझकर प्रदर्शन स्थल पर अराजकता और हिंसा फैलाने के लिए लाया गया?
ये किसका पैसा है, कहाँ से आता है, कहाँ जाता है... लोग तो 70 साल का हिंसाब मांगते है.. इनलोगों का कौन देगा.. चौतरफ़ा लूट मची है बस जनता परेशान है बांकी फुल मौज है
उत्तरप्रदेश में जंगल राज क़ायम है "दलित नाबालिग को दबंगों ने अगवा कर आरोपी रेप करते रहे, पिता रात भर थाने के लगाता रहा चक्कर, सुनवाई न होने से आहत पिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या की"
यूपी में पीलीभीत के अमरिया में खेत से घर पानी लेने गई नाबालिग को अगवा कर ले गए।यूपी पुलिस सम्बन्धित अधिकारी को भी बर्खास्त करे।परिवार को न्याय दे।@CMOfficeUP@PMOIndia