बिहार में नेताओं की अय्याशी चल रही है, उन्हें
लड़कियां सप्लाई की जा रही हैं 😡
बिहार सरकार और चुनाव आयोग आँखें मूंदे हुए है!
महोदय @ECISVEEP@dm_patna@bihar_police कृपया संज्ञान लें,मामला गंभीर है।
तूफानी बारिश।
वोट चोरी हेडक्वार्टर की लाइट्स झपझपा रही हैं। मुचुचो (मुख्य चुनाव चोर) ज्ञानू गधेश ऑफिस बन्द कर, अपनी स्कूटर पर जा रहे हैं।
कहीं दूर रेडियो पर "नैना बरसे रिमझिम..." बजता है।
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ज्ञानू (खुद से): - "ये बारिश... ये सन्नाटा... जैसे कोई EVM मुझे बुला रहा हो।" तभी सड़क पर अचानक एक सफेद साड़ी वाली सुंदरी हाथ हिलाती है। ज्ञानू ब्रेक लगाते हैं।
- सुंदरी (धीमी, खरखराती आवाज):- "ज्ञानू साहब... मुझे पोलिंग बूथ तक छोड़ देंगे?"
- "पोलिंग बूथ? इस वक्त? वोटिंग तो खत्म हो गई!"
- हमारा वोट पोलिंग के बाद ही पड़ता है। हिहिहि
सुंदरी स्कूटर पर बैठती है। उसका चेहरा आधा दिखता है।
ठंडी हवा चल रही है।
बाला: "मेरा नाम... स्वीटी ब्राजीलियन है।"
पोलिंग बूथ पहुंचते ही वो गेट खोलकर गायब हो जाती है। ज्ञानू चिल्लाते हैं – "सुइटी जी ! रुकिए!"
मगर सिर्फ गूंजता है "नैना बरसे..."
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सीन 2 – वोट चोरी ऑफिस
ज्ञानू पुराने चुनाव के सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने में व्यस्त रहा है। तभी एक "मतदाता" आता है – वही चेहरा! स्वीटी ब्राजीलियन
स्वीटी (मुस्कुराते हुए)- "गधेश साहब, सिर्फ 15 वोट डाल पाई। लेकिन मेरी आत्मा को चैन नही। हर रात सपने में कोई EVM मुझे बुलाती है।"
ज्ञानू (पसीना छूटता है): "तुम... तुम वो ही हो ना? उस रात, जिसे मैंने पोलिंग बूथ में छोड़ा था?"
स्वीटी (हंसकर): "क्या कह रहे हैं आप? मैं तो पहली बार मिल रही हूँ।"
अचानक फोन बजता है। खबर ये कि बस एक्सीडेंट में स्वीटी ब्राजीलियन नाम की लड़की मर गई। ज्ञानू दौड़कर मोर्चरी जाते हैं – लाश का चेहरा ढका है।
जब उठाते हैं – वही चेहरा!
ज्ञानू (चिल्लाते हुए): नहीं sssss"ये मुमकिन नहीं! ये तो अभी मेरे साथ थी।
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सीन 3 – पुरानी हवेली (EVM का गोदाम)
ज्ञानू की मां उसकी शादी तय करती हैं। दुल्हन का नाम: स्वीटी ब्राजीलियन है। बारात आती है। घूंघट उठता है – वही चेहरा!
ज्ञानू (पीछे हटते हुए): तुम,? ये नही हो सकता। तुम तो स्वीटी ब्राजीलियन हो
बाला (शांत स्वर में): नही। मैं आपकी पत्नी हूँ। मेरा नाम है सीमा हरयाणवी..
ज्ञानू भौचक रह जाता है। वह उससे कागज़ मांगता है। सीमा आधार दिखाती है। लेकिन आधार तो मान्य है ही नही.. वह उससे उसके बाप का बर्थ सर्टिफिकेट मांगता है। सीमा उसे खींचकर एक तमाचा जड़ती है।
वेरिफिकेशन हो जाता है।
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अब रात को ज्ञानू तमाचे वाले गाल में तेल लगा रहा था कि आवाज आती है –
"चल फिर वोट डालें, कि फिर ये हसीं पोल हो न हो..." वह भागता है। एक कमरे से दूसरा कमरा। चोरी की EVM के ऊपर, फर्जी वोटर रोल्स के पीछे, छुपाए गए 17C के बीच से कैमरा दिखाता है- गोदाम में सीमा हरयाणवी EVM लेकर साथ नाच रही है।
वह भागता है, बैडरूम में झांकता है।
तो वहां वो सो भी रही है!
ज्ञानू (पागलों की तरह): "एक साथ दो जगह?
ये कौन है? वो कौन थी?
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"क्लाइमेक्स –
बैगा राहुल को बुलाया जाता है।
वो ज्ञानू के पुराने पापों का रजिस्टर खोज निकालते हैं। उसमे तमाम मरे खपे लोगो के नाम, जिंदा बताकर लिखे हैं। उसके बदले तमाम जिंदो को मारकर हिसाव बराबर कर दिया गया है।
इस रजिस्टर में राहुल को सवूत मिल जाते हैं। स्वीटी ब्राजियलियन की एक जुड़वां बहन थी – बिहारी बहना। वो पुल गिरने से हुए हादसे में मर गई थी।
लेकिन ब्राजियलियन बाला को लगता है बिहारी बहना का वोट उसे सताता है।राहुल तह तक पहुँच चुके हैं। यहां एक्टर, डायरेक्टर, राइटर, फाइनैंसर, डिस्ट्रीब्यूटर और दर्शक सबका दोगला चरित्र खुल रहा है।
राज खुलते ही सीमा हरयाणवी उर्फ स्वीटी ब्राजियलियन उर्फ बिहारी बहना माफी मांगने लगती है। रोते हुए- "मुझे माफ़ कर दो। मेरी बहन मुझसे वोट मांगती थी... लेकिन मैंने उसकी EVM चुरा ली। अब वो मुझे माफ नहीं करती।"
ज्ञानू, सीमा हरयाणवी को माफ कर देते हैं। उसे गले से लगाते हैं। अचानक बिजली चली जाती है। आंटी की आत्मा EVM लेकर मुस्कुराकर गायब हो जाती है।)
ज्ञानू (बाला से): "अब डर नहीं। वो चली गई।"
बाला: "नहीं... वो मेरे अंदर थी। मैं ही आंटी थी... और बाला भी। हिहिहोहोहाहा
ज्ञानू की आंखे फटी रह जाती है।।
स्क्रीन पर लिखा आता है: "वो कौन थी?
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शायद हम सबके भीतर एक सीमा हरयाणवी है, और स्वीटी ब्राजीलियन। फ़िल्म का संदेश यही है, की इस सबके दोषी हम है। क्योकि मोदी जी तो दोषी हो नही सकते।
EVM की लॉन्ग बीप मद्धिम होती जाती है।
फ़िल्म खत्म होती है।
द इण्ड!!!
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और फिर एक पॉप अप स्क्रीन पर उभरता है।
दिस मूवी इज ब्रॉट टू यू बाय
"मोडानी इंटरप्राइजेज"
❤️
पैसे कमाने हों तो - ‘अली दा पहला नम्बर’ गाएँगे !
राजनीति करनी हो तो - ‘अलीनगर’ का नाम बदल कर ‘आदर्शनगर’, ‘मैथिली नगर’, ‘जानकी नगर’ कर जाएँगे !
इसीलिए संघी / भाजपायी ‘दोगले’ कहलाएँगे !
“राजीव गांधी एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 400 से अधिक सीटें जीती थीं”🚨
और कुछ लोगों ने सारे हथकंडे अपना लिये, ED से लेकर CBI तक, चुनाव आयोग से लेकर पुलिस तक, सब कुछ खरीद लिया,
फिर भी “अबकी बार 400 पार” वाला सपना, सपना ही रह गया 🤣
यही लोग आज राजीव गांधी पर सवाल उठा रहे हैं.
थोड़ी बहुत शर्म बची है या नहीं…?
मोदी जी : मोदी जी को जानते हो तुम लोग ?
बच्चा : मैने आप की वीडियो टीवी में देखी है....
मोदी जी : कहां देखा था?
बच्चा : टीवी में
मोदी जी : क्या करता था मैं टीवी में
बच्चा : वोट चोरी
बच्चे मन के सच्चे 😅
तहसीलदार हृदय राम तिवारी ने दस्खत किया है कि,, अंशुमान मिश्रा के पिता की आय ₹8.75 प्रति माह है और वार्षिक ₹105 है !
पूरे उत्तर प्रदेश में EWS के नाम पर नौकरियां लूटाई जा रही हैं और EWS के नाम पर बड़ी-बड़ी नौकरियों में घोटाले भी हो रहे हैं
"₹500 में झलक, ₹50000 में भगवान से हाथ मिलाओ।"
प्रिय देवस्थान,
तुम्हारे दरवाज़े पर खड़ा हूँ, नंगे पाँव, भीगी आँखों और मन में एक भारी-सी थकान लिए। पर मुझे मालूम है, मेरा आना बेमानी है।
क्योंकि तुम्हारे दरवाज़े अब किसी सादा-से भक्त के लिए नहीं खुलते,
अब वहाँ रस्सियाँ लगी हैं, बैरिकेड्स हैं, और सबसे ज़्यादा - सूचियाँ हैं।
तुम्हारे दर्शन अब भगवान की कृपा से नहीं, पास से मिलते हैं।
तुम्हारे गर्भगृह की गंध अब चंदन की नहीं, पॉलिटिकल कनेक्शन की है।
अब वहां भक्त नहीं, संपर्क सूत्र पहुँचते हैं - मंत्री, अभिनेता, उद्योगपति, चाटुकार और सोशल मीडिया स्टार।
एक समय था, जब लोग नंगे पाँव मीलों चलते थे। आज वीआईपी लोग एयरपोर्ट से सीधे हेलीकॉप्टर में चढ़कर भगवान को उनकी ड्यूटी याद दिलाने आते हैं। हमारे लिए - लाइन। उनके लिए - लाल कारपेट।
हमारे लिए - बैरिकेड के पीछे से घूंघटवाले दर्शन।उनके लिए - आरती थाली में नाम लेकर वीआईपी पूजा।
क्या सचमुच भगवान इतने भ्रष्ट हो गए हैं? या तुमने उन्हें भी डिपार्टमेंटलाइज कर दिया है? ईश्वर को अब धंधा दिए गए हैं। किसी होटल की तरह “पैकेज” बुक करो, ₹500 में लाइन में खड़े रहो। ₹5000 में आरती में बैठो। ₹50000 में भगवान को भी उठाकर तुमसे हाथ मिलवाया जाएगा। क्या यही है भक्ति? या ये कॉर्पोरेट लूट का नया संस्करण है?
मुझे बताओ, क्या भगवान भी अब पहचान पत्र मांगते हैं? क्या वो भी पूछते हैं - “आप किस विधायक के आदमी हैं?”
मुझे बताओ, क्या श्रद्धा अब श्रेणियों में बंटी जाती है? क्या धर्म भी अब डोनेशन स्लैब से चलता है?
शायद तुम भूल चुके हो - कि मंदिर वो जगह थी, जहाँ सब बराबर खड़े होते थे। जहाँ राजा और रंक दोनों एक ही धूल में माथा टेकते थे।
पर अब तो मंदिर भी संसद की तरह हो गए हैं - जहाँ आम आदमी को कोरिडोर में इंतज़ार करना पड़ता है, और वीआईपी सीधा भगवान के कान में इच्छा फूँककर चला जाता है।
और तुम, जो इन मंदिरों के प्रबंधक हो, तुम्हारी आत्मा किस कूड़ेदान में पड़ी है? क्या धर्म तुम्हारे लिए सिर्फ एक रसीद बुक है? क्या तुमने कभी सोचा - कि जिस आम भक्त ने अपनी मज़दूरी का आखिरी सिक्का चढ़ाया, उसे तुमने सिर्फ इसलिए नहीं घुसने दिया क्योंकि उसके पास कोई सिफारिश नहीं थी? कहते हैं - “ईश्वर सबका होता है।” पर आज के मंदिर में ईश्वर भी ब्रांड अंबेसडर बन चुका है - जिसका दर्शन भी अब सिर्फ़ इन्वेस्टमेंट के रिटर्न पर मिलता है।
प्रिय देवस्थान,
अगर तुम सुन पा रहे हो - तो जान लो, तुम्हारा सबसे बड़ा अपवित्रता यही है कि तुमने भगवान को भी बिचौलियों के हवाले कर दिया है।
तुमने देवता को दलालों के हाथ में दे दिया है।
मैं लौट रहा हूँ, क्योंकि मुझे रास्ता नहीं चाहिए। मुझे वो ईश्वर चाहिए
जो लाइन में मेरे साथ खड़ा हो, न कि वीआईपी के लोटे में बंद।
एक आम भक्त।
चाय इश्क और राजनीति।
36 राफेल लड़ाकू विमान ख़रीदने का ज़िम्मा हिंदुस्तान एयरोनिटिक्स लिमिटेड के बजाय बैंक डिफ़ाल्टर गुजराती अनिल अंबानी की कंपनी को दिया जाता है।
2019 में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को बताती है कि राफ़ेल ख़रीदी से जुड़ी महत्वपूर्ण ख़ुफ़िया फाइलें चोरी हो गई हैं।
फ़्रांस की एक अदालत में राफ़ेल ख़रीदी को लेकर एक भारतीय बिचौलिये को 10 लाख यूरो घूस दिए जाने के मामले में मुक़दमा चलता है।
जो राफेल विमान भारत ने 241 मिलियन डॉलर प्रति विमान की दर से खरीदा उसी राफेल विमान को इंडोनेशिया ने 193 मिलियन डॉलर प्रति विमान की दर से खरीदा,याने की एक विमान के लिए इंडोनेशिया ने 48 मिलियन डॉलर कम कीमत दी।
@KraantiKumar 32 साल से न्याय की भीख मांग रहा था दिनेश मुर्मू—
न नौकरी बची, न इज़्ज़त, न उम्मीद।
जो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ा था।
सिस्टम ने उसे ही गुनहगार बना दिया,
मत भूलो —
जब एक बेकसूर को बार-बार कुचलोगे,
तो प्रतिशोध में हथियार ही उठाएगा
#DineshMurmu#AdivasiInjustice
CBI पर तीर चला, पर असली वार तो सिस्टम पर था
32 साल पहले
एक ईमानदार आदमी ने भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया।
उसका नाम था दिनेश मुर्मू
पर उसे मिला क्या?
▪️ बदनामी
▪️ केस
▪️ और 32 साल की खामोशी
जब सिस्टम सोता रहा,
तो आदिवासी जगा —
तीर उठाया, और सीधा CBI ऑफिस पर दाग दिया।
अब सब पूछ रहे हैं —
"CBI ऑफिस पर तीर क्यों चला?"
कोई ये क्यों नहीं पूछ रहा —
CBI 32 साल से चुप क्यों थी?
आदिवासी समाज के दिनेश मुर्मू 1993 तक भारतीय रेलवे में नौकरी करते थे.
दिनेश मुर्मू जिस डिपार्टमेंट में काम करते थे वहां भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी चल रही थी. वो भ्रष्टाचार की लड़ाई में "Whistle Blower" बन गए.
सीताराम गुप्ता नाम के भ्रष्ट रेलवे अधिकारी को पकड़ने के लिए CBI की सहायता की. लेकिन सीताराम गुप्ता ने दिनेश मुर्मू पर की भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया.
CBI ने सीताराम गुप्ता समेत, Whistle Blower दिनेश मुर्मू को भी लपेट लिया. दिनेश मुर्मू की नौकरी, इज्जत सब चला गया. और CBI के केस में 32 सालों तक कोई प्रगति नही हुई.
इसी के सिलसिले में वो कई बार लखनऊ के CBI ऑफिस गए. उन्हे भगा दिया जाता. आदिवासी अपने पर आ गया, तीर कमान बनाकर CBI ऑफिस पर हमला कर दिया. तीर से एक ASI घायल हो गया.