Acharya Prashant receives fresh death threat over his remarks honouring Dr Ambedkar
· Renowned philosopher and author Acharya Prashant has received a fresh death threat following his recent remarks in honour of Dr Bhimrao Ambedkar, triggering concern among his supporters and prompting his foundation to initiate legal action
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डॉ. अंबेडकर का सम्मान करने पर आचार्य प्रशांत को मिली मौत की धमकी
· प्रसिद्ध दार्शनिक एवं लेखक आचार्य प्रशांत को एक बार फिर हत्या की धमकी मिली है। यह धमकी उन्हें डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान में दिए गए वक्तव्य के बाद एक यूट्यूब अकाउंट के माध्यम से दी गई है।
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धमकी देने वाले की गिरफ्तारी होनी चाहिए।
आचार्य प्रशांत वेदांत और सनातन धर्म को हर व्यक्ति तक ला रहे हैं। वे युवाओं के मार्गदर्शक हैं और महिलाओं को उनके बंधनों से मुक्त कर रहे हैं। वे हर जीव की आज़ादी के लिए संघर्षरत हैं।
वे असली भारत रत्न है और कोई अगर भारत रत्न को मारने की धमकी दे तो सबसे पहले उस आदमी की गिरफ्तारी हो।
भारत महान था अपने उपनिषदों, गीताओं और बोध के प्रति अपने समर्पण के कारण। और इसी बोध को आज जन जन तक लाने का काम आचार्य जी कर रहे हैं।
राहुल,
>> इसका क्या अर्थ है: "गलती से मेरा नंबर चला गया"?
अपने आप फ़ोन नंबर चलकर हमारे पास आया था? संस्था आपको स्वयं कभी सामने से कॉल नहीं करती - पहले आपने ख़ुद वेबसा��ट पर जाकर फ़ॉर्म भरा था और उस फ़ॉर्म में अनुरोध/स्वीकार किया था कि संस्था आपको कॉल करे।
और अगर आप चाहते थे कि संस्था कॉल न करे, तो वेबसाइट पर यह भी साफ़ बताया गया है कि अकाउंट कैसे डिलीट करते हैं। WhatsApp के हर संदेश पर लिखा आता है - "इन संदेशों को रोकें" (STOP Messages)। आप अपना नंबर हटा सकते थे। आप पढ़े लिखे तो होंगे? पाँच साल में ये नहीं पता चला कि अकाउंट कैसे डिलीट करना है? रोज़ सैकड़ों लोग करते हैं, बस आप ही अ���ूठे निकले.
>> “रोज़ कॉल और व्हाट्सएप आते हैं कि पैसे दो और कोर्स लो। ये अध्यात्म के नाम पर शुद्ध धंधा चला रहे हैं।”
भाई, तुम्हें मुफ़्त में कुछ दिया जा रहा है, और अगर तुम कुछ दो भी दोगे तो भी 50 रुपए दोगे। यही वो न्यूनतम योगदान राशि है जिस पर दो लाख छात्रों को संस्था आज गीता पढ़ा रही है। आज तक तुमने 50 रुपए के लिए किसी को बार-बार कॉल करते हुए सुना है? बड़ी-बड़ी कंपनियाँ भी पैसे बचाने के लिए ऐसा नहीं करतीं। जितना तुम दोगे, उससे कहीं ज़्यादा संस्था सिर्फ़ कॉल और WhatsApp पर तुम पर खर्च कर देती है। तुम्हें गीता से जोड़ने से पहले ही संस्था तुम पर ज़्यादा खर्च कर चुकी होती है - और इसमें हम ये तो गिनाना भी नहीं चाहते कि गीता समझने का मूल्य क्या होता है। त�� फ़ोन तुमसे कुछ लेने के लिए नहीं, तुम्हें कुछ देने के लिए किया जाता है।
जो भी व्यक्ति आचार्य जी की गीता से जुड़ता है, उसे
🔸महीने के तीसों दिन या तो सत्र या तो परीक्षा उपलब्ध करवाई जाती है। प्रतिदिन।
🔸गीता के हर श्लोक को दो-दो घंटे समझाया जाता है, और हर श्लोक की रिकॉर्डिंग्स पिछले कई सालों की आपके लिए उपलब्ध हैं।
🔸सिर्फ़ गीता ही नहीं, कबीर साहेब के भजन, बौद्ध दर्शन, अष्टावक्र गीता, ऋभु गीता, लाओ त्ज़ू पर भी सत्र होते हैं।
🔸एक पूरी सोशल मीडिया ऐप आपके लिए बनाई गई है जहाँ गॉसिप नहीं, गहरी चर्चा होती है। एक सोशल मीडिया के IT system पर कितना खर्चा होता है, कुछ अंदाज़ा है? और वो आपको बिना किसी शुल्क के मिलता है।
🔸Ask AP AI आपको मुफ़्त में, हाँ मुफ़्त में, ऐसे जवाब देता है जो पिछले 25 सालों की आचार्य जी की मेहनत से निकले हैं।
🔸महीने में 15 गीता परीक्षापत्र बनाए जाते हैं, आपकी समझ को धार देने के लिए।
थोड़ा बुद्धि को ज़ोर दो, ये सब ₹50 में देना मुमकिन है? जिन्हें तुम धर्मगुरु वगैरह कहते हो, वे तुम्हें ₹50 में मिलने भी न दें, सिखाना तो दूर की बात है। इतने में तो Zomato पर एक समोसे की डिलीवरी भी नहीं आती।
और तुम कहते हो हम धंधा चला रहे हैं? अरे, ये धंधा नहीं, अहंकार के लिए बहुत बड़ा फंदा है, जो गीता से भागना चाहता है। तुम्हारा यह ट्वीट बता रहा है कि हमारा तरीका सच में ��ारगर है।
>> “इतनी शिद्दत से तो कोई भगवान का नाम नहीं जपता, जितनी शिद्दत से ये लोग मार्केटिंग करते हैं।”
ये भगवान का नाम भी बिना मार्केटिंग के तुम तक नहीं पहुँचा होता - पर खैर, इतना तुम नहीं समझ पाओगे। शुक्र करो कि संस्था मार्केटिंग पर खर्चा कर रही है, वरना 2 लाख से भी ज़्यादा लोग कभी गीता सुनने और परीक्षा देने नहीं आते, वो परीक्षा इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के मुताबिक़ अध्यात्म क्षेत्र में दुनिय��� की सबसे बड़ी परीक्षा है। अगर पहली attempt में पास कर लोगे न राहुल, तो जीवन भर के लिए गीता तुम्हें मुफ़्त में सिखाई जाएगी।
>> “अगर आपके ज्ञान में वाकई दम होता, तो आपको फोन कर-करके लोगों से भीख नहीं मांगनी पड़ती।”
उपनिषदों में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? सार्त्र, हैडेगर, विटगेंस्टीन में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़े हैं? शून्यता सप्तति में दम है? यदि है, तो तुमने ख़ुद पढ़ी है?
जिस भी चीज़ मे�� दम है, वो तुमने ख़ुद कभी नहीं पढ़ी, तुम्हें ज़बरदस्ती ही पढ़वाई गई - स्कूल से ले��र कालेज तक। अपनेआप तो सड़ा कोकशास्त्र और व्हाट्सएप साहित्य ही पढ़ा है तुमने। अपनी ज़िंदगी देखो - तुम हो किस गुमान में? तुम्हें सचमुच लगता है तुम सच और गहराई की ओर अपनेआप ही चले जाओगे? नहीं, कभी नहीं। अपनेआप तो झूठ और गंदगी ही फैलते हैं। सफाई अपने आप कभी नहीं हो जाती - उसके लिए किसी को जान लगानी पड़ती है। सच स्वयं नहीं फैलता, दार्शनिकों और ज्ञानियों को सच फैलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है।
फ़ोन कर कर के भीख नहीं माँगी जा रही। फ़ोन कर कर के इस दुनिया को कुछ ऐसा दिया जा रहा है जो माँगने की भी इसकी औक़ात नहीं है। एहसान समझो कि तुम्हें कॉल किया जा रहा है। वरना आज कोई नहीं है जो तुम्हें गीता का अतिशुद्धतम अर्थ समझा रहा हो, जो अपना IIT और IIM का करियर छोड़कर तीसों दिन आपको समर्पित कर रहा हो और ऊपर से इस काम के लिए खुद खर्चा कर रहा हो ताकि तुम्हें कुछ सिखा सके।
जो काम आज कोई नहीं कर रहा, वो प्रशांतअद्वैत संस्था कर रही है, चाहे वो अंधविश्वास को तोड़ने की बात हो, चाहे पशु प्रेम सिखाने की बात हो, चाहे स्त्री सशक्तिकरण की बात हो। हमारी संस्था आज इन सब में सबसे अग्रणी है।
अगर ये बात समझ नहीं आ रही तो गीता कम्युनिटी पर आइए और कुछ दिन बिताइए। आपको खुद समझ आ जाएगा, जहाँ हर कुछ मिनटों में नए-नए testimonials आते हैं, जिनमें दुनियाभर के लोग बताते हैं कि गीता मिशन से जुड़ने के बाद उनकी ज़िंदगी में क्या परिवर्तन आया और क्या लाभ हुआ।
और हाँ, हमारे पास तुम्हें किए गए सारे कॉल्स, उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, तारीख़ और समय सहित उपलब्ध हैं। ऐसी झूठी अफ़वाहें फैलाने के कारण तुम्हारा Twitter account रिपोर्ट भी कर सकते है।
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आपके होने न होने से आचार्य प्रशांत गीता मिशन को कुछ नहीं होगा पर आपका नुकसान जरूर होगा। सच को समझें और अभी जुड़ें:
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आचार्य जी का जीवन और काम: https://t.co/o49cDNzt6N
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The Echo of Mahashivratri: Acharya Prashant’s Special Performance Goes Viral on Fan Channels too✨
As we all know, Acharya Prashant has a massive community of countless fan channels across YouTube and Instagram.
Alongside national and international media outlets, many of these channels have featured exclusive glimpses of this year’s special Mahashivratri theatrical performance. Upon popular demand, we are sharing some of those links with you.
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Is Acharya Prashant's Theatrical Performance on Mahashivratri a Unique Confluence of Dharma and Art? Greater Noida, Feb 16 (NationPress) — On the eve of Mahashivratri, Gautam Buddha
University's auditorium was filled to capacity as thousands... https://t.co/ax37s0CYxT
Greater Noida, Uttar Pradesh: On Mahashivratri, Philosopher and author Acharya Prashant combined knowledge, art, and spirituality through a special theatrical performance and exhibition, educating 2,000 selected participants, sharing Vedantic insights, answering questions, and demonstrating the true essence of Shivtatva while signing over 10,000 books
“सस्ती कॉपी” बोलने से पहले ओशो का असली माल देख ले 😂
ओशो के “ओरिजिनल विचार” क्या थे? चलो याद दिला दूँ:
• Meditation से past-life memory खुल सकती है
• आज की suffering पिछले जन्म की EMI है
• Karma = Universe का moral CBI
• Kundalini = spine में चढ़ती literal energy
• Chakras = invisible service centers
• Aura & vibrations = spiritual WiFi signal
और इतिहास भी देख — 1984 Rajneeshee bioterror attack. उनके कम्यून के वरिष्ठ अनुयायियों ने चुनाव प्रभावित करने के लिए 751 लोगों को Salmonella से बीमार किया. U.S. इतिहास का सबसे बड़ा bioterror attack. Guru-centric insulated structure कहाँ जा सकता है, इसका उदाहरण।
चैट देखनी है?
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पुनर्जन्म: ओशो बनाम आचार्य प्रशांत - कोई तुलना ही नहीं है!
पुनर्जन्म पर ओशो का अंधविश्वास:
1) व्यक्ति के वर्तमान जीवन की समस्याएँ पिछले जन्मों से जुड़ी हैं
2) ध्यान में पूर्वजन्म की स्मृतियाँ खुल सकती हैं
3) आत्मा बार-बार जन्म लेती है
अब सुनो आचार्य प्रशांत पुनर्जन्म के बारे में क्या कहते हैं:
ओशो के प्रेमी एनलाइटमेंट के सपनों में घूमते रहते हैं। क्योंकि ओशो ने ही कहा था कि वो भी इनलीग��टेंड थे। ये तो सीधे सीधे अपने को भगवान घोषित करके लोगों को गुमराह करने का तरीका है। भारत में धर्म के नाम पर इसी तरह से लूटा गया है और शोषण किया गया है
जबकि आचार्य प्रशांत कहते हैं इनलाइटमेंट जैसी कोई घटना नहीं होती। वो सिखाते हैं लगातार ख़ुद को देखो, अपनी बेईमानीयों और कमज़ोरियों को पकड़ो और अपनी सफ़ाई करो।
मुझे तो आचार्य जी की बात ईमानदार और काम की लगती है। वो लगातार ख़ुद संघर्ष कर रहे हैं और हमें भी यही सिखाते हैं।
@sachinsgaur Osho को पेड़ पर चढ़ के ‘enlightenment’ मिल गया था।
आचार्य की के session में आकर ये सब बोलते तो बड़ी झाड़ पड़ती।
सारा enlightenment का भूत उतर जाता।
सही में ‘no mind’ में पहुँच जाते भाई साहब।
खैर!
😅
ओशो और आचार्य प्रशांत में जमीन-आसमान का फर्क है:
ओशो: ओशो की शिक्षाएं अंधविश्वासों और छद्म-वैज्ञानिक दावों से भरी थीं। उन्होंने ज्योतिष को वैध विज्ञान बताया, पूर्वजन्म, आभामंडल, चक्रों को वास्तव��क ऊर्जा केंद्र, और अटलांटिस को ऐतिहासिक सच्चाई के रूप में प्रस्तुत किया।
जबकि ओशो ने संगठित धर्म और उसके कर्मकांडों का मजाक उड़ाया, उन्होंने उन्हें अपने स्वयं के रहस्यमय विश्वासों और अनुष्ठानों के ढांचे से प्रतिस्थापित कर दिया।
आचार्य प्रशांत जी: वे इन सभी सहारों को अस्वीकार करते हैं। कोई चमत्कार नहीं, कोई पौराणिक कथाएं नहीं, कोई चक्र नहीं, कोई पूर्वजन्म नहीं, कोई दैवीय सुरक्षा नहीं। व��� अंधविश्वास के प्रति निजी तौर पर कोई छूट नहीं देते — उनकी अस्वीकृति संपूर्ण और सुसंगत है।
शिक्षण को केवल अपनी सुसंगतता, अपनी प्रकाश डालने की क्षमता से काम करना होगा, या बिल्कुल नहीं।
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अंतर: जबकि ओशो ऊर्जा संचरण और पूर्वजन्म की कहानियों से मोहित कर सकते थे, आचार्य प्रशांत इनमें से किसी भी सुरक्षात्मक परत के बिना कार्य करते हैं।"
ओशो ने अंधविश्वास को नया पैकेज दिया। आचार्य प्रशांत हर अंधविश्वास को ��्वस्त करते हैं। यही फर्क है।
पूर्ण लेख पढ़ें: https://t.co/jWNLCZDoWp
@sachinsgaur ओशो ने खुद बोला है कि वो अमीरों के गुरु है और दूसरी तरफ है आचार्य प्रशान्त जी जिन्होंने ने गरीबों का हाथ थामा है !
फरक साफ है।
इसलिए सब आचार्य प्रशांत जी को सुनते हैं।
Acharya Prashant operates under entirely different conditions. He is doing philosophy in a new kind of warzone, one shaped not by state surveillance or institutional control, but by digital volatility, ideological fragmentation, and an audience that is both vast and unfiltered.
Osho openly promoted astrology as science, defended the literal existence of chakras and auras, spoke of remembering past lives, and described enlightenment as producing measurable energetic fields.
https://t.co/PZHS4qWFjl