मेरे कमरे की वो दो टेबल, जिन पर अब भी किताबें सजी हैं,
उन पर धूल नहीं, मेरी नाकामियों की परतें जमी हैं।
अब वो कमरा मुझे काटता है साहब,
क्योंकि वहीं कहीं मेरे अधूरे ख़्वाबों की लाश पड़ी है।
~ सोच ✍️
मेरे कमरे की वो दो टेबल, जिन पर अब भी किताबें रखी हैं,
हर रोज़ मुझे घूरती हैं जैसे मेरी अधूरी कोशिशों का हिसाब रखी हैं।
कभी जो कमरा मेरे सपनों का ठिकाना था,
आज वही कमरा मुझे काटता है, जैसे दीवारों ने मेरी हार याद रखी है।
~ सोच ✍️
कभी-कभी रात इतनी लंबी हो जाती है कि नींद भी साथ छोड़ देती है। मन उलझनों के अंधकार में भटकता रहता है, और भीतर एक अनाम रिक्तता घर कर लेती है। सुबह होते ही वही व्यक्ति मुस्कान ओढ़ लेता है, जिसने पूरी रात अपने ही विचारों के शोर में मौन होकर बिताई होती है।
“जिस्म से जवानी ऐसे बिछड़ रही है,
जैसे पतझड़ में शाख़ से हरियाली बिछड़ रही है।
कल तक जो ख्वाहिशें परवाज़ भरती थीं,
आज वो भी ख़ामोशी से कहीं सिमट रही हैं।”
~सोच ✍️
थक गया हूँ हर बार खुद को साबित करते-करते,
हर कोशिश के बाद भी खाली हाथ लौटते-लौटते।
इम्तिहान में भी हार मिली, हालात भी खिलाफ हैं,
कभी-कभी लगता है मेरी किस्मत को भी मुझसे कोई शिकायत है।
~ सोच ✍️
मेरे सीने पे रखो सिर अपना,
और कुछ देर दुनिया को भूल जाओ,
मेरी धड़कनों की हर आहट में,
अपने लिए एक सुकून सा पाओ।
न कोई शिकायत रहे, न कोई दूरी,
बस तुम और मैं इस पल में खो जाएँ,
मेरी बाँहों की पनाह में आकर,
सारे ग़म कहीं दूर सो जाएँ।❤️🥀
~ सोच ✍️
My parents is traveling on this ticket their berth was 12 13 someone from 14 no berth complained about cleaning or other things and he left cleaning staff came to parents berth and talking rudely why you complained this that as they are in 50s they are getting panicked by their behavior @IRCTCofficial@irctc_app@RailMinIndia
पूर्णतः चले जाना तब आवश्यक हो जाता है, जब तुम्हारे प्रश्न तुम्हारे विचार किसी के लिए असुविधा का कारण बनने लगें। जब तुम्हारी उपस्थिति सुकून नहीं, बोझ महसूस हो। उस क्षण आग्रह नहीं, मौन चुनना चाहिए। क्योंकि जहाँ भावनाओं का मूल्य समाप्त हो जाए, वहाँ सम्मानपूर्वक दूरी ही उचित होती है।
“जब हम पहली बार मिले थे, तब भी आसमान ऐसे ही बरस रहा था। बारिश की उन बूंदों के बीच तुम्हारा पहली बार मेरे सामने आना आज भी मेरी यादों का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। उस दिन भी हवा में मिट्टी की वही महक थी, मौसम में वही ठंडक थी और दिल में एक अनजाना सा एहसास था। शायद तब हमें अंदाज़ा नहीं था कि यह मुलाकात हमारी ज़िंदगी की सबसे खास याद बन जाएगी। आज फिर वही बारिश हो रही है, वही बूंदें ज़मीन को भिगो रही हैं, लेकिन हर बूंद के साथ तुम्हारी याद और भी गहरी हो जाती है। ऐसा लगता है जैसे बारिश को हमारी पहली मुलाकात आज भी याद है, तभी तो हर बरसात तुम्हारा नाम लेकर मेरे दिल के दरवाज़े पर दस्तक दे जाती है।” 🌧️❤️
“आज की बारिश ने फिर से उन पलों को जीवित कर दिया, जब हम पहली बार मिले थे। तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारी बातें, बारिश में भीगती हुई वो मासूम सी शाम, सब कुछ जैसे कल की ही बात हो। उस दिन बारिश सिर्फ आसमान से नहीं बरस रही थी, बल्कि मेरे जीवन में एक नए एहसास की शुरुआत भी हो रही थी। समय बीत गया, मौसम बदल गए, लेकिन उस पहली मुलाकात की याद आज भी उतनी ही ताज़ा है। हर बारिश मुझे तुम्हारे और करीब ले आती है, जैसे हर बूंद में तुम्हारा स्पर्श छुपा हो और हर हवा के झोंके में तुम्हारी मौजूदगी महसूस होती हो।” ❤️🌦️✨
~ सोच ✍️
तुम्हारे स्पर्श से मन में एक अनकही हलचल जाग उठती है,
तुम्हारी नज़दीकियाँ हर एहसास को और गहरा कर देती हैं।
हमारे प्रेम के उन खास पलों में, तुम्हारा साथ मुझे दुनिया की हर चिंता से दूर ले जाता है,
जहाँ सिर्फ़ तुम होती हो, तुम्हारी मुस्कान होती है, और हमारे दिलों की धड़कनों का संगीत। ❤️
~ सोच ✍️
तुम्हारे साथ बारिश में भीगना, तुम्हारे गीले बालों का चेहरे पर बिखर जाना,
और तुम्हारा वो मासूम सा अंदाज़—आज भी यादों में एक नशा सा घोल देता है।” 🌧️❤️
~ सोच ✍️
“तुम्हारे साथ बारिश में भीगना, और तुम्हारे भीगे हुए जिस्म की ख़ुशबू का हवाओं में घुल जाना,
आज भी उन लम्हों को याद करके दिल को मदहोश कर देता है।”
~ सोच ✍️
पहली बारिश की बूंदें जैसे ही ज़मीन पर गिरीं,
मिट्टी की वो सोंधी खुशबू हवा में घुल गई।
उसी के साथ चली आई एक पुरानी महक,
जो न जाने कब से कहीं दिल के किसी कोने में छुपी थी।
और फिर अचानक,
कुछ पुरानी यादें आँखों के सामने उतर आईं—
उसका साथ, उसकी बातें,
बारिश में भीगते हुए वो मुस्कुराता चेहरा।
अजीब है ना,
कभी-कभी एक बारिश,
मिट्टी की थोड़ी-सी खुशबू
और ठंडी हवा का एक झोंका,
सालों पुरानी यादों को भी
ऐसे जिंदा कर देता है,
जैसे वो कल की ही बात हो। 🌧️🍂❤️
~ सोच ✍️
आज फिर पहली बारिश हुई है,
और उसके साथ तुम्हारी याद भी चली आई है।
याद है वो दिन,
जब हम भीगते हुए बेवजह मुस्कुरा रहे थे,
बारिश की बूंदें चेहरे पर थीं,
और तुम्हारी बातें दिल में उतर रही थीं।
वो साथ चलना,
एक ही छतरी में सिमटना,
और कभी जानबूझकर बारिश में भीग जाना—
आज भी हर बूंद के साथ याद आता है।
अब बारिश तो हर साल आती है,
मगर तुम्हारा साथ नहीं आता।
बस कुछ अधूरी यादें,
कुछ भीगे हुए लम्हे,
और तुम्हारी कमी छोड़ जाती है।
हाय ये पहली बारिश…
न जाने क्यों हर बार तुम्हारी यादों को
और भी गहरा कर जाती है। ❤️🌧️
~ सोच ✍️
शायद अब हमारे रास्ते अलग होने का समय आ गया है। मैंने अपनी तरफ से जितना कर सकता था, उतना किया। कुछ बातें अधूरी रह गईं, कुछ सवाल अनसुने रह गए, और कुछ दर्द ऐसे हैं जो शायद हमेशा साथ रहेंगे।
मैं तुम्हारे लिए दिल से यही दुआ करता हूँ कि तुम्हें जिंदगी में हर खुशी मिले, हर वह चीज मिले जिसकी तुमने ख्वाहिश की है। मेरे मन में तुम्हारे लिए नफरत नहीं, बस एक गहरा दुख और बहुत सारी यादें हैं।
अब मैं उन यादों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करूंगा।
अलविदा।
अपना ख्याल रखना। 🌹
~ सोच ✍️