कुछ दिन पहले की बात है, रात का समय था, बारिश हो रही थी। मैं एक सुनसान बस स्टॉप पर पहुंचा, वहां एक लड़की खड़ी थी। उसकी साड़ी बारिश में भीग चुकी थी, और वह ठंड से कांप रही थी। उसका चेहरा थोड़ा उदास था, शायद वह देर रात अकेले इस सुनसान जगह पर होने से घबराई हुई थी ।
शायद मैं किसी का पसंदीदा अजनबी नहीं बनना चाहता था, मुझे वो सतही स्नेह नही चाहिए था जो सिर्फ़ दिखावे का हो। मुझे वो समझ-भरा प्यार चाहिए था जो मुझे समझ सकता। काश वो समझती वो बातें जो मैं ज़ोर से नहीं कह पाता, वो भावनाएँ जो मेरे अंदर उठती हैं लेकिन मैं उन्हें व्यक्त नहीं कर पाता था।
तुम सोच रहे थे कि तुम उनसे नाराज़ हो क्योंकि वो तुम्हें ज़रूरत पड़ने पर उपलब्ध नहीं थे, लेकिन असल में तुम अपने आपसे ही अधिक नाराज़ हो। कारण यह था कि तुम हमेशा उनके लिए उपलब्ध रहते थे, क्योंकि तुममें सीमाओं का अभाव है और तुम प्रेम के बदले मे कुछ ही सही प्रेम पाने की इच्छा रखते हो।
तुम किसी की कहानी में खलनायक बन जाते हो, तो किसी और की दास्ताँ में नायक शायद ही बन पाते हो। इससे तुम्हारे बारे में क्या पता चलता है? यह बताता है कि तुम एक इंसान हो। तुम अभी भी यात्रा पर हो, हर पल बढ़ रहे हो, सीख रहे हो और तुम सिर्फ़ अपने कुछ कर्मों या गलतियों तक सीमित नहीं हो।
जब तुझे पता है कि मैं वेजिटेरियन हूं, नॉन वेज से नफ़रत है तो मेरे सामने अपने नॉन वेज लव का ज्ञान मत पेल ना भड़वे, तुझे पसन्द होगा तो अपनी पसंद अपने तक रख किसीने तुझ से नही पूछा है।
जंगल के बीचों बीच खड़े होकर ये अहसास होता है कि ये सिर्फ हरे-भरे पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि एक जीवंत शांति का महासागर है। यहाँ हर पत्ता धीरे-धीरे साँस लेता है, और हर डाली पुरानी कहानियाँ कहती है। भीड़ की उन दीवारों से दूर, जहाँ हमेशा दम घुटता है, यहाँ समय पूरी तरह बहने लगता है।
वर्तमान मे कूल बनने की होड़ मे स्त्रियां अभद्रता और अश्लीलता को बाहें फैलाकर गले लगा रही है। पहले जिन कृत्यों को पुरुष किया करते थे जैसे शराब, सिगरेट, एवं अन्य तमाम नशीले पदार्थों का सेवन करना, गाली गलौज देना, तथा स्त्रियां विरोध करती थी, वही सब अब स्त्रियों में आम बात बन गई है ।
फिर वही शाम और जब किसी काम के लिए घर से दूर जाना होता है, मुझे थोड़ा समय निकालकर अंधेरे में पहाड़ो में भटकना, सुकून देता है। किसी स्थान पर दुबारा जाता हूं तो महसूस होता है कि शायद हवा में वही पुरानी खुशबू नही है। है तो बस पुरानी चाय की दुकान, एक कप कड़क चाय और धूमिल से ये सितारे।
ऐसा नहीं कि मेरे हिस्से में प्रेम कभी आया नही था। असल में मैं उस प्रेम को खोजता रहा, लेकिन कभी ठहराव नही मिला, खालीपन से अंदर इतना अंधकार हावी था कि मैं ये भी नही देख पाया कि मैं उस प्रेम को हर बार हार रहा हूँ। ख़ैर, अब ये सच साफ हो चुका है कि मेरे हिस्से में प्रेम कभी था ही नही।