इनके माता-पिता ने गलत मनुस्मृति पढ़ ली शायद,
या फिर हो सकता है कभी पढ़ा ही न हो,
या फिर शायद कहीं कुछ पढ़ा हो सुना हो लेकिन लगा हो कि भक्क कौनो कागज पर कोई कुछ लिख दिया तो उसको मान ही लिया जाए ऐसा थोड़ी न होता है, माने कुछ ऊट पटांग सुना हो लेकिन टिरका दिया हो,
लेकिन यकीन मानिए,
भारत के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मनुस्मृति कंठस्थ है. उन्होंने इस मनुस्मृति का इतना घोर अध्ययन कर लिया है कि शायद उनके लिए मोदी "मनु के वंशज" हैं और भारत का पूरा हिंदू समाज "मनुस्मृति" का अनुयायी.
हालांकि, इस बीच न जाने कितने ही बुद्ध, महावीर, विद्यासागर, राजा राम मोहन, सावित्री बाई फुले, पंडिता रमा बाई, पेरियार, त्रिपुरनेनी रामास्वामी, स्वामी दयानंद सरस्वती, कबीरदास, संत रविदास और संत चोखामेला जैसे संत, महात्मा और विचारक हुए....जिन्होंने बिना किसी निजी या सियासी स्वार्थ के "मनुस्मृति" की कुरीतियों के खिलाफ समाज को जागृत किया कि आज हिन्दू समाज की महिलाएं नगाड़े बजाती हैं, झूमती हैं, गाती, पढ़ती हैं, पढ़ाती हैं, जो जी चाहे वो करती हैं. लेकिन नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi के मुताबिक तो हिंदुस्तान का हिंदू समाज आज भी "मनुस्मृति" में ही फंसा हुआ है. फिर महाराष्ट्र में गणपति बप्पा के आगमन पर नगाड़े बजाती ये महिलाएं किस समाज की हैं? ये मनुस्मृति की मारी हैं क्या? कहीं इनसे जबरन तो ये नहीं करवाया जा रहा?
अब ये साफ़ हो चुका है कि हर्ष दुबे ने आज जो भी क़दम उठाया है, उससे पहले इस विषय में आंदोलन के बाक़ी साथियों से कोई विचार-विमर्श नहीं किया।
अचानक से उसका दिल्ली से लखनऊ पहुँच जाना, ब्रजेश पाठक के साथ प्रेस-कॉन्फ्रेंस करना और फिर सरकार की तरफ़ से बातचीत का आश्वासन लेकर आना - ये सब उसने अकेले किया। करणी सेना, अजीत भारती या फिर मीडिया/सोशल मीडिया के जरिए तथ्यों को सामने रख रहीं अनुराधा तिवारी या नेहा लालदास - उसने किसी से राय तक लेने की ज़रूरत नहीं समझी।
उसे इसका अंदाज़ा भी नहीं है कि व्यवस्थाएँ अपना काम निकल जाने पर दूध में पड़ी मक्खी की तरह किसी को भी निकल फेंकने में दक्ष होती हैं। ये आंदोलन स्वतःस्फूर्त था, किसी ने बुलाया नहीं था, फिर भी इतनी बड़ी संख्या में भीड़ जुटी कि उसने CJP को पीछे छोड़ दिया। यहाँ कॉकरोचों की तरह मूर्ख लोगों की भीड़ नहीं थी बल्कि गंभीर व जागरुक नागरिक जुटे हुए थे।
बिना किसी को विश्वास में लिए उसने जो हरकत की है, उससे उसने विरोधी गिरोहों को गुटबाजी वाला तंज कसने व मज़ाक़ बनाने का पूरा मौक़ा थमा दिया है। हालाँकि, ये भी अच्छी बात है कि ये आंदोलन सबका है, किसी एक नेता का नहीं।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे श्री हर्ष दुबे जी के साथ आज लखनऊ में पत्रकार वार्ता कर छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की मांगों एवं उनकी चिंताओं की गंभीरता के दृष्टिगत उन्हें पूर्ण रूप से आश्वस्त किया कि आगामी दो दिनों में उनकी मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा तथा संबंधित केंद्रीय मंत्री जी से उनकी भेंट भी सुनिश्चित कराई जाएगी।
छात्रों के उज्ज्वल भविष्य हेतु हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। किसी भी छात्र के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। हमारी सरकार सभी को साथ लेकर चलेगी।
@BJP4India@BJP4UP
‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ का हर्ष दुबे के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को कोई समर्थन नहीं है। चूँकि हम इस आंदोलन से वैचारिक रूप से जुड़े थे, इसलिए कल मेरी उपस्थिति वहाँ थी। हमने ना तो यह आंदोलन बुलाया था, ना प्रेस कॉन्फ्रेंस।
जो लोग हर्ष या अन्य लोगों के बुलाने पर जंतर मंतर आए थे, उनसे विनम्र निवेदन है कि वो अपने घरों को प्रस्थान करें। कोई तो कारण रहा होगा कि मैंने ऐसे किसी आंदोलन के लिए लोगों को इतनी शीघ्रता से बुलाने से मना किया था।
कोई भी पार्टी इसे यह ना समझे कि आंदोलन समाप्त हो चुका है। हम चर्चा करेंगे, लोगों को बताएँगे और हम शीघ्र ही वापस आएँगे और इस संख्या से बहुत बड़ी संख्या में आएँगे।
साथ ही, हर्ष दुबे के पिताजी को विधायक टिकट हेतु शुभकामनाएँ। आपके माध्यम से एक सवर्ण विधानसभा में पहुँचेगा। आशा है आप वहाँ आरक्षण की वर्तमान नीतियों का विरोध करेंगे।
@neha_laldas@talk2anuradha
"जाति" वाले सियासी शोर में अब "आरक्षण" को लेकर ये कौन सा नया सवाल है?
क्यों आरक्षण को लेकर इतना बवाल है?
कुछ कह रहे हैं कि आरक्षण खत्म करने के लिए ये सवर्णों की सुनियोजित चाल है.. तो कुछ कह रहे हैं कि ये आरक्षण की मौजूदा नीतियों में सुधार और जरुरी बदलाव पर चर्चा की शुरूआत है... तो ऐसे में वही बात कि आरक्षण को लेकर क्या असल सवाल है जो यूपी चुनाव से पहले इतना बवाल है?
#ReservationReformआंदोलन #AkhikeshYadav #Reservation #JantarMantar
जब कभी हम किसी का नमस्ते,नमस्कार या प्रणाम जैसे शब्दों सेअभिवादन करते हैं तो क्या हम जानते हैं कि किन शब्दों से किसका अभिनंदन करना चाहिए ?
When we greet someone with words like Namaste, Namaskar or Pranam, do we knowthe meaning of these words & which is an appropriate word 2 use?
कोई मुझे पितामह कहता है !
कोई शक्तिमान कहता है !!
मुझे कोई शिकायत नहीं।
उल्टा मैं इसे ज़र्रा नवाज़ी कहूँगा।
किसी कलाकार को
उसके किरदार से जानना,
उस कलाकार की उपलब्धि होती है।
किंतु, परंतु , मेरी अपनी पहचान
इसमें कहीं खो गई !
मैं उसे वापस लाना चाहता हूँ।
चाहता हूँ,
लोग मुझे मेरे नाम से जानें।
शुरुआत कर रहा हूँ
अपने चैनल से।
जो सबसे पहले शुरू किया था।
मैं उसे वापस लाना चाहता हूँ।
स्वागत करें उसका भी।
जैसे स्वागत किया सालों इस का।
काम वही रहेगा।
सिर्फ़ नाम बदल जाएगा।
तो चलिए
साथ साथ चलते हैं।
एक बार हमारी वेबसाइट पर भी जरूर आइए। ❤️
🐝🍯
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#BREAKING
ग्रेटर नोएडा: दनकौर के डेरीन गुजरान गांव में चोरों ने घर का ताला तोड़कर बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने संदूक में रखे करीब ढाई लाख रुपये नकद और लाखों रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण चोरी कर लिए। पूरी वारदात CCTV कैमरे में कैद हो गई। @Uppolice@noidapolice #GreaterNoida #CrimeNews #Noida #UttarPradesh