उत्तर प्रदेश के बरेली में 4 करोड़ रुपए से बनी पानी की टंकी नदी में समा गई!! नदी से थोड़ा दूर ही दूर टंकी बनाई गई थी, बाढ़ में वो दूरी भी खत्म हो गई।
अधिकारी मौज में ही होंगे.. ठेकेदार मौज में ही होंगे..
@kpmaurya1 जी, क्या टंकियां गिरेंगी तभी दूसरी बनेंगी? और बनेंगी तो गिरेंगी ही ,ये मान लिया जाए?
क्योंकि देखने पर तो यही लगता है कि टंकी बनी भी नहीं और गिर गई।
और कितना गिरेंगे ये अधिकारी-ठेकेदार?
जवाबदेही, जिम्मेदारी, नियम-कानून कुछ मायने भी रखते हैं या बस लूट सको उतना लूट लो, क्योंकि कानून का डर तो जैसे है ही नहीं!!
सरकार ने कितना सुंदर स्कूल बनावाया है ❤️
पूरे देश में 2047 तक इस से भी ज्यादा सुंदर-सुंदर स्कूल बनाने की तैयारी चल रही है।
अगर किसी ने इसे भाजपा कार्यालय कहा तो उसे थाईलैंड भेज दूँगा।
एम्बुलेंस के गड्ढे में फंसने से नवजात की गर्भ में ही मौत,
क्या कभी ऐसी घटना किसी नेता या अधिकारी के साथ घटती है?
विधायक: रानी पक्षलिका सिंह ,भाजपा
सांसद: राजकुमार चाहर, भाजपा
मुख्यमंत्री: @myogiadityanath भाजपा
DM : @mbansal_ias
📍बाह ,आगरा
हर बार BJP सरकार का वही शर्मनाक पैटर्न - हादसों से पहले रोकथाम नहीं, उनके बाद बयानबाज़ी होती है, कुछ छोटे अफ़सरों पर ज़िम्मेदारी मढ़ दी जाती है, और असली गुनहगार जवाबदेही मुक्त रहते हैं।
सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। पिछले 4 महीनों में सैदुलाजाब में ऐसी त्रासदी में 6 लोगों की मौत हुई, हौज़ रानी में आग ने 22 जानें ले लीं। हर बार जिंदगियां, सपने और अरमान मलबे में दबते हैं - और हर बार कार्रवाई गायब रहती है।
और जवाबदेही मांगने पर प्रधानमंत्री खुद आपको “दिमागी नक्सल, नाराज़ फूफा” जैसे अपमानजनक तमगे दे देते हैं - मकसद, सवाल पूछने वालों को शर्मिंदा करो, बदनाम करो और चुप करा दो।
12 साल में ये सरकार दुनिया भर की बातें कर के आपको गोल-गोल घुमाती रही, लेकिन मुद्दे की बात नहीं की। दिल्ली में "ट्रिपल इंजन" सरकार है, तो अब किस बात से लाचार है?
लाचारी है नीयत की - क्योंकि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती।
There Is No Accountability.
#TINA
राम वन गमन सड़क धसने पर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा सड़क बनेगी तो टूटेगी,
दरअसल वो कहना चाहते थे कि अगर सड़क जल्दी टूटेगी और बनेगी नहीं तो बार बार कमिशन कैसे मिलेगा? चुनाव कैसे लड़ेंगे? ख़र्चे कैसे चलेंगे? चरक वाला कुर्ता कैसे पहनेंगे? बच्चे अय्याशी कैसे करेंगे? बीवी को नौलखा कैसे दिलाएंगे?
70 हज़ार का चालान अब हाथ जोड़ रहे है माफ़ी माँग रहे है यह खाना मुझे 140 रुपय का दिया जब मैंने बिल मांगा तो गुस्से में खाना छीन लिया और बाहर फेक दिया मैंने तुरंत गुस्से में रेल मदद को कॉल करी और सारी बात बता दी रेलवे ने बिना किसी देरी के तुरंत वेंडर पर 70 हज़ार का जुर्माना लगा दिया 35 एक पर और दूसरे पर भी 35 हज़ार का अब यह दोनों हाथ जोड़ रहे है खाना भी फ्री में खाने के लिए बोल रहे है की जहाँ तक आप जाओगे वहाँ तक खाना फ्री बस हमे बचा लो हमारे छोटे छोटे बच्चे है साहब अपनी कंप्लांट वापिस के लो अब क्या करूँ इनको माफ़ करूँ या फ़ाईन होने दु आपकी क्या राये है
प्रधानमंत्री के तौरपर नरेंद्र मोदी जी की सबसे बड़ी उपलब्धियां👇👇
> एशिया में भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर
> एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली करेंसी– ₹
> प्रेस फ्रीडम इंडेक्स– 157th
> ग्लोबल हंगर इंडेक्स में रैंक– 102
> प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश से भी कम
ये तो बस कुछ ही उदाहरण हैं लेकिन और भी कई क्षेत्र हैं जहां मोदी जी ने देश को आगे ले जाने के बजाय पीछे धकेला।
इसके बावजूद भी मोदी जी SRCC में जाकर सिर्फ जुमलेबाजी करके आते हैं।
सोचिए, ऐसा क्या गुनाह किया था इन बच्चों ने कि इन्हें गोली मार दी गई?
इन्होंने सरकार से सिर्फ़ तीन चीज़ें माँगी थीं - शिक्षा, रोज़गार, और जवाबदेही।
एक छात्र के पैर की हड्डी AK 47 की गोली से टूट गई। सेना में जाकर देश की सेवा करने का उसका सपना भी उसी के साथ चला गया। दो और छात्रों के कंधों को गोली चीरती हुई निकल गई।
ये अपराधी नहीं थे। ये ग़रीब घरों के वो बच्चे थे जो अपने परिवार के सपने लेकर पढ़ने निकले थे - किसी को अच्छी नौकरी चाहिए थी, किसी को अपने घर के हालात बदलने थे।
गोली के घाव भर जाएंगे - पर जो डर इन बच्चों के भीतर बैठ गया है, उसका इलाज किस अस्पताल में होता है?
प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी - इनकी टूटी हड्डी तो जुड़ जाएगी। क्या इनका टूटा हुआ सपना आप लौटा सकते हैं?
बिहार के किसी सरकारी स्कूल में जब एक रिपोर्टर अचानक से स्कूल पहुंच जाता है तब सारे बच्चे प्लेट में चावल और नमक लेकर खा रहे थे
इसलिए जब उनसे पूछा जाता है कि दाल और सब्ज़ी क्यों नहीं मिला तुम लोगों को..
तब ये लोग बोलते हैं कि कभी हमको दाल सब्ज़ी नहीं मिलता
जब कोई अधिकारी यहाँ जांच करने आता है तब अच्छे अच्छे सब्ज़ी बनते हैं
इसलिए जब स्कूल वाले से पूछा जाता है कि आपने दाल या सब्ज़ी क्यों नहीं दी, तब वो बोलते हैं कि दाल सब्ज़ी बना हुआ है, कोई भी बच्चा दाल सब्ज़ी नहीं लिया, वो लोग नमक ही खाते हैं
इसलिए जब दाल और सब्ज़ी देखने गए तब ये लोग माफी मांगने लगे रूम के अंदर बैठकर कि वीडियो पोस्ट मत कीजिएगा
पर क्या बिहार में सरकार पैसे दे रही है पर ये लोग खाकर बैठे हैं और बदनामी सरकार की भी होती है साथ में बिहार की भी
सिर्फ इन लोगों के चक्कर में, जो पैसे खाने के चक्कर में बच्चों का स्वास्थ्य के साथ भी खेल जाते हैं
अभी इंदिरा गांधी एयरपोर्ट का उद्घाटन करना होता तो रील पे रील काट के इन्फ़्लुएंसर्स को पैसे देके चलाई जा रही होती,
लेकिन अब पानी भर गया तो कोई वीडियो नहीं चलाएगा!!
ये किस प्रदेश की पुलिस है..?
आखिर किस कानून के तहत इस युवक को बीच सड़क पर बांधकर दम भर लाठियां चलाई जा रही है -
ये मानवाधिकारों का हनन है के नहीं..कहां है मानवाधिकार आयोग..?