आज सड़कों पर उतरा मूलनिवासियों का जनसैलाब।
हम इस देश से इस मनुस्मृति रूपी ईवीएम को हटाकर रहेंगे जिसने हमारे हक अधिकारों को छीना है और हमें गुलाम बनाने का काम किया।
#चुनाव_आयोग_पर_महामोर्चा
#चुनाव_आयोग_पर_महामोर्चा
एक बड़ी तैयारी देशभर में चल रही है ईवीएम को हटाने के लिए। जनता इस मनुस्मृति रूपी ईवीएम को हटाना चाहती है। आने वाला समय हमारा है। हम इस देश से ईवीएम को हटाकर ही रहेंगे और फिर से देश में बैलेट पेपर से चुनाव होगा।
@MANOJMULNIVASI4#BringBallotPaper_SaveIndia भारत की जनता का विश्वास नाही रहा है evm पर न जाणे क्यो चूनाव आयोग evm पर जोर दे रहा है , इसका कारण सिधा है की ये evm घोटाळे मे शामिल हैं
पुरे देश में किसानो की समस्या होणे का मुख्य कारण किसनोका हिंदू होना वो किसान कम ओर हिंदू जादा हैं जिस दिन किसान खुद को किसान समजेगा उस दीन सत्ता मे होगा औंर उसकी कोई समस्या नही होगी
एक महत्वपूर्ण शोध ग्रंथ जो महाराष्ट्र का सांस्कृतिक और पुरातात्विक इतिहास प्रस्तुत करता है। इस ग्रंथ को लिखा है जाने-माने इतिहास संशोधक डा. विलास खरात और डा. प्रताप चाटसे ने।
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जाति इस देश की हकीकत है. वर्ण व्यवस्था और जातियां बनाकर शातिर और धूर्त लोगों द्वारा इस देश की बहुसंख्यक आबादी को वंचित रखा गया और शोषण किया गया यह भी एक हकीकत है. जातियों का उत्थान किये बगैर बहुसंख्यक आबादी को अभाव और शोषण के चक्र से नहीं निकाला जा सकता है.
भाजपा चाहती है कि बहुसंख्यक आबादी हमेशा वंचित रहे. वंचित रहेगी तभी धर्म नामक अफ़ीम के दम पर उनका वोट हासिल करके सत्ता पर राज किया जा सकता है. उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों और केंद्र में जातिगत जनगणना न कराकर भाजपा ने अपने इरादों को दिखा दिया है. बहुसंख्यक आबादी को यह समझना होगा कि वह भाजपा के लिए बस वोट बैंक बनना चाहती है या विकास और उत्थान देखना चाहती है.