‘बिनशर्त पाठिंबा’ खूप धोकादायक असतो.
माझा एक ‘अजेंडा’ राबवणारं सरकार आहे म्हणून त्याच्या बाकी चुकांना मी पाठीशी घालेन; हा विचार पूर्ण समाजाचा घात करणारा असतो.
सदसदविवेक बुद्धी प्रत्येकाला असते. ती गहाण टाकून सगळं ‘कोसळू’ द्यायचं का हा निर्णय ज्याचा त्याचा.
#GlobalPhenomenon
اور ہم نے لقمان کو دانائی عطا کی تھی، (اور اُن سے کہا تھا) کہ اللہ کا شکر کرتے رہو۔ اور جو کوئی اللہ کا شکر اَدا کرتا ہے، وہ خود اپنے فائدے کے لئے شکر کرتا ہے، اور اگر کوئی ناشکری کرے تو اللہ بڑا بے نیاز ہے، بذاتِ خود قابلِ تعریف۔
﴿سورۃ لقمان ، ۱۲﴾
@TZM_Zamzama وہ کھیل وہ ساتھی وہ جھولے
وہ دوڑ کے کہنا آ چُھو لے
ہم آج تلک بھی نہ بھولے
وہ خواب سُہانہ بچپن کا
آیا ہے مجھے پھر یاد وہ ظالم
گزرا زمانہ بچپن کا
अगर चीन मुस्लिम बहुल देश होता तो तथाकथित राष्ट्रवादियों की राष्ट्रभक्ति जागी हुई होती। चीन के नाम ले लेकर अपने हमवतन मुसलमानों पर वैसी ही टिप्पणियां की जातीं, जैसे पाकिस्तान की करतूत पर की जाती हैं। हरकतें चीन करता, और जवाबदेही भारतीय मुसलमानों की तय की जाती। लेकिन चीन मुस्लिम बहुल नहीं है, इसलिए लाख घुसपैठ होने पर भी देशभक्ति नहीं जगेगी।
जज को धमकियां क्यों मिल रही हैं? जज के नाम की वजह से ही ना! धमकी देने वाले कौन हैं? सत्ताधारी दल के स्लीपर सेल ही हैं ना! सवाल यह है कि इन धमकियों पर मध्य प्रदेश का हाईकोर्ट और मदर ऑफ डेमोक्रेसी का सुप्रीम कोर्ट कोई एक्शन लेगा? यह सर्वविदित है कि जज ने जिन्हें सज़ा सुनाई उन्होंने कोई महान कार्य नहीं किया था, बल्कि एक इंसान की पीट-पीट कर हत्या की थी, और एक को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया था। उनके ट्रक में मौजूद मवेशियों को लूट लिया था। क्या ऐसे अपराधियों को अदालत सज़ा ना दे? जिस जज ने उन हत्यारे अपराधियों को सज़ा सुनाई है, उस जज के खिलाफ सोशल मीडिया पर नफ़रती गैंग ने मुहिम चलाई हुई है, कुछ फ्रिंज एलिमेंट्स ने जज का पुतला भी जलाया है। उस जज के खिलाफ वही टिप्पणी की जा रही हैं, जैसी टिप्पणियां आम मुसलमान पर की जाती हैं, और अब बात धमकी देने तक पहुंच गई है। सवाल फिर वही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को इसका स्वतः संज्ञान नहीं लेना चाहिए?
पिछले दिनों प्रधान न्यायधीश को इंग्लैंड में विरोध का सामना करना पड़ा था। जिस पर भारत ने ‘सख्त’ नाराज़गी का इज़हार किया था। लेकिन एक शख्स के हत्यारों को सज़ा सुनाने जज को धमकियां दी जा रही हैं, क्या भारत सरकार इस पर सख्त होगी? क्या दुनिया इस खामोशी को नहीं देख रही है? ये धमकीबाज़ क्या चाहते हैं? क्या ये गाय के नाम पर इंसान को मार देने, उसके सामान को लूटकर उसके साथ हिंसा करने का लाइसेंस चाहते हैं? क्या भारतीय न्याय संहिता में ऐसा भी कोई धारा है, जो इस तरह के क्रूर अपराध करने का अधिकार देती हो? मीडिया और फ्रिंज एलिमेंट्स की चालाकी देखिए! वह उन हत्यारों को गौरक्षक लिख रहा है, जिन्हें अदालत ने एक इंसान की जान लेने का मुजरिम माना है।
जज को धमकी देने वाला गैंग वही है जो मुसलमानों से कहता है कि यह देश कानून से चलेगा शरिया से नहीं। लेकिन अब वही गैंग जज पर हर एक तरीके से अशोभनीय टिप्पणी कर रहा है। वह जज के जेंडर पर टिप्पणी कर रहा है, जज की धार्मिक पहचान पर टिप्पणी कर रहा है। ऐसा भी नहीं है, कि जज के खिलाफ चलाए जा रहे इस नफ़रती कुंठा ग्रस्त अभियान की जानकारी पुलिस को नहीं होगी, सरकार को नहीं होगी। लेकिन सब देखकर अनजान बने रहना चाहते हैं, उनकी यह खामोशी इन फ्रिंज एलिमेंट्स को मौन समर्थन नहीं तो क्या है?