बड़ा बयान: "मैं वास्तव में मरने से पहले मरना नहीं चाहता।" 🔥
पत्रकार: अन्ना हज़ारे के आंदोलन के दौरान हमने आमिर खान, अनुपम खेर, अमिताभ बच्चन और कई अन्य कलाकारों को खुलकर बोलते देखा था।
पत्रकार : आपको डर नही लगता
प्रकाश राज : झूठ बोलने को डरना है यार, सच बोलने को क्या डरना, सच के साथ खड़ा होना डर नही है !
अब सोनम वांगचुक और CJP के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में कोई सामने क्यों नहीं आ रहा?
प्रकाश राज: "वे डरे हुए हैं। हम सच के साथ खड़े हैं। जो सही है, उसके समर्थन में खड़े होने से हमें डर नहीं लगता।"
दिल्ली पुलिस द्वारा CJP प्रोटेस्ट के दौरान हिरासत में लिए गए लगभग 3000 छात्र-छात्राओं तथा युवाओं और महिलाओं पर बर्बर लाठी चार्ज के बाद दोपहर 2 बजे से अब तक विभिन्न थानों और स्टेडियमों में जानवरों की तरह बिना खाना और पानी गिरफ्तार रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।
क्या छात्राओं और महिलाओं को इतने रात तक पुलिस स्टेशनों और स्टेडियम में रखना क़ानून का मख़ौल उड़ाना नहीं है?
मोदी जी अब और कितना नीचे गिरोगे ?
लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं है।
मैं दिल्ली पुलिस से मांग करता हूँ कि सभी युवाओं को तत्काल रिहा किया जाए और उनके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाए।
संसद मार्च की कवरेज के दौरान दोपहर करीब 1 बजे दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए Molitics के एडिटर इन चीफ को 6.5 (साढ़े छह) घंटे बाद रिहा कर दिया गया। इस दौरान Molitics की टीम लगातार उनकी जानकारी लेने का प्रयास करती रही, लेकिन टीम के अनुसार उनकी लोकेशन को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। सुनिए पूरी घटनाक्रम
Video - @neeraj_jhaa
#Molitics #DelhiPolice #PressFreedom #Journalism #SansadMarch #Media
जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र एक्शन गलत है-
रामपुर में #जौहर_यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलेगा. ये खबर सुनकर स्तब्ध हूँ. 2006 में बनी यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासन को अब होश आया है कि ये गलत तरीक़े से बनाया गया है. यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र वही चला सकता है जो शिक्षा के महत्व को नहीं समझता हो. इतना बड़ा कैंपस, उतनी शानदार यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलाने वालों के हाथ नहीं काँपेंगे? कोई भी विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है. जो बनने के बाद किसी एक व्यक्ति का नहीं रह जाता. हज़ारों स्टूडेंट जो वहाँ पढ़ाई कर रहे हैं उनका भविष्य तो अधर में चला जायेगा.
बेहतर तो ये होगा कि सरकार उसे अपने अधीन कर ले और चलाये यूनिवर्सिटी .
मगर उसे तोड़ना पूरी तरह से गलत है. सरासर गलत.
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार, इसकी स्थापना साल 2006 में हुई थी. परिसर 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें कई बिल्डिंग्स हैं. यहाँ विज्ञान, लॉ, शिक्षा, वाणिज्य, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी, फार्मेसी, नर्सिंग सहित पैरामेडिकल विज्ञान और एग्रीकल्चर से जुड़े कोर्स करवाए जाते हैं. इसके अलावा बैडमिंटन, शतरंज, कैरम, टेबल टेनिस जैसे इनडोर गेम और फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, लॉन टेनिस, वॉलीबॉल, घुड़सवारी, रस्साकशी के ग्राउंड है.
वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, करीब 90 टीचर 24 अलग-अलग विषयों को पढ़ाते हैं.
हेलो बाबा जी
@myogiadityanath
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी कर दीजिए
या
उसका नाम अपने नाम पर योगी आदित्यनाथ रख दीजिए, लेकिन उसे तोड़िए मत।
प्रभु श्री राम के वास्ते उसे मत तोड़िए।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के 38 भवनों को लेकर जारी किए गए ध्वस्तीकरण के आदेश की हम निंदा करते हैं।
शिक्षा के एक बड़े संस्थान को इस तरह निशाना बनाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह केवल इमारतों का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा, ज्ञान और हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
शिक्षा के मंदिरों के संबंध में ऐसे निर्णय शैक्षिक वातावरण और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। शिक्षा को राजनीति का माध्यम बनाने के बजाय उसे संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
#ruchivira
#saansad
#moradabad
#samajwadipartyofficial
#education
जो सत्ता विश्वविद्यालयों को चाहे बुलडोज़र से या प्रशासनिक दमन के ज़रिए मिटाना चाहती है, वह दरअसल केवल इमारतें नहीं गिराती, वह विचार, विवेक और भविष्य पर हमला करती है। शिक्षा से डरने वाली सत्ता ही विश्वविद्यालयों से डरती है, क्योंकि विश्वविद्यालय सवाल पूछना सिखाते हैं, सत्ता के सामने सच बोलने का साहस देते हैं और नागरिक चेतना का निर्माण करते हैं।
रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय के साथ जो कुछ किया जा रहा है, वह किसी एक संस्थान का मामला नहीं है। यह उस राजनीति का विस्तार है जो ज्ञान की जगह प्रचार, संवाद की जगह भय और शिक्षा की जगह अधीनता को स्थापित करना चाहती है। ऐसे हमलों के पक्ष में कोई तर्क, कोई बहाना और कोई राजनीतिक औचित्य स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सनद रहे !!!विश्वविद्यालय केवल डिग्रियाँ नहीं देते; वे लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखते हैं। जो राष्ट्र अपने विश्वविद्यालयों को कमज़ोर करता है, वह अपने युवाओं से उनका भविष्य और अपने संविधान से उसकी चेतना छीन लेता है।
जय हिन्द
जाहिलों की ही जमात एक यूनिवर्सिटी को बुलडोज़र से रौंद सकती है
अरे कुछ ग़लत है, एक्शन लेना है - तो सरकार टेकओवर कर ले. ढहाने से क्या मिलेगा?
सरकारी स्कूल बंद किए जायेंगे
यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलेगा
यह है इन भाजपाई-संघियों की युवाओं के प्रति ज़िम्मेदारी और गंभीरता
लानत है
नीति आयोग की रोपोर्ट के आधार पर 98000 सरकारी स्कूल में गर्ल्स टॉयलेट नही है?
डूब के मर जाने की बात है सभी सरकारों के लिए - सोनू शर्मा
वीडियो पूरा देखना शर्म को भी शर्म आजएगी !
All Muslim should Share It 📢
See the pain of a Muslim girl. This girl's sister goes to study every day. While coming home, some Hindu boys kidnapped her. When this girl complained about this to the police, being a Muslim, no action was taken.
"...राम मंदिर मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए, वे दूसरे विवाद खड़े करते हैं—चाहे वह जौहर यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग गिराना हो या यूनिवर्सिटी में नॉन-वेजिटेरियन खाने पर बैन लगाना हो..."
जौहर यूनिवर्सिटी गिराने के नोटिस पर बोले यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय
#Rammandir@kashikirai
आज़म का जौहर यूनिवर्सिटी।
अगर आज़म खान की जगह अमर सिंह नाम होता या अमर पांडेय नाम होता तो फिर ये यूनिवर्सिटी अवैध नहीं वैध होता।
जौहर की जगह दीन दयाल उपाध्याय नाम बदलकर यूनिवर्सिटी कर दो योगी जी लेकिन तोड़ो मत।
सिर्फ़ नक्शा ही तो पास नहीं था, नक्शा पास ना होने से यूपी में ना भूकंप आयेगा और ना ही सुनामी।
योगी आदित्यनाथ की मुस्लिमों से नफरत उनको तानाशाह बनने की ओर अग्रसर कर रहा है।
अगर आप लोकल बनारसी है तो आप देखेंगे गंगा घाट किनारे एक भव्य होटल बन रहा जो तय मानकों के ख़िलाफ़ बन रहा है लोकल बनारसी पंडित इसका विरोध कर चुके है, फिर भी सरकार अपने पूंजीपति मित्र को फायदा पहुंचा रही है।
आज़म खान अगर भाजपा में होते तो योगी आदित्यनाथ खुद इस यूनिवर्सिटी का फीता काटते लेकिन वो विपक्ष में है और मुस्लिम भी है।
इस भवन को तोड़ने में सरकार को लाखों करोड़ों खर्च होंगे इसको बनाने में भी करोड़ो रुपए खर्च हुए है योगी जी के मूर्ख सचिवों को ये सोचना चाहिए इसको तोड़ने से किसी को फायदा नहीं होगा इससे अच्छा सरकार इस भवन को किसी मुख्य काम में लगा दे कोई सरकारी दफ्तर ही बना दे।