यही हाल देश के अधिकांश लोगो का जिनके ऊपर थोडी सी भी जिम्मेदारियां हैं अपने परिवार की... टूट रहे हैं फफक रहे हैं फिर से खडे हो रहे हैं... टूटने से बचा लो
आज सुबह उठकर देखा तो पता चला कि रात में तेज बारिश हुई है फिर अखबार देखा तो पता चला कई जगह ओले पड़े हैं फिर एक किसान का ये वीडियो देखा जिसमें पूरी फसल बिछी हुई देखकर किसान रो रहा है...ये देखकर लगता है कि किसानों के आंसुओं को समझने में अब हम कितने कमजोर हो गए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के विज्ञापन की बहुत तारीफ़ हो रही है
पर ज़रा ठहरिए !
टीवी चैनलों के ज़हर को निशाना बनाना आसान है। लेकिन कई बार दबे पाँव इंडियन एक्सप्रेस जैसा अख़बार भी जो करता है वो भूलना नहीं चाहिए।
याद है ये हेडलाइन 👇
“Opposition Stands, Women’s Bill Falls”
इसमें उसने संसद में सीटों की तादाद बढ़ाने के लिए लाए गए बिल को ‘महिलाओं का बिल’ बता कर छापा और विपक्षी दलों को ग़लत रौशनी में दिखाने की कोशिश की!
‘मानव की स्मरण शक्ति बहुत छोटी होती है’ -इंडियन एक्सप्रेस ने इस विज्ञापन के ज़रिए उसी का लाभ लेने की कोशिश की है। वह जानता है कि पाठक और दर्शक उसके उस ‘ज़हरीले हेडलाइन’ को भूल चुके हैं।
टीवी चैनलों की शर्ट से अपनी शर्ट अधिक सफ़ेद बताना आसान है। जबकि ये भी मौक़े बेमौक़े अपने तरीक़े से गंद फैलाने में पीछे नहीं रहते हैं।
Screenshot & Video : Indian Express
पिछले सप्ताह हुई UGC-NET परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं।
NEET पेपर लीक के कुछ ही हफ्तों बाद अब खबरें आ रही हैं कि -
- UGC-NET परीक्षा से ठीक पहले 100 पन्नों की एक PDF प्रसारित हुई।
- यह PDF उस question paper setting की है, जो सिर्फ़ NTA के पास उपलब्ध होती है।
- PDF के लगभग 90 सवाल Sociology के असली प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं।
- वही प्रश्नपत्र ₹2.25 लाख में बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में बेचा जा रहा था।
- इसी नेटवर्क ने CSIR-NET, HTET और ADA जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया।
NEET और NET में बार-बार सामने आए घोटालों के बाद भी मोदी सरकार आंखें मूंदकर सो रही है, क्योंकि लाखों छात्रों की रात-रात जागकर की गई सालों की मेहनत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।
सारा देश जानता है कि प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से किसी भी तरह की जवाबदेही या कार्रवाई की उम्मीद बेकार है - न जांच होगी, न छात्रों को न्याय मिलेगा।
बदलाव का एकमात्र औज़ार हमारी सम्मिलित आवाज़ है - देश भर के छात्रों की गूंज, जो भारत में शिक्षा revolution लाकर रहेगी।
चंपत राय के नेतृत्व में राम मंदिर में चोरी हुई,
चम्पत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया, और अब इस्तीफा मंजूर कर लिया गया।
लेकिन कार्यवाही क्या हुई - जीरो
क्या कोई गरीब ऐसा करता तो क्या होता?
बुलडोजर चलता?
इनकाउंटर होता?
तड़ीपार किया जाता?
लेकिन ऐसा क्यों नहीं हुआ?
मुद्दे कोई पेड़ पर नहीं उगते
इथेनॉल इतना बड़ा मुद्दा है पर विपक्ष सोया या पता नहीं कहां खोया है। इतना ज़रूर है कि वह भी सोशल मीडिया पर लिख रहा है। अच्छी बात है लिखना चाहिए। वैसे लिखने का काम तो बुद्धिजीवी/पत्रकारों/विशेषज्ञों का भी है और वे जम कर लिख भी रहे हैं। लेकिन सड़क पर उतर कर पीड़ित जनता को जोड़ने और आवाज़ उठाने का काम विपक्षी दलों का होता है। कहाँ हैं वो?
विपक्षी पार्टियां गाहे बगाहे पत्रकारों को उनकी ज़िम्मेदारी समझाने तो आ जाती हैं लेकिन अगर विपक्षी पार्टियों की ज़िम्मेदारी उनको समझाओ तो वे सरकार से ज़मीनी स्तर पर लड़ने की बजाय कमी बताने वाले पत्रकारों से ही लड़ने, ट्रोल करने आ जाती है। यही आसान भी है।
अब इसी पोस्ट पर देखिएगा 😌
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताज़ा प्रोविजनल डेटा के मुताबिक़, पिछले साल के मुकाबले इस साल जून में पेट्रोल की खपत 7% और डीज़ल की खपत 5.52% बढ़ी है।
जब इथेनॉल की वजह से माइलेज गिरेगा तो उतनी दूरी जाने के लिए पेट्रोल डीज़ल अधिक भराना ही पड़ेगा!
बचा लो तेल आयात में विदेशी मुद्रा!
चोर है तो क्या, सादगी से रहता है। सब ईश्वर देख लेगा।
लुटेरा है तो क्या, परिवार ही नहीं है। सब देश के लिए कर रहा है।
हत्यारा है तो क्या, सब धर्म को मजबूत करने के लिये कर रहा है।
मूर्ख है तो क्या, फोटू अच्छी खिंचवाता है।
ऊपर के सारे अवगुण हैं तो क्या, अब्दुल को तो टाइट रखा है।
आप मल्लिकार्जुन खड़गे है
2022 से आप कांग्रेस (INC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और 2020 से राज्यसभा सांसद भी हैं, 2021 से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।
अब आइए, केंद्र सरकार की MPLADS वेबसाइट के आंकड़ों के आधार पर आपके कार्यकाल में हुए कार्यों का विश्लेषण करते हैं।
एक thread 🧵
आइए मिलते हैं प्रियंका गांधी वाड्रा से , वह वर्ष 2024 से केरल के वायनाड लोकसभा क्षेत्र की सांसद हैं।
आइए करतें हैं एमपीएलएडीएस (MPLADS) वेबसाइट के आधार पर उनके कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का अवलोकन,
थ्रेड 🧵
आज मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने दिल्ली सहित देश के दर्जनों शहरों में छात्रों के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की! कितने चैनल पर यह प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखी?
51 साल पहले लगे इमरजेंसी के मुद्दे पर आयोजित बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर टीवी पर चली!
फिर पूछा जाता है विपक्ष कहाँ है! और ये सवाल वे टीवी वाले भी उठाते हैं जहाँ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक नहीं चलती है।
और विपक्ष के प्रवक्ता इसे सुन कर चुप भी रहते हैं! कुछ विपक्ष के प्रवक्त भी टीवी डिबेट में पार्टी से अधिक अपनी ब्रांडिंग के लिए जाते हैं।
यूपी में फर्रुखाबाद, गोला गोकर्णनाथ और गाज़ीपुर को (लहुरी यानी छोटी) छोटी काशी कहते हैं। राजस्थान में जयपुर और हिमाचल में मंडी जिला को भी छोटी काशी कहा जाता है। इसके अलावा यूपी में प्रयागराज और एमपी में अमरकंटक को तीर्थराज कहते हैं। क्या ऐसी अन्य स्थानों की समानताएं आप जानते हैं?
90 के दशक में जनसत्ता में एक खबर छपी। प्रभाष जी संपादक थे।
आडवाणी जी पुत्रवधू ने (जो तब परिवार से अलग हो चुकी थीं) आरोप लगाया कि सोमनाथ से अयोध्या यात्रा के दौरान जो चांदी की मूर्तियां आडवाणी जी को भेंट की गई थी, आडवाणी परिवार ने उन्हें पिघला कर कटलरी बनवा ली।
जनसत्ता और प्रभाष जी की बड़ी आलोचना की गई कि उन्हें व्यक्तिगत आक्षेपों को अखबार में जगह नहीं देनी चाहिए थी।
आंदोलन से लेकर निर्माण तक लगातार राममंदिर से जुड़े चंदे/चढ़ावे पर जिस तरह की खबरे आती रहीं उसे देखकर क्या लगता है, जनसत्ता को खबर छापनी चाहिए थी या नहीं?
अब NDA सरकार के अंदर भी गड़बड़ी अलग अलग स्वरूप में सामने आने लगी है। आप इसे “लॉ ऑफ़ एवरेज” भी कह सकते हैं।
चंदा घोटाला, नीट पेपर लीक, सीबीएसई मार्क्स मेस,जमीन घोटाला,राजेश एक्सपोर्ट स्कैम, के बाद के कर कई मामले सामने आ रहे हैं!
कुछ मामले आने की कतार में है जिनमे कुछ बड़े मामले बताए जा रहे हैं!
हालाँकि सरकार ने अक्काउंटिबिलिटी तय करने और एक्शन लेने की परंपरा को बंद कर दिया है लेकिन इन सब मामलों के एक के बाद सामने आने के बाद सरकार के इक़बाल और नैरेटिव पर जरूर गहरा असर हुआ है!
वहीँ टीवी मीडिया अभी भी दूसरे दलों के नेताओं के तोड़ने के ओपरेशन को मास्टरस्ट्रोक बताने में ही लगी है और समाज देश ले लिए सबसे अहम खबर/जिम्मेदारी बताने में लगी है!
Unpopular Opinion
एग्जाम सिस्टम में बहुत खामी है। पेपर लीक बड़ा मुद्दा है। मार्किंग सिस्टम से लेकर बहुत पारदर्शिता की जरूरत है। इसे ठीक करने को आवाज उठाएँ।
लेकिन एग्जाम सेंटर पर तय समय से नहीं पहुँचने के कारण एग्जाम में नहीं बैठने देने के फैसले का विरोध नहीं कर सकते हैं।
समय से एग्जाम प्रोसेस को लागू करने के लिए कट ऑफ समय तय होगा ही । अगर कट ऑफ समय के बाद एंट्री देने का ट्रेंड शुरू होगा तो स्टूडेंट्स अंतिम समय तक आते रहेंगे। फिर किसे माना करेंगे।
सभी स्टूडेंट्स में अंदर जाने के बाद फाइनल प्रोसेस के लिए समय चाहिए। हमारे समय से लेकर अभी तक स्टूडेंट्स और परिजन तो दो घंटा पहले सेंटर पहुंच जाते हैं।
इनकी कोई जेनुइन प्रॉब्लम हो सकती है देर से पहुँचने की लेकिन वह कारण अगर पर्सनल है तो फिर क्लेम नहीं कर सकते हैं। कई स्टूडेंट्स का एग्जाम बीमार होने,कुछ अन्य दिक्कत होने के कारण भी छूटता है। तब तो वे भी क्लेम करेंगे। ऐसे स्टूडेंट्स के लिए निश्चित सहानुभूति रखें। लेकिन इसके लिए नियम में बदलाव करने से बाक़ी स्टूडेंट्स पर असर होगा। पूरा एग्जाम प्रोसेस बाधित होगा।