Since the “ceasefire” in the Gaza Strip began in October last year, Israeli attacks have killed at least 1,257 Palestinans and wounded 4,131 others in near-daily attacks in the occupied territory.
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रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा - महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ।
सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं?
2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के।
केशव मौर्य सिर्फ़ मदरसों पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि उनकी कुर्सी दरअसल एक स्टूल है।
जिन्हें अंग्रेज़ों से मोहब्बत हो, उन्हें मदरसे कैसे पसंद आएँगे? मदरसे अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ साज़िशों और आज़ादी की जद्दोजहद के मरकज़ थे। उन्होंने बेशुमार मुजाहिदीन-ए-आज़ादी पैदा किए, जबकि सावरकर अंग्रेज़ों को माफ़ीनामे लिख रहे थे।
आज़ाद भारत का पहला दहशतगर्द गोडसे किसी मदरसे का तालीब-ए-इल्म नहीं था। लेकिन भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद मदरसे में पढ़े थे। मुंशी प्रेमचंद और राजा राम मोहन राय ने भी मदरसे में तालीम हासिल की थी।
दस्तूर का आर्टिकल 30 हर अक़ल्लियती बिरादरी को अपने तालीमी इदारे क़ायम करने और चलाने का हक़ देता है। ये बेहद शर्मनाक है कि एक दस्तूरी ओहदे पर बैठा शख़्स ऐसी ज़हरीली ज़बान इस्तेमाल करे।
मगर जब कुर्सियाँ कम हों, तो स्टूल वालों को अपनी सियासी अहमियत बनाए रखने के लिए ज़हर उगलना ही पड़ता है।
अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे सतीश महाना यह कहें कि "जिन्होंने राम मंदिर का विरोध किया, अगर उन्होंने चंदा दिया है तो रसीद दिखाएँ, तब देखेंगे कि उनका पैसा चोरी हुआ या नहीं," तो सवाल सिर्फ़ एक बयान का नहीं, बल्कि विधानसभा की गरिमा का है।
क्या अब कोई चुनी हुई विधानसभा का सदस्य अपनी आस्था के आधार पर चोरी को चोरी भी नहीं कह सकता? क्या अब हत्या को हत्या, डकैती को डकैती कहने से पहले लोगों को अपने मज़हब का हलफ़नामा देना होगा?
फिर यही उसूल वक़्फ़ बोर्डों पर क्यों लागू नहीं होता, जहाँ ग़ैर-मुस्लिमों को ज़बरन शामिल किया जाता है? हिन्दू एंडोमेंट बोर्डों को मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा औक़ाफ़ को क्यों नहीं? और जिस पार्टी का लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है, उसे तीन तलाक़ जैसे असंवैधानिक क़ानून (जो सिर्फ़ मुसलमानों से जुड़ा है) बनाने का अधिकार कैसे मिल जाता है?
अगर उसूल एक है, तो सब पर बराबर लागू होना चाहिए।
C’est la première fois de ma vie que je vois un fleuve de sang sous mes yeux… Et pourtant, on continue à scroll comme si ce génocide était devenu légitime
Tomorrow is a funeral of 112 Palestinians killed by israel in one massacre,
308 were killed in this massacre, only 112 were pulled from the rubble.
This is Gaza.
There is no coverage in international media about the attacks on Muslims in Nepal.
Hindu extremist mobs have attacked mosques, destroyed Muslims' properties and physically assaulted them.
वंदे मातरम् बिल: संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ, चुनावी राजनीति तथा जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश।
हमें किसी के "वंदे मातरम्" पढ़ने या गाने से कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में किसी दूसरे को साझी नहीं ठहरा सकता। "वंदे मातरम्" के कुछ हिस्से इस्लामी आस्था के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए किसी भी मुसलमान को इसे गाने या स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। किसी भी नागरिक को उसके धार्मिक विश्वास के विरुद्ध किसी नारे, गीत या विचार को अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
आज देश बेरोज़गारी, महंगाई, आर्थिक चुनौतियों, किसानों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में विवादास्पद विषयों को प्राथमिकता देने के बजाय संसद को जनता के वास्तविक और महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
#VandeMataramBill
#ReligiousFreedom
#ConstitutionOfIndia
#Article25 #Article19
#ArshadMadani
PM Modi and Amit Shah - you cannot threaten Gen Z into silence.
First you broke their bones. Now you are filing FIRs and taking down their accounts.
You are India’s past. Be careful about how you treat India’s future.
A muslim-owned repair shop in Nepal's Sunsari district was allegedly set on fire by Hindutva mobs on July 29. Chants of "Jai Shri Ram" (Victory to Lord Rama) can be heard in the video. Several other Muslim-owned businesses were also looted and vandalised.
A curfew was imposed along with road bloackades in parts of Nepal’s eastern Sunsari district on 28 July following clashes between Muslim and Hindu communities. Violence erupted on July 25 over religious symbols, leaving one person dead and several injured, according to local media