#NoTetBeforeRteAct
माननीय श्री राजनाथ सिंह जी रक्षा मन्त्री भारत सरकार से भेंट करके टेट के प्रकरण पर विस्तृत जानकारी दी ।माननीय जी को वार्ता के दौरान स्मरण कराया कि जब वर्ष 1998 में उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की 36 दिन की हड़ताल और 167 शिक्षकों की सेवा समाप्ति के बाद भी जिस समस्या का समाधान नहीं हुआ था,उसका समाधान आपने उत्तर प्रदेश में अपने मुख्य मंत्रित्व काल में किया था,जिसके चलते आज उत्तर प्रदेश के शिक्षक केन्द्र के समान वेतनमान लेते हैं ।
आज भी प्रधानमन्त्री जी के नेतृत्व में संसद द्वारा क़ानून पारित करा कर,आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता सम्बन्धी अन्याय को समाप्त किया जा सकता है ।देश के शिक्षकों को आप पर पूर्ण विश्वास है ।मेरे साथ teachers federation of india के उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी भी वार्ता में उपस्थित रहे ।
#NoTETbeforeRTEact
*IAS, IPS, IFS ,IRS,IES की exam यूपीएससी के माध्यम से भारत में आयोजित होती है। तो IMS (Indian Medical Services) के साथ-साथ IJS (Indian Judiciary Services) या IAS(J) की परीक्षा भी होनी चाहिए। जिससे सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ एक समान न्याय भी मिलें। और जो पूर्व से नियुक्त अधिकारीगण/ न्यायधीश इन परीक्षाओं को पास किए बिना नियुक्त हैं। उन्हें भी 2 वर्ष के भीतर इस परीक्षाओं को पास करना चाहिए। अन्यथा उन्हें भी शिक्षकों की भाँति अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी क्या?
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@yadavakhilesh विभागीय नियमों के अनुकूल 25-30 वर्ष पूर्व में नियुक्त शिक्षकों से वर्तमान में एक और परीक्षा उत्तीर्ण कराने की अनिवार्यता शिक्षकों के साथ अन्याय है ।
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
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#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
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न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता जी (Deepanker Datta) ने हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज बनने के लिए कोई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
भारत में उच्च न्यायपालिका (HC/SC) के जजों की नियुक्ति Collegium प्रणाली से होती है, न कि किसी प्रतियोगी परीक्षा से। बार से practicing advocate को सीधे हाईकोर्ट जज बनाया जा सकता है।
न्यायमूर्ति दत्ता जी 1989 में LLB पास कर advocate बने, ~16 साल वकालत की (कलकत्ता HC सहित)। 2006 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया (बार से elevation)। 2020 में बॉम्बे HC के Chief Justice और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
यह सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है।
#NoTetBeforeRteAct
शिक्षकों की EL जैसी समस्याओं पर टीचिंग पीरियड का बहाना बनाने वाले अधिकारी,आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपी गई tet की अनिवार्यता समाप्त करने एवं ओपीएस बहाल करने जेसे मुद्दों पर चुप्पी साधने वाली सरकारों को भीड़ बढ़ाने के लिये ही शिक्षकों की याद आती है ।स्कूलों तक किताबें पहुँचाने में कोताही बरतने वाले अधिकारी शिक्षकों को भीड़ में शामिल कराने के लिए बसों की व्यवस्था में कोई कोताही नहीं बरतते हैं |हम प्रधानमन्त्री @narendramodi ji अनुरोधकरतेहैं कि अधिकारियों के आदेश पर विभिन्न जयन्ती,पुण्यतिथि एवं उद्घाटन कार्यक्रम में भीड़ के रूप में शोभा बढ़ाने वाले इन शिक्षकों की समस्याओं का संज्ञान लेने की कृपा करें |
“यूनिवर्सिटी और हमे कानो कान खबर नहीं मिली”
“मेरी समझ में नहीं आया, ऐसी क्या जल्दी थी”
“अंबेडकर और सावरकर भी ऐसा क़ानून पसंद नहीं करते”
“सरकार को इसको कैसे भी बदलना होगा”
भारत के सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी JNU की वाईस चांसलर ने UGC पर आश्चर्य जताया। 🔥🙏