Men's energy was never meant to be owned by a woman — ancient or modern.
But one lone voice notes in modern India this ends in Fake 498A, DV cases, alimony & suicide.** ⚠️💔
#MGTOW#MensRights#RedPillIndia💊🔥
@ibmindia20 ज़्यादा ख़ुश होने की ज़रूरत नहीं है जिन देशों का नाम लिया एक के भी बुरे दिन नहीं आए ह तुम लोगो बस पाकिस्तान का नाम सुन जाये ताली पीटने लगते हो पता कुछ है नहीं वर्ल्ड पॉलिटिक्स का
जीवन के उस पड़ाव पर हूं..!
जहां फोन बजता ही नहीं है। कोई मैसेज नहीं। कोई कॉल नहीं। कई-कई बार तो ऐसा होता है कि फोन ले जाना ही भूल जाता हूं। अगर कभी फोन बज भी जाए,वो बस लोगों के मतलब के लिए होता है लेकिन मैं मदद करने से कभी पीछे नहीं हटता हूं, निस्वार्थ भावना से मदद कर देता हूं।
थोड़ी सी अदा दिखाने वाली
थोड़ा मुझपे हक़ जताने वाली
बिन बात भी रूठ जाने वाली
पर मेरे लिए मान जाने वाली
मुझे देख कर मुस्कुराने वाली
शरारतों से मुझे सताने वाली
मेरे हाल को समझ जाने वाली
कभी डांट कर समझाने वाली
चाहे हो सारी दुनिया उसकी तो भी
मुझे अपनी दुनिया बनाने वाली💗
~Sam✨
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दृश्यता खो गई बस नयन रह गए ,
डोर सारी कटी बस वचन रह गए ।
धैर्यता की परीक्षाएं इतनी हुईं ,
बस विकल्पों का बन के चयन रह गए ।
भाग्य समिधा जली प्रेम आहुति हुई ,
शेष अर्वट बची और हवन रह गए ।
___ वारिद्री 🕊️
गहन यामिनी में जब अंतिम अग्निकण
भी कर देगा शीत के समक्ष समर्पण ,
न कोई प्रबंध होगा, न यात्रा,न ही कोई
मुहूर्त,
सर्वत्र होगा मौन का मंत्रोच्चार।
तब...
मेरे अक्षों के तट पर कितने ही
स्वप्न करेंगे कल्पवास,
किसी ब्रम्हमुहूर्त में हो जाएगा , वास्तविकता से इनका संगम।
#माघपन्ती 🕊️
बड़ी ही शर्मनाक - बेहद दुखद!! 💔
जब सोशल मीडिया पर या जब भारतीय पश्चिमी देशों में जाते हैं और दुनिया भर में हमें नस्ल के आधार पर निशाना बनाया जाता है, तब हमें बहुत बुरा लगता है।
लेकिन अपने ही देश में, अपने ही नागरिकों को नस्ल, रंग और शक्ल-सूरत की वजह से अपमानित किया जाना, गालियाँ दी जाना और हिंसा का शिकार बनाया जाना -यह उससे कहीं ज़्यादा डरावनी और शर्मनाक सच्चाई है।
हमें बाहर से आकर हमें बाँटने वालों की जरूरत नहीं है। सच्चाई यह है कि हम खुद एक बँटा हुआ समाज बनते जा रहे हैं। हमारे बीच ही वे लोग मौजूद हैं, जो हमें रंग, चेहरे, बोली और पहचान के नाम पर बाँट रहे हैं। बाहर से किसी दुश्मन की जरूरत ही नहीं रह गई।
अंजेल चकमा की मौत हमारे समाज के सामूहिक विवेक को झकझोर देने वाली घटना है। दोषियों को सजा मिल भी जाएगी, लेकिन समाज के भीतर फैली इस घृणा और मानसिकता का इलाज कहीं ज्यादा मुश्किल और ज्यादा जरूरी है।
मलाल है मगर इतना मलाल थोड़ी है
ये आँख रोने की शिद्दत से लाल थोड़ी है
बस अपने वास्ते ही फ़िक्र-मंद हैं सब लोग
यहाँ किसी को किसी का ख़याल थोड़ी है
मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो
हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है
🖤🫶🏻
- Parveen Shakir
सरकार कार्रवाई के पैरामीटर तो बताए?
15 अक्टूबर को जैसलमेर में एक बस आग का गोला बन गई। 28 लोग मारे गए। बस का मॉडिफिकेशन गलत तरीके से पाया गया। रजिस्ट्रेशन गलत तरीके से हुआ। सुरक्षा उपायों का घोर उल्लंघन हुआ। सरकार ने एक डीटीओ पर कार्रवाई की।
28 अक्टूबर को जयपुर में एक बस में करंट से आग लग गई। दो लोग मारे गए। अनेक झुलस गए। बस बाहर से आई थी। बिना रोड टैक्स, अनेकों चालाना और ढेर सारी अनियमितताओं के साथ। सरकार ने तीन-चार आरटीओ पर हल्की-फुल्की कार्रवाई करके बात को ठंडा-मीठा कर दिया।
तीन नवंबर को जयपुर में नशे में धुत एक डंपर चालक ने 17 गाड़ियों को टक्कर मारते हुए 14 लोगों की जान ले ली। सरकार ने एक एसआई और दो-तीन पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिखावटी कार्रवाई कर दी।
मरने वाले तमाम आम लोग थे। किसी की कोई बड़ी पहचान नहीं थी। मरने वाला कोई बड़ा आदमी नहीं था। सरकार बड़े लोगों के अलावा सभी को कीड़े-मकोड़ों से ज्यादा नहीं समझती।
अब आइए, मोदी की रैली की बात करते हैं…
बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली हुई। रैली के सरकारी प्रसारण संबंधी एक मामूली सी तकनीकी चूक हुई, जिसका शायद तकनीकी लोगों के अलावा किसी को पता भी नहीं चला होगा। लेकिन वह सरकार की नजर में एक बड़ी लापरवाही और गंभीर चूक मानी गई।
इस कथित बड़ी घटना के लिए रातोरात एक सीनियर आईएएस अर्चना सिंह को एपीओ कर दिया गया। बताया जाता है कि अर्चना सिंह ने अपने मातहत लोगों को बचाने के लिए यह ‘अपराध’ अपने सिर लिया। अर्चना सिंह को शायद आज तक पोस्टिंग नहीं दी गई है।
अब बताइए, इस तकनीकी चूक से कोई हादसा नहीं हुआ। किसी की जान नहीं गई, कोई परिवार नहीं उजड़ा, कोई बच्चा अनाथ नहीं हुआ, कोई अपंग नहीं हुआ, किसी की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं हुई, सरकार की प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आई, इसके खिलाफ कोई धरना-प्रदर्शन नहीं हुआ, सरकार को कोई मुआवजा नहीं देना पड़ा, कोई कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं बनी लेकिन फिर भी कार्रवाई शीर्ष स्तर पर हुई।
कार्रवाई में यह भेदभाव आपको समझ में आता है क्या?
कार्रवाई में यह भेदभाव आपको पचता है क्या?
कार्रवाई का उद्देश्य क्या होता है?
यही ना कि जिम्मेदारों में, जनता में यह संदेश जाए कि सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी और लापरवाही बरतने वालों को खमियाजा भुगतना पड़ेगा? तो फिर एक तकनीकी गलती, जिसका जनता पर जीरो इंपैक्ट हुआ हो, उसके लिए सीनियर आईएएस जिम्मेदार और जहां बड़ी संख्या में जिंदगियां खत्म हो रही हों, परिवार के परिवार उजड़ रहे हों, उसके लिए ये आरटीओ, एसआई और कांस्टेबल जिम्मेदार?
ऐसा नहीं चल सकता। अगर सरकार गलतियों-चूकों को लेकर गंभीर है तो हर मामले में शीर्ष स्तर पर ही कार्रवाई करे फिर। ऐसी दिखावटी कार्रवाइयों से न तो जिम्मेदारों में जिम्मेदारी का कोई भाव सरकार जगा पाएगी और न ही जनता में कोई संदेश जा पाएगा।
अब राजस्थान की जनता 1980 के दशक वाली जनता भी नहीं रही है।
@BhajanlalBjp@RajCMO@narendramodi@PMOIndia@arvindchotia
@arvindchotia बाक़ी हमारे देश में ये देखना अच्छा लगता है की कैसे 10-12 लोगो के लिए हुए निर्णय जनता को कई सारे धुरियो में बांट देते है की सारा प्यार , भाई चारा ,कॉमी एकता सिर्फ एक ढकोसला लगता है और सिर्फ जाति ही जाती दिखती है पता नहीं कब साथ में घूमने वाला परम मित्र विजातीय हो जाये ।
@arvindchotia काफ़ी straight forward सवाल दाग दिया ह क्युकी कुछ लोग तो अभी असमंझस में है की इस निर्णय को कैसे अपनी राजनीति और समीकरण के हिसाब से use करना है बाक़ी कुछ जल्दबाज़ी में सहानुभूति दिखा रहे जिनोने धनकड़ जी को कभी जाट नेता का तमगा नहीं दिया ताकि उनकी नेतागीरी बची रहे
सीकर में दुनिया का सबसे नीचा पुल...
इतना नीचा और सबसे पतला पुल आपने दुनिया में कहीं नहीं देखा होगा। यह राजस्थान का सीकर शहर है। शहर के बीच से गुजरने वाली बरसाती नदी के बीचोंबीच बने इस पुल से होकर लोग आसानी से रास्ता पार कर लेते हैं। इस अनूठे पुल को पार करने वालों का हौसला छतों/बालकनियों पर खड़े लोग बढ़ाते हैं और उनके वीडियो भी बनाते हैं। बहुत ही सुन्दर दृश्य उभरता है यहां। बाद में इन वीडियो में गाने डाल डाल कर पुल पार करने वालों का शौर्य गान किया जाता है।
सीकर के लोग इस पुल को वैश्विक धरोहर घोषित करने की मांग भी कर रहे हैं ताकि इसे संरक्षित किया जा सके। आने वाले समय में दुनिया भर से पर्यटक इस पुल को देखने के लिए सीकर आएंगे तो यहां के लोगों का रोजगार भी बढ़ेगा। राजस्थान का पर्यटन विभाग इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दे तो आने वाले समय में अच्छे नतीजे भी मिल सकते हैं।
सीकर के व्यापारियों में उत्साह की लहर है। इनको समझ में आ गया है कि भविष्य में यहां पर्यटक ही पर्यटक होंगे और उनकी दुकान ग्राहकों से भरी होंगी। बस, इंद्रदेव की मेहरबानी लगातार होती रहे।
पिछले दो तीन दिन में @narendramodi जी ने प्रशंसा बटोरी थी वो आज एक ही झटके में ख़त्म हो गई जब इतना बड़ा फ़ैसला ले लिया था तो #ceasefire क्यों हमेशा की तरह संयम रख लेते @arvindchotia@kaankit