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वक्फ बोर्ड की ज़मीनों के बाद अब गुरुद्वारों की ज़मीनों पर भी सरकार की नज़र होने की चर्चा और आशंकाएँ तेज़ हैं।
अगर यह सच है, तो यह केवल एक समुदाय का नहीं, बल्कि सभी धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों का सवाल है @INCPunjab@SGPCAmritsar
हज़रत इमाम हुसैन जी का त्याग और बलिदान हमें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहने का हौसला देता है।
मुहर्रम का दिन हमें उनके बताए रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है, ताकि दुनिया में इंसानियत को कायम रखा जा सके।
@abpmajhatv पवनराजे निंबाळकर यांच्या हत्येप्रकरणी न्यायासाठी लढताना तुम्हाला उद्धव बाळासाहेब ठाकरे आणि शिवसेनेनेसाथ दिली. आज सत्तेत बसलेल्या लोकांच्या काळात या प्रकरणातील सर्व आरोपी निर्दोष मुक्त झाले आहेत.आता देखील तुम्ही तुमच्या वडिलांच्या कथित खुनींशी संबंधित राजकीय शक्तींना साथ देणार का
@abpmajhatv देश में राजनीतिक खरीद-फरोख्त चल रही है, संविधान की धज्जियाँ उड़ रही हैं।
विपक्ष को लोकसभा से इस्तीफा देकर सड़कों पर जनता के बीच जाना चाहिए।
चुपचाप बैठे रहने से लोकतंत्र अपनी आखिरी साँस ले रहा है।
उठो, वरना दौलत-ताकत का खेल देश खत्म कर देगा!
देश में राजनीतिक खरीद-फरोख्त चल रही है, संविधान की धज्जियाँ उड़ रही हैं।
विपक्ष को लोकसभा से इस्तीफा देकर सड़कों पर जनता के बीच जाना चाहिए।
चुपचाप बैठे रहने से लोकतंत्र अपनी आखिरी साँस ले रहा है
उठो, वरना दौलत-ताकत का खेल देश खत्म कर देगा@RahulGandhi@yadavakhilesh@rautsanjay61
@sayani06 https://t.co/gLD1nKEZzt
Politics has a long memory.Those who once mocked Hindutva and relentlessly targeted the BJP during the Bengal elections are now being reminded of their own words Changing political equations may be easy, but escaping one's past statements is not
@LutyensMediaIN@iamyusufpathan@IrfanPathan बहुत बड़ी बड़ी बातें करते है टीवी पर बैठ कर एक मस्जिद के इमाम की औलाद है लेकिन इनका दीन धर्म ईमान सिर्फ पैसा है लोगों को बड़ी बड़ी नसीहत देने में पूरी फॅमिली का कोई जवाब नहीं लेकिन इनकी परवरिश सही होती तो ये @AITCofficial को धोका नहीं देते
Tributes to India’s first Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru Ji on his death anniversary 🙏 A leader whose vision and contribution continue to inspire generations.
“हाथ कंगन को आरसी क्या,
पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या!”
PIB के अधिकृत बयान के अनुसार, आज से ठीक बारह साल पहले 26 मई 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभाली थी, उस दिन भारतीय basket का कच्चा तेल $108.05 प्रति बैरल था और डॉलर-रुपया exchange rate 58.59 रुपए थी। उस समय पेट्रोल ₹71.51 और डीज़ल ₹56.71 प्रति लीटर मिल रहा था।
आज कच्चे तेल की कीमत $99 प्रति बैरल से कम है, लेकिन पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़कर क्रमशः ₹102.12 और ₹95.20 प्रति लीटर हो गए हैं।
यानी कच्चा तेल सस्ता हुआ, लेकिन पेट्रोल करीब 42.8 % और डीज़ल करीब 67.9 % महँगा हो गया।
हर अर्थशास्त्री जानता है कि पेट्रोल-डीज़ल की महँगाई का असर हर क्षेत्र पर पड़ता है। परिवहन से लेकर खाद्य वस्तुओं तक, आम आदमी पर महँगाई की मार बढ़ती है। इसके बावजूद सरकार की मुनाफ़ाख़ोरी जारी है।
सवाल सीधा है कि जब कच्चा तेल सस्ता हुआ, तो पेट्रोल-डीज़ल महँगा क्यों?
जनता को राहत क्यों नहीं?
नरेंद्र मोदी बहुत नाराज हैं 😡
सरकार ने सिर्फ 11 दिन में पेट्रोल-डीजल के दाम पूरे 8 रुपए बढ़ा दिए.
मोदी ने इसे शासन चलाने की नाकामयाबी का सबूत बताया है.
मोदी ने प्रधानमंत्री से पेट्रोल-डीजल के जो दाम बढ़े हैं, उसे वापस लेने की मांग रखी है.
क्या मोदी की बात सुनी जाएगी 🤔