अपनी मंजिल को भुला कर जिया तो क्या जिया, है दम तुझमे तो उसे पा कर दिखा, लिख दे खुन से अपनी कामयाबी की कहानी, और बोल उस किस्मत को है दम तो मिटा कर दिखा।
मैंने पहले भी कहा था कि कुछ आंदोलनजीवी चाहते थे कि भूख हड़ताल में ही सोनम वांगचुक की मौत हो जाए। ताकि आंदोलन और भड़के और भारत को नेपाल और बांग्लादेश बना कर चोर दरवाजे से सत्ता को हथियाया जा सके। कल सोनम वांगचुक ने जो खुलासा किया वो इसी तरफ संकेत करता है।
याद रहे योगेंद्र यादव, राहुल गांधी के सलाहकार हैं, उन्होंने भी सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म होने पर निराशा जताई थी। और उन्होंने यह भी कहा था कि भारत अब संसद से या चुनावो से नहीं चलेगा, सड़क के आंदोलन से चलेगा।
झारखंड में छात्रों के समर्थन में आयोजित रैली के दौरान Republic TV के रिपोर्टर ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा से पूछा कि वह पिछले 14 दिनों से कहां थीं।
जवाब देने के बजाय नेहा बोरा ने पत्रकार को शेमलेस कहा।
पत्रकार को निशाना बनाया गया और नेहा बोरा की टीम ने यहां भी हंगामा करने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनकी गैरमौजूदगी और मीडिया के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अगर किसी ने आज तक इलीगल माइनिंग मशीन के साक्षात् दर्शन न किए हों, तो आँखें फाड़ कर इस वीडियो में देख लीजिए!
कोटपूतली में खनन माफिया अरावली की पहाड़ियों को ऐसे चबा रहा है जैसे कोई मुफ़्त का गुटखा हो, और इधर भजनलाल जी का सुशासन और प्रशासन कुंभकर्णी नींद का नया रिकॉर्ड बनाने में मस्त है।
BREAKING | झारखंड: JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार और छात्रों के बीच दूसरे दौर की वार्ता शुरू हो गई है। छात्रों का 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर सरकारी प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहा है। प्रदर्शन फिलहाल जारी है।
पहले दौर की वार्ता शुक्रवार रात हुई थी, जिसमें चार मंत्री और एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बनी थी।
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तरनतारन, अमृतसर में हिंदू विहीन हो गए थे गाँव, देखिए कैसे अपने ही देश में शरणार्थी बने हजारों लोग
@RitikaChandola
"हम लोग को आजादी नहीं चाहिए, पहले ही आजाद हैं"
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प्रोटेस्ट हाईजैक करने पहुँची वामपंथन को मंच से भी कर दिया था रवाना
@ritikachandola की ग्राउंड रिपोर्ट
मेरे झारखंड जाने का छात्रहित में इतना व्यापक असर होगा, उम्मीद नहीं थी।
अचानक सबको झारखंड के छात्रों की चिंता सताने लगी है।
अच्छा है 😊
#TapWithAmanChopra
जो बिना अनुमति के कानून तोड़ कर संसद को उखाड़ फेंकने और भारत को नेपाल बनाने वाली भीड़ के साथ, पार्लियामेंट के गेट तक पहुंच गए थे, वो एक पत्रकार के अपने बंगले तक पहुंचने से इतने घबराए हुए क्यों है ?
सौरव दास खुद को RTI एक्टिविस्ट बताता है। तो एक RTI एक्टिविस्ट को ट्रांसपेरेंसी से डर क्यों लगया है ? बंगले में ऐसा क्या है जो छुपाने की कोशिश हो रही है ?
केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि SC/ST कोटा में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा नहीं लागू होगी क्योंकि वह केवल OBC के लिए थी। तो मोदी जी, OBC रिजर्वेशन तो पहले था ही नहीं, फिर वो क्यों आया और आपकी पार्टी ने उसका समर्थन क्यों किया था?
दूसरी बात, आपके वकील ने कहा कि ‘आय के आधार पर’ SC/ST आरक्षण बिलकुल नहीं होगा क्योंकि उसका आधार केवल ‘आर्थिक पिछड़ापन’ ही नहीं, ‘ऐतिहासिक उत्पीड़न और अन्याय’ है। ‘केवल’ आर्थिक पिछड़ापन कहाँ, आप तो इनकम को कहीं भी आधार नहीं मानते!
जिस EWS का आप ढोल पीटते हैं, उसमें न तो फॉर्म के दाम कम हैं, न हॉस्टल की फीस, न कोर्स फीस… तो ये दो कौड़ी का राजनैतिक झुनझुने का सामान्य वर्ग करे क्या? @narendramodi यह बताएँ कि सामान्य वर्ग के टैक्स के पैसों से फंड हो रही SC/ST आरक्षण सब्सिडी का लाभ, सामान्य वर्ग के EWS को ही क्यों नहीं मिलता?
कोई तर्क है इसका कि आप जिसे सर्टिफाइड गरीब मानते हैं, वो प्रमाण पत्र उससे माँगते हैं, उसे सत्यापित करते हैं और उसे नौ लाख से सोलह लाख तक का लोन ले कर पढ़ाई करनी पड़ती है। फिर आप 1000 SC और 1000 OBC जातियों के शून्य प्रतिनिधित्व पर मौन हो जाते हैं कि इन जातियों का आरक्षण कहाँ है?
सत्य यह है कि आपका ‘विकसित भारत’ टूटते हायवे और निम्न गुणवत्ता के 50% लोगों से भरे कॉलेजों और विद्यालयों से कभी पूरा नहीं हो सकता। आरक्षण की समीक्षा करनी ही होगी, उसे तार्किक रूप से लाना ही होगा।
१. शून्य प्रतिनिधित्व वाली जातियों की पहचान
२. EWS की SC के स्तर की आर्थिक छूट
३. न्यूनतम अंक का विधान, GC से 10% से अधिक का कटऑफ में अंतर न हो SC/ST में
४. सक्षम लोगों को फर्जी तर्क के कारण आरक्षण न दिया जाए
५. हर श्रेणी में सबसे गरीब, पिछड़े को ही आरक्षण मिले
६. हर दस वर्ष में जातियों की समीक्षा और निष्कासन, नई जातियों को लिस्ट में जोड़ना बंद करें
🚨 आदलणीय बंधुओ 77 दिन का मौन चीत्कार और भीड़तंत्र का बहरापन!
रवींद्र जठेड़ी जी पिछले 77 दिनों से भेदभावपूर्ण SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन पर हैं।
उनकी हालत दिन प्रतिदिन नाजुक होती जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि वह आज भी उतने ही अकेले हैं, जितने पहले दिन थे।
रवींद्र जी, आपको एक बहुत ही कठोर वास्तविकता समझनी होगी।
आप CJP के कोई 'दिपके' नहीं हैं। आपके पीछे कोई विदेशी फंडिंग, पीआर एजेंसी या मोमबत्ती लेकर घूमने वाला इकोसिस्टम नहीं है जो आपके लिए रातों रात नेशनल मीडिया को इकट्ठा कर ले।
और जिन कथित सवर्ण (GC) राजनीतिक संगठनों से आप उम्मीद लगाए बैठे हैं, वह भी कभी आपके समर्थन में नहीं आएंगे।
मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों की तरह ही, इन संगठनों को भी इस मुद्दे से सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना है।
वह चाहते हैं कि यह मुद्दा सुलगता रहे ताकि उनकी दुकान चलती रहे।
जब कोई व्यक्ति सच में इस लड़ाई के लिए अपने प्राण दांव पर लगाता है, तो ये संगठन सबसे पहले गायब हो जाते हैं।
यह देश केवल भीड़तंत्र और शक्ति प्रदर्शन की भाषा समझता है।
जहां पीछे उग्र भीड़ नहीं होती, वहां सत्ता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि कृपया अपना यह अनशन तुरंत समाप्त करें।
यह संवेदनहीन सिस्टम आपके इस बलिदान के लायक बिल्कुल नहीं है।
कृपया अपनी सेहत पर ध्यान दें, आपके प्राण आपके परिवार के लिए बहुत कीमती हैं। 🙏🚩
#RavindraJatheri #SystemFailure #RealityCheck #ReservationSystem
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चुनौती दी थी कि हनुमानगढ़ी में रोज़ा नमाज हुई थी सिद्ध करके दिखाओ।
वीडियो उपलब्ध है।
अब गद्दी कौन छोड़ेगा, यह भी बताओ महाराज !
छात्रों को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांगने पर वाटर कैनन से भगाया जा रहा है।
ये अत्याचारी सरकार की निशानी है या नहीं?
जवाब देने के पहले बस ये जान लीजिए कि ये दिल्ली नहीं केरल का तिरुअनंतपुरम है और वहाँ कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार है।
अब मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि सरकार ने UGC पर इंगेज नहीं किया, CBSE/NEET पर जब बोलना था, तब एक शब्द नहीं बोला, आज कैसे थूक चाटने लगे?
यही बात तो पार्टी के समर्थक सात महीने से बोल रहे थे। पूरा कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट किया, मीडिया में अपने प्रवक्ताओं को भेजना बंद किया, हाउस अरेस्ट कराया, सुप्रीम कोर्ट से स्टे के बाद से ऐसे जताया कि उपकार कर दिया हो, आज घुटनों पर आ गए?
यही इस सरकार का पैटर्न बन चुका है। फोड़े को बवासीर बनने देते हैं, फिर जब लगता है कि अब मामला हाथ से निकल गया, तब झुक कर बात मानने को तैयार हो जाते हैं।
सुबह के 11 बजे तक यह आंदोलन सरकार के हिसाब से चल रहा था, नियंत्रण में था। अब यह स्पष्ट है कि नड्डा के घर बुलाने और तीन माँगें सुनने के बाद, तिलचट्टों का विश्वास आकाश पर है और वो CAA, किसान आंदोलन की तरह, भारत को नया, फर्जी आंदोलन देने जा रहे हैं।
अब मुझे देखना है कि माँगों पर सरकार करती क्या है! आत्महत्या करने वालों के परिजनों को एक करोड़ की माँग उचित है, क्योंकि अधिकांश पेपर लीक के कारण ही ‘सॉरी’ लिख कर मरे। दो अन्य माँगों में से एक प्रधान के त्यागपत्र की है, जो होना तो जनवरी में ही था, पर ईगो के कारण आज तक खींच लाई सरकार।
प्रधान अब इनके गले की फाँस बन चुका है।ये हर वो चीज करते हैं, जिसका इन्होंने पहले विरोध किया पर वामपंथी इनसे करवाते हैं। ‘कास्ट सेंसस’ ये राहुल के कहने पर करा रहे हैं, और प्रधान अब तिलचट्टों के कहने से जाएगा।
इनकी पुलिस आज फिर पिटी है, जैसे लाल किला वाले आंदोलन में पिटी थी। आईटीसेलिए फिर से विक्टिम बने घूम रहे हैं और यह पूछ रहे हैं कि ‘क्या ऐसे लोग विद्यार्थी हैं’? फिर अपने मालिक से पूछो न कि क्यों नड्डा से मीटिंग को तैयार हो गए?
जब सरकार अपने समर्थकों पर थूकती है तब उन्हें दूसरों का थूका चाटना ही पड़ता है।
वामपंथी मादरचोद होते हैं। और उन्हें जहाँ भी, जो भी पेलता है, मुझे प्रसन्नता होती है। मैं इन लौड़ा-लहसुन वाली दार्शनिक बातों से वर्षों पहले ऊपर उठ चुका हूँ जो तुम हाफ-पैंट पर बेल्ट लगा कर लिख रहे हो।