आपातकाल में श्री जयप्रकाश नारायण ने अपनी गिरफ्तारी से पूर्व लोक संघर्ष समिति का आंदोलन चलाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता श्री नानाजी देशमुख को ज़िम्मेदारी सौपी थी।
#Emergency1975#संविधान_की_हत्या
आपातकाल में सरकार से अलग राय रखने वाले अखबारों और पत्रिकाओं को विज्ञापन नहीं दिया गया। जबकि सरकार का प्रचार करने वाले अखबारों और पत्रिकाओं को खुले हाथों से विज्ञापन लूटाए गए।
#Emergency1975#संविधान_की_हत्या
आपातकाल पर शाह कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रतिदिन के कार्यों में सेंसरशिप का दखल दिशा-निर्देशों से भी कही ज़्यादा था। सेंसर के आदेश तानाशाही वाले होते थे। #Emergency1975#संविधान_की_हत्या
#विनम्र_श्रद्धांजलि
किताबों के पन्नों में सपने सजाए थे,
कलम से तकदीरें बनाने आए थे।
अलीगंज की उस शाम ने छीन ली हंसी,
बुझ गए वो चिराग जो रौशन जमाने आए थे।
घर से निकले थे पढ़ने की आस लिए,
लौटकर ना आए मां की प्यास लिए।
धुएं में खो गईं कुछ हँसती आवाजें,
छोड़ गए सवाल,
“यह अकेला रक्त है जो स्वतंत्रता की कीमत चुका सकता है। तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा!” (बर्मा, जुलाई 1944) भाषण, रुद्रांगश मुखर्जी द्वारा द ग्रेट स्पीच ऑफ़ मॉडर्न इंडिया (2011) में उद्धृत)
#नेता_जी
शिक्षा का उद्देश्य है बुद्धि को कुशाग्र बनाना और विवेकशक्ति को विकसित करना। यदि ये दोनों उद्देश्यपूर्ण हो जाते हैं तो यह मानना चाहिए कि शिक्षा का लक्ष्य पूरा हो गया है। – सुभाष चंद्र बोस
#नेता_जी
“भारतीय राष्ट्रीय सेना के रूप में सुभाष चंद्र बोस द्वारा प्रवर्तित शक्तिशाली गतिविधियों का प्रभाव था जिसने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला दिया था “- क्लेमेंट एटली, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री
#नेता_जी
प्रत्येक छात्र में शक्ति और स्वास्थ्य, उन्नत चरित्र, ज्ञान तथा उच्च शक्ति संपन्न आदर्श का होना अति अनिवार्य है - सुभाष चंद्र बोस, लाहौर छात्र सम्मेलन में
#नेता_जी