भारत के प्रथम Dalit उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम ने कहा था कि केवल कायर ही हिंदू धर्म छोड़ सकते हैं। बाबू जगजीवन राम की अंबेडकर से बनती नहीं थी। एससी वर्ग के युवाओं को इनसे सीखना चाहिए। जातिवादी भीमायानियो/नवबौद्ध से बचके रहो।
यादव, कुर्मी, जाटव, निषाद सभी जातियों की पार्टी हैं लेकिन सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली कोई पार्टी नहीं है। 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा' सवर्णों के लिए कार्य करेगी।
- पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट, अलंकार अग्निहोत्री
जिस वीर ने कालापानी की कालकोठरी में भी
अखंड भारत और हिन्दुत्व की ज्योति बुझने नहीं दी…
जिसने गुलामी के दौर में स्वाभिमान, राष्ट्रवाद और क्रांति का बिगुल फूंका…
ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी और
हिंदुत्व के पुरोधा वीर सावरकर जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।
मुझे याद है ये बात मैने भटके हुए युवा में @ajeetbharti और @AKTKbasics के साथ बैठकर बोली थी कि भाजपा को अपने गियर्स चेंज करने पडेंगे क्योंकि मेरे शहर के सबसे बडे मदरसे में एक बहुत बडी मीटिंग हुई थी इस बात पर कि हम कैसे हिन्दुओं को हिन्दुओं से खतम करना है।
इस पॉडकास्ट में एक कुछ बडे रहस्योद्घाटन हुए थे लेकिन तब शायद सबको मेरी बात "ऐवें ही बोल रहा होगा..." लगी होगी।
पर मेरी बात याद रखना मुझे इस बारे में वो पता है जो तुममें से किसी को नहीं पता, और सच बताऊं तो उसी दिन से मेरा एक भी वीडियो बनाने का मन नहीं हुआ। ये जो So Called Cast Activism का नाच कूद जितना सब लोग सोशल मीडिया पर मचा रहे हैं इस सब पर पेशाब होने वाला है। तुम्हारे सारे ज्ञान की नैय्या खुदने वाली है इतनी बडी तैयारी चल रही है।
वाह सवर्ण द्रोहियों।
@gupta_rekha@KapilMishra_IND@ManojTiwariMP
अब तुम लोगो को सवर्ण एकता से भी डर लगने लगा ?
परमिशन रद्द और पदाधिकारीयों की गिरफ्तारी के बावजूद पंकज धवरैय्या जी ने शोभायात्रा की जगह निकाली पद यात्रा और दिल्ली पुलिस को दी गिरफ्तारी ॥
सवर्ण समाज का अपमान किया गया।
भगवान परशुराम जी महाराणा प्रताप जी महाराज अग्रसेन स्वामी विवेकानंद जी का रथ झांकी प्रसाद झंडे तक उठवा लियॆ गये।
Rsp राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के पदाधिकारी उठा लियॆ गये।
मैं वर्षों से SC/ST Act के दुरुपयोग के खिलाफ बोल रही हूँ, पर सोचा नहीं था कि एक दिन खुद ही इसका निशाना बनूँगी।
मेरे 3 साल पुराने tweets खंगालकर @NCSC_GoI & Delhi Police द्वारा मेरे खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
यह एक सोची-समझी साज़िश है- हमारी आवाज़ दबाने की ।
#SCSTActMisuse
कोई व्यक्ति किसी ऐसी पार्टी में जाए जिसका वो घनघोर विरोधी रहा हो, तो नई पार्टी में जाने की सूचना सार्वजनिक करने से घंटे भर पूर्व, नई पार्टी के समर्थकों को भी सूचित कर दे।
फिर एक घंटे में, हमारे जैसे लोग जो पार्टी के कारण दूसरे नेताओं पर कटाक्ष, गालियाँ, मीम्स, फलाँ का अजेंट आदि लिखते हैं, वो हम डिलीट मार लेंगे।
इसे संवैधानिक रूप से बाध्य बना दिया जाए। बाद में रासबादी लोगों को समस्या हो जाती है।
कल अनामिका उपाध्याय को जमानत मिली थी, आज अनामिका बहन बाहर आ गईं है।
जानकारी के लिए बता दूं कि इसी रविवार को छत्तीसगढ़ की दुर्ग भिलाई पुलिस ने अनामिका उपाध्याय को SCSTACT में जेल भेज दिया था।
अनामिका की सगी बहन की उसी दिन बारात आने वाली थी।
अम्बेडकर पर सिर्फ एक वीडियो बनाने के लिए इनको जेल भेजा गया था, देश की राजनीति और सामाजिक समरसता का अंदाज़ा आप लगा सकते हो कि आप की आवाज कैसे दबाई जा सकती है और बोलने की आजादी कैसे पाबंद की जाती है।
लेकिन एक सच्चा मुसलमान वही है जो कुरान के हिसाब से काफिरों को वाजिबुल कत्ल माने।
बाकी ये सेल्युलरिज्म का कीडा सिर्फ हिन्दुओं के लिए है।
-बदसूरतुद्दीन खटमल।
जब श्री राम को नहीं मानते भगवान वाल्मीकि जी को काल्पनिक या ब्राह्मण बोलते हो तो यह अंबेडकरवादी नेता वहाँ हाथ जोड़ने क्यों गया ?
बेटा यह मेरा समाज है तुम्हारा सम्मान करने वहाँ कोई खड़ा तक नहीं हुआ 🤣
आने दे मुझे इंडिया वापस ग़ैर जाटव समाज की गलियों में घुसने भी नहीं दूँगी बाक़ी जाटव समाज आज भी बहनजी को अपना नेता मानता है बेटा तू तो गया !!
छपरियों के नेता 🤣🤣
#dr_rohini_ghavari #bhimarmychief #jaibhim #jaivalmiki
26 अप्रैल को जंतर मंतर पर एकत्रीकरण से भी प्रशासन डर गया??
मतलब अब जन सामान्य को प्रोटेस्ट करने का भी अधिकार नहीं है वो भी उस जगह जो सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही धरने प्रदर्शन के लिए तय करने पावर मौहर लगाई थी।
Brahmins family is being forced to flee their home in terror due to SC/ST Act misuse in Ayodhya, UP.
On Ambedkar Jayanti night, Soshit Vanchit neighbours stormed the Tiwari family's doorstep, torched their chhapra and hurled casteist abuses and death threats. Bedridden 82-year-old Brahmin Seshman Tiwari said they hid inside fearing for their lives.
Family alleges years of targeted harassment — a brother murdered in 2011, another killed after being thrown in a well. SC/ST Act misused with false cases. Eight cases in the past year, three found false by police.
Family now wants to sell ancestral land and flee. PAC deployed for protection.
अम्बेडकर के बारे में फैलाये गये मिथक और उनकी सच्चाई ?
1-मिथक-अंबेडकर बहुत मेधावी थे।
सच्चाई - अंबेडकर ने अपनी सारी शैक्षणिक डिग्रीयां तीसरी श्रेणी में पास की।
2-मिथक -अंबेडकर बहुत गरीब थे!
सच्चाई -जिस जमानें में लोग फोटो नहीं खींचा पाते थे उस जमानें में अंबेडकर की बचपन की बहुत सी फोटो है, वह भी कोट पैंट और टाई में!
3-मिथक- अंबेडकर ने शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिया !
सच्चाई -अंबेडकर के पिता जी खुद उस ज़माने में आर्मी में सूबेदार मेजर थे! इसके अलावा सविंधान बनाने वाली सविंधान सभा में 26sc और 33st के सदस्य शामिल थे !
4-मिथक- अंबेडकर को पढ़नें नहीं दिया गया।
सच्चाई -उस जमानें में अंबेडकर को गुजरात बडोदरा के क्षत्रिय राजा सियाजी गायकवाड़ नें स्कॉलरशिप दी और विदेश पढ़ने तक भेजा और ब्राह्मण गुरु जी ने अपना नाम अंबेडकर दिया।
5-मिथक- अंबेडकर नें नारियों को पढ़ने का अधिकार दिया!
सच्चाई- सविंधान बनाने वाली सविंधान सभा में 15 महिलाएं शामिल थी जिसमें एक दलित महिला भी शामिल थी और इन 15 महिलाओ ने संविधान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया!
6- मिथक-अंबेडकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे!
सच्चाई -अंबेडकर नें सदैव अंग्रेजों का साथ दिया भारत छोड़ो आंदोलन की जम कर खिलाफत की एंव जिस साइमन कमीशन ने लालालाजपत राय की हत्या की और भगतसिंह को फांसी हुई, अम्बेडकर अंग्रेजों के उस साइमन कमीशन के साथ थे एंव अंग्रेजों को पत्र लिखकर बोला कि आप और दिन तक देश में राज करिए उन्होंने जीवन भर हर जगह आजादी की लड़ाई का विरोध किया।
7-मिथक -अम्बेडकर बड़े शक्तिशाली थे!
सच्चाई- 1946 के चुनाव में पूरे भारत भर में अंबेडकर की पार्टी की जमानत जप्त हुई थी।
8- मिथक-अंबेडकर नें अकेले आरक्षण दिया!
सच्चाई- आरक्षण संविधान सभा नें दिया जिसमें कुल 299 लोग थे, अंबेडकर का उसमें सिर्फ एक वोट था, आरक्षण सब के वोट से दिया गया था और भारत में कई दलित जातियों को आरक्षण 1909 में ही दे दिया गया था !
9-मिथक-अंबेडकर ने सविंधान बनाया।
सच्चाई- अंबेडकर केवल संविधान की 16 समितियों में से सिर्फ एक प्रारूप समिति के ही अध्यक्ष थे जबकि सविंधान बनाने वाली पूरी संविधान सभा के अध्यक्ष परम् विद्वान डाक्टर राजेंद्र प्रसाद जी थे और सविंधान का मसौदा, ढांचा बी एन राव ने बनाया था !
10-मिथक-अंबेडकर राष्ट्रवादी थे।
सच्चाई-1931में गोलमेज सम्मेलन में गांधी जी से भारत के टुकड़े करनें की बात कर दलितों के लिए अलग दलिस्तान की मांग की थी।
11-मिथक- आरक्षण को लेकर संविधान सभा के सभी सदस्य सहमत थे।
सच्चाई- इसी आरक्षण को लेकर सरदार पटेल से अंबेडकर की कहा सुनी हो गई थी। पटेल जी संविधान सभा की मीटिंग छोड़कर बाहर चले गये थे, बाद में नेहरू के कहनें पर पटेल जी वापस आये थे। सरदार पटेल नें कहा कि जिस भारत को अखण्ड भारत बनानें के लिए भारतीय देशी राजाओं, महराजाओं, रियासतदारों, तालुकेदारों नें अपनी 546 रियासतों को भारत में विलय कर दिया जिसमें 513 रियासतें क्षत्रिय राजाओं की थी।इस आरक्षण के विष से भारत भविष्य में खण्डित होने के कगार पर पहुंच जाएगा।
12-मिथक-अंबेडकर स्वेदशी थे।
सच्चाई- देश के सभी नेताओं का तत्कालीन पहनावा भारतीय पोशाक धोती -कुर्ता, पैजामा-कुर्ता, सदरी व टोपी, पगड़ी, साफा आदि हुआ करता था। गांधी जी नें विदेशी पहनावा व वस्तुओं की होली जलवाई थी। यद्यपि कि नेहरू, गाधीं व अन्य नेता विदेशी विश्वविद्यालय व विदेशों में रहे भी थे फिर भी स्वदेशी आंदोलन से जुड़े रहे।अंबेडकर की कोई भी तस्वीर भारतीय पहनावा में नही है। अंबेडकर अंग्रेजियत के हिमायती थे ।
अंत में कहना चाहते हैं कि अंग्रेज जब भारत छोड़ कर जा रहे थे तो अपने नापाक इरादों को जिससे भविष्य में भारत खंडित हो सके के रुप में अंग्रेजियत शख्सियत अंबेडकर की खोज कर लिए थे।
हमारा उद्देश्य सच्चाई बयां करने की कोशिश करना है। तथ्यों की जानकारी स्वयं अपने स्तर पर भी पता कर सकते हैं। ये सभी तथ्य गूगल पर मिल जायेंगे।
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कॉन्ग्रेस ने संसद को ऐसा बंधक बना लिया है कि अब कोई भी पार्टी जो ‘संसदीय मर्यादाओं’ की बात करती है, वह कायर ही दिखती है।
परिसीमन समय की आवश्यकता है और संविधान में स्पष्ट निर्देश हैं कि कब-कब होगा और क्यों। आज जब डेमोग्रफी सोच-समझकर बदली जा रही है और पार्टियाँ स्वयं ही तुष्टिकरण के लिए या तो उसे बढ़ावा देती है, या चुप रहती है, तो परिसीमन ही एक ऐसा विकल्प बचता है कि ऐसे क्षेत्रों को दो या तीन क्षेत्रों में बाँट कर उसके लक्ष्य को टाला जा सके।
इसका दूसरा आयाम बढ़ती जनसंख्या है कि प्रति सांसद/विधायक कितने नागरिक होने चाहिए। यहाँ पर मेरा (और कई अन्य लोगों का) मत यह भी है कि जो हैं, वो कौन-सा भला कर रहे हैं? सांसद या विधायकों ने जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है, क्या वहाँ सारे कार्य उचित रूप से हो रहे हैं?
क्या सड़कें बन गईं, नालियाँ साफ हैं, विद्युत आपूर्ति निर्बाध है, कारखाने लग गए, कृषि में परफैक्शन आ गया? जब पंचायत और पार्षद स्तर तक विकेन्द्रीकरण हो चुका है, तो अधिक सांसदों को लाने से होगा क्या? क्या ये सांसद अपने नागरिकों की पीड़ा सुनते भी हैं?
मैं परिसीमन के पक्ष में केवल डेमोग्रफी परिवर्तन के कारण हूँ। यहाँ मुसलमानों की जनसंख्या हर संसदीय क्षेत्र में जगह देख-देख कर इस हिसाब से बसाई जा रही है कि 30% का क्रिटिकल मास पाते ही, उस क्षेत्र को राजनैतिक रूप से अन्य लोगों के लिए इर्रिलेवेंट बना दिया जाए।
बाकी, तो अधिकतर सांसद-विधायक बस स्टेटस के लिए बनते हैं और पार्टियाँ इसलिए इन्हें टिकट देती हैं क्योंकि इनको टिकट देना ही है किसी को। जीतना इन्हें किसी एक नेता के चेहरे पर ही है। स्वयं कोई काम करते नहीं।
दो-तिहाई बहुमत तो भाजपा लाने से रही। 240 की चपत महँगी पड़ रही है। अब ये इस बात पर केन्द्रित हैं कि दो-तीन बड़ी पार्टियाँ हल्ला करते हुए सदन से निकल जाएँ। सपा-टीएमसी पर सबकी दृष्टि है। बीजेडी इनके पक्ष में हैं, दक्षिण से YSRCP भी है।
यह सब देखते हुए, यूपी-महाराष्ट्र में टिकट वितरण की टीस अब स्मरण हो रही होगी। यही टीस इन्हें यूजीसी के कारण पुनः किसी और समय ध्यान में आएगी कि 29% सवर्ण मतदाताओं से 10% भी नैराश्य में यदि छिटक गया तो क्या होगा।
आपकी क्या राय है इस पर?