पहले लगा कोई अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है पर फिर पता चला ये तो अपने लखनऊ का पार्क है! बरसात की वजह से पानी पानी है।
मुस्कुराइए कि आप लखनऊ देख रहे हैं 😌
बड़ी ख़बर-
IAS से इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने योगी आदित्यनाथ की सरकार में भ्रष्टाचार की सारी परतें उधेड़ दी हैं।
आप उनकी बात को सुनिए । एक एक शब्द में इस सरकार के प्रचंड भ्रष्टाचार की गवाही है।
दिव्या राजनीति में आ रही हैं।
उनका स्वागत है।
इस भ्रष्ट व्यवस्था को आंखे दिखाकर राजनीति में आना,
बिना डरे, बिना घबराए, मंजिल की ओर कदम बढ़ाना,
मुश्किल तो है, मगर असंभव कतई नहीं।
नियति कुछ ऐसे ही फैसलों का इंतज़ार करती है, जमकर परीक्षा लेती है और जमकर साथ देती है।
दिव्या मित्तल को इस नई पारी की असीम शुभकामनाएं।
योगी से सवाल पूछती एक होर्डिंग लगाने पर 2.55 लाख का जुर्माना!!
और पूरे प्रदेश में विपक्ष के नेताओं को बदनाम करती होर्डिंग्स की क़तार पर जुर्माना कब लगेगा?
मुकदमा कब होगा?
क्या योगी आदित्यनाथ की भक्ति में बेसुध हो चुका है यूपी का पुलिस प्रशासन?
बड़ी ख़बर-(सूत्र)-
लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक बीजेपी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े को जो फीडबैक मिला है, वो होश उड़ाने वाला है।
चार मुद्दे खासकर-
पहला- जमकर भ्रष्टाचार।
दूसरा- बेलगाम जातिवाद।
तीसरा- पार्टी कार्यकर्ताओं की दुर्दशा।
चौथा- बुरी तरह निरंकुश नौकरशाही।
विनोद तावड़े ने दिल्ली को सब बता दिया है।
सूत्र बताते हैं कि इसे सुनकर दिल्ली के हाव-भाव सिर्फ इतने थे - 'इसमें नया क्या है?'
इस सरकारी चिट्ठी को ध्यान से पढ़िए और बलाइयां लीजिए बुलंदशहर पुलिस की..!!
पिछले एक साल में NDPS एक्ट का एक भी मामला जिले में नहीं लिखा तो “गोकशी में पकड़े गए लोगों पर NDPS एक्ट लगा दो” और FIR कराओ ये लिख रहे हैं बुलंदशहर के SP क्राइम नरेश कुमार !!
क्या क्या नमूने भर रखे हैं “आपकी सेवा में तत्पर” वाली पुलिस में @dgpup साहब आपने!!
तो मुख्य चुनाव आयुक्त सिर्फ वोटर लिस्ट हो नहीं बीजेपी का टिकट और मंत्री पद भी बांट रहे थे।
केरल से जिस तरह खुलासे सामने आया है न्यूज़मिनट् के इंटरव्यू में उसके बाद अब ज्ञानेश कुमार को पद पर नहीं रहना चाहिए।
किसी भी डेमोक्रेटिक सिस्टम में इतने विवाद के बाद उन्हें ख़ुद इस्तीफ़ा दे देना चाहिए ताकि कुछ तो भरोसा बना रहे।
मोहतरमा का नाम सीमा खन्ना है । ये चुनाव आयोग में IT director हैं और SIR के जरिए नाम हटाने की खुराफात इन्हीं की दिमागी उपज थी ।
ये राष्ट्रद्रोह की प्रबल दावेदारों में शामिल हैं ।
ज्ञानेश पर एक और बड़ा ख़ुलासा : दोनों चुनाव आयुक्तों ने की थी कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत
Based on IE report by @RitikaChopra__
https://t.co/NUdGwZvv3Y
योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर का हाल देखिए।
पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी और सांसद रवि किशन शुक्ला की इस बातचीत को सुनिए।
गोरखपुर डूबा हुआ है।
लोग बुरी तरह त्रस्त हैं।
योगी अकबर, बाबर और औरंगजेब से लड़ रहे हैं।
और सांसद जी सवाल उठाने वाले को सपाई बताने में व्यस्त हैं।
सवाल है कि गोरखपुर के नाम पर हज़ारों करोड़ के फंड की मलाई किधर गई?
भ्रष्टाचार के जलभराव की नदी लोगों के घरों में घुस गई?
बीजेपी पार्षद : पानी निकासी नहीं हो रहा है, नाली नाला सब जाम हो चुका है
रवि किशन शुक्ला: सपा जॉइन कर लिए क्या
पार्षद विश्वजीत शुक्ला: आप बसपा जॉइन कर लिए क्या
वो तो ग़नीमत है रविकिशन अपने पार्षद को पाकिस्तानी घोषित नहीं किए 🤣
चुनाव आयोग के भीतर क्या चल रहा था कि दो चुनाव आयुक्तों को दस महीनों में चौदह बार लिखित आपत्तियाँ दर्ज करनी पड़ीं?
इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में सामने आई बातें पढ़िए। सवाल किसी विपक्षी पार्टी ने नहीं, आयोग के अपने दो आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोश - ने उठाए थे।
• आयोग की मंज़ूरी के बिना उसी के नाम पर पत्र और आदेश किसने जारी किए?
• नए IT सिस्टम की जानकारी आयुक्तों को मीडिया से क्यों मिली?
• मतदाता सूची के डेटाबेस का नियंत्रण केंद्रीकृत क्यों किया जा रहा था?
• नए मतदाताओं के फॉर्म 6 में बदलाव पर ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ होने की आपत्ति क्यों उठी?
• ज़मीनी अधिकारियों की सिस्टम तक पहुँच रोकने का अधिकार किसने दिया?
ज्ञानेश कुमार, जब आपके साथी आयुक्त ही फैसलों पर सवाल उठा रहे थे, तो उन आपत्तियों का क्या हुआ? क्या आयोग की सामूहिक ज़िम्मेदारी केवल काग़ज़ पर रह गई है?
भाजपा सरकार भी बताए - इन आरोपों की स्वतंत्र जाँच और जवाबदेही की माँग पर उसका रुख़ क्या है?
इन्हें महज़ अंदरूनी मतभेद कहकर नहीं टाला जा सकता। इन फैसलों का संबंध जनता के नाम, उसके वोट और निष्पक्ष चुनाव से है। संबंधित रिकॉर्ड सामने आएँ, स्वतंत्र जाँच हो और ज़िम्मेदारी तय हो।
जनता से हर दस्तावेज़ माँगने वाला चुनाव आयोग अपने फैसलों का हिसाब भी जनता को दे!
न्यूज 24 से दबाव में इस्तीफा देने वाली ईमानदार पत्रकार गरिमा सिंह ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ज़बरदस्त रिपोर्टिंग करते हुए आइना दिखाया ,
गरिमा सिंह तुम भारत क़ी गरिमा हो , सलाम है आप को ऐसी पत्रकारिता के लिये ,
SIR तीनों इलेक्शन कमिश्नर की देखरेख में हुआ है। लेकिन उनमें से दो, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि फ़ैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए और जारी किए गए👇
https://t.co/lGmceiyb9s
देश की राजधानी दिल्ली में शिवम उर्फ़ सुदामा और अन्य 3 नाबालिगों के साथ, एक 16 वर्षीय नाबालिक लड़की का गैंगरैप किया, फ़िर उसको चाकुओं से गोदकर मार डाला, 13 दिन बाद उसकी लाश को ढूंढा गया, जंगली कुत्ते उसे खा चुके थे,
यह देश की राजधानी है, बाकि देश में क्या हो रहा होगा सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
गोरे बच्चे की चाहत में नेपाली लड़कियों का सौदा हो रहा है। यूपी से सटे नेपाल बॉर्डर से इन लड़कियों को लाया जाता है। बिना शादी बच्चा करने के बदले दलाल को 1 करोड़ रुपए तक दिए जा रहे हैं। इसमें लड़की को केवल 20 से 25 लाख रुपए मिलते हैं।
ऐसे दंपती जिनकी संतान नहीं है, उनमें बच्चा करने का नया ट्रेंड देखने को मिला है। ये IVF से बच्चा करने के बजाय नेपाली युवतियों से बच्चा कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर मामले ऐसे दंपतियों के हैं, जहां महिला गर्भधारण करने में सक्षम नहीं है। IVF में केस बिगड़ने और बच्चे के कमजोर पैदा होने की आशंका भी रहती है।
नेपाल से दलालों के जरिए मोटी रकम देकर लड़कियों को भारत लाया जाता है। उन्हें एक से डेढ़ साल तक यहीं रखा जाता है। संबंध बनाकर गर्भधारण कराया जाता है। बच्चा होने के बाद वापस नेपाल भेज दिया जाता है।
बड़ी ख़बर-
एक ही अखबार। एक ही तारीख। दो समाचार।
पहला- योगी आदित्यनाथ का बयान। माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी खत्म।
दूसरा- जापानी बुखार पीड़ित मासूम की उपचार के दौरान मौत।
अखबार दैनिक हिंदुस्तान है।
तारीख 16 सितंबर है।
मासूम बच्चों की आहों पर भी सूचना के जयजयकार की मुहर है!!
यूपी के हाथरस में लगभग छह साल पहले एक 19 साल की दलित युवती खेतों में गंभीर हालत में मिली थी. 16 दिनों बाद उसकी अस्पताल में मौत हो गई.
आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में उसके शव को गांव लाकर आधी रात में परिजनों की ग़ैर-मौजूदगी में जला दिया था.
इतने साल बीत जाने के बाद भी इस परिवार के घर से सीआरपीएफ का पहरा नहीं हटा है. सुरक्षा का यही घेरा अब परिवार के लोगों के लिए क़ैद बन चुका है.
पूरी रिपोर्ट देखिए: https://t.co/KCq9QSOU2a
रिपोर्टः गौरव गुलमोहर
शूट/एडिटः तेज बहादुर सिंह