हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति संप्रदाय या धर्म से नहीं है, हमारी लड़ाई सामाजिक असमानता जातिगत-भेदभाव अंधविश्वास पाखंड और संविधान विरोधियों से हैं...
#जयभीम
SBI Funds Management IPO : Many investors were surprised when it listed up by just 7%
Now it’s up by just 2%, There was a time when I also used to be surprised on this type of events
But after spending almost 18 years in Market, I don’t get surprised with anything 🙂
#शिक्षा
दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपक भास्कर लिखते हैं:
आज दुखी हूं, कॉलेज में काम खत्म होने के बाद भी स्टाफ रूम में बैठा रहा, कदम उठ ही नहीं रहे थे।
दो बच्चों ने आज ही एड्मिशन लिया और जब उन्होंने फीस लगभग 16000 सुना और होस्टल फीस लगभग 1,20,000 सुनकर एड्मिशन कैंसिल करने को कहा।
पिता ने लगभग पैर पकड़ते हुए कहा कि सर, मजदूर है राजस्थान से, हमने सोचा कि सरकारी कॉलेज है तो फीस कम होगी, होस्टल की सुविधा होगी सस्ते मे, इसलिए आ गए थे।
मैंने रोकने की कोशिश भी की लेकिन अंत में एडमिशन कैंसिल ही करा लिया।
बैठकर, ये सोच रहा था कि एक तरफ जहां लोग सस्ती शिक्षा चाह रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि 30 प्रतिशत खुद जेनेरेट कीजिये।
ऑटोनोमी के नाम पर निजिकरण हो रहा है।
सोचिये दिल्ली विश्विद्यालय के चारो तरफ प्राइवेट यूनिवर्सिटी का जाल बिछ रहा है।
जो लोग 15,000 की फीस नही दे पा रहे वो लाखों की फीस प्राइवेट यूनिवर्सिटी को कहां से देंगे ?
लगभग ऐसे कई बच्चे डीयू के तमाम कॉलेजों में एड्मिशन कैंसिल कराते होंगे।
इन दो बच्चों में एक बच्चा हिन्दू और दूसरा मुसलमान था, दोनों ओबीसी।
ये उस देश मे हो रहा है जहां के प्रधानमंत्री खुद को ओबीसी क्लेम कर रहे हैं,
ये उस देश में हो रहा है जिसके प्रधानमंत्री स्वयं चाय बेचने की बात करते हैं।
अरे भाई आप गरीब है तो इनके लिए ही कुछ कर देते।
कॉलेज में कई तरह की स्कालरशिप तो हैं लेकिन फीस भरने के लिए काफी नही, होस्टल फीस भरने लायक तो कतई नही।
PG में रेंट पर रहना तो अच्छी आर्थिक व्यवस्था वाले लोगों के भी वश का नही।
शिक्षक एक कार्पस फण्ड बनाने की बात कर रहे हैं ताकि ऐसे बच्चों की मदद किया जा सके।
लेकिन इससे एक दो लोगों की मदद तो हो सकती है लेकिन सर्व कल्याण तो सरकार की नीतियों से ही होगा।
लेकिन सरकार को खुद बचा रहना है और बाकी मंत्रालयों को उनको बचाये रखना है
तो गरीब मजदूर क्या करें।
लेकिन मैं दुखी हूं कालेज का 95 प्रतिशत का कटऑफ और बच्चे के पास 95 प्रतिशत नम्बर हैं
लेकिन इसके बावजूद भी गरीब बच्चे क्या करेंगे ?
गांव गोद लिए जा रहे हैं और लोग गरीब हुए जा रहे हैं।
बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ का नारा कितना फेक लगता है।
गर्ल्स कॉलेज बेटियों को उच्च शिक्षा देने के लिए ही बना था लेकिन आज एक गरीब की बेटी उसी से महरूम हो गई।
विश्विद्यालय अपने यूनिवर्सिटी होने का चरित्र खो रही है।
बाकी फर्स्ट कट ऑफ का एड्मिसन खत्म हो गया है।
दूसरे और तमाम कटऑफ में भी शायद ऐसे कितने बच्चे आएंगे और वापस चले जायेंगे।
ये सालों से हो रहा होगा लेकिन जब भारत बदल रहा था तो शायद ये भी बदल जाता।
बाकी अब कुछ नहीं। शिक्षा मंत्रालय रोज एक नया फरमान ला रहा है।
उस पिता ने कहा कि सुना था कि JNU की फीस कम है उसी से सोच लिए थे कि यहां भी कम होगी।
अब आप समझे JNU को खत्म क्यों किया जा रहा है।
सत्यमेव जयते
सौजन्य: Shahid Akhtar 2022 के पोस्ट से।
I see almost everyone talking against ethanol. People are angry on that issue. What is opposition doing about it?
Mudda tumhari wait kar raha hai tum gayab ho.
(includes all parties)
जब आदिवासी, दलित, महिलाओं के मानवाधिकारों का खुलेआम हनन होता है और महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती, तब सवाल उठना स्वाभाविक है कि महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग आखिर किसके लिए हैं?
SC-ST आरक्षण पर एक फिर सुप्रीम कोर्ट की ओर से हमला हुआ है.
IAS माता पिता के बच्चों के खिलाफ मामला दायर किया गया था उन्हें आरक्षण क्यों मिलना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस BV Nagarathna ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, माता पिता IAS हैं तो बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए इस पहलू पर ध्यान रखना होगा.
दलित आईएएस आईपीएस बन जाए या CM DM SDM बन जाए तो भी उसकी जाति और सामाजिक पिछड़ापन खत्म नही होता.
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को पता होना चाहिए आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नही है. आरक्षण प्रतिनिधित्व है, आरक्षण गरीबी के कारण नही बल्कि सामाजिक पिछड़ेपन के कारण दिया गया है.
@IndianOilcl booked LPG refill on 5 Feb Consumer No. 7075804090. Payment done, invoice generated, bt cylinder still not delivered, Complaint already raised SR No: 1-1489977889692, yet no resolution.plz intervene and ensure immediate delivery.
@PetroleumMin@MoPNG_eSeva#Indane
जब आदिवासी युवक पर अमानवीय अत्याचार होता है, जब दलित युवाओं का उत्पीड़न किया जाता है, जब SC/ST/OBC समुदायों पर रोज़ाना सैकड़ों मामले दर्ज होते हैं तब National Human Rights Commission की संवेदनशीलता कहाँ चली जाती है?
लेकिन जैसे ही किसी प्रभावशाली वर्ग से जुड़ा मामला सामने आता है, तुरंत suo motu संज्ञान ले लिया जाता है।
क्या मानवाधिकार अब जाति देखकर तय होंगे?
क्या आदिवासी और दलित इस देश के बराबरी के नागरिक नहीं हैं?
हम मांग करते हैं कि NHRC की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा हो; अन्यथा इसे तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए।
@India_NHRC@rashtrapatibhvn@narendramodi@jualoram@arjunrammeghwal@AmitShah
जब रेप दोषियों को राहत मिलती है,तो डर सिर्फ एक परिवार में नहीं पूरे समाज में फैलता है।आज पीड़िता सड़कों पर है —और सवाल सिस्टम से है।
#JusticeForUnnaoVictim
भाजपा का राइट विंग इस देश के लिए एक दीमक है – जो देश को भीतर से खोखला कर रहे हैं।
सबका अपना-अपना धर्म है, तुम मैच जीतने से मतलब रखो ना यार। जब जेमिमा ने जीसस को धन्यवाद और बाइबल की एक पंक्ति पढ़ने की बात कही, तो इनके पेट में मरोड़ उठ गई।
लेकिन जब मनु भाकर ने कहा कि वो गीता की एक लाइन दोहरा रही थी, तो ये लोग जश्न मनाने लगे।
मतलब इन्हें देश से मतलब नहीं है सिर्फ़ धर्म से मतलब है।
बिहार चुनाव में जाति जनगणना का मुद्दा क्यों गायब है. सवर्ण जातियों के ओवर रिप्रजेंटेशन का मुद्दा क्यों गायब है.
जाति जनगणना क्या अचार डालने के लिए किया गया था. बिहार जननायक कपूरी ठाकुर की भूमि है, जिन्होंने ओवर रिप्रजेंटेशन को खतरे के रूप में देखा था.
जाति जनसंख्या और नौकरी में संख्या इस प्रकार है.
भूमिहार आबादी 2.86% और नौकरी में संख्या 4.9%.
ब्राह्मण आबादी 3.63%, नौकरी 3.60%
राजपूत आबादी 3.45%, नौकरी 3.81%
कायस्थ आबादी 0.60%, नौकरी 6.68%
यादव आबादी 14.26, नौकरी में संख्या 1.55%
कुशवाहा आबादी 4.21%, नौकरी 2.04%
रविदास समाज आबादी 5.25%, नौकरी 1.20%
मुसहर आबादी 3.98%, नौकरी 0.26%
आंकड़ा बता है किन जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन है. इसी कारण जाति जनगणना से डरते हैं. तेजस्वी यादव को कहना चाहता हूँ ओवर रिप्रजेंटेशन वाले RJD या महागठबंधन को वोट नही देने वाले हैं. ओवर रिप्रजेंटेशन नेशनल इमरजेंसी है.
बिहार चुनाव में जाति जनगणना का मुद्दा क्यों गायब है. सवर्ण जातियों के ओवर रिप्रजेंटेशन का मुद्दा क्यों गायब है.
जाति जनगणना क्या अचार डालने के लिए किया गया था. बिहार जननायक कपूरी ठाकुर की भूमि है, जिन्होंने ओवर रिप्रजेंटेशन को खतरे के रूप में देखा था.
जाति जनसंख्या और नौकरी में संख्या इस प्रकार है.
भूमिहार आबादी 2.86% और नौकरी में संख्या 4.9%.
ब्राह्मण आबादी 3.63%, नौकरी 3.60%
राजपूत आबादी 3.45%, नौकरी 3.81%
कायस्थ आबादी 0.60%, नौकरी 6.68%
यादव आबादी 14.26, नौकरी में संख्या 1.55%
कुशवाहा आबादी 4.21%, नौकरी 2.04%
रविदास समाज आबादी 5.25%, नौकरी 1.20%
मुसहर आबादी 3.98%, नौकरी 0.26%
आंकड़ा बता है किन जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन है. इसी कारण जाति जनगणना से डरते हैं. तेजस्वी यादव को कहना चाहता हूँ ओवर रिप्रजेंटेशन वाले RJD या महागठबंधन को वोट नही देने वाले हैं. ओवर रिप्रजेंटेशन नेशनल इमरजेंसी है.