Official Twitter Account of @AIYSDS_Chief || Founder & Central President of the @AIYSDS || Dist. President, Bokaro of the #Janta_Majdur_Sangh (Trade Union)
@AIYSDS_Chief Mr. Mukesh Ambani, you must take immediate action on this. Customers trust you and your company. Don't let it break you. Rather strengthen it. Your company's image is getting tarnished due to inefficient, useless employers. You have to save him. Resolve customer problems and (1).
@AIYSDS_Chief [1]. लगता है अम्बानी जी अपने इंप्लायरों को काम न करने की तनख्वाह दे रहे हैं। इसी से लगता है रिलाइंस जिओ का मुनाफ़ा कुछ अधिक हो रहा है। कस्टमरों से किया वादा ना पूरा करने पर कस्टमर और कर भी क्या सकते हैं। रिलाइंस जिओ से पोट्रेट करा कर किसी दूसरे नेटवर्क का इस्तेमाल करेंगे।
श्रीमान मुकेश अम्बानी जी आपके कम्पनी के एंप्लॉय बहुत ही कामचोर, वेतनखोर देत्य हैं। यह लोग कस्टमर के वैल्यू को नहीं समझ रहे हैं और आपकी कंपनी का रेपुटेशन दिन पर दिन गिरा रहे हैं। इन्हें कस्टमर के समस्याओं से कोई मतलब नहीं है ना ही उनके समस्याओं का समाधान कर रहे हैं और ...
मनीष कश्यप ऊर्फ त्रिपुरारी कुमार तिवारी जिसने सबसे पहले इस झूठी खबर का प्रसार किया कि, तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों को मारा-पीटा जा रहा है। जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि, ये दो लोगों को पैसे की लालच देकर उनके चेहरे पर मरहम पट्टी तथा कुछ अन्य दवाएं लगाकर घायल दिखाते हुए एक वीडियो बिहार में बनाया। उसमें दोनों युवक अपने को तमिलनाडु में काम करने वाले मजदूर बताते हैं और ये दावा करते हैं कि, उन्हें तमिलनाडु में बिहार का मजदूर और हिंदी भाषी होने के नाते मारा पीटा गया है।
इस फेक वीडियो को तमिलनाडु का बताकर इसने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की छवि को ख़राब करने की कोशिश की। इस देशद्रोही ने भारत के दो प्रांतों बिहार और तमिलनाडु के संबंधों में दरार डालने का प्रयास किया।
इसके फेकन्यूज से ऊर्जा ग्रहण किये बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल व संघ और भाजपा की मीडिया व उसके दरबारी पत्रकारों ने बिना इसकी जांच किये। इस झूठ को खूब प्रचारित किया। जिससे बिहार और तमिलनाडु की पुलिस हरकत में आई और जांच कर यह पाया कि इन दरबारियों ने झूठ फैलाया है।
बिहार और तमिलनाडु की पुलिस ने समाचारपत्र 'दैनिक भास्कर', दक्षिणपंथी वेबसाइट 'ओप इण्डिया ', और मनीष कश्यप जैसे झूठबाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
मनीष कश्यप जो अपने को 'सन ऑफ बिहार' कहता है. अब उसके झूठ का पर्दाफाश होने पर लोग उसे 'बवासीर ऑफ बिहार' कहने लगे। मनीष ने अपने जिस ट्विटर अकाउंट से फेकन्यूज फैलाया था उसे उसने डिलीट कर दिया।
ये 'बिमारी ऑफ बिहार' नामक चरणचंपू अपने को बचाने के लिए 'ठग्स ऑफ हिंदूस्तान' बागेश्वर धाम सरकार की चरण वंदना करने पहुंचा। ताकी बाबा के राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर ये अपने को बचा सके। लेकिन बाबा का रसूख इसके काम नहीं आया और ये जेल में योगासन कर रहा है। इन जातिवादी ढोंगियों को फेसबुक और यूट्यूब पर देखना सुनना बंद कर दीजिए।
Shiva Nand Yadav
(शोधछात्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर)
#BrahmanisationOfBuddha
भारत के वास्तविक इतिहास ब्रह्मणिनिज्म और बुद्धिजम, ऐसा बाबा साहब अंबेडकर कहते थे और आज रिसर्च के द्वारा जो सबूत मिल रहे है इससे यह सिद्ध होता है कि ब्राह्मणो ने बुद्धिजम को सडयंत्र और हिंसा के द्वारा खत्म किया और बुद्धिस्ट स्थलों पर कब्जा किया ।
वेद हमे नैतिकता सिखाता है या अनैतिकता?
ऋग्वेद का सबसे प्रमुख देवता इंद्र है ।33% स्तुति पूरे ऋग्वेद में इसी इंद्र की देखने को मिलती है जो ऋग्वेद के मण्डल 8 ke 96,97 सूक्त में कृष्ण और विष्णासुर उसके परिवार की बेहरमी से हत्या करता है फिर धन संपदा और गायों को लूट लेता है फिर तथाकथित ऋषि उसकी स्तुति करते है और लूट का माल बाटने की डिमांड करते है। यानी अनैतिक कार्यों में समर्थन।
यही वेदों का प्रमुख इंद्र वाल्मीकि रामायण, बालकांड 48,49 सर्ग में गौतम ऋषि की पत्नी अहल्या का व्यभिचार करने हेतु गौतम का भेष बना अहल्या से समागम करता है जिसे ऋषि देख लेते है और पनिशमेंट की निंजा तकनीक का उपयोग कर तत्काल श्राप देकर वैदिक सबसे प्रमुख गॉड इंद्र के दोनों अंडकोष ज़मीन पर गिरा देते है।
शचिपति इंद्र गिड़गिड़ाने लगता है फिर एक सर्जरी की वैदिक निंजा तकनीक से भेड़ का अंडकोष निकाल वैदिक गॉड इंद्र में ट्रांस्प्लांट कर दिया जाता है।
तब से वैदिक यज्ञ में बिना अंडकोष के भेड़ बलि चढ़ाने की प्रथा भी सुरू हो जाती है।
सवाल है हम भारतीय सभ्यता ऐसे लूट पाट हत्यारे वाले वेद और व्यभिचारी इंद्र की स्तुती कैसे कर सकते है? और ऐसे अनैतिक इंद्र की स्तुति वाला वेद और फर्जी वैदिक काल हम सभ्य भारतीयो पर कौन और क्यों थोप रहा?
जब देवता ही ऐसा है तो उसके मानने वालों का चरित्र उससे अच्छा हो सकता है?
उससे भी बड़ा सवाल यह है की ऐसे अनैतिक मान्यताओं वाले ग्रंथ को अभी भी कौन और क्यों सपोर्ट कर रहा?
संविधान की प्रस्तावना, अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, सिविल राइट्स एक्ट और समानता के तमाम अन्य उपबंधों के उल्लंघन के लिए गोरखपुर के गीता प्रेस पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।
उसके छापे हज़ारों पन्ने एससी, एसटी, ओबीसी, क्षत्रिय जाति और तमाम जातियों की स्त्रियों के विरुध्द हैं। मेरे पास इसके सैकड़ों प्रमाण हैं।
गीता प्रेस और उसकी पत्रिका कल्याण ने बाबा साहब के खिलाफ अभियान चलाया था क्योंकि बाबा साहब ने हिंदू कोड बिल लाकर हिंदुओं का, ख़ासकर हिंदू स्त्रियों का भला करना चाहा था।
गीता प्रेस के न चाहने पर भी वे सारे क़ानून पारित हुए।
ऐतिहासिक रूप से गीता प्रेस एक हारी हुई संस्था है। उसके सपनों का वर्ण व्यवस्था आधारित भारत 🇮🇳 कभी नहीं बन पाया।
उसको ऑक्सीजन देने की बीजेपी की कोशिश ग़लत है।
Claim : वाल्मीकि रामायण में 4 दांत वाले हाथी का ज़िक्र होना यह दर्शाता है की वह लाखों साल पहले की है क्योकि मल्टीपल दांत वाले हाथी लाखों साल पाये जाने के सबूत मिले है।
Fact : मल्टीपल दांत वाले हाथी बनाने की शिल्पकला बुद्धिस्ट गांधार शैली है। आप नीचे दिये चित्र(reference : Gandhara Art in Pakistan by Harald Ingbolt) में देख सकते है की बुद्धिस्ट गांधार शैली में 6 दांत वाले हाथी की मूर्ति बनवा रहे थे।
यही नहीं इस तरह की मूर्तिकला का ज़िक्र बुद्धचरितम के चीनी संस्करण(3rd to 5th century) में भी मिलता है जिसे भारतीय संस्कृत बुद्धचरितम से पिछले 100 साल में कम्पाइल किए गये में ग़ायब कर दिया गया है। Edward B Cowell द्वारा अनुवादित चीनी और तिब्बती बुद्धचरितम में यह आज भी लिखा पाया जाता है जिसमे बुद्ध की माता सपने में 6 दाँत वाले हाथी को देखती है।
ऐसे में वाल्मीकि रामायण जो देवनागरी लिपि और क्लासिकल संस्कृत में लिखी गई जिसमे मुग़ल क़ालीन इस्तेमाल बारूद तोप सहित शक पल्लव कंबोज मलेच्छ इत्यादि के साथ बुद्ध को भी गाली देने का भी ज़िक्र हो उससे साफ़ पता चलता है की यह पिछले हज़ार साल के अंदर बुद्धिस्ट दशरथ जातक कथा को ही विकसित कर लिखी गई है और मल्टीपल दांत वाले हाथी की कल्पना भी बुद्धिस्ट शिल्पकला से ली गई है।
Conculsion : उपरोक्त तथ्यों से यह कही भी सिद्ध नहीं होता की बालमिकी रामायण सुंदरकांड सर्ग 4 श्लोक 27,28 के लेखक लाखों साल पहले था या वाल्मीकि रामायण लाखों साल पुराना है हाँ यह ज़रूर सिद्ध होता है वाल्मीकि रामायण का लेखक यह कल्पना बुद्धिस्ट आर्ट और बुद्धचरितम से लीया है।
@singh_unhadmahi अब अबू भविष्यपुराण में अकबर को पूर्वजन्म का शंकरचार्य के गोत्र का ब्राह्मण भाई बता रहे है तब बड़ी शांति फैली थी अब जैसे ही कोई किताब खोल दे रहा तो अशांति फैल जा रही🥱🥱
थोड़ा बरनाल लगावे शांति मिलेगी फिर पढ़े
बुद्ध का नाम विष्णु, ईश्वर, इन्द्र, व्यास, विनायक कैसे है?
बुद्धिस्ट वैपुल्य सूत्रों में एक नाम आता है लंकावतार सूत्र जिसमे बौद्ध राजा रावण को बुद्ध उपदेश दे रहे है।
इसी रावण की कहानी और दशरथ जातक कथा को जोड़कर एक नई कहानी बनाई गई जिसमे सीताहरण का कॉन्सेप्ट रावण के द्वारा जोड़ दिया गया और तभी इसका अनुवाद चीनी भाषा में हुआ आज भी बुद्धिस्ट देश में इस तरह का एक्सटेंड वर्शन जातक कथा पाया जाता है ख़ास बात यह की बुद्धिस्ट देशों में राम और रावण दोनों बुद्धिस्ट ही है।
हालाँकि 5th सेंचुरी में बुद्धघोष तिपितक पर टीका अट्टकथा लिखते समय इस सीताहरण प्रसंग जोड़े जाने का विरोध भी जताते है।
अब इसी लंकावतार सूत्र में बुद्ध के विभिन्न नाम प्रयुक्त हुए है जैसे स्वयंभू, विनायक, बुद्ध, ब्राह्मण, विष्णु, ईश्वर, राम, व्यास, इंद्र, बलि, वरुण इत्यादि ।
कुछ लोग आश्चर्य करेंगे की आज ये सारे नाम आसमानी है और ब्राह्मणसंप्रदाय में प्रयोग हो रहा है।
तो जवाब यही पर तो छुपा है की यही से सारे नाम कॉपी किए गए है चुकी ये महायान की भाषा पाली पाक्कित मिश्रित यानी आज के संस्कृत कि पूर्वज भाषा या प्रोटो संस्कृत या बुद्धिस्ट हाइब्रिड संस्कृत (BHS) थी और चुकी आज के ब्राह्मण संप्रदाय ने भी उसी भाषा को स्वीकार कर क़ब्जा किया और बाक़ी के बहुजनों को संस्कृत पढ़ने पर रोक लगा दी ऐसे में ऐसे ग्रंथों में क्या क्या लिखा था बहुजन भूलते गये। और महायान रचित HBS पर ब्राह्मणों का एकछत्र क़ब्जा होते गया और इसलिए आज जितनी भी बुद्धिस्ट कथा कहनिया थी सबको मॉडिफाई करके अपने हिसाब से ब्राह्मण मुस्लिम शासन काल में लिखता रहा और मूल सोर्स को ख़त्म करता रहा साथ ही बहुजन समाज के लिए नफ़रत भी पैदा करता रहा।
धम्म की महायान शाखा जिसने पाली पाक्कित को संस्कारित करके यानी बनावटी बनाया जिसे संस्कृत कहा जाता है हालाँकि आज कि संस्कृत उस संस्कृत से काफ़ी अलग है इसलिए इतिहासकारों लिपिकारो को उसे बुद्धिस्ट हाइब्रिड संस्कृत (HBS) संस्कृत कहना पड़ा।
भारतीय इतिहासकार अभी उसे संस्कृत ही बोलते है ताकी समस्त भारतीय अभी भी कंफ्यूज रहे की पाली पाक्कित से संस्कारित होकर विभिन्न चरणों में धीरे धीरे जो बनावटी भाषा संस्कृत बना वो बुद्धिस्ट महायान शाखा की देन है।
और उसी महायान शाखाओ की गुणवाचाक बातो को जातिवाचक, भेदभाव सूचक और उनके अर्थों का अनर्थ करके आज बोधिस्त्वों का नामकरण बुद्ध के विभिन्न नामो का प्रयोग कर भेदभाव पैदा कर ढोंगी अपनी पेट पालता रहा और जिस तरह बुद्ध के विभिन्न नामो को अलग अलग देवी देवता बनाया वैसे ही समण
समाज को भी भिन्न भिन्न नाम देकर जातियो में बाँट कर उचनीच के बीज बोए।
चुकी पूरे देश में लोग बुद्धिस्म को ही मानते थे इसलिए बुद्धिस्ट महाविद्यालयों को जलवाये जाने के बाद भी महायान शाखा पर काबिज ढोंगी वर्ग आसानी से राजवंशों में अपनी पैठ बना सका क्योकि राजवंश बुद्धिस्ट ही थे। और फिर धीरे धीरे राजवंश भी उसकी गिरफ़्त में आते गये जिन राजवंशो ने इंकार किया उन्हें शूद्र कहा जाने लगा।
बुद्ध के विभिन्न नाम लंकावतार सूत्र में आप ख़ुद पढ़ लीजिए
भगवद् गीता ब्राह्मणवादियों द्वारा प्रमोट करने का मुख्य कारण है कि वो रोटी बेटी संबंध,अंतर्जातीय विवाह निषेध की वकालत करती है।@dhruv_rathee चैप्टर 1 में अर्जुन की प्रमुख समस्या यह है कि लड़ाई में जो लोग मारे जाएँगे तो उनकी औरते दूषित हो जाएगी यानी न सिर्फ़ संपूर्ण स्त्रियों के चरित्र पर भी संदेह कराया गया है बल्की वो स्त्रिया दूसरे वर्ण के लोगो से शादी विवाह भी करेगी और फिर उससे वर्णसंकर बच्चे बच्चे पैदा होंगे जिससे वर्णव्यवस्था चरमरा जाएगी का भी दर्द व्यक्त किया गया है। और इससे लड़ाई में मरे हुए लोगो को पितरो का पिंड नहीं मिल पायेगा और कुल का नाश हो जाएगा।
ये प्रश्न के साथ ही चैप्टर 1 समाप्त होता है दूसरे चैप्टर में कृष्ण को इसका जवाब देना था लेकिन कृष्ण इसका जवाब देने की बजाय जातिवादी जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर मुद्दा ग़ायब करने की कोशिश करते है मसलन चैप्टर 2 के 3 श्लोक में कृष्ण, अर्जुन को नपुंसक कहकर न सिर्फ़ किन्नर समाज को दुर्बल कहके नीचा दिखाने की कोशिश करते है बल्की श्लोक 2 में अर्जुन को स्वर्ग का ख़्वाब भी दिखाते है।
सवाल है इसी चैप्टर 2 के श्लोक 23,24, 25 में वो आत्मा पर कोई भी भौतिक प्रभाव पड़ने से साफ़ इंकार करते है तो अर्जुन स्वर्ग में भोगेगा क्या?
क्या मरने के बाद स्वर्ग भोगने के लिए आत्मा जाएगी या आत्मा को स्वर्ग भोगने के लिए फिर से एक नई माता पिता की ज़रूरत होगी जो उसे शरीर देगा? स्वर्ग में मर्दों के लिये अगर अप्सराये होंगी तो स्त्रियों को कौन कौन सुविधा मिलेगी ?
इस मुद्दे पर गीतकार कोई जानकारी नहीं देता न ही कोई अन्य ग्रंथ।
वर्णसंकर बच्चों से कुल नाश होगा या नहीं इसपर भी कृष्ण जवाब नहीं देते और गृहयुद्ध के लिए लड़ने को अर्जुन को उकसाते है चैप्टर 2 का 31, से 38 श्लोक। और पूरे गीता में कृष्ण वर्ण व्यवस्था को ख़ुद बनाये है और वर्णव्यस्था बनाये रखने की वकालत करते नज़र आते है (गीता चैप्टर18 )और अर्जुन को भी वर्णव्यवस्था फॉलो करने के लिये उकसाते है।
conclusion : वर्णवयस्था बनाये रखना न सिर्फ़ humanity के ख़िलाफ़ है बल्कि यह भारतीय संविधान की मूल भावना अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन के भी ख़िलाफ़ है।
आप ख़ुद पढ़ लीजिए।
@JioCare सिर्फ समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन ही देता है। समाधान नहीं करता है। इसीलिए तो मैं हमेशा कहता हूँ कि जिओ का सर्विस बहुत ही घटिया है। जिओ का पूर्ण रूप से बहिष्कार होना चाहिए। तभी इनको समझ में आएगा, कस्टमर का वैल्यू।
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@reliancejio@JioCare