मध्यप्रदेश के देवास में तिरंगा यात्रा निकालते वक्त डीजे की आवाज़ से कुपित मधुमक्खियों ने भाजपाइयों को नोच डाला,
विश्वस्त सूत्रों द्वारा मधुमक्खियों के पूर्वजो का नेहरू परिवार से संबंध बताया जा रहा है
आज विभाजन विभीषिका दिवस है।
ये देश कभी नही भूल सकता की लाखों लोगों का कत्लेआम कराने वाले मोहम्मद अली जिन्ना के साथ BJP के पुरखे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तीन राज्यों में सरकार बनाई थी।
देश ये भी नहीं भूल सकता की जिन्ना के नाती नाडियाडवाला के पैसे से जनसंघ और बीजेपी चलती थी।
"The Indian National Congress is deeply alarmed and gravely concerned by reports that China has denied India access to historically Indian patrolling points across the Line of Actual Control (LAC) in Taksing, Arunachal Pradesh.
The Indian National Congress demands that Prime Minister Narendra Modi immediately address the nation about these concerning developments."
Statement by Shri @salman7khurshid, Chairman, INC Foreign Affairs Department, on incursions along the Line of Actual Control.
कहानी शुरू होती है उस ₹90 करोड़ के बड़े टेंडर से, जो दिल्ली शिक्षा विभाग ने राज्य की छात्राओं के लिए 1,30,000 माउंटेन टेरेन बाइक्स (MTB) खरीदने के वास्ते निकाला था। कागजों पर सब कुछ भव्य लग रहा था। प्रति साइकिल लागत ₹6,957 तय की गई थी। लेकिन, जैसी कि कहावत है- 'चमकती हुई हर चीज सोना नहीं होती', इस चमकते हुए टेंडर के पीछे एक गहरी परत दबी हुई थी।
पर्दाफाश तब हुआ जब नेता सौरभ भारद्वाज ने मीडिया के सामने आकर एक हैरान करने वाला खुलासा पेश किया। उन्होंने मंच पर दो साइकिलें खड़ी कर दीं- एक तरफ बाजार में खुलेआम ₹4,200 में मिलने वाली आम साइकिल और दूसरी तरफ छात्राओं को बांटी जा रही वही ₹6,957 वाली 'खास' महंगी साइकिल।
सच्चाई सामने लाने के लिए मंच पर ही एक पेशेवर साइकिल मैकेनिक को बुलाया गया। मैकेनिक ने जब उस ₹6,957 वाली साइकिल को टटोला, तो उसकी पोल तुरंत खुल गई। उसके ब्रेक इतने घटिया और लोकल क्वालिटी के थे कि जरा सी रफ्तार में भी जान का खतरा बन जाएं। और जब मडगार्ड पर हाथ पड़ा, तो वह इतने कमजोर प्लास्टिक का निकला कि मामूली से दबाव से ही चकनाचूर होकर टूट गया। लोग सन्न थे
असली कहानी तो इसके पीछे छिपे 'खेल' में थी।
सवाल यह उठा कि देश की दिग्गज और अनुभवी साइकिल कंपनियां- जैसे 'एवॉन' (Avon), 'हीरो इकोटेक' (Hero EcoTech) और 'एसके बाइक्स' (SK Bikes)—इस रेस से बाहर कैसे हो गईं? और यह बड़ा ठेका किसकी झोली में गिरा ?
जांच की परतें खुलीं तो नाम सामने आया- 'मत्ता स्पोर्ट्स' (Matta Sports)।
हैरानी की इंतहा तब हुई जब पता चला कि इस कंपनी के प्रमोटर ने खुद सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि उनका साइकिल उद्योग से पहले दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था, उन्हें इसका शून्य अनुभव था!
फिर सवाल उठा कि बिना अनुभव वाली कंपनी को यह मलाईदार ठेका मिला कैसे ?
आरोप लगे कि टेंडर के नियमों के साथ सुनियोजित तरीके से खिलवाड़ किया गया था। नियमों के मुताबिक टर्नओवर की शर्त को अचानक चार गुना बढ़ाकर ₹360 करोड़ कर दिया गया, जबकि इस ठेके को हथियाने वाली 'मत्ता स्पोर्ट्स' का कुल टर्नओवर मात्र ₹40 करोड़ ही था।
इतना ही नहीं, आरोप हैं कि 'एसके बाइक्स' जैसी स्थापित कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए टेंडर के नियमों से साल 2025 का प्रावधान खासतौर पर हटा दिया गया था।
'एसके बाइक्स' का दावा चीख-चीखकर कह रहा था कि वे बिल्कुल उन्हीं मानकों और खूबियों वाली साइकिलें मात्र ₹4,100 में देने को तैयार थे। अगर थोड़ी भी ईमानदारी बरती जाती, तो जनता के खून-पसीने के टैक्स के ₹36.70 करोड़ सीधे-सीधे बचाए जा सकते थे।
अब हर कोई एक ही मांग कर रहा है इस पूरे खेल की उच्चस्तरीय जांच हो ।
Plastic instead of torsteel rods in an RCC slab, discovered along the Amritsar-Katra Expressway!
BJP corruption awaiting that fateful pilgrim bus to Vaishnodevi, that will fall into a gorge to reveal Amrit Kaal...
पाँच, दस और पचास ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बाद में बना लीजिए, मोदी "जी"।
पहले अस्पताल बनाइए।
जिन अस्पतालों में लोग ठीक होने जाते हैं, वहीं से ज़ख्मी होकर लौट रहे हैं।
क्या मज़ाक बना रखा है?
This is minor cronyism in this govt, done without blinking. The big ones are the ports, airports, mines to Adani & contracts to Adani & firms of BJP leaders & those who donate to BJP via electoral bonds etc.
The level of corruption now is many times of peak UPA govt
Obsessive foreign visits give him the luxurious life he's addicted to
and he's psychologically unstable when it comes to hugging world leaders, especially white — what an embarrassment, as most despise it!
Delhi's Lieutenant Governor has invoked powers under India's National Security Act that allow police to hold people in administrative detention without procedural guarantees, including the right to be informed of the grounds of detention and the possibility to challenge is before judicial authorities.
This move is deeply concerning. We urge the Delhi Police not to invoke the NSA against peaceful protesters.
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ये कहानी इतनी मज़ेदार है, इस ख़त से समझिये ... 2016 में इस कॉलेज को विदिशा से शिफ्ट किया जाता है, NCTE की टीम आती है कहती है भव्य बिल्डिंग है, लैब है ... सब ठीक है ... हक़ीक़त में 10 साल बाद भी खेत है!
They cut 55000 mangroves for some obscure road & now they’re trying to loot Rs.13000 crores from public funds under the fake narrative of “flood control”
BTW - Nothing controls floods like the mangroves & they cost nothing.
The shameless bunch takes people for chutiyas.