श्री चिराग पासवान जी, आपने कहा आरक्षण पर समीक्षा तो छोड़िए, चर्चा भी नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ को इतने लोग सड़कों पर आ जाएँगे कि सँभालना कठिन हो जाएगा।
मुझे नहीं लगता कि आपको ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का अर्थ भी पता है। नौ बार के सांसद और विधायक पिता के पुत्र, आज भी आरक्षित सीट से राजनीति कर रहे हैं। और दुर्भाग्य कि आज भी अपने समर्थकों को आप आगजनी-दंगा करने वाले गुंडों की तरह ही देखते हैं कि इन्हें सँभालना मुश्किल हो जाएगा।
आप ऑप्रेस्ड हैं, दलित हैं, पीड़ित हैं और आप सड़कों पर आने की धमकी भी दे देते हैं, ये विरोधाभास कैसे बाँच लेते हैं आप?
और हाँ, आपके चाहने, न चाहने से कुछ नहीं होता। घर में टीवी है तो एकाध बार डिबेट देखिए कि ‘चर्चा’ किस विषय पर हो रही है। और @JPNadda जी आरक्षण पर सोच रहे हैं या नहीं, यह भी आपको पता चल जाएगा।
वैसे यह भी ठीक है कि जब आपको ही ‘चर्चा’ और ‘समीक्षा’ का नहीं पता, तो जिन्हें आप सड़कों पर लाना चाह रहे हैं, वो कितना ही समझ पाएँगे। आपकी जाति SC का सबसे बड़ा हिस्सा ले जाती है। पासवान, चमार, धोबी और पासी 95% आरक्षण ले रहे हैं।
तो देखिए, युवा बिहारी @iChiragPaswan जी, चर्चा तो आरंभ हो चुकी है और @BJP4India ने एक कदम आधिकारिक रूप में बढ़ाया है, एक कदम अनाधिकारिक रूप से अन्य लोगों से रीच आउट कर के।
आप ‘बिहारी फर्स्ट’ की बात करते थे, ये अचानक से माफिया की भाषा क्यों बोल रहे हैं। आप तो मोदी जी के हनुमान हैं, मोदी जी पर विश्वास रखिए। वो चर्चा करवा रहे हैं, वरना आपको लगता है कि अनिल बेलूनी जी की कृपादृष्टि के बिना कोई भी टॉपिक चर्चा में आ सकता है?
गेम समझिए। परिस्थिति बदल रही है। महबूबा ने भी धमकी दी थी। वीपी सिंह को भी लगा था कि वो अनंत काल पीएम रहेगा। जनता से उसी पार्टी को चुना जिसके नेता ने संसद में खड़े हो कर ओबीसी आरक्षण का विरोध किया था।
नेहरू ने OBC को 1955 में ही कोटा देने का विरोध किया था। 1961 में मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में नेहरू ने आरक्षण का विरोध किया था। पर वो लगातार चुनाव जीतते रहे। तो ऐसा तो है नहीं कि यदि @narendramodi आज इस पर समीक्षा करें, और वह चुनाव हार जाएँगे!
संभव है कि सवर्ण और अनरिप्रेजेंटेड ओबीसी, एससी एकमुश्त वोट दे दे! इसीलिए, चर्चा और समीक्षा दोनों हो रही है, और हम रिफॉर्म भी करवा लेंगे।
Hello @DelhiPolice एक दिन में आपने ग़लत बोलने वाले @ajeetbharti पर FIR रजिस्टर कर ली !!
लेकिन पिछले एक साल से हज़ारो प्रयास के बाद भी मेरे साथ शोषण करने वाले सांसद पर FIR क्यों नहीं की ?
आप किसके इशारों पर काम करते हो ?
11 सितंबर को दिल्ली पुलिस थाने में आ कर ही धरना दूँगी क्या मैं महिला नहीं हूँ मेरे सम्मान का क्या ?
#Law #Delhi
ये प्रति दिन सामान्य वर्ग को गाली देता है बिहार सरकार ने इसको अधिकार दे रहा है के ये गाली देगा तुम क्या कर लोगे ?
@ajeetbharti गाली देगा तो SC ST एक्ट?
इसका मतलब तो यही हुआ न के सरकार चाहती है के SC ST एक्ट के मामले बढ़े ?
सामान्य वर्ग को सामूहिक फाँसी ही दे दो ।
It's time for judicial review of the amendments made in 2018 to SC/ST Atrocities Act which removed the safeguards laid down by the Supreme Court to check its rampant misuse.The Amendments have made it worse. Every affected party must prefer a constitutional challenge to the Act.
@Vishal13755990@SauravDassss Chandrashekhar jo sabko Randi likhta ghoom raha tha Main tujhe bolun apni bahan aise kisi mahan vyakti ko de de, accha lagega maza aayega?
Ye casteism nahi self-respect hai.
FIR to kisi par bhi kara do utha kar, SC-ST act ke 91% cases fake register hue ye bhi unmein se ek hai.
@Vishal13755990@SauravDassss Bro, I was in the live so get your facts straight. Ajeet Bharti did NOT comment on Chandrashekhar Azad’s mother or sister. He replied to a commenter in same way who had made a disgusting comment about Ajeet’s sister. So where did “Azad’s mother and sister” suddenly come from?
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
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मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
वो कौन सी जातियाँ हैं जिनका उत्थान हो गया और कौन सी जातियाँ हैं जो आज भी वंचित हैं। OBC में एक हजार जातियाँ ऐसी हैं जिनको लाभ नहीं मिला और सवर्ण तो भाई बाबा जी का ठुल्लू लेके घूम ही रहा है।
सवर्ण आज तक हर पार्टी के लिए, चाहे पहले कांग्रेस के लिए हो, अभी भाजपा के लिए, एक वोट बैंक बन करके रह गया है और कहीं न कहीं उसे राष्ट्रवाद, हिंदुत्व ये सब कह-कह करके मूल विषयों से भटकाया जाता है। मूल विषय क्या आरक्षण का है।
EWS को आपने कौन सा आर्थिक सौहार्द दिया? न एज रिलैक्सेशन है, न उसकी फीस कम हुई, न हॉस्टल उसके लिए स्पेशल मिलते हैं, न प्रशिक्षण केंद्र, कुछ नहीं EWS को। इस कारण से मैं कहता हूँ कि EWS को at par with SC ट्रीट किया जाए आर्थिक आधार पर।
सुने सवर्णों की सारी मांगे @ajeetbharti जी ब्रो से, संलग्न वीडियो में...
गुजरात की भूमि से एक हिन्दू जननायक निकला:
>उसने लोगों को एक नए भारत का सपना दिखाया।
>कुछ हिंदू उसे अपना नेता मानते हैं।
>विदेशी उसे खूब पसंद करते हैं।
>भले ही मु$लिम उसे गाली दें पर फिर भी उनका नेता बनने की चाह में वह लगातार हिंदुओं को नीचा दिखाता रहा और अंततः बुरी मौत मरा।
@khanumarfa Sunder Kand Paath is being conducted here, not activities like bomb-making as alleged in some madrasas and mosques. Unlike universities like Jamia and Aligarh, where the focus often shifts to Roza-Iftaari for an entire month, this promotes devotion and peace?
@AmazonHelp@ajassy Don't try to fool us by giving the link of issues related to sign in issues.
I have an issue with the Pay on delivery option.
Kindly mention the reason for closing my POD option when most of the orders were prepaid and there wasn't any cancellation.
@AmazonHelp These are the options in the link you gave, where is the option regarding the Pay on Delivery option?
@ajassy Kindly look at the team how they are resolving the issue.
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