सहारनपुर के बाद अब सरकार की नज़र मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद पर जिसे गिराने का नोटिस थमा दिया गया है..
मस्जिद के लोगों को नोटिस जारी कर नक़्शा दिखाने के लिए कहा गया है अगर नक़्शा नहीं दिखा पाये तो मुस्तफ़ा मस्जिद को सरकारी बुलडोजर से गिरा दिया जाएगा
मस्जिद के ठीक बराबर में जैन मंदिर भी है.अब सवाल है क्या मंदिर के लोगों को भी नक्शा दिखाने का ऐसा कोई नोटिस दिया गया है ?
BBC लंदन की पत्रकार रही हुदा जरीवाला को उत्तरप्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने किया गिरफ़्तार ,
हुदा जरीवाला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपराधी कहा था जिसके बाद पुलिस ने इस मामले मे शिकायत दर्ज कर जेल भेज दिया ,
सहारनपुर कलेक्ट्री परिसर मे मस्जिद को शहीद करने के बाद हुदा जरीवाला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपराधी कहा जिसके बाद सहारनपुर पुलिस ने इन्हे गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया ,
हुदा जरीवाला ने दिल्ली मे हुई शाहीन और नफीसा पिटाई के बाद अपनी बात मज़बूती से रखी , लेकिन सहारनपुर में कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले पर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाने और अपनी बात रखने वाली पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता हुदा ज़रीवाला को यूपी पुलिस द्वारा आनन-फानन में गिरफ्तार कर जेल भेज देना बेहद शर्मनाक है ,
लोकतंत्र में जब सवाल पूछने वाली आवाज़ों पर हथकड़ियां लगाई जाने लगें , तो समझ लेना चाहिए कि शासन व्यवस्था जवाबदेही से कितना खौफजदा है ,
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले पर बयान देने वाली मुस्लिम पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हुदा जरीवाला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अपने बयान में जरीवाला ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सहारनपुर के डीएम को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और मुख्यमंत्री योगी को मस्जिद ध्वस्तीकरण के लिए ‘अपराधी’ बताया। इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई, जिसके बाद सहारनपुर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की 120 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को ज़मींदोज़ किए जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंदर से भी विरोध और इंसाफ के सुर उठने लगे हैं। पूर्व भाजपा विधायक शशिबाला पुंडीर ने इस गैर-संवैधानिक बुलडोज़र कार्रवाई पर गहरा दुख जताते हुए अपनी ही सरकार और सूबे👇
उत्तर प्रदेश में कुछ दिन पहले 5 मिनट शांतिपूर्वक नमाज़ पढ़ने पर FIR दर्ज हो गई थी!
अगर इसी ट्रेन में कोई नमाज़ पढ़ लेता तो बहुसंख्यक समाज अब तक हाय तौबा कर रहा होता!
BBC लंदन की पत्रकार रह चुकी मुस्लिम पत्रकार हुदा जरीवाला का बयान ,
" जिसने भी मुसलमानो की मस्जिद शहीद की वो अपराधी है ",
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अपराधी कह रही है हुदा जरीवाला ,
समाजवादी पार्टी की तेज़-तर्रार सांसद इकरा हसन ने प्रशासन के धोखे और साज़िश का बड़ा पर्दाफाश किया है। इकरा हसन ने साफ किया है कि ज़िला कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस मामले में यथास्थिति (Status Quo) बरकरार रखने को कहा गया था और मुस्लिम पक्ष के पास ऊपरी अदालत का दरवाज़ा खटखटाने के👇
कैराना की मुस्लिम सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर कलेक्ट्री मस्जिद गिराये जाने के बाद बड़ा खुलासा करते हुए कहा ,
" जिला कोर्ट के आदेश के बाद 22 दिन का समय था , हम हाईकोर्ट जाने वाले थे लेकिन बिना किसी लिखित आदेश के मस्जिद गिरा दी गयी " ,
नमाज़ पढ़ना इतना बड़ा गुनाह हो गया? अगर सर्किट हाउस परिसर में एक सड़क पर 3-4 मिनट नमाज़ पढ़ लिया तो FIR? अभी अभी सावन बीता है। हुड़दंग से लेकर मारपीट और हंगामा सब हमने देखा है। पुलिस वालों को औक़ात दिखाते कांवड़ियों को भी देखा है। : अजीत अंजुम (वरिष्ठ पत्रकार)
सहारनपुर मस्जिद के 1896 के दस्तावेज़ है फिर भी मस्जिद को बुल्डोज़ कर दिया गया, काग़ज़ होते हुए भी मस्जिद को तोड़ दिया! हाईकोर्ट जाने का मौक़ा भी नहीं दिया गया! बोले हमज़ा मसूद
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद 1911 में याकूब और वालिद खान की ज़मीन पर बनाई गई थी। बाद में उन्होंने डीएम कार्यालय के लिए अपनी ज़मीन दान कर दी। यानी सरकारी इमारत से पहले ही वहां मस्जिद मौजूद थी। इसके बावजूद मस्जिद को हाईकोर्ट में अपील का मौका दिए बिना गिरा दिया गया। यह बेहद शर्मनाक है।
सहारनपुर मस्जिद बुलडोज़र के बाद पहली बार मस्जिद के इमाम आए कैमरे पर!
मलबे में कुरान-ए-पाक और जानमाज़…कुरान को कबाड़ियों ने नदी में बहाया!
इमाम साहब का Exclusive Interview - पूरी कहानी YouTube पर देखें।👇
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नमाज़ पढ़ना इतना बड़ा गुनाह हो गया ? अगर सर्किट हाउस परिसर में एक सड़क पर 3-4 मिनट नमाज़ पढ़ लिया तो FIR ?
अभी अभी सावन बीता है . हुड़दंग से लेकर मारपीट और हंगामा सब हमने देखा है . पुलिस वालों को औक़ात दिखाते कांवड़ियों को भी देखा है .
सांसद इमरान मसूद के भतीजे और युवा नेता हमज़ा मसूद का एक बेहद भावुक और दर्द भरा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपनी गहरी बेबसी ज़ाहिर की है। एक मस्जिद को न बचा पाने के कारण हमज़ा इतने आहत हैं कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और डिग्रियों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैसे तो सजा संवैधानिक होनी चाहिए, लेकिन जब अपराध अलग लेवल के हो तो सुताई भी अलग लेवल की होनी चाहिए।
लिव इन पार्टनर काजल की हत्या के मामले में गुजरात पुलिस ने फैज़ल को लगातार लाठी से सुताई करी।