उत्तर प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
पावर कॉरपोरेशन के हालत बयां करता ये AI वीडियो।
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माननीय मुख्यमंत्री जी पावर कारपोरेशन के अभियंता, कर्मचारी, संविदा कर्मचारी अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं, बिजली कर्मी बिना रेस्ट के दिन रात कार्य कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने का काम कर रहे हैं, वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन का प्रबंध 3 साल से बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न पर उत्पीड़न कर रहा है और उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, किसी भी स्तर पर पिछले 3 साल से कर्मचारियों से ना तो माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा वार्ता की गई है और ना ही पावर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन द्वारा वार्ता की जा रही है, पावर कारपोरेशन में शीर्ष स्तर पर तानाशाही चरम पर है।
राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकल गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 नोटिस देकर निर्दोष अभियंताओं व कर्मचारियों के वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी आपसे अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वर्टिकल व्यवस्था को समाप्त किया जाए ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
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लखनऊ में अभियंता संघ की हुई केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में निर्दोष अभियंताओं पर की गई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में निर्णायक संघर्ष का लिया संकल्प:उत्पीड़न की कार्रवाइयों को निरस्त कराने के लिए मा मुख्यमंत्री जी से की प्रभावी हस्तक्षेप की मांग।
@ChairmanUppcl@UPPCLLKO
उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न होने पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की:15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी “जन-जागरण अभियान” का ऐलान : सभी डिस्कॉम मुख्यालय पर प्रदर्शन:उत्पीड़न होने पर सीधी कार्रवाई की चेतावानी
@ChairmanUppcl@UPPCLLKO
विद्युत अभियंता संघ में 12 अप्रैल को लखनऊ में बुलाई केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक :मार्च 2023 के आंदोलन व निजीकरण के विरोध में जारी आंदोलन के फलस्वरुप की समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में होगा निर्णायक संघर्ष का ऐलान:
@myogiadityanath@aksharmaBharat@UPPCLLKO
ऊर्जा प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों पर कीगई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में संघर्ष का शंखनाद।
मा. मुख्यमंत्री जी से अनुरोध हैकि बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को निरस्त कराये जाने की कृपा करें,जिससे बिजली कर्मी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहे।
निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है।
ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
@myogiadityanath@UPPCLLKO
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
#stop_privatization_of_uppcl
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आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
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*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में विद्युत अभियंता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी : अभियंताओं पर की गयी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गई तो 20 नवंबर के बाद होगा आंदोलन:
उ.प्र. राज्य विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गयी और अभियंताओं की ज्वलंत समस्याओं का समय रहते समाधान न किया गया तो प्रदेश के तमाम विद्युत अभियंता 20 नवंबर के बाद आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में यह संकल्प दोहराया गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का टेंडर होते ही तमाम अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगें जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में मुख्यतः संयुक्त उपक्रम में बनाई जा रही ओबरा डी और अनपरा ई परियोजना को उत्पादन निगम को दिया जाए, उत्पादन निगम में सैकड़ों की संख्या में अधिशासी अभियंताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विगत 04 वर्षों से सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर रुकी हुई पदोन्नति तत्काल की जाए, वर्टिकल रीस्ट्रचरिंग के नाम पर निजीकरण करने हेतु अभियंताओं के पदों को समाप्त करने की साजिश तत्काल बंद की जाए, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्म कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के 19 मार्च 2023 के निर्देश के अनुसार वापस ली जाए, वर्तमान आंदोलन के फलस्वरुप परामर्श व चार्जशीट के नाम पर अन्य कारणों से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के तहत अभियंताओं की रोकी गयी प्रोन्नति, स्थायीकरण आदेश तत्काल जारी किये जाएं और आंदोलन के फलस्वरुप उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं के ट्रांसफर निरस्त किये जाएं, आईटी के नाम पर अभियंताओं के साथ लगातार किया जा रहा भेदभाव व उत्पीड़न बंद किया जाए।
उ.प्र. राज्य अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद अभियंता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का सतत् प्रयास किया है और अभी भी विद्युत अभियंता इस कार्य में लगें हैं किंतु पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन इसके बदले में अभियंताओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने पर आमदा है। जिसके विरोध में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया गया।
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन: लेसा में निजीकरण हेतु वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर 8000 पद कम किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण के हर प्रारूप और हर कोशिश का किया जायेगा पुरजोर विरोध।
राजधानी लखनऊ में लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में आज बिजली कर्मियों ने दफ्तरों के बाहर आकर जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के लगभग 8000 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे राजधानी की बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने की पूरी संभावना है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वर्टिकल प्रणाली केवल निजीकरण के लिए लागू की जा रही है और निजी कंपनियों का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि टीजी 2 के लगभग 1350 पद, जूनियर इंजीनियर्स के 287 पद और अभियंताओं के 45 पद समाप्त किए जाने से लेसा में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया है और त्यौहार के समय हर स्तर के कर्मचारी में लखनऊ से हटाए जाने का भय व्याप्त हो गया है जिसका कार्यप्रणाली पर भारी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े शहरों में वर्टिकल प्रणाली लागू कर इन शहरों की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के अन्तर्गत देने की तैयारी है। संघर्ष समिति ने कहा कि देश के जिन शहरों में निजी कंपनियां अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत काम कर रही हैं उन शहरों में इसी प्रकार की प्रणाली लागू है जिससे कम कर्मचारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली के नाम पर अत्यधिक अल्प वेतन भोगी लगभग 6000 संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है जिससे बिजली व्यवस्था तो चरमरा जाएगी ही साथ ही इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाना अमानवीय कृत्य भी है।
दीपावाली के पर्व के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने आज विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा तथा निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में आज रेजिडेंसी पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों में सभा के अन्त में वरिष्ठ बिजली मजदूर नेता गिरीश पांडे जी की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और दो मिनट मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करें अन्यथा केन्द्र सरकार ग्रांट देना बंद कर देगी : ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश : निजीकरण थोपने की हर कोशिश का होगा राष्ट्रव्यापी विरोध
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि यह विदित हुआ है कि 16 सितम्बर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स ऑफ पॉवर की मीटिंग में यह सहमति बनी है कि विद्युत वितरण निगमों के संचालन हेतु राज्य सरकारों को तीन विकल्प दिए जाए और जो राज्य सरकार इन तीनों विकल्पों को न माने उनको केन्द्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट बन्द कर दी जाय।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया व्यापक रूप से चलाई जा रही है जिसका बिजली कर्मी विगत 11 महीनों से जोरदार विरोध कर रहे हैं। अब इन घटनाक्रमों से उद्वेलित सारे देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट होकर सामने आ गए हैं और वे निजीकरण का व्यापक विरोध करेंगे और राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जायेगा जिसका निर्णय आगामी 03 नवम्बर को मुम्बई में होने वाली नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की मीटिंग में लिया जायेगा।
संघर्ष समिति ने बताया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की इसी मीटिंग में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के मसौदे को अन्तिम रूप दिया गया था जिसे 09 अक्टूबर को विद्युत मंत्रालय ने जारी कर दिया है। संघर्ष समिति निजीकरण हेतु लाए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का प्रबल विरोध करती है और मांग करती है कि इसे तत्काल वापस लिया जाय।
उन्होंने बताया कि मुम्बई में 04 एवं 05 नवम्बर को हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा "विद्युत वितरण निगमों के सस्टेनेबिलिटी के लिए पी पी पी मॉडल" है जिसका अर्थ निजीकरण ही है।
संघर्ष समिति ने बताया कि सात राज्यों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की बैठक में हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार बिजली के निजीकरण पर राज्यों को तीन विकल्प देने जा रही है, अन्यथा की स्थिति में केंद्र सरकार की ग्रांट बंद कर दी जाएगी।
पहला विकल्प है - राज्य सरकार विद्युत वितरण निगमों की 51% हिस्सेदारी बेंच दे और पीपीपी मॉडल पर विद्युत वितरण कंपनियां चलाई जाए।
दूसरा विकल्प है - विद्युत वितरण कंपनियों की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी जाए और प्रबंधन बिजी कंपनी को सौंप दिया जाए।
तीसरा विकल्प है - जो राज्य निजीकरण नहीं करना चाहते तो वह अपनी विद्युत वितरण कंपनियों को सेबी और स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर कर लिस्टिंग कर दें।
यह पता चला है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में यह सहमति हुई है कि जो राज्य यह तीनों विकल्प न दें उनका केंद्र से मिलने वाली ग्रांट बंद कर दी जाए और आगे कोई आर्थिक मदद न की जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली संविधान की आठवीं अनुसूची में कॉन्करेंट लिस्ट पर है जिसका मतलब होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बराबर के अधिकार हैं। ऐसे में चुनिंदा सात प्रांतों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) की राय लेकर निजीकरण का निर्णय राज्य सरकारों के ऊपर कैसे थोपा जा सकता है ?
संघर्ष समिति ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति की कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड है उसे ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में किस हैसियत से और क्यों बुलाया जा रहा है ? उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिया की भूमिका में आ गई है।
उन्होंने बताया कि मुंबई में चार और पांच नवंबर को होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का एकमात्र एजेंडा भी यही है। अब स्पष्ट हो गया है कि इस डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी में 2025 में यही निष्कर्ष निकाला जाएगा जो ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग की राय है। ऐसा लगता है कि सारे देश में निजीकरण की मुहिम बहुत तेज गति से चलाई जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह शर्तें निजीकरण हेतु राज्य सरकारों पर बेजा दबाव डालना है और एक प्रकार से ब्लैक मेल है जिसके विरोध में देशव्यापी आन्दोलन चलाया जाएगा।
उप्र में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 324 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
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विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का किया विरोध : निजीकरण के उद्देश्य से हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
उत्तर प्रदेश के चार शहरों में विद्युत वितरण प्रणाली की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग करने से आए दुष्परिणामों को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने 01 नवंबर से लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर हजारों पदों को समाप्त किए जाने का विरोध किया है।
आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस संबंध में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के माननीय विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से फोन पर बात की। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद मेरठ की बिजली व्यवस्था पहले से खराब हो गई है। श्री अमित अग्रवाल ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को हुई प्राक्कलन समिति की बैठक में भी प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष के पद से उन्होंने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रबल विरोध किया था। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि विद्युत वितरण की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है अतः इसे वापस लिया जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रबन्धन यह सब तब कर रहा है जब बिजली कर्मी और अभियन्ता दीपावाली के पर्व पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने हेतु योजनाबद्ध ढंग से काम कर रहे हैं। अभियंता संघ ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जनपदों में 16 अक्टूबर को अभियंताओं की सभा भी बुलाई है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
निजीकरण के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने लगातार 320 वें दिन जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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अत्यंत दुखद सूचना-
लेसा में दुबग्गा डिवीजन के अधिशासी अभियंता इं• विशाल वर्मा जो 2012 बैच के अभियंता थे अभी मात्र 38 साल के थे उनके असामयिक निधन हो गया है उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश के विद्युत अभियंताओं में भारी शोक व्याप्त हो गया है।
इं• विशाल वर्मा जी अपने कार्यों के प्रति बहुत ही निष्ठावान, ईमानदार और मेहनती अभियंता थे तथा अभियंता संघ के बहुत ही समर्पित एवं सक्रिय सदस्य भी थे।
इस प्रकार अचानक से उनका निधन हो जाना पूरे अभियंता समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है।
अभियंता संघ द्वारा फील्ड हॉस्टल पर दिवंगत पुण्य आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक सभा की गई।
ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें और इस दुख की घड़ी में शोक संतृप्त परिवार को साहस प्रदान करें।
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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