देश के ‘राजा’ का हुक्म है - जो बेरोज़गारी, महंगाई, गलत GST, अग्निपथ पर सवाल पूछेगा - उसे कारागृह में डाल दो।
भले ही मैं अभी हिरासत में हूं, भले ही देश में अब जनता की आवाज़ उठाना जुर्म हो, लेकिन वो हमारा हौसला कभी नहीं तोड़ पाएंगे।
संविधान में संशोधन होना चाहिए :- सरकारी नौकरी उसे ही मिले, जिसके बच्चा न हो.! मुख्यमंत्री वही बने जो कुंवारा हो, और प्रधानमंत्री वो.जिसने बीबी छोड़ रखी हो.।
भाइयों-बहनों!
जिन्होंने..
◆ किसानों को रौंदा,
◆ बेटियों के दुष्कर्मियों का साथ दिया
◆ आधी रात में बेटियों को जलाया
◆ पुलिस हिरासत में दलित को मारा
◆ उप्र के हर युवा को बेरोजगार बनाया
◆ Petrol-Diesel-LPG को बजट के बाहर किया
क्या आप उन्हें कभी भी माफ करेंगे?
महंगाई,बेरोज़गारी,किसान आंदोलन,आर्थिक अनिश्चितता,सीमा अतिक्रमण व जन-स्वास्थ्य जैसी ज़रूरी बहसों से मुँह फेरकर,गाँधी-सावरकर व “छह ग्राम सेलिब्रिटी नशा” जैसी अप्रासंगिक थेथरई पर पूरा-पूरा दिन स्क्रीन समर्पित करने के लिए किस ख़ास तरह की बेशर्मी व कुतार्किक पाखंड की ज़रूरत होती होगी?
यही व्यक्ति प्रधानमंत्री हैं न!
या कोई बहुरूपिया बैठ गया है!
काश! यह प्रधानमंत्री होते तो
महंगाई-महंगाई इतना रटते कि वह
अच्छे दिन की तरह पककर गायब हो जाती!
भाजपा सरकार ने लम्बे समय से चली आ रही ‘ओबीसी’ समाज की गणना की माँग को ठुकरा कर साबित कर दिया है कि वो ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ को गिनना नहीं चाहती है क्योंकि वो ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में उनका हक़ नहीं देना चाहती है।
धन-बल की समर्थक भाजपा शुरू से ही सामाजिक न्याय की विरोधी है।