See this madarchd dalit. Can't do any work but still gave birth to 3 kids. Can't even feed them. Because he sells free Rashan from the government for Desi daaru. Imagine his Madarchdpana, instead of feeding his child, makes reels with a phone and jio internet. His madrchd son will then say "5000 saal se shoshan hua". This is typical dalit modus operandi....... Breed like pigs then say Jitni Abaadi Utna Haq
यह भ्रामक और काल्पनिक दावा डॉ. अंबेडकर की पुस्तक जाति का उच्छेद Annihilation of Caste 1936 से उपजा था। पुस्तक में पेशवा ब्राह्मण कालीन पुणे में अछूतों के गले में मिट्टी का बर्तन थूक के लिए और कमर में झाड़ू बाँधने का वर्णन है।
जबकि पेशवा ब्राह्मणों के दफ़्तरों, डायरियों और लाखों अभिलेखों में इसका कोई प्राथमिक लिखित प्रमाण या कोई भी एक भी अन्य नहीं मिलता है।
5 जून 1936 को पत्रकार एन.सी. केलकर ने केसरी में डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर को चुनौती दी थी की इसका प्रमाण दो आप यह किस प्रमाण और आधार पर लिख रहे है। भीम राव अंबेडकर ने तब स्वीकार किया की इसका मेरे पास कोई दस्तावेज़ी या अन्य सबूत नहीं, अम्बेडकर ने आगे कहा कि यह दावा मौखिक परंपरा पर टिका है। यानी यह बात भीम राव अम्बेडकर ने किसी से सुनी थी!
और अपनी पुस्तक में लिख दिए थे झाड़ू मटकी वाली कहानी! उनके पास इसका ना कोई सबूत था ना कोई प्रमाण उंन्होने कहा कि उन्होंने किसी से सुना था, जबकि यह भी हो सकता है उंन्होने किसी से सुना भी ना हो और अपनी जाति को विक्टिम दिखाने के नकली कहानी जोड़ दी, क्योंकि अम्बेडकर पढ़े लिखे थे वो अच्छे से जानते थे आने वाले समय मे लोकतंत्र में विक्टिम बनने का कितना फायदा होगा!
यह कथा बिना किसी सबूत के बिना किसी आधार के लिखी गई फिर भी यह कथा दशकों तक दोहराई गई। भाषणों, किताबों, रैलियों और बाद में सोशल मीडिया में इसे बार-बार दोहराया गया।
मौखिक कथा को ऐतिहासिक सत्य का जामा पहनाया गया। भावनात्मक प्रभाव इतना गहरा था कि लोग इसे निर्विवाद मानने लगे।
वास्तविक छुआछूत और भेदभाव कहाँ थे कब थे सड़क, कुआँ, मंदिर पर पाबंदियाँ थी या नही थी और कहाँ थी इसका भी कोई प्रमाण नही मौजूद। इन सभी विशिष्ट प्रथा का कोई ठोस आधार नहीं मिलता।
फिर भी इसे प्रतीक बनाकर सामूहिक पीड़ित-भावना गढ़ी गई। उसी पीड़ित-कथा के सहारे आरक्षण की माँग को नैतिक और राजनीतिक वैधता दी गई।
कल्पना जब बार-बार दोहराई जाए, तो वह इतिहास बन जाती है। और इतिहास जब भावना से जुड़ जाए, तो नीति बना देता है। यही इस कथा का सफ़र है मौखिक से मुद्रित, मुद्रित से जनमानस, और जनमानस से आरक्षण की राजनीति तक।
सामान्यवर्ग वास्तविकता के साथ जागना होगा
आज मैं सारी बहस का अंत करते हुए कुछ "सार्वभौमिक सत्य" पेश करके अपने इतिहास ज्ञान को "मूलनिवासियों" के चरणों में फेंकता हूँ :-
"सम्राट अशोक" ही इस धरती के कर्ता-धर्ता हैं,
"पाली" सबसे प्राचीन भाषा है, पूरे संसार में "बुद्ध" ही "बुद्ध" हैं।
"ब्राह्मण" आक्रमणकारी हैं और "मुसलमान" मूल निवासी हैं।
"चाणक्य" काल्पनिक हैं, लेकिन "चंद्रगुप्त मौर्य" शासन के प्रणेता हैं..
"रामायण" काल्पनिक है, लेकिन शंबूक का वध राम ने किया था ..
"महाभारत" जातक कथा है लेकिन "द्रोणाचार्य" ने "एकलव्य" का अंगूठा काट दिया..
देवी काल्पनिक हैं पर इनके पूर्वज महिषासुर को दुर्गा जी ने ही मारा था ..
और अंतिम सत्य यह है कि दुनिया में सबसे पढ़े-लिखे "अंबेडकर" हैं। वे न होते तो मनुष्य दो पैरों पर चलना नहीं सीख पाता।
इति..🙏🙏
आरक्षण केवल इन 4 श्रेणियों को ही दिया जाना चाहिए:
1.प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति को
2.प्रत्येक अनाथ को
3.देश के लिए जान गंवाने वाले शहीदों के बच्चों को
4.आर्थिक आधार पर प्रत्येक गरीब व्यक्ति को, चाहे उनका धर्म और जाति कुछ भी हो।
क्या आप इस बात से सहमत हैं???
आरक्षण उसके असली हकदार को मिले बस ।
नीले कबूतरों मनुस्मृति लिखी सवर्णों ने,
उसमें दलित को नीचा बताया गया
लेकिन संविधान तुम्हारे हिसाब से बाबासाहेब ने लिखा था, तो फिर उसमें दलितों को क्यों नीच बताया गया? सारी जातियों को एक समान कर देते
बहुत तगड़ा सवाल भाई ने दिल खुश कर दिया 🔥🔥
@izeennatrana ये जो sc st obc वालों को ब्राह्मणों और सवर्णों कि बहु बेटियों कि माँगने कि आदत लग गयी है। ये अपने ही राज्य में ब्राह्मणों और सवर्णों MP MLA मंत्री कि बेटियों का हाथ मांगे जाकर गरीबों कि बहु बेटियांँ सस्ती होती है क्या GNDड में दम है तो जाकर बोलो ना
ये जो sc st obc वालों को ब्राह्मणों और सवर्णों कि बहु बेटियों कि माँगने कि आदत लग गयी है। ये अपने ही राज्य में ब्राह्मणों और सवर्णों MP MLA मंत्री कि बेटियों का हाथ मांगे जाकर गरीबों कि बहु बेटियांँ सस्ती होती है क्या GNDड में दम है तो जाकर बोलो ना
@Baliyan_x भाई आरक्षण में कुछ नहीं हुआ वो 50% सीमा hai 50% जो समान्य वर्ग के थे उसमे से 10% मिल रहा hai yaar reform का मतलब तब कहते जब आरक्षण के 50% में ही मिलता hai