@PremchandTweet सिद्धांत प्रिय व्यक्ति सर्वाधिक सिद्धांतहीन होता है...
उत्तरोत्तर सैध्दांतिक निर्माण और विध्वंस एक अनंत प्रक्रिया है..
जिस तरह ज्ञान के विकास की..
“जिस तरह बीमारी में मनुष्य को ईश्वर याद आता है उसी तरह अकृतकार्य होने पर उसे अपने दुस्साहसों पर पश्चाताप होता है । पराजय का आध्यात्मिक महत्त्व विजय से कहीं अधिक होता है ।”
- मुंशी प्रेमचंदhttps://t.co/TEuWg7fcJi
@PremchandTweet कोई बताए.
सूरज क्यो रोशनदान से झांकता है ?
पवन खिड़की से पहुंचती है ?
पानी नदियों से बहता खेतों तक आता है?
पेड फल फूल देते है ?
और धरती का धैर्य.
एक ही उत्तर..
परोपकार
मगर
मनुष्य तो सांस लेते भी
निस्वार्थी नहीं कहला सकता
क्योंकि उस कर्म में भी
जिंदा रहने का स्वार्थ है ....
@manojkjhadu पूज्य विभीषण
आप सत्य व धर्मनिष्ठा के नाते
रावण को त्याग श्रीराम की शरणागत हुए
और बच गए..
वरना संस्कृती के संहारक
तो हर कालखंड में दिग्भ्रमित होते
व देखने में आए है....
@manojkjhadu सबसे पहले तो आवश्यकता कृत्रिम अथवा प्राकृतिक के अंतर को समझने की है..
फिर यदि हमारे संदर्भ में
सावधान रहने की बात है तो..
यह भी आवश्यक है कि
47 में उसके जन्म से
डीएनए की जांच होनी चाहिए
और उसमें क्या निकलेगा ?
उसको आप भली-भांति जानते हैं..
@sahityasrijan ऐसे ही मेरे कितने साथी भूखे रह,
लगे हुए हैं औरों के हित अन्नू उगाने।
इतना समय नहीं मुझको जीवन में मिलता,
अपनी खातिर सुख के कुछ सामान जुटा लूं।
पर मेरे हित उनका भी कर्तव्य नहीं क्या ?
मेरी बाहें जिनके भरती रही खजाने,
मैं मज़दूर मुझे देवों की बस्ती से क्या.
देवराज दिनेश
#MayDay
@thepoetichouse .......
सबसे खतरनाक वह चाँद होता है
जो हर हत्याकांड के बाद
वीरान हुए आंगन में चढ़ता है
पर आपकी आंखों को मिर्चों की तरह नहीं गड़ता
..... .....
अवतार सिंह संधू