'फूड ग्रेड महुआ संग्रहण' के लिए ग्रामीणों को वन विभाग द्वारा किया जा रहा जागरूक, अच्छी क्वालिटी के महुआ एकत्र करने के लिए ग्रामीणों को बांटे गए नेट।
@JashpurDist#foodgrademahua#CGModel
शिक्षा व्यवस्था की यह तस्वीर जशपुर जिले के झारखंड बॉर्डर से लगे गांव भलमंडा की है। यहां प्राथमिक शाला में 82 बच्चे हैं पर स्कूल भवन नहीं। मजबूरी में बच्चों की क्लास इस तरह से लगाई जा रही है। @SchoolEduCgGov
@PriyankaJShukla आपके द्वारा की गई इस पहल का असर आज स्पष्ट दिख रहा है। किसानों के लिए नुकसान की खेती अब मुनाफे की खेती बन चुकी है। खेती की 40 साल पुरानी परंपरा को तोड़ने का पूरा श्रेय आपको और उस वक्त की प्रशासनिक टीम को जाता है। किसानों के जीवन में बदलाव आया है और वे मिश्रित खेती अपनाकर खुश हैं।
हौसले की उड़ान से सब संभव!
पहले #कोरोना को हराया, डेढ़ महीने बाद 5289 मीटर ऊंचाई पर लहराया #तिरंगा!
विपरीत परिस्थितियों में यदि कोई जीत दिलाता है तो वो है आपका हौसला व सच्ची लगन।जशपुर, छत्तीसगढ़ की #CoronaSaviours सुमन ताम्रकार जी ने इसे सिद्ध कर दिखाया है।
#ThursdayMotivation
ये हैं @JashpurDist की कु. #सुमन_ताम्रकार जो Aug’20 में #COVID19 +ve थीं
न केवल उन्होंने #COVID19 को शिकस्त दी बल्कि बीमारी के डेढ़ महीने बाद ही-Oct’20 में 5289m ऊँची #FriendshipPeak के शिखर पर पहुँच..
..उन्होंने यह भी दिखलाया कि जीवन में हौसले व लगन से कुछभी पाया जा सकता है😊
.मिलिए @JashpurDist की सुमन ताम्रकार से। शहर की इस बेटी ने पहले तो कोरोना से जंग जीता, इसके बाद माउंट ट्रेकिंग में 17353 फ़ीट की चढ़ाई कर शिखर पर तिरंगा लहरा दिया। जशपुर जिले की पहली पर्वतारोही के साथ सरगुजा संभाग की पहली महिला पर्वतारोही बनने का गौरव भी प्राप्त किया है।
आदिवासी बाहुल्य @JashpurDist एक ऐसा जिला है जहां खाद्यान के लिए आत्मनिर्भरता ना के बराबर है। कुल 8 लाख 51 हजार की जनसंख्या वाले इस जिले में 7 लाख 54 हजार लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं और सरकार की खाद्यान योजना का लाभ उठा रहे हैं।
जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक में पहाड़ी कोरवा जनजातियों का एक ऐसा गांव, जहां के बच्चों ने आजतक जलता हुआ बिजली का बल्ब नहीं देखा है। गांव तक जाने के लिए ना सड़क है ना यहां पीने के पानी की कोई व्यवस्था। यहां आकर लगता ही नहीं हम 21 वीं सदी में जी रहे हैं। @ChhattisgarhCMO
हाथियों के डर से घोंसले में इंसान, फसल की रखवाली के लिए पेड़ पर गुजार रहे रात
जिले के कुनकुरी विकासखंड कुछ गांव में देखने को मिल रहा है। घोंसले पर सोने वाले इंसान धान उत्पादक किसान हैं जो हाथियों से फसलों की रखवाली के लिए ऐसा कर रहे हैं।
कोई भी बीमारी सिर्फ परीक्षा लेने आती है...
करमेला 97 वर्ष, फिलोमिना 82 वर्ष, फिलोरा 81 वर्ष ने दी कोरोना को मात। पढ़िए 97 वर्षीय करमेला ने इस उम्र तक खुद को इतना फिट कैसे रखा कि कोरोना जैसी बीमारी को आसानी से हरा दिया।