राजस्थान प्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती सारिका सिंह चौधरी जी के चूरू आगमन पर महिला कांग्रेस की बहनों के साथ “पोस्टकार्ड अभियान” के तहत प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड लिखकर महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने और इसमें ओबीसी वर्ग की महिलाओं को न्यायपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने की स्पष्ट और दृढ़ मांग उठाई।
📍चूरू
#AIMCPostcardAbhiyan
#ImplementWomensReservationNow
📍 ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में भारत में महिलाएं, शक्ति और सार्वजनिक जीवन विषय पर अपने विचार रखना मेरे लिए एक सुखद अनुभव रहा।
@DivyaMaderna
आदरणीय बाईसा @DivyaMaderna जी Block हटा दो अब😊🙏
आप University of Oxford के वैश्विक मंच हमारा प्रतिनिधित्व कर रहे हो ये गर्व की बात है,,, इसी चीज की तारीफ करना चाह रहा था 🙌
दिव्या जी ने उन शिल्पकारों की आवाज़ बुलंद की है जिनकी कला मशीनों के शोर में खो रही थी। अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ मजबूती से खड़ा होना ही नेतृत्व की असली प्रखरता और सफलता है। #DivvyaRepresentsHeritagePattuAtOxford@DivyaMaderna
📍 ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
ब्लावाटनिक स्कूल में @DivyaMaderna जी ने महिलाओं की भूमिका और भविष्य की राजनीति पर अपने विचार रखते हुए युवाओं को प्रेरित किया।
#Leadership#WomenEmpowerment
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भारत की आवाज
दिव्या मदेरणा जी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट जैसे प्रतिष्ठित मंच पर “भारत में महिलाएं, शक्ति और सार्वजनिक जीवन” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार रखते देखना बेहद गर्व का क्षण है।
उन्होंने जिस आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और लोकतंत्र में उनकी भूमिका को दुनिया के सामने रखा, वह सच में प्रेरणादायक है। ऐसे मंच पर भारत की आवाज़ को मजबूती से प्रस्तुत करना हर किसी के बस की बात नहीं होती।
उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ सराहनीय है, बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता है।
आपको इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। 👏
@UniofOxford@BlavatnikSchool@DivyaMaderna
#DivvyaMahepalMadernnaAtOxford #WomenInPolitics #OxfordUniversity
जब कोई जननेता अपनी मिट्टी की पहचान को साथ लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचता है, तब पूरा समाज गौरवान्वित होता है। दिव्या मदेरणा जी ने धोरों की धरती का पट्टू पहनकर मरुधरा की कला का मान बढ़ाया है। #DivvyaRepresentsHeritagePattuAtOxford@IndiaNews@NewsNationTV
पश्चिमी राजस्थान धोरों की धरती से निकलकर जब मुझे University of Oxford के वैश्विक मंच पर अपनी बात रखने का अवसर मिला, तो मैंने तय किया कि मैं अपने साथ केवल शब्द नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी की पहचान, अपनी विरासत और पश्चिमी राजस्थान की आत्मा भी लेकर जाऊँगी।
ऑक्सफोर्ड में पहनी गई मेरी यह पट्टू से बनी जैकेट केवल एक परिधान नहीं थी, बल्कि राजस्थान के उन बुनकरों के संघर्ष, धैर्य और शिल्प का प्रतीक थी, जो आज भी शुद्ध ऊन पर गांधीजी के चरखे की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। पट्टू की हर बुनाई में महीनों की मेहनत, लोक संस्कृति की गरिमा और राजस्थान की सांस्कृतिक आत्मा बसती है।
कभी हजारों परिवारों के जीवन का आधार रही यह कला आज मशीनों के दौर में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। एक समय था जब पश्चिमी राजस्थान के गाँवों में हजारों परिवार इस शिल्प से जुड़े थे, लेकिन आज मुश्किल से कुछ दर्जन कारीगर ही इस विरासत को बचाए हुए हैं।
मेरे लिए यह जैकेट उन हाथों का सम्मान थी, जिन्हें अक्सर कोई अंतरराष्ट्रीय मंच नहीं मिलता। दुनिया राजनीति को अक्सर केवल सत्ता और भाषणों से जोड़कर देखती है, लेकिन मेरे लिए राजनीति का असली अर्थ उन लोगों को पहचान दिलाना है, जिनकी आवाज़ सबसे कम सुनी जाती है।
अगर इस पट्टू जैकेट के माध्यम से रेगिस्तान के किसी बुनकर को गौरव महसूस हुआ हो, अगर किसी कारीगर को यह लगा हो कि उसकी मेहनत धोरों से निकलकर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों तक पहुँची है, तो यही मेरे इस सफर की सबसे बड़ी सार्थकता है।
एक धागा, एक सपना और महीनों की मेहनत… यही है धोरों की धरती का ‘पट्टू’।
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#HandloomOfIndia @BlavatnikSchool@UniofOxford
सार्वजनिक जीवन में 'पावर ड्रेसिंग' (Power Dressing) केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि एक प्रखर राजनीतिक और सामाजिक भाषा है। इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि महान नेताओं ने अपने परिधानों को विचारधारा, शक्ति और जन-जुड़ाव का सबसे सशक्त माध्यम बनाया है।
जिस प्रकार महात्मा गांधी ने खादी की एक सूत से बनी धोती को साम्राज्यवाद के विरुद्ध आत्मनिर्भरता और भारतीय अस्मिता का वैश्विक प्रतीक बना दिया था, ठीक उसी परंपरा को आधुनिक वैश्विक पटल पर @DivyaMaderna जी ने एक नई परिभाषा दी है।
जब वे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मंच पर संबोधित करने पहुँचीं, तो उन्होंने किसी विदेशी डिज़ाइनर लेबल के बजाय मरुधरा के पारंपरिक 'पट्टू' को चुना।
राजनीति में पहनावा एक 'Strong Communication' होता है और दिव्या जी ने बिना एक शब्द बोले इस पट्टू के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि वे ज्ञान के शिखर पर पहुँचकर भी अपनी जड़ों से कितनी गहराई से जुड़ी हैं। यह परिधान जैसलमेर और बाड़मेर के उन बुनकरों के संघर्ष और हुनर की कहानी कहता है, जो आज भी चरखे की विरासत को जीवित रखे हुए हैं।
ऑक्सफोर्ड के उस भव्य हॉल में दिव्या जी का पट्टू जैकेट पहनना यह संदेश देता है कि असली आधुनिकता अपनी संस्कृति को त्यागने में नहीं, बल्कि उसे गर्व के साथ दुनिया के सामने पेश करने में है।
यह चयन दर्शाता है कि उनकी संवेदनाएँ आज भी धोरों की धरती के अंतिम छोर पर बैठे शिल्पकार से जुड़ी हैं। इस एक वस्त्र के माध्यम से उन्होंने राजस्थान की लोककला को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बना दिया और यह साबित किया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो अपनी मिट्टी की महक को सात समंदर पार तक पहुँचा सके। आज ऑक्सफोर्ड के गलियारों में गूँजती मरुधरा की यह आवाज़ हर राजस्थानी के लिए स्वाभिमान का विषय है।
#DivvyaRepresentsHeritagePattuAtOxford