@shailendraPBH72 यह तो अक्खा मनमानी चल रही है लेखपाल की इनपर कोई अंकुश लग सकता है। लेखपाल ग्रामसभा में लोगों की सेवा के लिए नियुक्त है कि लोगों को परेशान करने और उन्हीं लोगों से कमाने में जुटे हैं। क्या उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वेतन जो मिल रहा है उससे काम नहीं चल रहा है।
कुंडा (प्रतापगढ़) में आपदा के बीच भ्रष्टाचार का बड़ा मामला!
पीड़िता कोमल का आरोप है कि उनका घर ढहने के बाद हल्का लेखपाल कृष्ण कुमा��� पांडे ने मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर ₹200 की अवैध वसूली की और अब और पैसों की मांग कर रहे हैं। 3 बार IGRS शिकायत करने पर लेखपाल
ग्राम पंचायत डीह बलई विकासखंड बाबागंज तहसील कुण्डा जनपद प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में से प्रत्याशियों व अन्य लोगों का नाम हटाए जाने पर विकासखंड में लिखित सूचना देने के बाद भी अभी तक कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की गई।
ग्राम पंचायत डीह बलई विकासखंड बाबागंज तहसील कुण्डा जनपद प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश में सम्बंधित विकासखंड के अधिकारियों की मिलीभगत से उक्त ग्राम पंचायत चुनाव के दृष्टिगत व्यक्तिगत स्वार्थ व विजय की भावना से राज्य निर्वाचन आयोग की मतदातासूची में से प्रत्याशियों व अन्य लोगों का नाम हटाए
@thename_vinay बैठक में निर्णय लेकर हम लोगों का मनोबल गिराया जा रहा है। आवेदन नहीं लगता है किसी कोर्ट ने मुकदमा किया गया है। तारीख पर तारीख मिल रही है।
मैंने पहले ही कहा थी कि आशा करता हूं कि इस विषय में दोबारा पोस्ट न करना पड़े तो अच्छा रहेगा, लेकिन जब बेहूदगी की सारी हदें पार हो जायें तो जवाब देना तो बनता है। जन सामान्य और सोशल मीडिया पर तो लोग इन्हें गाली दे ही रहे हैं, इन्हें सिर्फ paid ‘ट्रोल सेना’ का ही भरोसा है।
कोर्ट में भी कई बार ये अपनी छीछालेदर करा चुकी हैं। अनेक बार माननीय न्यायधीश को इनके वकील को फटकार लगाते हुए कहना पड़ा कि ‘अपनी क्लाइंट को चुप कराइये, अदालत में कैसा व्यवहार किया जाता है व कोर्ट में बोलने की तमीज़ सिखाइये।’ ये इन घटनाओं से सुधरना तो दूर और अधिक कुंठित हो गयीं।
इनकी करतूत का एक और नमूमा देखिये, मेरे नाना की चार बेटियां हैं और वे अपनी संपत्ति चारों में बराबर बांटना चाह रहे हैं, जो की उचित ही है, लोकिन ये नाना-नानी की पूरी संपत्ति अकेले हथियाना चाहती हैं, जिसे लेकर मुकदमे भी चल रहे हैं, लेकिन सिर्फ मुकदमों से हमारी मम्मा का मन नहीं भरता है, इसलिए कई बार ये हिंसक होकर उनपर हमला भी कर चुकी हैं।
��ां, ये सही बात है कि मेरे ननिहाल में उतनी संपत्ति नहीं है जितनी बेंती- भदरी में ईश्वर की कृपा से है, हमारे रिश्तेदारों परिवारजनों में ये सर्व विदित है कि मेरे माता- पिता की शादी का दोनों तरफ़ का पूरा खर्चा हमारे बाबा ने उठाया। इसके बावजूद इन्होंने बाबा को भी नहीं बख्शा, कोर्ट में दिये गए अपने लिखित बयान में इन्होंने बाबा को ‘दहेज लोभी’ बताया, इतना ही नहीं ये भी कहा कि वे कोई ‘सम्मानित व्यक्ति’ ��हीं हैं। समय आने पर कोर्ट में दिये गए इनके सारे दस्तावेज़ पोस्ट कर दूंगा।
इतना ही नहीं क्या आप लोग जानते हैं कि दाऊ के ऊपर जो झूठी एफआईआर मम्मा मे करायी है उसमें आजी को भी दोषी ठहराया है?
हम सभी जानते हैं कि सोशल मीडिया पर इस बयानबाज़ी से चटपटी ख़बरें भले बन जायें लेकिन इससे मुकदमे की मेरिट पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।
हमारे पिछले पोस्ट का भी अभी तक कोई ��वाब नहीं आया, 100 करोड़ रुपये एक मुश्त और 25 लाख रुपये प्रति महीना, ये धन उगाही है या गुंडा टैक्स?
मैंने जो पहले कहा वो सभी बातें प्रमाणित सत्य हैं पर अब आपके सामने जो वीडियो ला रहा हूं वो देखकर आप लोग भौचक्के रह जायेंगे।संपत्ति की ख़ातिर अपनी वृद्ध और बीमार मां पर जूतों की बरसात करती हुई हमारी मम्मा भानवी कुमारी को देखिये और मन में सोचिये कि क्या यही है महिला सशक्तिकरण?
निश्चित है कि माता जी की भाड़े की ‘ट्रोल सेना’ हमें ‘दूध का कर्ज़’ याद दिलाने का प्रयास करेगी, लेकिन उनको ये ‘कर्ज’ हमारी ‘जूतेबाज़’ माता जी को याद दिलाना ज़्यादा ज़रूरी है।
@PMOIndia @CMOfficeUP
सादर,
जय सियाराम