PDA के महानायक, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उ०प्र० के यशस्वी पूर्व मुख्यमंत्री, लोकसभा में सपा संसदीय दल के नेता मा० श्री @yadavakhilesh जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हम ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
@samajwadiparty
ये है भाजपा ‘कालीन’ विकास… सुना तो ये था कि दरारों को कालीनों से ढका जाता है लेकिन यहाँ तो गंगा एक्सप्रेसवे के गड्ढे ढके जा रहे हैं, कुछ दिनों पहले कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पंखे लगे थे। भाजपा एक्सप्रेसवे को अपने भ्रष्टाचार का ड्राइंग रूम बना रही है क्या?
उप्र में भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के कारण ईमानदार अधिकारी निम्नलिखित कई तरह के दबाव में हैं :
- कमीशनख़ोरी से भ्रष्टाचार करने
- भाजपाइयों को टेंडर दिलवाने में हेराफेरी करने
- ट्रांसफ़र-पोस्टिंग को धंधा बनाते हुए पैसे लेने
- चंदा-पर्ची कटवाकर वसूली करवाने
- विपक्ष पर झूठे मुक़दमे लगाने
- हिरासत में किसी को मरवाने
- विरोधियों के फ़ेक एनकाउंटर करवाने
- एनकाउंटर का डर दिखाकर पैसे ऐंठने
- पीडीए के अत्याचार को दबाने-छिपाने
- कारोबारियों से धन उगाहने
- बलात्कार-अपहरण के केस दबाने
- भाजपाइयों के क़ब्ज़े के मामले छुपाने
- प्रदेश की सीमाओं पर माल इधर-से-उधर करवाने
- मिलावट के मामलों को शुद्ध बताने
- किसान, मज़दूर, महिलाओं, युवाओं के उत्पीड़न पर मुँह फेर लेने
- छूआछूत के मामले दबवाने
- मंदिर चोरी के केस में एफ़आइआर न करवाने
- किसी माननीय की छवि को हर हाल में लीपापोती करके बचाने…
… ऐसे और भी अनगिनत कारण हैं जहाँ भाजपा सरकार अधिकारियों पर अनैतिक-अवैध काम करने का दबाव बनाती है, जिसकी वजह से उन्हें त्यागपत्र तक देना पड़ जाता है।
ईमानदार अधिकारियों के बिना कोई शासन-प्रशासन नहीं चल सकता है।
उप्र के मुख्यमंत्री जी अपना मॉडल जनता के सामने रख रहे हैं कि ‘सामने से किसी को JPNIC दे दो फिर उसके बदले ईंट नहीं बल्कि ‘सोने की सिल्ली’ ले लो। भाजपा राज में भ्रष्टाचार का स्वर्ण ठोसीकरण जिस तरह से हो रहा है, उसकी पोल भी एक दिन ‘राम मंदिर में चोरी’ की तरह खुलेगी फिर ये भी डायरी लिखकर पूछेंगे कि भेदिया कौन है? धर्मघात करनेवाले भाजपाई धर्मद्रोहियों ने जब लोकरक्षक प्रभुराम को नहीं छोड़ा तो वो लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी को क्या छोड़ेंगे।
इनकी स्वर्ण सिल्लियाँ भी इनके गुप्त खज़ाने से बाहर निकाली जाएंगी और इनका धर्म के नाम पर किया गया ढोंग का मुखौटा भी एक दिन उतर जाएगा।
7 हज़ार करोड़ क्या 70 हज़ार करोड़ भी इनकी छवि को सुधार नहीं सकता है।
सबका नंबर लगेगा।
भाजपा अब चाहे कितनी भी कीचड़ फैला दे अब उसका कमल नहीं खिलेगा।
बहनों के साथ धोखा तो रावण ने भी नहीं किया था। अधर्मी भाजपा और उनके संगी-साथी तो दशानन से बड़े झूठे निकले क्योंकि ये दस से भी अधिक मुख से दस गुना झूठ बोलते हैं। रावण ने तो केवल एक बार भेष बदलकर छल किया था, ये तो निरंतर उसी भेष में रहकर छलते-ठगते हैं।
भाजपा जाएगी, फिर कभी नहीं आएगी।
PDA की सकारात्मक राजनीति का ये सुखद परिणाम है कि लोग अपने आप PDA को विविध सकारात्मक रूप में परिभाषित कर रहे हैं। सकारात्मकता से सौहार्द जन्म लेता है, और सौहार्द से सामाजिक एकता, जो देश को ‘प्रेम, दया, अपनेपन’ से जोड़ती है और तरक़्क़ी और ख़ुशहाली की नयी राह बनाती है।
ख़ुद से बढ़कर दुनिया में ना देखा कोई और…
जुबां पर आज दिल की बात आ गई…
जो अपना चुनाव हार गये, वो दूसरों से ख़ुद को मुख्यमंत्री के रूप में चुनने की उम्मीद करते हैं। डबल इंजन का मतलब यहाँ तो ‘दिल्ली-लखनऊ’ के साथ-साथ ‘सिराथू-गोरखपुर’ भी निकला। अब देखते हैं ये हटते हैं या हटाए जाते हैं।
भाजपाई JPNIC जैसी अद्भुत सिग्नेचर बिल्डिंग को सिर्फ़ बेच सकते हैं, उतना बड़ा कभी सोच नहीं सकते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार ने उनकी सोच को संकीर्ण, कुंठित और संकुचित कर दिया है।
भाजपा जाएगी, बड़ी सोच आएगी!
विदेशों में जब ‘Unregistered-Underground’ लोग उभरकर आएंगे तो उनके X एकांउट तो सस्पेंड किये ही जाएंगे।
बेहद गंभीरता और चिंता के कारण पूरी दुनिया में बसे भारतीयों के बीच निम्नलिखित कुछ सवाल उठ रहे हैं:
- स्वदेशी का नारा लगानेवाले विदेश आख़िर क्या लेने गये हैं?
- क्या FCRA = Foreign Contribution (Regulation) Act का अध्ययन करने गये हैं?
- क्या अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारत का रुपया क्यों गिर रहा है इसका शोध करने गये हैं?
- क्या भारतीय किसानों को बर्बाद करने के लिए ‘अमेरिकी डील’ में कुछ और जुड़वाने गये हैं?
- क्या वहाँ भी साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने गये हैं?
- क्या वहाँ अपने ‘दरारवाद’ के प्रसार के लिए गये हैं?
- क्या अपनी ‘विभाजनकारी’ कुदाली नज़रिये की ज़मीन खोजने गये हैं?
- क्या वहाँ के क़ानून को भी स्मृतिमय बनाने गये हैं?
- क्या शाखा विस्तार करने गये है?
- क्या भारत में बने अपने भवनों के आय के स्रोत को वैधानिक जाँच से कैसे बचाएं, इसके लिए वकील की खोज में गये हैं?
- क्या आरक्षण के ख़िलाफ़ ‘समीक्षा’ या ‘सुधार’ जैसे किसी अन्य नये शब्द की तलाश में गये हैं?
- क्या भारत के संविधान को कमज़ोर करने के लिए अपने विचारवंशियों से विचार-विमर्श करने गये हैं?
- क्या देश की छवि को धूमिल करने गये हैं?
- सुरंग बनाने की नई टेक्नोलॉजी के स्टडी टूर पर गये हैं?
- क्या अपने अज्ञातवासियों से संपर्क साधने गये हैं?
- क्या वहाँ रह रहे भारतीयों के लिए संकट पैदा करने गये हैं?
- क्या विदेश नीति को गुट सापेक्ष मोड़ देने गये हैं?
- क्या मंदिरों के नाम पर विदेशों से इकट्ठा किये गये अकूत धन के चोरी किये जाने पर आक्रोशित भारतीय समाज को सफ़ाई देने गये हैं?
- क्या विदेशों में संभाल कर रखी, अपने सौ सालों की सीक्रेट खाता-बही का फ़ाइनल हिसाब-किताब करने गये हैं?
- क्या समाप्ति वर्ष की चलाचली की बेला का अंतिम उत्सव मनाने गये हैं?
- क्या भविष्य में वहाँ राजनीतिक प्रश्रय लेने की संभावना तलाशने गये हैं?
भाजपा सरकार है या दुकानदार?
अब उप्र की भाजपा सरकार ने लखनऊ के JPNIC (जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है।
अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।
‘कमीशन’ भ्रष्ट भाजपा की गाड़ी का तेल-पानी है और ‘निजीकरण’ उसका जुगाड़।
डॉ. उदय प्रताप सिंह ‘गुरु जी’ की गरिमामय उपस्थिति में उनके ‘अभिनंदन ग्रन्थ’ के विमोचन समारोह के साहित्यमय क्षण!
बड़ो का आशीर्वाद और दिशा निर्देशन बना रहे।
‘आरक्षण सुधार’ के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के ख़िलाफ़ एक और गहरी साज़िश है। आरक्षण पीडीए का अधिकार है किसी की इच्छा का विषय नहीं।
भाजपा व उनके संगी-साथी समय-समय पर जिस तरह कभी ‘समीक्षा’ तो कभी ‘सुधार’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग कर आरक्षण का विरोध करते हैं या कभी ‘क्रीमीलेयर’ की बात करते हैं या ‘आरक्षण त्यागने’ की सलाह देते हैं, वो सदियों से शोषित-वंचित लोगों को मिले आरक्षण के अधिकार की हक़मारी की लगातार की जा रही कोशिश के अलग-अलग मुखौटे हैं।
आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा!
डॉ. उदय प्रताप सिंह ‘गुरु जी’ की गरिमामय उपस्थिति में उनके ‘अभिनंदन ग्रन्थ’ के विमोचन समारोह के साहित्यमय क्षण!
बड़ो का आशीर्वाद और दिशा निर्देशन बना रहे।
शिक्षा, शिक्षक व शिक्षार्थी विरोधी, स्कूलबंद करवानेवाले भाजपाई और उनके संगी-साथी यूनिवर्सिटी बनानेवालों के ख़िलाफ़ ED की छापेमारी कर रहे हैं जिससे कि उनके 1-2% बचे हुए साम्प्रदायिक संकीर्ण सोच के कुतर्की समर्थकों को संतुष्ट कर पाएं, जबकि उन भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जो निम्नांकित आपराधिक कांडों में संलिप्त हैं :
- राम मंदिर के चोर
- सत्ता सजातीय अपराधी
- कोडीन कांडी
- भाजपाकाल निर्मित बदहाल बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
- भाजपाकाल निर्मित हिचकोले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
- भाजपाकाल निर्मित गड्ढायुक्त कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे
- भाजपाकाल निर्मित दरारी ग्रीन कॉरीडोर
- भाजपाकाल निर्मित खटपट सड़कें
- भाजपाकाल निर्मित गिरते पुल
- भाजपाकाल निर्मित ढहती टंकियाँ
- भाजपाकाल निर्मित टपकती छतें
- भाजपाकाल निर्मित स्टेशन की दीवार
- भाजपा की सत्तावाले, दूसरे राज्यों तक में पकड़े जानेवाले भ्रष्ट पुलिसकर्मी
- महाकुंभ में 1 लाख डकार गये भाजपाई ठेकेदार
- स्मार्ट सिटी के नाम पर खरबों का खेल करनेवाले भाजपाई
- अस्वीकृत भूमि पर अवैध निर्माण करनेवाले भाजपाई जन प्रतिनिधि
- दुर्व्यवहार और दुर्वचनों पर प्रचार की पुताई करके 7000 करोड़ रुपए में हिस्सा बाँट करनेवाले अधिकारी…