🚨BREAKING : BJP Fraud EXPOSE 🔥🔥
BJP is clapping for Raghav Chadha's "30-day recharge" win. Now check your own phone.
Chadha, who left AAP and joined BJP in April, is taking a victory lap because TRAI now wants 30-day plans. He says we recharge 13 times a year for 12 months.
Fine. Look at the plans already on the app.
28 days is ₹349.
1 month is ₹379.
13 recharges of ₹349 comes to ₹4,537.
12 recharges of ₹379 comes to ₹4,548.
So after all the celebration, we pay ₹11 MORE a year. They sold us the same loot in a new packet.
And remember, in 2024 these same companies hiked tariffs by up to 25% in one go. Did Modi ji say a single word? No. The corporates smiled and the common man paid.
My mother keeps a tiny notebook just to track her phone recharge dates. This is the family BJP is fooling.
Bro, they switched parties, not the habit of fooling people 😏
Two extra days, zero extra relief, full PR 🔥🔥
भारत में 2023-24 में सबसे ज्यादा चंदा पाने वाली क्षेत्रीय राजनैतिक पार्टियां👇
1.आम जनमत पार्टी (गुजरात)— 620 करोड़
2.सत्यवादी रक्षक पार्टी (गुजरात)— 330 करोड़
3. न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी (गुजरात)— 200 करोड़
4. स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी (एक पेपर पार्टी है)— 219 करोड़
5. भारतीय नेशनल जनता पार्टी— 191 करोड़
6.गरीब कल्याण पार्टी (गुजरात)— 138 करोड़
इन सभी पार्टियों के पास न कोई लोकसभा सांसद है और न ही कोई विधायक है ये मुश्किल से 2-4 सीट पर चुनाव लड़ते हैं— फिर भी इन 6 पार्टियों को लगभग 1700+ करोड़ का चंदा मिला है जबकि कांग्रेस को लगभग 288 करोड़ ही मिला था।
क्या आपने कभी भी इन पार्टियों के नाम सुने थे??🤔
सोर्स:—( BBC & Subhangi Mishra)
I explain analytical base of my conclusion that GDP growth in Q1 in 2026-27 in current price is 2.6% and in real terms close to 0. There are still messier distortions in sectoral performance with manufacturing and consumption witnessing negative growth. https://t.co/pvsjXlAdcq
आनंद जी,आप बक्सर के विधायक हैं और आपके क्षेत्र के लोग एक रोड के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं,तो कृपया रोड ठीक कराइये !
जब रोड ठीक हो जाएगा तब सनस्क्रीन की बात किया जाएगा !
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में ही पटना गांधी मैदान आता है, रैली में अनुमान से कम भीड़ पहुंची थी 2025 में और 17 अगस्त 2026 को इसी विधानसभा क्षेत्र के विधायक के रूप में शपथ लेंगे प्रशांत किशोर। वक्त बदलते समय नहीं लगता। राजधानी ही जीत लिए प्रशांत किशोर।
A small group of aspiring Non Resident Biharis celebrating Prashant Kishor's historic victory from Bankipur✌️
We are doing our best to bring meaningful change to Bihar. The journey has just begun 🙏
Jai Bihar ✊
बांकीपुर उप-चुनाव में किसकी जीत होगी यह तो पता नहीं मगर इस चुनाव में पहली बार प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज ने एक राजनीतिक दल के रूप में प्रभावित किया है. जन सुराज पहली बार एक पोलिटिकल पार्टी की तरह लड़ी और उसने खुद को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा खाली की गई सीट पर उसे हर बूथ पर चुनौती दी. भाजपा के कार्यकर्ता एक अरसे बाद इस चुनाव को लेकर काफी इनसिक्योर थे, वे प्रशांत किशोर और जनसुराज के दूसरे नेताओं से उलझ रहे थे, जगह-जगह मार-पीट की नौबत आ रही थी.
जहां-जहां मारपीट या झगड़ा फसाद की नौबत आई जन सुराज के कार्यकर्ता भी बराबरी से डटे रहे. आरोप लगे कि भाजपा की इस सबसे सुरक्षित सीट पर पुलिस भी जन सुराज के लिए दिक्कतें पैदा कर रही है. कई कार्यकर्ताओं को डिटेन किया गया. मगर पीके और उनके साथियों ने थाने में बैठकर अपने कार्यकर्ताओं के लिए लड़ाई लड़कर मैसेज दिया कि वे हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं.
हाल के वर्षों में भाजपा हर बूथ और बूथ के हर पन्ने पर अपने कार्यकर्ता को तैनात करने की रणनीति के लिए जानी जाने लगी है. ज्यादातर पोलिटिकल पार्टियां इस खेल में भाजपा से चूक जाती हैं. एसआईआर के वक्त भी ज्यादातर विपक्षी पार्टियों के पास हर बूथ पर बूथ लेवल एजेंट तक नहीं थे. मगर इस चुनाव में जन सुराज के पास हर बूथ पर पर्याप्त कार्यकर्ता थे. बांकीपुर एक छोटा सा इलाका है. मगर इस छोटे से इलाके में भाजपा को हर फील्ड में बराबरी की टक्कर देकर जन सुराज ने साबित किया कि वह आने वाले वक्त में बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. यह इस चुनाव का बड़ा संदेश है.
हालांकि यह सब जन सुराज में आसानी से नहीं हुआ है. प्रशांत किशोर लगभग चार साल से बिहार में घूम रहे हैं और उनकी पार्टी पौने दो साल पुरानी हो चुकी है. इस बीच पार्टी ने एक विधानसभा चुनाव लड़ा है, उससे पहले एक उप चुनाव में शिरकत की है. मगर उन दोनों चुनावों में जन सुराज की तैयारी, उसका प्रदर्शन किसी नौसिखिये पार्टी जैसा रहा. वह उम्मीदवार चुनने में गलती करती रही. पैसों और प्रचार के दम पर, मीडिया मैनेजमेंट के जरिये बिहार में छा जाने की कोशिश करती रही. नतीजा यह हुआ कि ज्यादातर सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई.
मगर 2025 विधानसभा की करारी हार के बाद पीके ने अपने पार्टी को पूरी तरह बदल दिया. सबसे पहले उन्होंने पार्टी के ऊपर से अनावश्यक बोझ कम किया. सबसे बड़ा बोझ प्रोफेशनल्स का था. जो काफी ऊंची सैलरी पर तैनात थे, वे फायदा कम और नुकसान अधिक कर रहे थे. वे प्रशांत किशोर और पार्टी के दूसरे लोगों के बीच दीवार बन गये थे. पहले पीके के इर्द गिर्द नेता कम प्रोफेशनल अधिक दिखते थे, अब नेता ज्यादा दिखने लगे हैं.
पीली एसयूवी गाड़ियां, महंगे कनात, पटना शहर में कई दफ्तर, चकाचौंध भरी व्यवस्थाएं, यह सब जन सुराज को बिहार जैसे गरीब राज्य में किसी अमीर कंपनी जैसी छवि देती थी. पीके ने उसे कम किया. अब पटना में उसका सिर्फ एक दफ्तर बचा है. इसके अलावा बिहटा में आश्रम है.
कई महत्वाकांक्षी नेता जो पीके के साथ इसलिए जुड़े थे कि उन्हें फायदा होगा. वे खुद बखुद उन्हें छोड़कर अलग हो गये. टीम छोटी होने लगी. सिर्फ भरोसे के लोग बच गये. फिर उन्होंने मिथिला स्टूडेंट यूनियन के लड़कों को बुलाकर जमीनी संघर्ष करने वाली एक टीम बनाई, जिसका नाम संघर्ष वाहिनी रखा. इसके दो लड़कों अनूप मैथिल और आदित्य मोहन ने बांकीपुर में पीके के लिए जमीन तैयार की, मुद्दे तलाशे और गजब की मेहनत की. ये पेड नहीं हैं और किसी और लालच से जुड़े नहीं हैं. इनका मकसद राजनीति है. इसके अलावा बीपीएससी आंदोलन से जुड़े शिक्षक और छात्र नेताओं को जोड़ा. वे भी मजबूती के साथ इनसे जुड़े रहे.
मीडिया की टीम छोटी हुई और इस बार कैंपेनिंग के लिए पत्रकारों को दिल्ली से बुलाने का काम कम हुआ. हालांकि दिल्ली के पत्रकारों के प्रति अभी भी प्रशांत किशोर का मोह दिखता है और पटना वाले पत्रकारों को जब तक मूर्ख साबित करना चाहते हैं. यह एरोगेंसी घटती नहीं. फिर भी मीडिया का बजट कम किया और प्रचार के बदले काम पर फोकस किया.
इस तरह पैसे और प्रोफेशनल की ताकत के बदले पीके ने पहली बार जमीनी कार्यकर्ताओं की छोटी सी टीम पर भरोसा किया. वह कारगर रही. अपने अमले को छोटा किया तो वे खुद दौड़-भाग कर सके. सबसे कमाल का काम यह हुआ कि बांकीपुर में जन सुराज जैसी बिल्कुल नई पार्टी ने हर बूथ पर भरोसे के एजेंट और कार्यकर्ताओं की टीम खड़ी की जो उनके लिए भाजपा की टीम से हर जगह लड़ती नजर आई.
अब पीके हारें या जीतें, उन्हें जीत का फार्मूला मिल गया है. बिहार में एक ऐसी पार्टी खड़ी होती नजर आ रही है, जो बीजेपी के लिए आने वाले वक्त में मुसीबत का सबब बन सकती है.
#pk #जनसुराज
भाजपा एग्जिट पोल आते ही टीवी स्टूडियो में जीत का जश्न मनाने पहुंच जाती थी, वो इस बार नज़र ही नहीं आ रही... 🫣
लगभग सभी एग्जिट पोल जनसुराज को बढ़त दिखा रहे हैं। 🔥
बिहार बदलाव का फैसला कर चुका है,अब बस आधिकारिक मुहर बाकी है।
जय बिहार! ✊🙏
बांकीपुर से अब तक का सबसे बेहतरीन वीडियो।
जब एक पत्रकार ने भाजपा उम्मीदवार के पड़ोसी से पूछा कि उन्होंने किसे वोट दिया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रशांत किशोर को वोट दिया है। उन्होंने बताया कि मतदान केंद्र जाने से पहले उनका इरादा भाजपा को वोट देने का था, लेकिन आखिरी समय में उन्होंने अपना फैसला बदल लिया और प्रशांत किशोर को वोट दे दिया।
जब मोहल्ले के लोग ही नीरज को वोट नहीं दे रहे हैं, तो फिर उन्हें कौन वोट देगा?
बांकीपुर में भाजपा बड़ी हार की ओर बढ़ रही है।