ठीक है कि उसने ज्यादा पी रखी होगी धर्मेन्द्र जी लेकिन अगर वो शाहरुख खान का बेटा न हो तो उसके पीने का कोई वीडियो वायरल भी नहीं होगा .
हमने कई सालों तक नोएडा के चैनलों के आसपास भी न्यूज़ रुम से बाहर निकलकर पियक्कड़ में तब्दील हुए पत्रकारों को देखा है . कार को बार में तब्दील करने वाले ऐसे पत्रकार हर रोज़ क़ानून तोड़ते हैं . सार्वजनिक जगहों को मयखाना बना देते हैं . किसी से फ़ोन करके पूछ लीजिए . बहुतों के नाम पता चल जाएंगे .
आज ही शनिवार को जरा आप दिल्ली और गुरुग्राम के पाँच सितारा होटलों के पास घूम आइए . आपको बहुत से टल्ली मिल जाएंगे . बड़े बड़े घरों से लौंडे लड़खड़ाते हुए गाड़ी में बैठते हुए दिखेंगे .सनातनी परिवार के लड़के भी .
शाहरुख खान के बेटे को ड्रग्स के मामले में उसे फंसाया गया . ये बात साबित हो चुकी है . कभी कुंभ मेले में छापा पड़ जाए तो बहुत से सैकड़ों किलो गांजा , चरस और बहुत कुछ बरामद हो सकता है .
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और इंसानियत की एक मिसाल सामने आई है। यहाँ के रहने वाले रियासत उर्फ बबलू सिद्दीकी ने माता-पिता को खो चुकी अपनी मुंहबोली हिंदू बहन दीपांशी की शादी का पूरा जिम्मा उठाया।
बुधवार (8 जुलाई) को कस्बे के एस एस ग्रीन पैलेस में दीपांशी और कमलकांत की शादी हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुई, जिसमें बबलू सिद्दीकी ने खुद आगे बढ़कर कन्यादान की रस्म निभाई। उन्होंने बिना किसी बाहरी मदद के करीब 800 मेहमानों के खाने-पीने और शादी के अन्य खर्चों का इंतजाम खुद किया। भावुक होकर दुल्हन दीपांशी ने कहा कि बबलू भैया ने सगे भाई की तरह अपना फर्ज निभाया है और यह शादी समाज में मजहबी नफरत के खिलाफ मोहब्बत और इंसानियत का एक बड़ा पैगाम है।
यह सबसे शानदार फॉर्मूला है। जब भी ऐसे सवालों से सामना हो जिसमें जवाब देने में ही छीछालेदर होने की प्रबल संभावना हो तो ‘दूसरों’ को लेकर अनर्गल टिप्पणी करना शुरू कर दो। लोग चढ़ावा चोरी पर सरकार से सवाल कर रहे हैं, और सरकार के मुखिया चौतरफा ढेले फेंक रहे हैं। देखते हैं! इस तरह के बयानात से कब तक हिंदुओं को बहलाते हैं।
शरीर रस्सी से बंधा है, हाथ जोड़ रहे हैं , भीख मांग रहे हैं, मजलूम बने हुए हैं.. जानते हैं यह लोग कौन हैं यह वह 32 दरिंदे हैं जिन्होंने 5 दिन तक एक 13 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप किया
सुनो ज़ायनिस्ट @netanyahu सिर्फ RSS और उसके चेले चपाटों के अलावा कोई भी भारतीय ज़ायनिस्टस आतंकी 🇮🇱 के साथ नहीं है। ज़ायनिस्टों के साथ उतने ही भारतीय हैं, जितने स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेज़ों के साथ थे। लिहाज़ा ख्याली पुलाव बनाने की चेष्टा ना करें। भारत गांधी से मोदी तक 🇵🇸 के साथ रहा है, और रहेगा।
एक और पेपर लीक।
एक और परीक्षा रद्द।
इस बार महाराष्ट्र का TET।
देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को वसूली का सिस्टम बना दिया गया है, जिससे देश का हर युवा असुरक्षित है।
यह सिर्फ पेपर लीक नहीं,
यह युवाओं के भविष्य की चोरी है।
"मेरी पोती 15 महीने की हैं रोज़ सुबह उठती है और मोदी जी की तस्वीर को लड्डू खिलाती हैं उनकी पूजा करती हैं, कुछ तो ख़ासियत होगी मोदी जी में?" अभिनेता सुनील शेट्टी
सुनील शेट्टी मोदी जी को भगवान घोषित कर रहे हैं क्योंकि ऐसा करके राज्यसभा मिल सकती हैं या यूं कहें सुनील शेट्टी बेरोजगार हो चुके हैं और रोज़गार पाने के लिए देश के करोड़ो बेरोजगार युवाओं को तबाह करने वाली सरकार की चापलूसी करना चाहते हैं इसलिए मोदी जी को भगवान बता रहे हैं कि उनके घर में मोदी जी को भगवान की तरह देखा जाता हैं।
क्या मोदी की वह तस्वीर उस लड्डू को खा लेती है? अगर नहीं खाती, तब सुनील शेट्टी को उस बच्ची को बताना चाहिए कि यह अंधविश्वास है! मोदी भी उसी की तरह इंसान हैं, कोई ‘भगवान’ नहीं!
हज़रत इमाम हुसैन जी का संघर्ष, त्याग और बलिदान हमें असत्य, अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध मानवता की सबसे मज़बूत ढाल बनने की सीख देता है।
आज मुहर्रम के दिन हमें उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
सम्मान अपनी जगह है, लेकिन लोकतंत्र में किसी भी नेता को इस स्तर तक पहुँचा देना कि 15 महीने के बच्चे की हर हरकत में भी चमत्कार दिख रहा है, सुनील शेट्टी को... यह ठीक सोच नहीं है।
नेता कितने भी बड़े क्यों न हों, भगवान तो नहीं हैं।
अगर हम बच्चों को बचपन से ही नेताओं की तस्वीरों के आगे लड्डू चढ़ाने की कहानियाँ सुनाकर गर्व महसूस करने लगेंगे, तो कल वे सवाल पूछना तो दूर , सिर्फ़ जयकार करना सीखेंगे।
देश को ऐसे नागरिक चाहिए जो संविधान, विज्ञान और कर्तव्य का सम्मान करें; किसी भी नेता की पूजा करने वाली पीढ़ी नहीं।
बच्चों को भगवान और माता-पिता का सम्मान सिखाइए, नेताओं की पूजा नहीं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जागरूक नागरिक हैं, भक्त नहीं।
जब तर्क कम पड़ जाएँ, तब जादू और चमत्कार की कहानियाँ शुरू हो जाती हैं।फ़िल्मों में अभिनय अच्छा लगता है, लेकिन लोकतंत्र में नहीं shetty ji...
वेज चिकन पार्टी थी शायद...
कल तक गंगा में इफ्तार करने से जिनकी भावनाएँ आहत हो रही थीं, आज उसी गंगा में चिकन और शराब की पार्टी से किसी की भावनाएँ आहत क्यों नहीं हो रही हैं? शायद इसलिए कि इस बार पार्टी करने वाले दूसरे समुदाय के हैं।
प्रिय ग़ाज़ियाबाद पुलिस, इस तरह एक पूरे समुदाय के नरसंघार के लिये खुलेआम भड़काने की घटना तो आतंकवाद की श्रेणी में आती है।
रासुका और UAPA जैसी धारायें भी कम हैं एैसे लोगों के लिये, उम्मीद है आप संविधान सम्मत काम करेंगे।
@ghaziabadpolice@Uppolice
मशहूर YouTube टीचर Abhinay Sir ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा पर तीखा तंज़ कसते हुए कहा —
जेपी नड्डा का एकमात्र काम PM Narendra Modi की सेहत का ध्यान रखना है। इसीलिए मोदी जी दिन-ब-दिन जवान होते जा रहे है। 😂
वहां मौजूद भीड़ अपनी हंसी नहीं रोक पाई!
झबरा फड़-फड़ा रहा है। इसका फड़-फड़ाना लाज़िम भी है। इसके गैंग के 14 दरिंदों ने गाय के नाम पर इंसान को पीट-पीट कर मार डाला था। पूरी दुनिया में ऐसी घटनाएँ कहीं नहीं होतीं, जहां जानवर के नाम पर इंसान को मार दिया जाए। खैर! उन हत्यारों को सज़ाएँ हुईं, तो झबरा फड़-फड़ाने लगा। अब उन हत्यारों को हिंदुओं की लड़ाई लड़ने वाला बता रहा है। ज़रा पता करो कि कितने हिंदुओं ने उन हत्यारों से कहा था कि जाओ जाकर गाय के नाम पर इंसान को मार दो? वास्तविकता यह है कि इस जैसे झबरों को भी सज़ा होनी चाहिए, क्योंकि ये लोग आम हिंदुओं को अपराधी बना रहे हैं। ये इन घटनाओं के मास्टरमाइंड हैं।
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
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#ChhatraJodo