आरएसएस ने किये दीक्षाभूमि पर कब्ज़ा; किये ताले बंद. मैं बौद्धों को पूरी छूट देता हूँ आरएसएस को इस अपमान का जवाब देने का!
कल रात नागपुर में धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस की पूर्वसंध्या पर जब हज़ारों बौद्ध अनुयायी दीक्षाभूमि पहुँचे, तो उन्होंने पाया कि दीक्षाभूमि के गेट पर ताले लगे हुए थे!
यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि RSS ने दीक्षाभूमि स्मारक समिति पर कब्ज़ा कर लिया है और उनका पिट्ठू उनके इशारों पर काम कर रहा है।
14 अक्टूबर 1956 को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने दीक्षाभूमि पर अपने लाखों अनुयायियों के साथ धम्म अपनाया था। कल रात जो हुआ, वह RSS की एक सोची-समझी साज़िश थी, जिसका मकसद धम्म चक्र परिवर्तन दिवस की पूर्व संध्या पर न सिर्फ़ बाबासाहेब बल्कि बौद्ध धर्म का भी अपमान करना था।
इससे पहले भी RSS के कब्ज़े वाली समिति ने पार्किंग की व्यवस्था के बहाने दीक्षाभूमि की ज़मीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की थी। तब वंचित बहुजन आघाड़ी ने नागपुर को झकझोर कर रख दिया था।
कल हमारे नागपुर शहर अध्यक्ष मंगेश वानखेड़े ने भंतेगण के साथ दीक्षाभूमि पर ताला होने की वजह से वहाँ बाहर से ही बाबासाहेब को अभिवादन किया और वंदना की।
कल की घटनाएँ केवल महाराष्ट्र के बौद्धों का ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के बौद्ध समाज का अपमान था।
मैं देशभर के सभी बौद्धों से कहता हूँ कि वे बाबासाहेब और बौद्ध धर्म का अपमान करने के लिए RSS को सबक सिखाएँ। आपको पूरी छूट है।।
जय भीम। नमो बुद्धाय।
#Dikshabhoomi #Nagpur
🚨SOS🚨
AISA President Neha Bora has been picked up by Delhi Police in an unauthorised vehicle, WITHOUT A SINGLE FEMALE CONSTABLE!
WE DO NOT KNOW WHERE THEY ARE TAKING THEM! THEIR WHEREABOUTS ARE UNKNOWN!
@DelhiPolice has crossed EVERY LIMIT!
Ask for roads, you get slapped by a Minister.
Go to court, you get called a “Cockroach”
Come out on streets, you get lathicharged.
But there was always one option left - to vote against the regime.
Now even that’s being taken away!
Resist this, Save Democracy!
Students are dying in remote Tribal areas, and they’re dying in a cosmopolitan city like Mumbai too. This crisis cuts across geography.
How many more students have to die before their lives become a priority?
Hindu Mahasabha wanted Britain to reoccupy India...
They delivered a secret letter asking for the same in 1951, just before the 1952 election.
Declassified records of the British Archives tell us, this story of betrayal.
https://t.co/rskh4v7uw7
आजादी की पूर्व संध्या पर ये तस्वीर जरूर देखिए…
2 जुलाई 1972, शिमला।
एक तरफ प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, दूसरी तरफ विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी।
राजनीतिक मतभेद थे, लेकिन सम्मान था। बारिश हुई तो इंदिरा जी ने अपना छाता अटल जी के सिर पर कर दिया।
आज इंदिरा जी के लिए निशिकांत दुबे जैसे लोग जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वह देखकर फर्क साफ समझ आता है।
विरोध कीजिए, लेकिन मर्यादा मत छोड़िए।
इंदिरा गांधी सिर्फ एक मजबूत प्रधानमंत्री नहीं थीं, वे लोकतांत्रिक शालीनता और राजनीतिक संस्कार की मिसाल थीं।
और यही कांग्रेस की खूबसूरती थी—विचारों की लड़ाई में भी इंसान और लोकतंत्र का सम्मान।
यही असली आजादी कांग्रेस ने दी थी। जिसे पहले नेहरू जी फिर इंदिरा जी और राहुल गाँधी हमें दे रहे है 🇮🇳
#घोरकलजुग #IndiraGandhi #RahulGandhiVoiceOfIndia
I'm astonished to see that two High Court judges and an IIT Director are associated with this! 😥
What a concerning situation. Watch and weep, indeed. 😔🤔
#HindutvaJokers
दो दिन पहले उत्तराखंड सरकार के ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी बच्चों से संवाद कर रहे थे, तभी एक छात्रा ने बताया कि वो राष्ट्रीय स्तर की ताइक्वांडो खिलाड़ी है, उसका इंटरनेशनल प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ था, लेकिन उससे 1.5 लाख रुपये मांगे गए। पैसे न दे पाने के कारण वह इंटरनेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाई।
और मुख्यमंत्री जी का जवाब था “चलो बेटा, अभी बैठ जाओ, कोई बात नहीं।”
सोचिए, जिस खिलाड़ी ने देश के लिए पदक जीतने का सपना देखा था, उसके सपने पर कथित भ्रष्टाचार ने ताला लगा दिया और सरकार का जवाब है “कोई बात नहीं”!
मुख्यमंत्री @pushkardhami जी ,यह “कोई बात नहीं” कहकर टाल देने का विषय नहीं है। यह खिलाड़ियों के भविष्य, उनकी मेहनत और खेल व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला है।
इससे भी बड़ा मामला यह है कि यह वीडियो बाद में @BJP4UK ,सरकार के @DIPR_UK और सरकार से जुड़े तमाम सोशल मीडिया पेजों से गायब कर दिया गया।
एक गोल्ड मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी के “कोई बात नहीं” वाले जवाब के लिए, और दूसरा BJP को वीडियो गायब करने के लिए!
यही कारण है कि हम ओलंपिक पदक तालिका में ऊपर नहीं, नीचे से टॉप करते हैं!
Salute to these kids who are fighting for their future!
All they are asking for is a road to their school. Is that too much to ask after nearly 80 years of Independence? This should have been done decades ago.
This 15th August, let’s pledge to work for the children and schools of rural India. 🇮🇳