केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।
लेटर में लिखा है, "...यह पक्का करने के लिए कि जंतर-मंतर और पूरे देश में जो हालात हैं, उनसे देश विरोधी तत्वों को फायदा न हो, देश एकजुट रहे, भारत में छात्र कानूनी पचड़ों में न उलझें और अपनी पढ़ाई और अपने करियर पर ध्यान दें, मैंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया है..."
@chitraaum बस बस चित्रा काकी... इसी तरह इस्तीफा हम @dpradhanbjp जी का मांग रहे है ताकि नैतिकता का सर्वोच्च मानदंड स्थापित किया जा सके।
पर तुम तो बुरा मान जाती हो यार 😏
@ABPNews अच्छा जी !
तो इस ड्रामें के लिए पेपर आउट कराया गया था कि ये नोटंकी करना भूल गया था पिछली बार 🫡
खैर एंट्री टाईम 1.30 तक ही था ... खामखा कार्य दिवस का 30 मिनट खराब कर गये प्रधानमंत्री जी महोदय 😢☹️
@abhinaymaths@aajtak वाले सच मे ही सूखा क्या सडा हुआ नशा करते है ... बिहार में सरकार सम्राट की है और लिख नीतीश सरकार का शिक्षा विभाग रहे हैं... इनको और इनकी पत्रकारिता को 100 जूते देय हो रे महादेव जी 🙏🙏🙈
25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में:
आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं करना मुझे।
तीन-तीन बार मुख्यमंत्री कम नहीं होता देखो। ये तो हमारे नेता लोग समझ नहीं पा रहे हैं मेरी भावनाओं को। मैंने कहा लाइन मेरे से बड़ी खींचो तुम। मेरी लाइन तुम मिटाओ मत, मेरे से बड़ी लाइन खींचो। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, नहीं बनेगा, किसी को नहीं मालूम। हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलते रहो, चलते रहो। अभी संकट जो मैं कह रहा हूँ देश संकट में है, तो क्यों नहीं तुम आगे आ-आकर के हम सब मिलकर देश की रक्षा करें? कांग्रेस का औरा जो राजस्थान में है, हिंदुस्तान में वो हमें महसूस है, दिल्ली में रैली होती है सबसे अधिक लोग राजस्थान से जाते हैं। हाईकमान इस बात को जानता है। 20-25 साल से मैं देख रहा हूँ। इसलिए कृपा करके सब मतभेद भूलो, सब एक हो जाओ।
और इस मीडिया वालों को, मेजर क्या वो मीडिया जो मुख्य मीडिया है वो मीडिया जो आपका क्या कहलाता है, गोदी मीडिया। अब गोदी मीडिया का गोदी हटे ये उन मीडिया वालों से चाहिए कि अब गोदी हटवा दें वो अपना। वो तब हटवा पाएँगे जब ईमानदारी के साथ में सामाजिक सरोकार रखेंगे, देश हित में बात करेंगे, और सरकार के दबाव में नहीं आएँगे तो जाकर के ये तमगा गोदी मीडिया का हटेगा।
और सोशल मीडिया में मैं कहना चाहूँगा कृपा करके आप सच्चाई पे चलो, और आप सचिन पायलट को नुकसान मत करो। बहुत नुकसान कर चुके हो, बहुत नुकसान कर चुके हो। इतना नुकसान कर दिया आप कल्पना नहीं कर सकते, मैं बराबर सुनता रहता हूँ उनको। अब मैं कहता हूँ अब किसको जाके मैं कहूँ? किसको जाके कहूँ? कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता है और कमेंट कर देते हैं हम लोगों पर।
कुछ एबीसीडी पता नहीं उनको, और रिवोल्ट हो गया, रिवोल्ट हो गया। अरे, रिवोल्ट कैसे हो गया? अगर 100 लोगों ने कहा कि हमने साथ दिया हाईकमान का, सरकार हमने बचाई है। हम में से किसी को भी बना देते मुख्यमंत्री, क्या गलत कहा उन्होंने? क्या गलत कहा उन्होंने? और उसको रिवोल्ट बता रहे हैं वो हाईकमान के खिलाफ है, पर मैंने माफी माँगी सोनिया गांधी से फिर भी, मैं उस वक्त विधायक दल का नेता था।
मैं नेता था विधायक दल का, मुझे तीन बार बिना माँगे हुए सोनिया गांधी ने मुझे मुख्यमंत्री पद दिया। 1998 के अंदर, 2008 में सेकंड टाइम मुख्यमंत्री बनाया मुझे सोनिया जी ने, थर्ड टाइम तो मैं 21 पे आया हुआ था। 2013 में मैं 21 पे आया हुआ था, तभी तीसरी बार राहुल गांधी जी ने, सोनिया जी ने, प्रियंका जी ने मिलकर मुख्यमंत्री बनाया।
मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था, मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ। ये क्यों भ्रम है मीडिया वालों को? और अनपढ़ आदमी होता तो फिर भी कह देते वो। अनपढ़ कामराज जी थे, तब भी कांग्रेस प्रेसिडेंट थे देश के। मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद जहाँ गांधी जी अध्यक्ष रहे हों, पंडित नेहरू रहे हों, मोतीलाल नेहरू रहे हों, कौन नहीं रहा? सरदार पटेल रहे हों, उस कांग्रेस प्रेसिडेंट मुझे बना रही हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस, तो मैं मना करूँगा? मैं मना करूँगा?
वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक कॉन्सपिरेसी थी मेरे ख्याल से। मुझे लगता है वो एक बड़ी कॉन्सपिरेसी हुई। अचानक ही ऑब्ज़र्वर आ गए, अचानक ही तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया।
हिंदुस्तान में लोग समझते हैं अशोक गहलोत जो है, उसको मुख्यमंत्री रहना था, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना था, इसलिए रिवोल्ट हुआ। मुझसे कितने नज़दीक आदमी भी देश में हैं, कितने नज़दीक मेरा खुद का मिलने वाला हो, उसके दिमाग में यही बात है कि भाई, अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री रहना था इसलिए रिवोल्ट करवा दिया। अब मैं उनको कैसे समझाऊँ? आज मैं समझा रहा हूँ आपको। अब भी कुछ भला मेरा हो जाए तो आप लोग भला करना, जो मैं बता रहा हूँ आपको। पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था मैंने रिवोल्ट करवा दिया, और वही मैं मीडिया की बात करूँगा।
जिस मीडिया ने बातें फैलाई थी, मैं चुप रहा, और चुप भी मैं इसलिए रहा मुझे सोनिया जी को बताना था कि चाहे ये पायलट के खिलाफ रिवोल्ट था या क्या था, मुझे मतलब नहीं है। आज मैं आया हूँ सिर्फ इसलिए कि मैंने जो है, मैं नेता था विधायक दल का। ऑब्ज़र्वर आए हुए थे एआईसीसी के, एआईसीसी ऑब्ज़र्वर के मायने होते हैं। चाहे वो खड़गे साहब थे चाहे अजय माकन जी थे, और मैं प्रस्ताव पास नहीं करवा पाया।
हालाँकि, मैंने रात को कहा था कि आप अभी इस मीटिंग को बंद करते हैं, कल वापस मीटिंग बुलाकर के अपन बात करेंगे। वो स्थिति बनी नहीं हमारी, इसलिए वो इसलिए जो है, वो नहीं हो पाया प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। मैंने जाके सॉरी फील किया मैडम के सामने कि मैं विधायक दल का नेता था। मुझे सब कुछ पार्टी ने दिया है, उसके बाद में भी ये स्थिति बन गई तो मैं माफ़ी चाहता हूँ। ये बात थी।
भाजपा नेताओं द्वारा मानेसर प्रकरण पर की जा रहीं टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया:
ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे पायलट साहब हों, चाहे वो डोटासरा जी हों, चाहे वो जूली साहब हों, चाहे वो सीपी जोशी साहब हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह जी हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान जी भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला जी भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे।
सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ में और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग। जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाँ जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान पे किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ। सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमांड का पहले था, आज भी है।
25 सितंबर की घटना जो हुई है वो उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए, कहा भई अगर नया मुख्यमंत्री बने, अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए, नया मुख्यमंत्री बने, बने वो हमने जो लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड के साथ में, हम होटलों में बंद रहे हैं, लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड साथ रहे हम लोग, सरकार बचाई, हम में से किसी को भी, हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, बना दीजिए, हमें मंजूर है पर पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे क्योंकि वो तो ले जाने वालों में थे मानेसर, ये उनकी मांग थी, उसको तोड़-मरोड़ कर के कह रहे हैं कि हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट हो गया, अरे हाईकमांड खिलाफ रिवोल्ट होता तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या बाद में? अगर रिवोल्ट हम करते, तो हाईकमांड मुझे क्यों रखती मुख्यमंत्री? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए।
और लास्ट बात ये है, हिंदुस्तान के इतिहास के अंदर जब कभी भी हाईकमांड ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं, 90% एमएलए जो होता है जो मुख्यमंत्री साथ होते हैं, वो छोड़ के जाते हैं नए मुख्यमंत्री बनने वाले के पास। नए मुख्यमंत्री पास जाते हैं कि भई ये कल बनने वाला है, शपथ लेगा 5 दिन बाद में, 2 दिन बाद में और इन्हीं को जो है हमें मंत्री बनना है इनके साथ, हमारे काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे, तो पुराने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी, कैप्टन साहब हों चाहे वो एक्स वाई जेड कोई हो, जो-जो मुख्यमंत्री हटाने का फैसला हाईकमांड ने किया है, 90% विधायक छोड़ के जाते हैं उनके पास से, ये तो मैंने देखा है। कोई नहीं रुकता है।
क्या कारण था उस दिन कि नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा, चला दिया खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया, उसके बाद में उनके पास नहीं गए, उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? वो तो शपथ लेने वाले थे मान लो, जाते उनके पास में, ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब वो भी उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए, वो भी मतलब अनुभव प्राप्त हो चुके हैं, हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं कोई, हम तो स्नेह रखते हैं बचपन से ही, हम तो बचपन से ही इनके परिवार में आते-जाते थे, जब हम MP बनकर गए, तो वैभव हो चाहे ये हो, 2-3 साल के बच्चे की तरह थे, हम तो बच्चे की तरह मानते हैं आज भी उनको। अब उसके बाद में अगर वो राजनीति में पता नहीं कौन गाइड कर रहा है।
एक तो जो मीडिया जो है, वो सच्चाई पे उनका सपोर्ट करे मुझे ख़ुशी होगी, मुझे भी सपोर्ट किया। बचपन से मीडिया ने मुझे सपोर्ट किया, मैं मीडिया फ्रेंडली कहलाता हूँ, मीडिया ने भी हमारे साथ चाय पी होगी तो पेमेंट खुद ने दिया होगा मीडिया वालों ने, ऐसे सम्बन्ध हम लोगों ने रखे हैं पर हमने कभी नहीं कहा कि तुम अंट-शंट अनर्गल ऐसी बातें करो जिससे मेरी खुद की इमेज पे लोग हँसें। कभी उसको बना देते हैं, प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं उसको, पायलट साहब को, कि ये प्राइम मिनिस्टर के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेजिडेंट के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेजिडेंट बनने जा रहा है, कभी कहते हैं ये जी एस ओ बनने जा रहा है और कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहा है, तो क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? जितने भी मीडिया वाले हो, तुम लोग पीछे पड़े हुए हो, तुम लोग जो है दिल्ली में चाहे मेनस्ट्रीम मीडिया हो और चाहे वो आपका सोशल मीडिया हो।
सोशल मीडिया को मैं सलाम करता हूँ उनको, इस संकट की घड़ी में जो भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है, उनको मैं सलाम करता हूँ। डेमोक्रेसी खतरे में है, उसकी रक्षा करने के काम की बड़ी भूमिका किसी की है, मेनस्ट्रीम मीडिया की नहीं है, सोशल मीडिया की है और उनके अंदर जो बैठे हुए लोग हैं, जमीनी हकीकत उनको नहीं मालूम है, वो नई-नई स्टोरी चलाते रहते हैं, कोई फायदा नहीं, सबसे बड़ा नुकसान जो कर रहा है पायलट साहब का, वो वो मीडिया कर रहा है जो आउट ऑफ़ वे झूठी ख़बरें चला करके, झूठे पोस्ट देकर के ये इसके लायक हैं।
एक पत्रकार ने लिख दिया कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को क्यों बेटा मानती है? सचिन पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेती है? ये पत्रकारिता है क्या इनकी? पत्रकारिता है इनकी, आप कल्पना कीजिए कि कहाँ ले जा रहे हैं देश को, मीडिया वाले भी। इसलिए मैं कहना चाहूँगा पायलट साहब को ही, उनको सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए, गलती इंसान से ही तो होती है, गलती इंसान से होती है, मैं भी कर सकता हूँ। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए, मैंने बाहर निकलते ही जैसलमेर के होटल से, जब तय हो गया ये लोग भी आ रहे हैं, आते ही मैंने बात कि आप लोग स्टेटमेंट दिया, 'फॉरगेट एंड फॉरगिव'। अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते उस दिन, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते, मैंने उसके ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी, मैंने कहा 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' मतलब जिसने गलतियाँ हमने करी आपस के अंदर, सब भूलो और माफ़ करो, अब वो बात भी अगर समझ में नहीं आई उनको, उसमें मेरा क्या कसूर है?
हम आज भी मिलते हैं, हँसी-मजाक भी करते हैं, बातचीत भी करते हैं। हमारी कोई आपस में दिक्कत नहीं है, सच्चाई को स्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है। मैंने बीकानेर में कहा 6 महीने पहले, भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में क्या कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भई चलो ये इशू खत्म हो गया क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे, उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इशू बना हुआ रहता है, हम नहीं चाहते इशू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है, पर जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे, तो भई आप जानते हो इशू तो बना ही रहता है, मैं नहीं चाहता इशू बना रहे।
हम चाहते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी संकट में है देश के अंदर, देश खुद संकट में है और देश को अगर कोई बचा सकता है तो वो सिर्फ कांग्रेस बचा सकती है। ये गांधी जी के सानिध्य वाली पार्टी है, पंडित नेहरू हों, मौलाना आजाद हों, सरदार पटेल हों, उस वक्त के नेता थे हमारे। उन्होंने कैसे पार्टी को, देश को आजाद करवाया, हम भूल सकते हैं क्या? जेलों में बंद रहे थे 10-10 साल तक, इन्होंने उंगली नहीं कटाई हमारी आरएसएस-बीजेपी वालों ने, आज राज कर रहे हैं वो लोग। ये देश को तोड़ देंगे लोग, ये ऐसे खतरनाक लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम करते-करते पता नहीं देश को कहाँ ले जाएँगे।
लड़ाई हमें सब को मिलके लड़नी चाहिए, पायलट साहब हों, चाहे मैं हूँ, चाहे कोई नेता है। अगर हमें ईमानदारी है कांग्रेस में रहने की, और हम चाहते हैं कांग्रेस के लिए जान लगा दें क्योंकि कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी। उन्होंने अपनी जुबान से यें कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है। उनको मालूम है कि मैंने उनकी मदद करी है, उनका फ़ोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है हम लोगों को भी।
भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते हैं हाँ भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी करी थी, तो मेरा दिल भर जाता। क्यों नहीं कही उन्होंने, क्यों नहीं ये बात कही? जब मुझसे वो फ़ोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री बनाने में मदद करो, तो मैं मदद करके आ गया, तो क्या उनका धर्म नहीं था क्या कहने का? भई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी, ठीक है आज हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, कुछ तो कहते वो, ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं।
दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। गांधी जी ने कहा था, 'द ट्रुथ इज गॉड, गॉड इज ट्रुथ', सत्य ही भगवान है, ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है, हम तो इस पे चलते हैं और पायलट साहब हों, चाहे कोई नेता हो, पीसीसी अध्यक्ष हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हो, डोटासरा जी हो और नेता हो, सबको हम तो यही कहेंगे भई सब लोग मिलके चलो, राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमांड राहुल जी के दिमाग में ऐसा है जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं, अभी पीसीसी प्रेसिडेंट की और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे आपकी, अच्छा काम आप लोग कर रहे हो, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा?
@Kapil_Jyani_ शनिचर साइलेंट साहब भी मुस्लिम और गुर्जर वौटरो का हिसाब दैखकर सीट बदलते भागते है कांग्रेस मे होकर भी ..... इनका तो और भी बुरा हाल है मतलब 🙈😂😂
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