शामली जनपद में हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या बेहद दुखद और चिंताजनक है।
कल शाम (26 अगस्त 2026) जिम से निकलकर घर जाते समय अंकित पर चार से अधिक हमलावरों ने ऑटोमेटिक हथियारों से ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिसमें उन्हें कई गोलियां लगीं।
अंकित बालियान की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर एक गैंग द्वारा जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट सामने आना बेहद गंभीर है क्योंकि संगठित गिरोहबंदी के खात्मे का दावा पुलिस करती रही है, उसके बावजूद शहर के बीचोंबीच इस तरह बेखौफ होकर हत्या होना बताता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, अभी तक किसी की गिरफ्तारी न होना भी आपकी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
@UPGovt हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार कर इस हत्याकांड के पीछे सक्रिय पूरे आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश करे और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।
हमारी संवेदनाएँ अंकित बालियान के शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
24 सितंबर को चन्द्रशेखर आजाद जी ने दिल्ली बुलाया है🚨
आरक्षण के समर्थन में होने वाली इस विशाल महारैली का सभी साथी अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें व अपने साथियों को अवगत कराएं
अधिकारों की इस लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लो..!!
वंचितों की हिस्सेदारी के विरोधियों का दोहरा चरित्र देश के सामने है। पहले ‘आरक्षण हटाओ’ और अब ‘आरक्षण में सुधार’ की मांग करने वालों से तत्काल “सौहार्दपूर्ण वार्ता” लेकिन अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज, आख़िर ये कैसा सौहार्द है, नड्डा जी?
एक तरफ वार्ता की तस्वीरें, दूसरी तरफ छात्रों पर लाठियाँ, यह दोहरा चरित्र अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।
24 सितंबर 1982 को मान्यवर कांशीराम साहब ने पूना पैक्ट के 50 साल पूरे होने पर पूरे देश में “धिक्कार दिवस” मनाया था। यह कोई साधारण विरोध नहीं था, बल्कि एक अकाट्य राजनीतिक और सामाजिक समझ का नायाब उदाहरण था।
परम पूज्य बाबा साहेब ने जिस पूना पैक्ट पर बड़े दुखी मन से हस्ताक्षर किए थे, आज उसी पूना पैक्ट का दुष्परिणाम “Depressed Classes (वंचित वर्ग)” के सामने है। यही कारण है कि जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा जी आरक्षण विरोधियों से मुलाकात करते हैं, तो बहुजन समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
किसान आंदोलन पर जिस सरकार ने 13 महीने बाद सुध ली, पेपर लीक के जनव्यापी आंदोलन के आंदोलनकारियों से नड्डा जी एक महीने बाद मिलने का समय निकाल पाए, लेकिन जैसे ही जातीय वर्चस्व बनाए रखने की जिद लिए कुछ मुट्ठीभर लोग भाजपा-RSS के दिल में छुपे एजेंडे को लेकर इकट्ठा होते हैं, तो तुरंत “सौहार्दपूर्ण वार्ता” होने लगती है।
सरकार को जवाब देना होगा कि ऐसे लोगों से आखिर क्या बात हुई और आरक्षण को लेकर सरकार का रुख क्या है?
आरक्षण कोई राजनीतिक खैरात नहीं, बल्कि सामाजिक गैर-बराबरी के रहते संविधान द्वारा सुनिश्चित प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की व्यवस्था है। जब तक भेदभाव और गैर-बराबरी कायम है, तब तक आरक्षण भी कायम रहेगा।
मुट्ठीभर जातंकवादियों की आड़ में वंचितों की संवैधानिक हिस्सेदारी को कमजोर करने की साजिश कर रहे सरकार के पिट्ठुओं, कान खोलकर सुन लो! भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) 24 सितंबर, पूना पैक्ट दिवस पर दिल्ली में एक बड़ा जनांदोलन करके संविधान की ताकत का एहसास कराएगी।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल!
जय संविधान! जय आरक्षण!
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद की बहुजन नेताओं से अपील 🚨👇🏻
"अपनी पार्टी का मोह छोड़िए, आज समाज को आपकी जरूरत है। पार्टियां आपको सम्मान देती है क्योंकि आपके समाज के पास वोटबैंक है। आपकी चुप्पी समाज पर अन्याय को बढ़ावा देगी"
आज डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जयपुर में।
राजस्थान के नागौर के डांगावास हत्याकांड में वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त 2026 को आए फैसले ने पीड़ित परिवारों को बेहद आहत किया है। उनका सवाल है कि यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की?
वर्ष 2015 की इस जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय न मिलना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
पुलिस की यह कार्रवाई हमारी आवाज़ नहीं रोक सकती। हम डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाकर रहेंगे। न्याय की यह लड़ाई आख़िरी दम तक जारी रहेगी।
ब्रिटिशकालीन भारत में अंग्रेजों ने जमींदारी जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से शासन किया और पहले से सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभुत्व रखने वाले वर्गों को अपने शासन में सहयोगी बनाया। इसके परिणामस्वरूप धन, धरती और राजपाट पर कुछ विशेष वर्गों का वर्चस्व और मजबूत हुआ। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन आजादी के बाद भी धन, धरती और सत्ता-संसाधनों पर समाज के एक बड़े वर्ग का वर्चस्व बना रहा और भूमि तथा संसाधनों का न्यायपूर्ण बंटवारा नहीं हो सका।
इसी असमानता को कम करने के उद्देश्य से स्वतंत्र भारत में भूमि सुधार लागू किए गए। लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, कानूनी एवं प्रशासनिक अड़चनों और प्रभावशाली भू-स्वामी वर्गों के प्रतिरोध के कारण भूमि सुधार अपने व्यापक उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सके। भूमि और संसाधनों की असमानता से पैदा हुआ असंतोष आगे चलकर कई उग्र सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों की पृष्ठभूमि बना, जिनमें नक्सल आंदोलन भी शामिल था।
ऐतिहासिक रूप से सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक अवसरों से वंचित समुदायों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को संविधान लागू होने के साथ ही आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान मिला। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग को केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1990 के दशक में लागू हुआ।
आरक्षण का संवैधानिक आधार मुख्यतः सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन तथा पर्याप्त प्रतिनिधित्व का अभाव है। इसके बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आर्थिक आधार पर EWS आरक्षण की व्यवस्था की गई। ऐसे में आज आवश्यकता है कि आरक्षण और प्रतिनिधित्व की पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन किया जाए।
हम लंबे समय से सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि देश की धन-संपत्ति, जमीन, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, राजनीति, मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में विभिन्न सामाजिक समूहों की कितनी हिस्सेदारी है। जब तक विश्वसनीय और व्यापक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक सामाजिक न्याय और समान हिस्सेदारी की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आ सकती।
हमारी मांग है कि जिसकी जितनी संख्या है, उसकी उतनी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थानीय निकायों, संसद और विधानमंडलों में प्रभावी प्रतिनिधित्व मिले। OBC समाज को लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले। SC, ST और OBC के लिए राज्यसभा तथा विधान परिषदों में भी उचित और प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
उच्च न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व, पदोन्नति में आरक्षण, सरकारी योजनाओं और बजट में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी, सरकारी ठेकों और सरकारी खरीद में आरक्षण तथा निजी क्षेत्र में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि सामाजिक न्याय केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित न रहे।
निजी क्षेत्र में हमारे समाज के लोग केवल मजदूरी करने के लिए नहीं हैं। उन्हें प्रबंधन, निर्णय लेने वाली संस्थाओं और नेतृत्व के पदों पर भी उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। आर्थिक विकास में भागीदारी तभी सार्थक होगी, जब विकास के साथ निर्णय लेने की शक्ति में भी समान भागीदारी सुनिश्चित हो।
मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए मीडिया संस्थानों में भी ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों की पर्याप्त भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग की आवाज लोकतांत्रिक विमर्श में प्रभावी रूप से सामने आ सके।
यह लड़ाई किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के अनुरूप न्यायपूर्ण हिस्सेदारी दिलाने की लड़ाई है। हमारा लक्ष्य है-- धन, धरती, सत्ता और देश के महत्वपूर्ण संस्थानों में न्यायपूर्ण हिस्सेदारी तथा वास्तविक सामाजिक न्याय।
जिला बाराबंकी के हैदरगढ़ के सुबेहा थाना क्षेत्र के पूरे गुमान मजरे कोलवा गांव में लंबे समय से चले आ रहे जमीनी विवाद का फैसला पीड़ित पक्ष के पक्ष में आने के बाद उन्होंने अपनी जमीन पर फसल बोई थी। इसके बावजूद आरोपी पक्ष जुताई करने के लिए पहुंचा और विरोध करने पर पहले से घात लगाए लोगों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
पीड़ितों का कहना है कि इस दौरान महिलाओं समेत कई लोगों के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दिया गया, जिसमें 70 वर्षीय शमशेर अली की मौत हो गई। वहीं, जब दलित समाज के लोग बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो उन्हें भी बेरहमी से पीटा गया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि 16 अगस्त की इस घटना में लगभग 30 आरोपियों में से अभी तक केवल 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। बाकी आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। यह पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की जिला टीम मौके-ए-वारदात से ही पीड़ित पक्ष के साथ खड़ी है। पीड़ितों को न्याय दिलाने और सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर कल धरना भी दिया गया।
@UPGovt से हमारी मांग है कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो तथा पीड़ित परिवार और घायलों को उचित न्याय एवं सहायता दी जाए।
हमारी गहरी संवेदनाएँ मृतक शमशेर अली जी के शोकाकुल परिवार के साथ हैं। प्रकृति परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। साथ ही, हम सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
माननीया वित्त मंत्री @nsitharaman जी, सादर जय भीम!
UPI को शुल्क-मुक्त रखकर सरकार ने वर्षों तक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया और आज यह देश की महत्वपूर्ण डिजिटल जन-सुविधा बन चुका है। ऐसे में UPI भुगतानों पर शुल्क वसूलने संबंधी विधायी संशोधन पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
आपने कहा है कि शुल्क (MDR) का भुगतान दुकानदार करेगा, लेकिन क्या कारोबारी इस अतिरिक्त लागत को अपनी जेब से वहन करेंगे? छोटे दुकानदार कम मार्जिन पर काम करते हैं। लागत बढ़ेगी तो कीमत बढ़ाकर इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
माननीय वित्त मंत्री जी, जब आप बड़े-बड़े मॉल में जाती होंगी तो देखती होंगी कि ग्राहक चाहे कितने का भी सामान खरीदे, कैरी बैग के पैसे तक अलग से वसूले जाते हैं, जबकि उपभोक्ता आयोग ऐसे शुल्क को अनुचित व्यापार व्यवहार मान चुका है। तो फिर यह कैसे माना जाए कि UPI शुल्क का असर अंततः उपभोक्ता पर नहीं पड़ेगा?
और क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव में UPI को मुफ्त रखने की नीति बदली जा रही है? U.S. Trade Representative, 2026 की रिपोर्ट में भारत की UPI और RuPay को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर आपत्ति जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन नीतियों ने विदेशी भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया और वैश्विक कार्ड नेटवर्क के शुल्क-आधारित कारोबारी मॉडल को बाधित किया।
क्या भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का फैसला भारतीय जनता के हित में होगा या विदेशी कार्ड कंपनियों के दबाव में?
UPI को जन-सुविधा रहने दीजिए।
UPI भुगतान को मुफ्त रहने दीजिए।
@mygovindia@FinMinIndia
नारी शक्ति, साहस, वीरता व न्याय की अनोखी मिसाल, होल्कर साम्राज्य की महारानी माता अहिल्याबाई होल्कर जी के स्मृति दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवँ विनम्र आदरांजलि।
दो दिन पहले उत्तराखंड सरकार के ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी बच्चों से संवाद कर रहे थे, तभी एक छात्रा ने बताया कि वो राष्ट्रीय स्तर की ताइक्वांडो खिलाड़ी है, उसका इंटरनेशनल प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ था, लेकिन उससे 1.5 लाख रुपये मांगे गए। पैसे न दे पाने के कारण वह इंटरनेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाई।
और मुख्यमंत्री जी का जवाब था “चलो बेटा, अभी बैठ जाओ, कोई बात नहीं।”
सोचिए, जिस खिलाड़ी ने देश के लिए पदक जीतने का सपना देखा था, उसके सपने पर कथित भ्रष्टाचार ने ताला लगा दिया और सरकार का जवाब है “कोई बात नहीं”!
मुख्यमंत्री @pushkardhami जी ,यह “कोई बात नहीं” कहकर टाल देने का विषय नहीं है। यह खिलाड़ियों के भविष्य, उनकी मेहनत और खेल व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला है।
इससे भी बड़ा मामला यह है कि यह वीडियो बाद में @BJP4UK ,सरकार के @DIPR_UK और सरकार से जुड़े तमाम सोशल मीडिया पेजों से गायब कर दिया गया।
एक गोल्ड मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी के “कोई बात नहीं” वाले जवाब के लिए, और दूसरा BJP को वीडियो गायब करने के लिए!
यही कारण है कि हम ओलंपिक पदक तालिका में ऊपर नहीं, नीचे से टॉप करते हैं!
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी विधानसभा के ग्राम पंचायत महोली चौराहे पर साहस और शौर्य की मिसाल, 1857 के महासंग्राम की महानायिका वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी जी की प्रतिमा को पुलिस द्वारा जबरन हटाया जाना बहुजन नायकों और नायिकाओं के प्रति भाजपा की घोर असंवेदनशीलता और बहुजन इतिहास के अपमान को दर्शाता है।
16 अगस्त को वीरांगना अवंती बाई जी की जयंती है। जयंती से ठीक पहले उनकी प्रतिमा हटाया जाना अत्यंत निंदनीय है और भाजपा सरकार की बहुजन विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
@MP_MyGov तत्काल प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उसी स्थान पर स्थापित करे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करे। बहुजन समाज अपने नायकों और नायिकाओं के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
भाजपा द्वारा लगभग 6 महीने पहले से मनाए जा रहे परम ज्ञानी, संत शिरोमणि, जगतगुरु सतगुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व एवं इस अवसर पर निकाली जा रही कलश यात्रा को लेकर उनके अनुयायी भाई चन्द्रशेखर आजाद जी का बयान।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी दलित युवा नवप्रवर्तक रवि टम्टा जी का यह नवाचार वास्तव में अद्भुत, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण है। सुदूर पहाड़ में जन्मे रवि टम्टा जी ने साबित कर दिया कि उनके हौसले भी पहाड़ जैसे बुलंद हैं।
रवि टम्टा जी ने HAPIDA SKYNeX उड़ान वाहन (Flying Vehicle) के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वे सुरक्षित एवं विद्युत चालित व्यक्तिगत उड़ान वाहन विकसित करने के उद्देश्य से कार्य कर रहे हैं। वर्षों के शोध, नवाचार और अथक परिश्रम के बाद प्रोटोटाइप की यह सफल उड़ान उनके सपने को साकार करने की दिशा में पहला बड़ा मील का पत्थर है।
यह उपलब्धि केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। ऐसे स्वदेशी नवाचार भारत की वैज्ञानिक क्षमता, युवाओं की प्रतिभा और आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं।
रवि टम्टा जी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत मंगलकामनाएं। हमें विश्वास है कि उनका यह प्रयास भारत को भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हमें आप पर गर्व है!
"दो केंद्रीय मंत्री मेरे पास आए थे, उन्होंने कहा हम आपकी मांग पर विचार करेंगे"
◆ ASP के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा
@BhimArmyChief | Chandra Shekhar Aazad | #ChandraShekharAazad | @manakgupta
"शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मिटने वालों का यही निशां होगा"
कारगिल युद्ध में भारतीय सेनाओं के अदम्य साहस व पराक्रम को शत-शत नमन करते हुए सभी देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।
#Kargilvijaydivas
सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना पूरे देश के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेशस्थली को मिली यह वैश्विक मान्यता भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत का सम्मान है।
सारनाथ ने पूरी मानवता को शांति, करुणा, समानता और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। यह उपलब्धि हमारी ऐतिहासिक धरोहर को विश्व पटल पर नई पहचान देगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।
सारनाथ की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ।
जय भीम! नमो बुद्धाय!
अगर माइलेज 3–5% घटेगा, तो हर 100 किमी पर जनता की जेब से और पैसा निकलेगा। बाइक चालक 6–11 रुपये और कार चालक 21–35 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करेगा।
भुगतान ज़्यादा, माइलेज कम–आखिर E20 के नाम पर जनता की जेब पर दोहरा वार क्यों?
'भारतरत्न' से सम्मानित देश के 11वें राष्ट्रपति, 'मिसाइल मैन' के नाम से प्रसिद्ध, महान वैज्ञानिक, शिक्षक व लेखक डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी के स्मृति दिवस पर उन्हें शत शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
रेलवे में स्टाफ की कमी अब यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है।
सीट को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसा में बदल गया। एक युवक को प्लेटफॉर्म पर फेंक दिया गया और उसकी बहन के साथ भी बदसलूकी की गई। ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि ट्रेनों और स्टेशनों पर पर्याप्त टीटीई, आरपीएफ और अन्य रेलवे स्टाफ की उपलब्धता कितनी आवश्यक है।
रेलवे में लाखों पद रिक्त हैं। एक ओर लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, तो दूसरी ओर इतने बड़े पैमाने पर पद खाली पड़े हैं। यह न केवल बेरोजगारी को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं से भी सीधा समझौता है।
@AshwiniVaishnaw जी रिक्त पदों पर भर्ती न करना सिर्फ बेरोजगारी बढ़ाना नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।