पीजीआई चंडीगढ़ के निदेशक एवं विश्व के जाने माने न्यूरोलॉजिस्ट प्रो विवेक लाल ने स्वयं आज चंडीगढ़ की धरती से #JusticeForMoumita आंदोलन की नेतृत्व किया। ऐसे महान चिकित्सक को बारंबार नमन कि उच्च पद पर रहने के बावजूद आज बिटिया के लिए आगे आये। #justiceformoumitadebnath#BengalHorror
फ्रांस में एक तैराक हुए, जेवियर। फ्रांस के लिए उन्होंने ओलंपिक तक खेला। उन्हें फ्रांस के अच्छे तैराकों में गिना जाता रहा है। पर जेवियर दुर्भाग्यशाली थे, उन्हें ओलंपिक में स्वर्ण पदक नहीं मिला।
जेवियर की पत्नी भी तैराक हैं, उन्होंने भी फ्रांस के लिए ओलंपिक में भाग लिया है। पर मैडल उनके भाग्य में भी नहीं। सम्भव है कि वे दुर्भाग्यशाली हों, या उनमें गोल्ड जीतने लायक प्रतिभा न हो।
एक ओलंपिक में जेवियर उस माइकल फेलेप्स के साथ भी तैरे थे, जो ओलंपिक का बादशाह है। जिसके पास सबसे अधिक पदक हैं। फेलेप्स के आगे तो उन्हें हारना ही था, वे हार गए। जेवियर के मन मे वह हार बैठ गयी। वह हार उसे हमेशा दर्द देती रही, तड़पाती रही। पर करते क्या?
उन्हें यह बात तो समझ आ गयी थी कि उनमें उतनी प्रतिभा नहीं जो ओलंपिक में अपना राष्ट्रगान बजवा सकें। जेवियर ने अपनी उम्मीदों को अपने बेटे में ढूंढना शुरू किया। उनके लड़के में भी प्रतिभा थी।
आखिर उसके माता-पिता ओलंपियन थे। जेवियर पति पत्नी अपने बच्चे के पीछे कड़ी मेहनत करने लगे। लड़का भी ओलंपिक पहुँचा। टोक्यो ओलंपिक में वह छठवें स्थान पर रहा। पदक से दूर, बहुत दूर... जेवियर चैन से नहीं बैठता था। ओलंपिक गोल्ड उसकी आँखों के आगे नाचता था।
उसने अब अपने बेटे के लिए वह ट्रेनिंग स्कूल चुना, जिसमें माइकल फेलेप्स का कोच रहा बाउमैन हेड कोच था। जेवियर हर वह प्रयास कर लेना चाहता था, जो उसके बेटे के विजेता बनने में सहायक होता।
लड़का भी अपना सबकुछ झोंक रहा था। उसके जीवन का एकमात्र आंदोलन ओलंपिक गोल्ड पाने लायक स्पीड पाने का था। वह तैर रहा था, और केवल तैर रहा था।
उसके कोच को भी भरोसा था उसपर। उसने पहले ही दिन से समझ लिया था कि यह लड़का कमाल करेगा। वह भी उसके साथ जी जान से लगा हुआ था। फिर आया ओलंपिक 2024। जेवियर पति-पत्नी की उम्मीदें आसमान पर थीं। बेटे का एक गोल्ड उन्हें जीवन भर का सुकून देने वाला था।
बताता चलूं, खेल छोड़ने के बाद उस पति पत्नी ने कोई और काम नहीं किया। वे अपना सारा समय और सारा धन अपने बेटे पर खर्च करते रहे। क्यों? बस इसलिए कि एक पदक आये। स्वर्ण आये। तो सुनिये। 2024 के ओलंपिक में उनका बेटा 4 स्वर्ण के साथ कुल पांच पदक लेकर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बना है। फेस ऑफ द गेम, लियोन मर्चेंड!
वह लियोन जो पदक तालिका में अकेले 186 देशों से आगे खड़ा है। वह अपने देश का पहला खिलाड़ी है जिसके पास एक ओलंपिक में एक से अधिक स्वर्ण पदक है। कुछ कहानियां तनिक लम्बी होती हैं, देर से पूरी होती हैं। पर जब पूरी होती हैं तो कमाल होती हैं।
साभार- सर्वेश कुमार तिवारी जी
फ्रांस में एक तैराक हुए, जेवियर। फ्रांस के लिए उन्होंने ओलंपिक तक खेला। उन्हें फ्रांस के अच्छे तैराकों में गिना जाता रहा है। पर जेवियर दुर्भाग्यशाली थे, उन्हें ओलंपिक में स्वर्ण पदक नहीं मिला।
जेवियर की पत्नी भी तैराक हैं, उन्होंने भी फ्रांस के लिए ओलंपिक में भाग लिया है। पर मैडल उनके भाग्य में भी नहीं। सम्भव है कि वे दुर्भाग्यशाली हों, या उनमें गोल्ड जीतने लायक प्रतिभा न हो।
एक ओलंपिक में जेवियर उस माइकल फेलेप्स के साथ भी तैरे थे, जो ओलंपिक का बादशाह है। जिसके पास सबसे अधिक पदक हैं। फेलेप्स के आगे तो उन्हें हारना ही था, वे हार गए। जेवियर के मन मे वह हार बैठ गयी। वह हार उसे हमेशा दर्द देती रही, तड़पाती रही। पर करते क्या?
उन्हें यह बात तो समझ आ गयी थी कि उनमें उतनी प्रतिभा नहीं जो ओलंपिक में अपना राष्ट्रगान बजवा सकें। जेवियर ने अपनी उम्मीदों को अपने बेटे में ढूंढना शुरू किया। उनके लड़के में भी प्रतिभा थी।
आखिर उसके माता-पिता ओलंपियन थे। जेवियर पति पत्नी अपने बच्चे के पीछे कड़ी मेहनत करने लगे। लड़का भी ओलंपिक पहुँचा। टोक्यो ओलंपिक में वह छठवें स्थान पर रहा। पदक से दूर, बहुत दूर... जेवियर चैन से नहीं बैठता था। ओलंपिक गोल्ड उसकी आँखों के आगे नाचता था।
उसने अब अपने बेटे के लिए वह ट्रेनिंग स्कूल चुना, जिसमें माइकल फेलेप्स का कोच रहा बाउमैन हेड कोच था। जेवियर हर वह प्रयास कर लेना चाहता था, जो उसके बेटे के विजेता बनने में सहायक होता।
लड़का भी अपना सबकुछ झोंक रहा था। उसके जीवन का एकमात्र आंदोलन ओलंपिक गोल्ड पाने लायक स्पीड पाने का था। वह तैर रहा था, और केवल तैर रहा था।
उसके कोच को भी भरोसा था उसपर। उसने पहले ही दिन से समझ लिया था कि यह लड़का कमाल करेगा। वह भी उसके साथ जी जान से लगा हुआ था। फिर आया ओलंपिक 2024। जेवियर पति-पत्नी की उम्मीदें आसमान पर थीं। बेटे का एक गोल्ड उन्हें जीवन भर का सुकून देने वाला था।
बताता चलूं, खेल छोड़ने के बाद उस पति पत्नी ने कोई और काम नहीं किया। वे अपना सारा समय और सारा धन अपने बेटे पर खर्च करते रहे। क्यों? बस इसलिए कि एक पदक आये। स्वर्ण आये। तो सुनिये। 2024 के ओलंपिक में उनका बेटा 4 स्वर्ण के साथ कुल पांच पदक लेकर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बना है। फेस ऑफ द गेम, लियोन मर्चेंड!
वह लियोन जो पदक तालिका में अकेले 186 देशों से आगे खड़ा है। वह अपने देश का पहला खिलाड़ी है जिसके पास एक ओलंपिक में एक से अधिक स्वर्ण पदक है। कुछ कहानियां तनिक लम्बी होती हैं, देर से पूरी होती हैं। पर जब पूरी होती हैं तो कमाल होती हैं।
साभार- सर्वेश कुमार तिवारी जी
जब गलतियां ही इतनी बढ़ जाये तो सुधारने की जरूरत नही रहती फिर गलतियों को ढकने की जरूरतें पड़ने लगती है ।
मध्यम वर्गीय युवाओ के लिये रेलवे भर्तियां एक मुख्य आशा के तौर पर इस देश मे रही है । लाखो भर्तियो से लाखों परिवार की जरूरतें पूरी होती है । रेलवे में इतनी कम भर्तियो से न ही युवा हताश है जबकि लाखो करोड़ो परिवार के सालो की आशाओं में फिरसे निराशा ही रही । रेलवे भर्ती प्रक्रियाओं का हाल 5 साल से हर कोई जानता हर कोई ,खुद जिम्मेदार लोग इस बात को जानते है कि उन्होंने पिछले 5,6 सालो में रेलवे में किंतनी नौकरियां निकाली है लाखो पद खाली है ये अखबार में भले आपको फ्रंट पेज पर न दिखे पर किसी न किसी कोने में छोटी सी खबर महीनों में एक दो बार जरूर आपको दिख ही जाएगी । क्यो की अखबारों के front page तो अभी कमला पसंद और पान बहार जैसे अति महत्वपूर्ण विज्ञापन के लिए है जैसे कि इंसान के लिए युवाओ के लिए बेहद जरूरी है
रेलवे असिस्टेंट लोको पायलट के लिए इस साल निकली भर्तियों को लेकर छात्र काफ़ी नाराज़ हैं. छात्रों का आरोप है कि इतने सालों बाद रेलवे में वैकेंसी निकाली गई हैं और इनकी संख्या सिर्फ़ 5 हज़ार है. गुस्साए छात्रों ने इसके खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. रिक्तियां बढ़ाने की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन करते हुए शहर के एक कोने से दूसरे कोने पर जा रहे हैं.
पढ़ें पूरी खबर: https://t.co/zeiV3sGB1E
#Railway #RailwayALPVacancy | @rohit_manas
The third world war will be fought on Twitter, and it's going to be India vs the rest of the world.
Russia, Israel, and a few more friends will abstain or perhaps provide silent support by retweeting our tweets. Chinese people won't participate as Twitter is banned there, but the CCP will support India's enemies by providing them bot support for retweets.
I trust our meme-lords. We've the capacity to take on the World. The fight is going to be nasty. Racism and Islamophobia are going to be the two digital nuclear weapons, and their usage will create a lasting impact on the World. Winter is coming!
कोन बचाही #हसदेव ल.... इस गाने को सुनकर भी आपके मन मे हसदेव के प्रति संवेदना नही जगती है तो फिर 5 जून को पर्यावरण दिवस के रूप में मनाना भी बन्द कर देना ।
रविवार शनिवार की छुटियो में भेड़ बकरियों की तरह उत्तराखंड हिमाचल पेड़ो पहाड़ो पर घूमने से शांति की चाह रखते हो ,जिस पीपल के पेड़ की पूजा करके भगवान को मनाने की इक्षा रखते है ऐसे ही लाखो पेड़ को काटा जा रहा है , ईश्वर की सच्ची सेवा प्रकृति के संसाधनों को स्वार्थी न बनकर इन्हें बचाने में है ।
उन लाखों निर्दोस जीव जंतुओं के आशियानों को छीना जा रहा है और ये लड़ाई सालो से चल रही है !
#हसदेव_बचाओ
#SaveHasdeo
@GKPonline please stop selling books with wrong information ,in this book you mentioned that there is solved papers of 2014,2015&2019 but there is not a single question of 2019 ??
Is not this a fraud case ?? Refund my amount and stop this kind of fraud.