“जो पुलिस वाले मुझे घसीट कर ले जा रहे थे, वह मेरे कान में कह रहे थे इस सरकार को हटाइये
कोई राजस्थान से था, कोई हरियाणा से लेकिन यही कह रहे थे मेरे कान में”
@RahulGandhi 🔥🔥🔥🔥
सरकार से बड़ा गुंडा कोई नहीं होता है।
हाँ, दिल को बहलाने के लिए बोल सकते हो कि जनता मालिक होती है।
ये सिर्फ कागजी लिखावट है, सच्चाई से इसका दूर दूर तक वास्ता नहीं है।
"अहमदाबाद में एयर इंडिया के प्लेन हादसे में मारे गए 260 लोगों को सरकार एक साल में ही भूल गई।"
इन्हें अब सिर्फ इथेनॉल ही याद है। राम मंदिर की लूट पर भी चुप है।
सोचो जिस फ्यूल का माइलेज 30 फीसदी तक कम होता है,
वो फ्यूल 110 रुपए लीटर मिल रहा है।
अगर ओरिजिनल खरीदेंगे तो लगभग 160 रुपए लीटर मिलेगा।
आ गए अच्छे दिन.........
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कुछ दिन पहले सिविल लाइंस आवास पर आए एक एसी मैकेनिक ने गर्व से बताया कि उनकी माताजी, जो मनरेगा में मजदूरी करती हैं, कांग्रेस सरकार की 'इन्दिरा गांधी स्मार्टफोन योजना' के माध्यम से डिजिटल दुनिया से जुड़ चुकी हैं।
उनके आग्रह पर वीडियो कॉल के जरिए निवाई (टोंक) निवासी श्रीमती यशोदा कुमावत और उनकी साथी महिला श्रमिकों से बातचीत हुई। बातचीत में उनकी पीड़ा और अपेक्षाएँ साफ़ झलकीं। उनका एक ही कहना था-"हमें वीबी-जी राम जी योजना नहीं, मनरेगा चाहिए।"
वे चाहती हैं कि मनरेगा में काम के दिनों की संख्या बढ़े, समय पर रोजगार मिले और जनहितकारी योजनाओं को फिर से प्रभावी बनाया जाए।
आज से भाजपा सरकार ने महात्मा गांधी जी के नाम पर यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना का नाम बदलकर 'वीबी-जी राम जी योजना' कर दिया है। श्रमिकों में चिंता है कि कहीं यह बदलाव केवल नाम तक सीमित न रह जाए, बल्कि उनके रोजगार के अधिकार और काम की उपलब्धता पर भी असर डाले। उनकी स्पष्ट मांग है-नाम बदलने से नहीं, काम बढ़ाने से मजदूरों का जीवन बदलेगा।