चाचा जी, सच कहूँ तो हमें तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा। वो नीतीश कुमार, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए किसी भी हद से गुजर जाते थे — गठबंधन तोड़ते, बनाते, फिर तोड़ते — आज वो कुर्सी इतनी आसानी से कैसे छोड़ रहे हैं? जिस पद के लिए आप 25 साल से लड़ते आए, वो इतना सस्ता हो गया क्या?
चाचा जी, हम अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ना चाहते। लेकिन यह पलायन वाला फैसला देखकर बहुत निराशा हुई है। बिहार के लिए आपने जो कुछ भी किया, उसके लिए सम्मान है, लेकिन यह आखिरी फैसला दिल को चुभ रहा है।
चाचा जी, सच कहूँ तो हमें तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा। वो नीतीश कुमार, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए किसी भी हद से गुजर जाते थे — गठबंधन तोड़ते, बनाते, फिर तोड़ते — आज वो कुर्सी इतनी आसानी से कैसे छोड़ रहे हैं? जिस पद के लिए आप 25 साल से लड़ते आए, वो इतना सस्ता हो गया क्या?
प्रिय चाचा जी - @NitishKumar
नमस्ते।
चाचा जी, आप बिहार आए थे बेरोजगारी और पलायन रोकने के बड़े मिशन के साथ। लेकिन आज क्या देख रहे हैं? आप खुद बेरोजगार होकर दिल्ली पलायन कर रहे हैं!
बिहार का दुर्भाग्य नही बिहारी खुद दुर्भाग्य है।
जब इनको लालू यादव जैसा तेज तर्रार नेता मिला तो इनको नीतीश कुमार की गोद में बैठना था।
और जब युवा तेजस्वी यादव मिला तो ये निशांत कुमार की गोद में बैठना है।
और ये चाहते है कि बिहार महाराष्ट्र को टक्कर दे।😂
सदन में लगे टैब मॉनिटर को मुख्यमंत्री ने पहले नमस्कार किया, दुबारा फिर नमस्कार किया और फिर मशीन से माफ़ी के साथ ही उसकी गर्दन मुड़वा दी, फिर दूसरे, तीसरे और बाक़ी मॉनिटर की भी…
क्या इतने बड़े सूबे के मुख्यमंत्री की मानसिक सेहत और ऐसा व्यवहार आपको सामान्य लगता है? क्या यह गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं है?? #viral #video
@Jduonline इसी का बदला लेने के लिए तुमने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड गोपालगंज कस्तूरबा गांधी बालिका अपहरण कांड
उसके बाद पटना हॉस्टल काण्ड NEET छात्रा के साथ किया
@Shubhamshuklamp@yadavakhilesh तुम फिर भी यादवों का नहीं हो सकोगे, क्योंकि तुम्हारे पूर्वज भी यादवों के ख़िलाफ़ जाकर अंग्रेज और मुगलों से जा मिले थे,
यहां तक यादवों के ख़िलाफ़ कांग्रेस और भाजपा से भी जा मिले,
ये देखिये!
मुह से जन्म लेने वाले को रिटेन में कम मार्क लाने के वावजूद टॉप करवा दिया गया।
जबकि रिटेन मे टॉप करने वाले को इंटरव्यू मे मात्र 8 मार्क दिया गया ढोंगियों के द्वारा
ये देखिये!
मुह से जन्म लेने वाले को रिटेन में कम मार्क लाने के वावजूद टॉप करवा दिया गया।
जबकि रिटेन मे टॉप करने वाले को इंटरव्यू मे मात्र 8 मार्क दिया गया ढोंगियों के द्वारा
3 सीट था जिसमें 6 लोगों का मेरिट बनाया गया इस परीक्षा में सबसे ज्यादा रिटेन में मार्क लाने वाला अनिल कुमार एक OBC थे.
रिटेन में सबसे ज्यादा मार्क कम लाने वाले OBC को इंटरव्यू में सबसे कम मार्क देकर बाहर कर दिया गया.
37 मार्क लाने वाले पीयूष पाठक को इंटरव्यू में 18 मार्क मिला और 43.15 मार्क लाने वाले OBC छात्र अनिल कुमार को इंटरव्यू में मात्र 8 मार्क देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया.
दुःख इस बात की नहीं है कि मेरिट है, दुःख इस बात की है कि द्रोण बेईमान है.
"मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा"
आप इन्हें भलीभांति जानते होंगे। यह कुमार विश्वास जी हैं। पहले ये कवि हुआ करते थे, मगर
उसमें तगड़ा पैसा नहीं था फिर इन्होंने अपना पेशा बदल दिया और अब ये श्री राम कथा कहने लगे हैं।
आज कुमार विश्वास जी ख़ुद को "अभागा सवर्ण" बोल रहे हैं, और बड़े ही दुःखी मन से इमोजी लगाकर बोल रहे हैं।
कुमार विश्वास जी आप आज जो कुछ दिनों की कथा कहकर लाखों रुपए छापते हो, यह सब भी कहीं न कहीं आपकी "जाति" के कारण ही प्राप्त हुआ है।
यदि आप ख़ुद को "अभागा सवर्ण" कहते हो तो आप ही अपने वर्ग का अपमान कर रहे हो।
आपके लिए राहत इंदौरी साहब का एक शेर कहूंगा।
अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए
अगर युवा साथी अनुमति दे तो🙏बिहार के भ्रष्ट और गरीबों का शोषण करने वाले ऑफिसर के विरुद्ध अभियान चलाया जाए....क्या आप साथ देंगे???आप माने या ना माने अभी समाज की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार की है...
BJP नेता कह रहे है कि 10 हजार ₹ में महिलाओं का वोट खरीदने के बाद अब बिहार से ₹20-25 हजार में लड़की ले आएंगे।भाजपाइयों की बिहार और महिलाओं के प्रति सदा से ही ऐसी विषैली सोच रही है।